आप खाना खरीद रहे है या जहर ? अवश्य पढ़े !

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शरीर में होनेवाले ज्यादातर रोगों का केंद्र पेट ही होता हैं। ऐसे में खानपान के मामले में थोड़ी सी लापरवाही कई बिमारियों की वजह बनती हैं। ऐसे में सावधानी ही बचाव हैं।

कुछ समय पहले मैंगी में हानिकारक सीसा और सोडियम ग्लूटापेट मिलने से उसे बैन कर दिया गया था। भारत में रेडी तो ईट फूड्स और पैकेज्ड फूड्स के अलावा भी कई अन्य उत्पादों में प्रीझरवेटिव, स्वीटनर और कलरिंग उत्पाद मिलाये जाते हैं। ऐसे सभी उत्पाद न केवल हमारे शरीर के लिए स्लो पाइजन का काम करते है बल्कि घातक बिमारियों की वजह भी बनते हैं। इनसे बचने के लिए एक मात्र उपाय देसी और प्राकृतिक प्रोडक्ट्स को काम में लेना हैं।

बाजार में मिलनेवाले तैयार पैकेज्ड फूड्स और अन्य आहार में कौन से हानिकारक तत्व होते है और उनका हमारे शरीर पर क्या हानिकारक प्रभाव पड़ता है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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  • पोटैशियम ब्रोमेट - इसके सेवन से कैंसर का खतरा रहता हैं। इसे उन ब्रेड और बेकरी उत्पादों में मिलाया जाता है जिन्हे हम सब खाते हैं। यह आटे को लचीला बनाता हैं। इनसे बनी ब्रेड को उच्च तापमान पर नहीं पकाए तो यह ब्रेड में ही रह जाता हैं। 
  • सोडियम बेंजोएट - सॉस, फ्रूट, जैम और अचार में इस प्रीझरवेटिव का इस्तेमाल किया जाता हैं। इससे कैंसर होने का ख़तरा अधिक रहता है और नर्वस सिस्टम पर इसका बुरा असर होता हैं। 
  • सोडियम नाइट्रेट - हैम बर्गर, हॉट डॉग, सॉस में इसका इस्तेमाल होता हैं।  उत्पाद ज्यादा दिनों तक इस्तेमाल हो सके और उनका रंग भी अच्छा रहे इसलिए इसका उपयोग होता हैं। इसके अधिक सेवन से फेफड़े कमजोर होते हैं और अस्थमा की तकलीफ बढ़ती हैं। 
  • ऐस्परटेम - यह एक कृत्रिम स्वीटनर हैं। अक्सर मोटापे और डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी की जगह इसे इस्तेमाल किया जाता हैं। इसके अधिक सेवन करने से माइग्रेन, नेत्रदोष और सिरदर्द होने लगता हैं। 
  • नमक / Salt - आवश्यकता से अधिक नमक का सेवन हमारे सेहत के लिहाज से बिलकुल गलत है। पैक्ड वेजिटेबल, चिप्स, फ़ास्ट फ़ूड, नमकीन, सूप, अचार, पापड़ और आइसक्रीम में भी अधिक नमक का इस्तेमाल होता हैं। इससे शरीर में सूजन, ह्रदय रोग, किडनी रोग, ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर विकार निर्माण होते हैं। 
  • प्रोपाईल गैलेट - मीट, वेजिटेबल आयल, पोटैटो स्टिकस, च्युइंगगम, रेडी टु यूज़ सूप में इसका उपयोग होता हैं। इनके अधिक सेवन से पेट का कैंसर होने का ख़तरा रहता हैं। 
  • ट्रांस फैट - डेरी उत्पाद में प्राकृतिक रूप से ट्रांस फैट होता हैं। अब पैकेज्ड फ़ूड में वेजिटेबल ऑइल में हाइड्रोजन मिलाकर इसका इस्तेमाल किया जा रहा हैं। इसे खाने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा दोगुना बढ़ जाता हैं।  
  • रिफाइंड अनाज - साबुत अनाज की तुलना में रिफाइंड अनाज खाना शरीर के लिए खतरनाक होता हैं। सफ़ेद ब्रेड, सफ़ेद चावल और सफ़ेद पास्ता ह्रदय रोग के खतरे को बढ़ाते हैं। इनमे ग्लूटेन अधिक होता हैं। इसकी कलरिंग और स्टिचिंग भी की जाती हैं, जो की हमारे शरीर के लिए खतरनाक हैं। 
ऊपर दी हुई जानकारी पढ़कर हमें यह पता चलता है की खानपान में प्रोसेस्ड और प्रीझरवेटिव आहार की जगह हमें नैसर्गिक देसी आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसा करने से हमें न केवल कई रोगों मुक्ति मिलती हैं बल्कि सेहतमंद भी रहा जा सकता हैं। यह जानकारी हमें आहार विशेषज्ञ डॉ सुनील कांति ने मुंबई से भेजी हैं। 

अच्छे सेहत के लिए हमेशा अपने परिवार के खानपान के मामले में सजग रहे। स्वयं को और अपने बच्चे को पैकेज्ड फ़ूड से दूर रखे। 

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Wednesday, June 01, 2016 2016-06-01T11:17:32Z

2 comments:

  1. aapki baat bilul sahi hai, lekin desi aahar aajkal milta kaha hai? jo thoda bahut Organic food bade shehro me milta hai, uski cost itni jyada hoti hai ki har koi kharid nahi sakta.

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