जिस तरह हम जिम में कोई व्यायाम करने से पहले वार्मअप करते है ठीक उसी प्रकार योगासन करने से पहले भी हमें कुछ सुक्ष्मआसन करने होते है जिससे योग करते समय शरीर को कोई हानि नहीं पहुचती है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से होता हैं। 
  
पैर तथा हाथ हमारे शरीर के कर्मेंद्रिय है।  दैनंदिन जीवन की कई गतिविधियों को हम हाथों के द्वारा करते हैं। हाथों को मस्तिष्क से मिलने वाले निर्देशों के द्वारा यह कार्य होता है। आज हम गठिया निरोधक अभ्यासक्रम के तहत हाथों को मजबूती एवम लवचिकता प्रदान करने वाले छोटे आसन समूह का अभ्यास करेंगे। 

हाथों से किये जानेवाले सुक्ष्मआसन की जानकारी निचे दी गयी हैं :


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हाथों से किये जानेवाले सुक्ष्मआसन योग Hand Yoga Warm up exercises in Hindi 

मुष्ठीका बंधन ( मुट्ठियां कसकर बांधना ) Hand Yoga Exercise in Hindi 

हाथों की उंगलियां शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। विविध कार्यों को सुचारु रुप से चलाने में इनकी अहम भूमिका होती है। 

मुष्ठीका बंधन प्रारंभिक स्तिथि 

  1. पैरों को सामने तान कर बैठे।
  2. हाथों को भूमि से समांतर, कंधों की ऊंचाई में, कुहनियों में सीधा कर पैरों के ऊपर तथा समांतर रखें। 
  3. हाथों के तलवे भूमि की तरफ खुले हो।
  4. पीठ गर्दन तथा हाथ सीधे रहने चाहिए। 
  5. अब आंखें बंद करें और संपूर्ण शरीर को शिथिल पाए।

मुष्ठीका बंधन विधि 

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  • दोनों हाथों को सीधे रखते हुए पूरक करते हुए पांचों उंगलियों को तान देते हुए कड़ा कीजिये।
  • इस प्रकार तान दे कि वे एक दूसरे से पूर्ण रुप से अलग हो। ऐसी कृति में दो उंगलियों के बीच जो पडदे हैं वह पूर्ण रुप से ताने जाए।
  • अब सांस लेते हुए अंगूठे को अंदर ले कर मुष्टिका बांधे। 
  • इस कृति में अधिकतम कसाव हो, जो हमारे फेफड़ों को भी प्रभावित करेगा।
  • इस प्रक्रिया को करीब 10 बार दोहराइए। अभ्यासानुसार संख्या बढ़ा सकते हैं। 

मणिबन्ध नमन ( कलाई मोड़ना )Wrist Yoga Exercise in Hindi 

मनी बंध का अर्थ होता है कलाई। कलाई का जोड़ यह अनेक प्रकार से उपयोग में आता है। अंगुलियों की सूक्ष्म गतिविधियों के बाद उन्हें आधार देने का कार्य कलाई का होता है। 


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  • प्रारंभिक स्थिति में बैठकर हाथों को कंधों की ऊंचाई में मुष्टिका बंधन की तरह रखें। 
  • अब पांचों उंगलियों को मिलाकर हथेलियों को बंद कर ले। उंगलियों की दिशा भूमि की तरफ होगी। 
  • पूरक करते हुए हथेलियों को कलाई से ऊपर की ओर मोड़ीए और पूरे हाथ में इस प्रकार तनाव उत्पन्न  कीजिए,  जैसे आप किसी चीज को पूरी ताकत से दबा रहे हो।
  • श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जमीन की और शिथिल करते हुए छोड़िए।
  • इस प्रक्रिया को भी 10 बार दोहराइए। 

