कोलोरेक्टल कैंसर के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय

कोलोरेक्टल कैंसर के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय कोलोरेक्टल कैंसर के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय
बड़ी आंत और गुदा के कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) कहा जाता हैं। यह कैंसर पुरुषों में तीसरा और महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। दुनियाभर में सभी तरह के कैंसर में कोलोरेक्टल कैंसर से 8 फ़ीसदी मृत्यु होती है। इसकी वजह लोगों में इस कैंसर की जानकारी का अभाव है। 

हमारे पेट में खाने के नली में जो आखरी के 4 से 5 फ़ीट होते है उसे Colon या बड़ी आंत कहा जाता है और आंखरी के लगभग 5 इंच को Rectum या गुदा कहा जाता हैं। खाने से पानी और पौष्टिक तत्व को बड़ी आंत से शोषित कर रक्त में भेजा जाता है और बाकि अनावश्यक तत्व या मल को गुदा के रास्ते शरीर से बहार निकाल दिया जाता हैं। 

आज के इस लेख में हम आपको इसी बड़ी आंत और गुदा भाग में होने वाले कैंसर कोलोरेक्टल कैंसर के कारण, लक्षण, उपचार और बचने के उपाय की जानकारी देने जा रहे हैं। 

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कोलोरेक्टल कैंसर का कारण, लक्षण, उपचार और बचाव 


कोलोरेक्टल कैंसर क्या हैं ? Colorectal Cancer in Hindi

बड़ी आंत या गुदा में होनेवाले कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर कहा जाता हैं। इसे कुछ डॉक्टर कोलन कैंसर या रेक्टल कैंसर भी कहते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है की कैंसर किस स्थान पर हुआ हैं। दोनों प्रकार में लक्षण सामान्य होने के कारण इसे कोलोरेक्टल कैंसर ही कहा जाता हैं। 

कोलोरेक्टल कैंसर होने के क्या कारण हैं ? Colorectal Cancer causes in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर होने का मुख्य कारण अभी तक पता नहीं चला पर कुछ कारक ऐसे है जिस वजह से कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता हैं। जैसे की :
  1. आयु : उम्र बढ़ने के साथ-साथ कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना अधिक होती हैं। 
  2. जीवनशैली : निष्क्रिय जीवनशैली से कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि शारीरिक रूप से सक्रिय (active) लोगों की आते पेट की गतिविधि / पेरीस्टाल्टिक गतिविधियों करती है जिससे कोलन में कैंसर बनने वाले पदार्थ कम होते हैं। 
  3. रोग : अगर आपको पहले से कोई रोग है जैसे की डायबिटीज, ग्रहणी (IBS), अल्सरेटिव कोलाइटिस या अन्य कैंसर है तो आपको कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा रहता हैं। 
  4. पारिवारिक ईतिहास : अगर आपके परिवार में किसी को कोलोरेक्टल कैंसर है तो आपको भी कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना रहती हैं। यह छूने या साथ रहने से नहीं फैलता है पर आपके परिवार में नजदीक के रिश्तेदारों का gene समान होने से यह हो सकता हैं। 
  5. नशा : अगर आप शराब, तम्बाखू  या धूम्रपान का नशा करते है तो आपको कोलोरेक्टल कैंसर हो सकता हैं। 
  6. आहार : उच्च तापमान पर पकाए हुए लाल मांस खाने से कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ता हैं। आहार में फाइबर और पानी की कमी से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता हैं। 


कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण क्या हैं ? Colorectal Cancer symptoms in Hindi

ज्यादातर मरीजों में शुरुआत में कोई लक्षण नजर नहीं आते है और जब तक लक्षण नजर आते है तब तक कैंसर फ़ैल चूका होता हैं। फिर भी कुछ ऐसे लक्षण है जो दिखाई देने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं :
  1. दस्त या कब्ज होना 
  2. मल के साथ खून आना 
  3. पेट में दर्द 
  4. कमजोरी 
  5. बिना वजह वजन कम होना 
  6. पेट फूलना 
  7. शरीर में खून की कमी 


कोलोरेक्टल कैंसर का निदान कैसे किया जाता हैं ? Colorectal Cancer diagnosis in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर का निदान करने के लिए डॉक्टर निचे दिए हुए परिक्षण करते हैं। 
  1. शारीरिक परिक्षण : सबसे प्रथम डॉक्टर आपको अनेक सवाल पूछकर बीमारी के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा करते हैं। इसके बाद आपकी शारीरिक जांच होती हैं। गुदा भाग में ऊँगली डालकर डॉक्टर कैंसर है या नहीं और अगर है तो कहा तक फैला है इसका अंदाजा लगाते हैं। 
  2. मल की जांच : मल / Stool में खून है या नहीं इसकी जांच की जाती हैं। 
  3. खून जांच : इसमें शरीर में रक्त की कमी, संक्रमण और CEA जांच की जाती हैं। CEA जांच से कैंसर है या नहीं यह पता करने में सहायता मिलती हैं। 
  4. दूरबीन जांच : सिग्मोइडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी जांच में गुदा भाग से एक पतली ट्यूब अंदर डाली जाती है जिसके आगे एक छोटा कैमरा लगा होता है। इससे बड़ी आंत या गुदा में पोलिप या ट्यूमर है या नहीं इसका निरीक्षण किया जाता हैं। 
  5. बायोप्सी : पोलिप या ट्यूमर दिखाई देने पर उसकी बायोप्सी की जाती हैं। 
  6. स्कैन : कैंसर का निदान होने पर कैंसर शरीर में और कही फैला है या नहीं या जानने के लिए CT scan या PET scan किया जाता हैं। 
जरूर पढ़े - कैंसर से बचने के उपाय

