शिशु को बोलना कैसे सिखाये ?

शिशु को बोलना कैसे सिखाये ? शिशु को बोलना कैसे सिखाये ?
Baccho ko bolna kaise sikhaye ?

यह जानी-मानी बात है कि हमारे दिमाग का सबसे अधिक विकास जीवन के पहले सात वर्षों में होता है और ये शुरूआती वर्ष ही वह समय होता है जब दिमाग बढ़ता और सोचने-समझने के लिये तैयार होता है। आपका शिशु इन्हीं वर्षों में बोलना सीखता है, भाषा सीखता है और समाज से जुड़ने के लिये बोलना भी शुरू करता है।

अच्छा बोलचाल वाला माहौल, अन्य लोगों की साफ और गूंजती हुयी आवाजें और भाषा ही वह चीजें हैं जो आपके शिशु को बोलना सीखने के लिये मदद करती हैं। आज इस लेख में हम आपको यह जानकारी देंगे के शिशु बोलना कब और कैसे सीखते है और उन्हें बोलना सिखने के लिए आप कैसे उनकी मदद कर सकते हैं। 

शिशु के पहली बार बोलना सिखने और उन्हें बोलना सिखाने से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :


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बच्चों को पहली बार बोलना कैसे सिखाये ? How to teach baby to speak information in Hindi

आवाज, शब्द और भाषा क्या है ?


आवाज, शब्द एवं भाषा हमारे बोलचाल के जरूरी हिस्से हैं। फेफडे से निकलने वाली हवा, गले में आवाज पैदा करने वाली परतों के बीच दब कर कंपन करती है जिसकी वजह से आवाज पैदा होती है।

बोलने के लिये जीभ की मांसपेशी, होंठ, जबड़े और गले में आवाज बनाने वाले अंग के एक साथ काम करने से पैदा होने वाली पहचानने योग्य आवाज को शब्द कहते हैं और इन्ही शब्दों से भाषा बनती है।

भाषा शब्द और वाक्यों का एक समूह है जो हमें इस तरीके से बात कहने के लिये तैयार करती है जिसे लोग समझ सकें। यह बोल कर, लिख कर, चित्र बनाकर या बिना बोले इशारों से जैसे पलकें झपका कर या मुंह बनाकर जाहिर की जाती है।

शिशु कब बोलना शुरू करते हैं ? When does baby start to speak (Hindi)


आपका शिशु पैदा होने के क्षण से ही बात करना शुरू कर देता है। वह भूखा होने पर, गीला होने पर या बेचैन होने पर रो कर आपसे बात करता है लेकिन जल्दी ही बोलने और भाषा सीखने के लिये उसे एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे अपने हाव-भाव और शब्दों से खुद को जाहिर करने में उसकी क्षमता बढ़ जाती है।
  1. जन्म से 3 महीने - जन्म से तीन महीने की उम्र तक आपका शिशु आवाजों को पहचानने लगता है और जानी-पहचानी आवाज की ओर में अपना सिर ले जाने की कोशिश करता है तथा बोलने वाले का चेहरा देखने लगता है। 
  2. तीन से चार महीने - तीन से चार महीने का होने पर वह तुतलाने लगता है जो उसके बोलने की शुरूआत की असली निशानी है और अब आपका शिशु मुस्कुरा कर, हंस कर, खुशी अथवा नाराजगी जाहिर कर समाज से जुड़ने की कोशिश करता है। सबसे पहले ’, ‘और एंव पुह’, ‘बुहऔर मुहजैसी आवाजें आपके शिशु के तुतलाने में शामिल होती हैं।
  3. 9 से 12 महीने - शिशु की उम्र 9 से 12 महीने हो जाने पर वह हाथ लहरा कर बाय-बायकरने लगता है, ‘करना सीख जाता है और काफी देर तक समझ में न आने वाले जुड़े हुये शब्द जैसे का-कूके साथ तुतला कर बड़ों के बात करने के तरीके की नकल करता है। शिशु अपना पहला शब्द जो कि दादा’, ‘पापाया मामाहो, अपने पहले जन्मदिन के आसपास बोलने लगता है। 
  4. 2 वर्ष तक - 18 महीने की उम्र तक शिशु एक-बार में आपकी कही बात को समझने लायक हो जाता है और उसे 20 से 100 शब्दों की जानकारी हो जाती है। 2 वर्ष की उम्र तक शिशु की जानकारी 200 शब्दों से ज्यादा हो जाती है और वह दो शब्द वाले वाक्य बोलना शुरू कर देता है, सवाल करने वाले लहजे में बुदबुदाता है, सुने हुये शब्दों को दुहराता है, उसी तरह बोलने की कोशिश करता है तथा कहाँ है?’ ‘यह क्या है?’ जैसे आपके छोटे सवालों को समझने लगता है।
  5. 3 वर्ष तक - 3 वर्ष की उम्र पूरा होने पर आपके शिशु को 800 से 900 शब्दों की अच्छी जानकारी हो जाती है। वह 2 से 3 शब्दों में बातें करता है, ‘हाँया में जवाब देता है और खुद को मुझेकहकर बताने लगता है। इस समय अपने छोटे शिशु से बात करने और उसके मन में क्या है, यह जानने पर आपको बहुत खुशी होती है। 
  6. 4 वर्ष तक - 4 वर्ष की उम्र में आपका शिशु बोलना सीख लेता है और 4 से 5 शब्द वाले जुडे़ हुये वाक्य बना कर बोलने लगता है। वह अपनी बात कह सकता है, आपसे बात कर सकता है, और कहानियां सुनाता है। वह आपकी कविताऐं सुन कर खुश होता है और हंसी-मजाक भी समझने लगता है। 
बाल-विहार जाने की उम्र पार करते-करते आपका शिशु कौन? क्यों? कहाँ? और कैसे? शब्दों का प्रयोग करते हुये आपसे सवाल करना शुरू करता है तथा इन सवालों के जवाब भी देने लगता है। वह अपना नाम एंव पूरा पता बताने लगता है, लम्बे वाक्य बोलने लगता है तथा आपसे बातचीत भी करने लगता है।

