योनि मार्ग से होनेवाले गाढ़े, सफेद या हल्के पीले स्त्राव को Leucorrhoea या श्वेत प्रदर कहा जाता है। सामान्य भाषा में इसे ही "सफ़ेद पानी जाना" या White discharge भी कहा जाता हैं। श्वेत प्रदर के बहुत से कारण होते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन इसका मुख्य कारण होता है। 

लगभग हर महिला को कभी न कभी कुछ समय के लिए यह समस्या होती है और कुछ महिलाओं में तो यह सफ़ेद पानी की समस्या इतनी बढ़ जाती है की डॉक्टर से मिलकर इसका लम्बा उपचार कराना पड़ता हैं। आज इस लेख में हम सफ़ेद पानी जाने से जुडी सारी जानकारी देने जा रहे हैं। 

श्वेतप्रदर या सफ़ेद पानी जाने के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलु नुस्खों से जुडी सारी जानकारी निचे दी गयी हैं :  
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सफ़ेद पानी (श्वेतप्रदर) जाने का कारण, लक्षण और उपचार Safed pani ka desi gharelu ilaj

महिलाओं में सफ़ेद पानी जाने का कारण क्या हैं ? Safed pani ka karan

श्वेतप्रदर या सफेद पानी जाना इसे हम दो रूप में देख सकते है।
  1. स्वाभाविक - सामान्यतः यह non pathological होता है और कई बार यह अपने आप बंद होता है और कई बार फिर से शुरू होता है। माहवारी के पहले, माहवारी के बाद, अण्डोत्सर्ग के समय या यौन सम्बन्ध के वक्त सफेद स्त्राव होना स्वाभाविक होता है। सम्भोग के दौरान अगर स्त्राव कम मात्रा में होता है तो दर्द हो सकता है। कई बार यह लड़कियों में पहला मासिक आने के पहले भी होता है और इसे युवावस्था का लक्षण मान सकते हैं। कई बार नवजात बालिकाओं में भी कुछ समय तक सामान्य लिकोरिया रह सकता है।
  2. बीमारी या बीमारी का लक्षण स्वरूप - योनिगत संक्रमण या STD बीमारी के वजह से स्त्राव की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही  इसमें चिकित्सा की जरूरत होती है।

ल्यूकोरिया / सफ़ेद पानी का निदान कैसे करते हैं ?

जब हम योनि के स्त्राव का माइक्रोस्कोप में परीक्षण करते हैं अगर उसमे 10 से ज्यादा WBC मिलते हैं तब उस अवस्था को ल्यूकोरिया कहा जाता है। अगर सफेद स्त्राव कभी-कभी होता है और उसका प्रमाण भी कम रहता है तो यह सामान्य बात है इसमें कोई चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन अगर अत्यधिक स्त्राव होना, स्त्राव के रंग में बदलाव होना, उससे अजीब सी गंध आना यह लक्षण दिखाई दे तो यह या तो किसी संक्रमण , हार्मोन्स में बदलाव या कैंसर की वजह से हो सकता है इसके लिए योग्य चिकित्सा की आवश्यकता होती है। 

Physiologic leucorrhoea / स्वाभाविक श्वेतप्रदर क्या हैं ?

  • सामान्यतः एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्तेजित होने से होने वाले स्त्राव को फिजियोलॉजिकल लिकोरिया कहा जाता है।
  • यह कोई गंभीर समस्या नहीं है, पर इसे जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी सुलझाना अच्छा रहता है। 
  • कई बार यह शरीर की नैसर्गिक संरक्षण प्रक्रिया होती है जिसके तहत योनि का PH बनाए रखने के लिए साथ ही योनिगत पेशियों में लचीलापन रखने के लिए सामान्यतः थोड़ा स्त्राव होता है।
  • कई बार गर्भावस्था में भी एस्ट्रोजन के साथ योनि का रक्तसंचलन बढ़ने की वजह से सामान्य श्वेतप्रदर होता है। 
  • इसके अलावा अत्यधिक उपवास, अधिक वजन उठाने, कामुक चित्रदर्शन, अश्लील वार्तालाप, गलत तरीके से सम्भोग, रोगी व्यक्ति के साथ सम्भोग, योनि की अस्वच्छता,कॉपर टी के प्रयोग के कारण, बार बार गर्भपात करना, अनियमित जीवनशैली जैसे रात्री जागरण,अनियमित भोजन, क्रोध, मानसिक तनाव आदि कई वजहों से भी श्वेतप्रदर हो सकता है। 

Pathological leucorrhoea / संक्रमित श्वेतप्रदर क्या हैं ?