मणिबंध चक्र ( कलाई घुमाना ) Wrist Rotation Yoga Exercise in Hindi 

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  • प्रारंभिक स्थिति में बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर तान दे।
  • हाथों को कंधे की सीध में पैरों से समांतर रखे। 
  • मुठियां कसी हुई हो। 
  • पूरक करने के उपरांत अंतःकुंभक के साथ मुट्ठियों को बाहर की दिशा में वृत्ताकार घुमाइए। 
  • तत्पश्चात रेचक करें।
  • यही क्रिया विपरीत दिशा में भी करें। 
  • 10 से 20 आव्रुत्तिया करे।

कोहनी नमन ( कोहनियां मोड़ना )Elbow Yoga Exercise in Hindi 

कलाई के बाद कोहनी का नंबर आता है। कोहनी की रचना कुछ हद तक घुटनों के समान होती हैं। कुहनियों को भी स्वस्थ रखना उतना ही आवश्यक होता है। 


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  1. प्रारंभिक स्थिति में बैठे पैर सामने की ओर तान दें।
  2. हाथ पैरों से समांतर कंधे की ऊंचाई में रखते हुए हथेली आसमान की तरफ खुली रखें।
  3. धीरे-धीरे सांस लेते हुए हाथों को कुहनियों में मोड़े।
  4. पांचों उंगलियों के अग्र कंधों पर मिले। मेरुदंड सीधा रहे। 
  5. सांस छोड़ते हुए हाथों को पूर्व स्थिति में लाए।
  6. इस तरह 10 बार दोहराइए। 
  7. प्रकारांतर में पुनः सामने के बदले में भुजाओं को बाजू में फैला कर हथेलियों को ऊपर करके 10 बार और नीचे करके 10 बार उक्त अभ्यास को दोहरा सकते है। 

द्विस्कन्ध चक्र ( कंधों को घुमाना ) Shoulder Yoga Exercise in Hindi 

कंधे हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्दन से निकलने वाली तंत्रिकाएं हाथों तक कंधों के मार्ग से ही जाती है। यद्यपि हम कोई बाहरी काम नहीं करते फिर भी कंधों के दर्द का अनुभव प्रायः सभी लोगों को होता है।  इसका कारण यह है कि मस्तिष्क तथा गर्दन की नसों से कंधों का सीधा संबंध होता है।

इन कंधों के जोड़ों को मजबूत , क्रियाशील और लवचिक रखना आवश्यक होता है। 


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  1. प्रारंभिक स्तिथि में बैठ जाए। हाथों को कोहनियों में मोड़कर अंगुलियों से कन्धों को स्पर्श करें। 
  2. अब पूरक करके अंतः कुंभक के साथ दोनों कोहनियों को वृताकार घुमाइए। तत्पश्चात रेचक करें।
  3. अब विपरीत दिशा में भी यह क्रिया करें। 
  4. दोनों दिशा में कम से कम 10 आव्रुत्तियाँ करे। 
हमारी आज की कार्यपद्धती, आहार-विहार, तनाव आदि कई कारणों की वजह से हमारे शरीर के भीतर कठिनता, कड़ापन, लोच की कमी आदि परिवर्तन आ रहे हैं। अर्थराइटिस ,ऑस्टियोआर्थराइटिस , फ्रोजन शोल्डर , स्पांडिलाइसिस आदि कई तरह की बीमारियां होना अभी आम हो गया है।

पवनमुक्तासन गठिया निरोधक अभ्यासक्रम इन बीमारियों के व्यवस्थापन में अद्भुत भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं इसके दैनंदिन अभ्यास से हम दूसरे आसनों को भी आसानी से कर सकते हैं। यह व्यायाम दिखने में छोटे दिखते हैं पर इन्हें रोजाना करने से इसका परिणाम अत्यंत सूक्ष्म स्तर तक जाता है। इसलिए अपने रोजाना की दिनचर्या में और योगासन करने के पूर्व पवनमुक्तासन याने की गठिया  निरोधक अभ्यासक्रम को हमें जरुर अपनाना चाहिए।

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