कोलोरेक्टल कैंसर की अवस्थाए क्या हैं ? Colorectal Cancer stages in Hindi

Colorectal Cancer की stages इस प्रकार हैं :

  1. अवस्था 0 या Carcinoma-in-situ : इस अवस्था में बड़ी आंत या गुदा में कैंसर की असमान्य कोशिकाए mucosa या आंतरिक स्तर तक सिमित होती हैं। 
  2. अवस्था 1 या Stage 1 : इस अवस्था में कैंसर बड़ी आंत या गुदा के आतंरिक स्तर से मांसपेशियों की परत तक पहुंच जाता हैं पर आसपास के ऊतक और Lymph nodes तक नहीं फैलता हैं। 
  3. अवस्था 2 या Stage 2 : इस अवस्था में कैंसर बड़ी आंत या गुदा में आसपास के ऊतकों तक पहुंच जाता हैं  पर Lymph nodes तक नहीं फैलता हैं। 
  4. अवस्था 3 या Stage 3 : इस अवस्था में कैंसर Lymph nodes तक फैलता जाता हैं। 
  5. अवस्था 4 या Stage 4 : इस अवस्था में कोलोरेक्टल कैंसर फैलकर अन्य भाग जैसे की Liver या Lungs तक पहुंच जाता हैं। 


कोलोरेक्टल कैंसर का उपचार Colorectal Cancer treatment in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर का उपचार उसकी अवस्था पर निर्भर करता हैं। कोलोरेक्टल कैंसर का उपचार विभिन्न तरीके से किया जाता है जैसे की सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और लक्षित चिकित्सा। 
  1. सर्जरी या शल्य चिकित्सा : कोलोरेक्टल सर्जरी में कोलोरेक्टल कैंसर का निदान होने पर सर्जन की मदद से बड़ी आंत से संभव हो उतना विकृत भाग को हटा दिया जाता है। कोलोरेक्टल कैंसर का यह विकल्प सबसे बेहतर विकल्प है। दो दशक पहले यह प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती थी लेकिन आधुनिक तकनीक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी ने इस प्रक्रिया को काफी बदल दिया है ओपन सर्जरी के मुकाबले फायदेमंद है। गुदा भाग में कैंसर होने पर गुदा के हिस्से को ऑपरेशन कर निकाला जाता है और मल निकालने हेतु कोलोस्टॉमी बैग लगा दी जाती हैं। 
  2. कीमोथेरेपी : कीमोथेरेपी में दवा या इंजेक्शन द्वारा कोलोरेक्टल कैंसर के ट्यूमर को छोटा किया जाता हैं और बढ़ने से रोका जाता हैं। 
  3. रेडिएशन थेरेपी : रेडिएशन थेरेपी या विकिरण उपचार में हाई रेडिएशन बीम का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है और उन्हें फैलने से रोका जाता हैं। 
  4. लक्षित चिकित्सा : लक्षित चिकित्सा या Targeted therapy में कैंसर कोशिका को बढ़ाने वाले प्रोटीन्स का प्रमाण कम किया जाता हैं। 

कोलोरेक्टल कैंसर से बचने के उपाय Colorectal Cancer prevention in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर से बचने के उपाय निचे बताये गए हैं :
  1. सक्रिय जीवनशैली : कोलोरेक्टल कैंसर से बचने के लिए आपको active lifestyle में रहना होगा। रोजाना कम से कम आधा घंटा अपने क्षमतानुसार कोई व्यायाम अवश्य करे। 
  2. मोटापा : मोटापा कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को बढ़ाता हैं। अपने वजन को नियंत्रण में रखे। अवश्य पढ़े - मोटापा कम करने के आसान असरदार उपाय 
  3. आहार : समतोल पौष्टिक आहार का सेवन करे। हरी सब्जिया, फल और फाइबर युक्त आहार का सेवन करे। लाल मांस, अधिक तलाहुआ आहार, फ़ास्ट फ़ूड और डब्बाबंद फ़ूड का सेवन न करे। 
  4. रोग : अगर आपको डायबिटीज, ग्रहणी (IBS), अल्सरेटिव कोलाइटिस या अन्य कैंसर है तो इसका उपचार कराए। 
  5. नशा : धूम्रपान, शराब और तम्बाकू का सेवन न करे। 
  6. स्वास्थ्य परिक्षण : 45 वर्ष के पश्च्यात हर वर्ष अपने डॉक्टर से अपना सालाना हेल्थ चेकअप जरूर कराते रहे जिससे कोई भी रोग होने से पहले आपको पता चल सके और खतरे को बढ़ने से पहले रोका जाए। 
कोलोरेक्टल कैंसर का उपचार संभव हैं। इससे डरने की जगह आपको इसका उपचार जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए। 

अगर आपको यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण, लक्षण, उपचार और बचाव की जानकारी उपयोगी लगती है तो कृपया इसे शेयर जरूर करे ताकि यह उपयोगी जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। 
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Tuesday, June 04, 2019 2019-06-04T09:13:16Z

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