भाषा और बोलना सीखने में अपने शिशु की मदद कैसे करें ?


जिस समय आपका शिशु, आस-पास के माहौल से भाषा सीखता है तो उसका हौसला बढ़ाने के लिये यह तरीके अपनायें।
  1. अपने शिशु से बात करें और उसके साथ बातचीत में शामिल हों
  2. बोलचाल में अलग-अलग ढंग और शब्दों का प्रयोग करें
  3. बात कहने के बाद रूकें और अपने शिशु को प्रतिक्रिया का समय दें
  4. अपने शिशु के लिये गाने गायें
  5. हो सकता है कि शिशु आपके शब्दों को न समझ सके लेकिन वो आपकी आवाज को पहचानेगा और प्रतिक्रिया देना सीखेगा
  6. इशारों का प्रयोग करते हुये अपने शिशु के साथ बार-बार पैट अ केक’, ‘पीक अ बूजैस खेल खेलें
  7. 6 से 9 महिने की उम्र होने पर अपने शिशु को आईना दिखायें और उससे पूछें कि यह कौन है?’
  8. शिशु को सिखाने के लिये आप शरीर के अंगो की ओर इशारा करते हुये जोर-जोर से उनका नाम लें जैसे नाक’, ‘गाल
  9. अपने शिशु को नाटकीय खेलों में शामिल करें
ध्यान देने वाले संकेत

यहाँ कुछ बातें हैं जो आपके के लिये चिंता का कारण हो सकती हैं और जिनके लिये विशेषज्ञ की सलाह लेना ठीक रहेगा। 
  1. यदि शिशु ने 16 से 18 महीने की उम्र तक समझ में आने वाला एक भी शब्द न बोला हो
  2. यदि शिशु 2 वर्ष की उम्र तक दो अक्षर वाले वाक्य न बोल पाता हो
  3. शिशु अपना पहला शब्द 18 महीने की उम्र में बोले पर इसके बाद भाषा विकास की गति को बरकरार न रख पाये
  4. अपना पहला अक्षर 9 से 18 महीने के बीच बोलने के बाद शिशु इसके आगे न बढ सके
साराशं-

शिशु का दिमाग का पहले 7 वर्ष में सबसे अधिक बढता है और शिशु इस समय सबसे ज्यादा सीखते हैं। अच्छी तरह बोलना भी शिशु इसी समय में सीखते हैं। अगर उसके आस-पास साफ भाषा और अच्छे बोल-चाल वाला माहौल हो तो यह शिशु को जल्दी बोलना सीखने में बहुत मदद करता है। हालांकि शिशु पैदा होते ही बात करना शुरू कर देते है पर इस समय अपने को जाहिर करने के लिये वे इशारों की भाषा में बात करते है। समय के साथ धीरे-धीरे एक लम्बे दूरी को पार करते हुये सामान्य शिशु आमतौर पर 3 से 4 साल की उम्र में बोलना सीख लेता है और आपकी बात समझने और अपनी बात कहने के काबिल हो जाता है। शिशु को बोलना और भाषा सिखाने के लिये आप उसके साथ बातचीत करके, कवितायें और गाने सुनाकर, उसके साथ नाटकीय खेलों से उसकी मदद कर सकते हैं पर यदि आपका शिशु 2 वर्ष की उम्र तक साफ न बोल पाये और उसके भाषा तथा बोलने सीखने की गति धीमी हो तो यह खतरे के संकेत हैं और आपको किसी जानकार से सलाह लेने की जरूरत है।  

यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 

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Friday, June 02, 2017 2017-06-02T08:24:08Z

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