  • इसमें स्त्री के योनि से सफेद,पीला, मटमैला , गाढ़ा स्त्राव अधिक मात्रा में निकलता है। 
  • योनिगत श्लैष्मिक त्वचा में संक्रमण, सूजन या अन्य कोई बीमारी आदि की वजह से यह स्त्राव होता है। 
  • इस वजह से स्त्री कमजोर हो जाती है। 
  • कई बार शर्म या संकोच की वजह से ज्यादातर स्त्रिया यह बात छुपाती है जिस वजह से कई बार यह काफी गंभीर समस्या बन जाती है और इसकी चिकित्सा में समय भी अधिक लगता है।
  • स्त्राव के अलावा इसमें कुछ अन्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे की 
  1. योनिस्थान में खुजली
  2. कमरदर्द
  3. पेट के निचले हिस्से में दर्द
  4. बार बार पेशाब आना
  5. चक्कर या आंखों के सामने अंधेरा आना
  6. पिंडलियों में खिंचाव
  7. कमजोरी लगना
  8. चिड़चिड़ापन
  9. सिरदर्द
  10. भूक कम लगना
  11. कैल्शियम की कमी होना

योनिस्राव के विविध स्वरूप 

  • योनि ग्रीवा से उत्पन्न श्लैष्मिक बहाव को योनिक स्त्राव कहा जाता है। 
  • योनिक स्त्राव एक सामान्य प्रक्रिया है जो मासिक चक्र के अनुसार होती रहती है। 
  • कई बार मासिक धर्म आने के पूर्व एवं बाद में तथा अंडोत्सर्ग के समय योनि से सफेद स्त्राव होता है यह एक सामान्य प्रक्रिया है। 
  • यह सफेद एवं चिकना, गंध रहित होता है। सामान्यतः इस में खुजली नहीं होती अगर इस में खुजली हो तो यह फंगल या मिक्स बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। 
  • साफ एवम पानी जैसा स्त्राव महिलाओं में कई बार होता है खासतौर पर भारी व्यायाम या वजन उठाने पर कई महिलाओं में इसकी शिकायत होती है लेकिन यह भी सामान्य रहता है। 
  • जब यह स्त्राव पीला, हरा, अधिक गाढ़ा, अधिक मात्रा या बदबू लिए होता है तब यह असामान्य होता है। उस वक्त डॉक्टर के पास जाकर चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

असामान्य यौनिक स्त्राव के कारण 

यह इन कारणों से हो सकता है :
  1. योनि में फंगल, बैक्टीरियल या मिक्स संक्रमण
  2. यौन सम्बन्धों से होनेवाला संक्रमण 
  3. शरीर की रोगप्रतिकारक क्षमता कम होने से होनेवाला संक्रमण। खासकर मधुमेह व्याधि में अक्सर फंगल इन्फेक्शन हो जाता है।

सफ़ेद पानी / ल्यूकोरिया का उपचार एवम बचाव Safed pani ka upchar 

  • श्वेत प्रदर के चिकित्सा में सबसे पहला उपाय है योनि की स्वच्छता रखें।
  • प्रत्येक बार मल मूत्र विसर्जन के पश्चात मिथुन के पश्चात योनि को साफ पानी से धोना आवश्यक होता है।
  • एक टब में गुनगुना पानी लेकर उसमें एक चम्मच बोरीक पाउडर डालें और इस में बैठे। इससे जननांगों की सफ़ाई और सिकाई भी होगी।
  • फिटकरी युक्त पानी से योनिमार्ग की सफाई करें।
  • बार बार गर्भपात कराने से भी संक्रमण होकर श्वेत प्रदर की समस्या हो सकती है इसलिए अनचाहे गर्भ स्थापन के प्रति सतर्कता बरतते हुए उचित गर्भनिरोधक उपायों का प्रयोग करें एवं एक या दो संतान उत्पत्ति के पश्चात नसबंदी का ऑपरेशन करा ले।
  • सफेद पानी की शिकायत होने पर बिना विलंब डॉक्टर को बताएं ताकि उसका जल्द-से-जल्द इलाज हो सके और उसकी वजह से ज्यादा संक्रमण ना हो पाए।
  • अगर आपको मधुमेह है तो रक्तशर्करा को नियंत्रण में रखे। 
  • कब्ज मत होने दे। 
  • असुरक्षित यौन सम्बन्धों से बचे। 
  • कामुक विचारों से दूर रहे। अच्छा साहित्य पढ़े।

