शशांकासन योग में शरीर का आकार खरगोश के समान होने के कारण इस आसन को 'शशांकासन' और अंग्रेजी में 'Hare Pose' कहा जाता हैं। पीठ दर्द और गर्दन के दर्द को दूर करने के लिए यह उपयोगी आसन हैं। दमा / Asthma रोग, मधुमेह / Diabetes और ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोगी योग हैं।

शशांकासन योग की विधि, लाभ और सावधानी संबंधी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

shashankasana-yoga-posture-benefits-steps-in-hindi
शशांकासन - विधि
  • सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर एक दरी / चटाई या योगा mat बिछा दे। \
  • अब वज्रासन में बैठ जाये। वज्रासन में कैसे बैठे यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करे - वज्रासन योग विधि 
  • वज्रासन में बैठने के बाद श्वास लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर सीधा ऊपर उठाये। 
  • अब धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए हाथों को बिना मोड़े आगे की ओर तब तक झुके जब तक की आपका मस्तक (Forehead) जमीन को स्पर्श न करे। 
  • हाथ और कुन्हानियो का स्पर्श जमीन से होना चाहिए। 
  • क्षमतानुसार कुछ देर श्वास रोककर (कुंभक) इस स्तिथि में बने रहे। 
  • धीरे-धीरे श्वास लेते हुए आरंभिक स्तिथि में लौटें।
  • अपने क्षमतानुसार इस क्रिया को दस बार दोहराए। 
प्रकारांतर 
  • वज्रासन में बैठे। 
  • कमर के पीछे दाये हाथ (Right hand) से बायीं कलाई (Left wrist) को पकडे।  
  • लम्बा गहरा श्वास ले और फिर श्वास धीरे-धीरे छोड़ते हुए अपने नितंब (Hips) को बिना उठाए सामने की ओर आगे झुके और मस्तक का स्पर्श जमीन से करे। 
  • यथाशक्ति श्वास रोके और इस स्तिथि में बने रहे। 
  • अब धीरे-धीरे श्वास लेते हुए प्रारंभिक स्तिथि में लौटें। 
शशांकासन - लाभ 
  1. शरीर मजबूत और लचीला बनता हैं। 
  2. काम विकारों को दूर करता हैं। 
  3. पाचन प्रणाली सक्रीय होती हैं। 
  4. कब्ज को दूर करता हैं।  
  5. पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम कर मोटापा दूर करने में सहायक हैं। 
  6. दमा / Asthma रोग, मधुमेह / Diabetes और ह्रदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोगी योग हैं। 
  7. क्रोध, भय, शोक आदि आवेश तथा भावनात्मक असंतुलन को कम करता हैं। 
शशांकासन - सावधानी 
  1. पेट और सिर में कोई समस्या होने पर यह योग नहीं करना चाहिए। 
  2. चक्कर आना, उच्च रक्तचाप, हर्निया और स्लिप डिस्क की तकलीफ होने पर यह योग न करे।
  3. यह योग करते समय कोई तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की राय लेना चाहिए। 
अभ्यास के साथ इस योग का समय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। यह आसन रोजाना करने से आप मनोविकार से दूर रह सकते है और आपकी स्मरणशक्ति अच्छी रह सकती हैं।

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