श्वेतप्रदर / सफ़ेद पानी से बचने के घरेलू उपाय Safed pani ka desi ilaj 

  1. पौष्टिक आहार लें जिससे कि आपकी रोगप्रतिकारक क्षमता बढें। जैसे चोकरयुक्त आटे की रोटी, दालें, जौ का दलिया, हरी सब्जियां, सलाद, फल, चुकंदर, टमाटर, गाजर, काली मिर्च, सुकामेवा आदि को अपने आहार में शामिल करें।
  2. मिर्च मसाले से युक्त, तला हुआ भोजन, बहुत अधिक मात्रा में बैंगन, लहसुन,प्याज, आलू, बासी खाना, अधिक खटाई युक्त आहार आदि अपने आहार में ना ले।
  3. चाय , कॉफी से दूर रहे।
  4. बबूल की छाल और अशोक की छाल पानी में उबाल लें और इस पानी को छानकर इसमें फिटकरी मिलाकर इससे योनि की सफाई करें।
  5. एक चौथाई चम्मच फिटकरी का पाउडर की फक्की सुबह शाम पानी के साथ लेने से भी श्वेत प्रदर ठीक होता है।
  6. गुलाब के ताजे फूलों की पत्तियों को मिश्री के साथ खाकर ऊपर से ठंडा मीठा दूध सुबह शाम पिये। इससे करीब 1 हफ्ते में श्वेत प्रदर के साथ पेशाब में जलन एवं शरीर की गर्मी भी कम हो जाएगी।
  7. आयुर्वेद के अनुसार चावल का धोवन यह श्वेत प्रदर के लिए काफी अच्छा रहता है। 10 ग्राम नागकेसर लेकर चावल के धोवन के साथ पीसे एवम इसमें मिश्री मिलाकर रोज एक कप पीने से कुछ दिनों में श्वेत प्रदर की समस्या कम हो जाएगी।
  8. 1 चम्मच शहद में आधा चम्मच आंवले का पाउडर करीब 1 महीने तक लेने से श्वेत प्रदर में आराम मिलेगा। 
  9. चावल के मांड में स्वादानुसार नमक या शक्कर और भुना जीरा मिलाकर आधा गिलास पीने से भी लाभ मिलेगा। आप चाहे तो आधा गिलास छाच एवं आधा ग्लास मांड मिलाकर भी पी सकते हैं।
  10. जीरा व मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर पीस कर रखे एवं इसे सुबह शाम एक एक चम्मच चावल के धोवन के साथ ले।
  11. केले का प्रयोग जरूर करें। चाहे तो आप खाने के बाद केला ले या दूध में केला मिलाकर खाए या केले में घी मिलाकर खाए। केले के प्रयोग से श्वेत प्रदर में काफी राहत मिलती है।
  12. बड़ी इलायची व माजूफल को समान मात्रा में लेकर पिस ले एवं इनके चूर्ण की दो-दो ग्राम की मात्रा में सुबह शाम पानी के साथ कुछ दिन तक लेने से प्रदर रोग ठीक हो जाएगा।
  13. गोंद को कुछ मात्रा में लेकर घी में तल लें फिर इसमें पानी व शक्कर डालकर उबालकर छानकर प्रतिदिन एक कप पिए, इस से सफेद पानी के साथ कमर दर्द, पिंडलियों में दर्द की तकलीफ भी कम होगी।
  14. आंवला चूर्ण करीब 3 gm की मात्रा में हर रोज सुबह शाम शहद के साथ करीब 1 महीने तक ले।
  15. मुलहठी के चूर्ण को सुबह शाम 1 ग्राम की मात्रा में कुछ दिनों तक ले।
  16. कमर दर्द या जोड़ों के दर्द के लिए त्रिफला गुग्गुल सुबह शाम पानी के साथ लें। अशोकारिष्ट, लोध्रसव जैसी दवाइयां भी आप डॉक्टर के सलाह से ले सकते है। 
  17. गाजर, पालक, गोभी एवं चुकंदर का सूप रोजाना पीने से गर्भाशय की सूजन कम होती है एवम श्वेत प्रदर में लाभ होता है। साथ ही आपका हीमोग्लोबिन भी बढ़ने में मदद होती है।
  18. रोजाना सुबह कच्ची भिंडी खाने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलेगा।
  19. मेथी दाने का पाक या मेथी के लड्डू खाने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलता है एवं शरीर भी पुष्ट होता है। गुड व मेथी का चूर्ण एक एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम खाने से प्रदर रोग में राहत मिलती है।
  20. फालसे का शर्बत पीने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलता है। 
  21. आप चाहे तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करके भी श्वेत प्रदर के चिकित्सा करा सकते हैं।
  22. अपने दैनंदिन जीवन में योग अभ्यास को जरूर शामिल करें।
जो महिलाएं शर्म के कारण डॉक्टर के पास नहीं जा सकती है या जिन्हें थोड़ी तकलीफ है वह यह घरेलू उपचार आजमा सकते हैं लेकिन अगर ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें। 
इस तरह योग्य आहार, उचित व्यायाम, योगा, शारीरिक स्वच्छता साथ ही आवश्यकता पड़ने पर घरेलू उपचार एवं डॉक्टर की चिकित्सा के द्वारा आप श्वेत प्रदर की समस्या से निजात पा सकते हैं।
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