आज भारत में 'स्वच्छ भारत अभियान' का प्रचार जोर शोर से शुरु हैं। खुद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य कई जानी मानी हस्तिया हाथ में झाड़ू लेकर सफाई कर रहे है और अन्य लोगो को स्वच्छता करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कुछ समय पहले हमने इस ब्लॉग पर स्वच्छता के स्वास्थ्य संबंधी लाभ संबंधी एक लेख लिखा था। इसमें हमने केवल स्वच्छता रखकर आप कैसे अनेक बीमारियो को दूर कर सकते हैं इसकी जानकारी दी थी।
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स्वच्छता के अनेक मानसिक, आर्थिक और शारीरिक लाभ होने के बावजूद कई भारतीय ऐसे हैं जो आज भी कूड़ा करकट फैलाना और गंदगी करने को अपना जीवनसिद्ध अधिकार मानते हैं। उन्हें जब तक सड़क या दीवारे लाल न कर दे अपने पान-गुटखा खाने का पूरा आनंद नहीं मिलता हैं। चाहे आप कितना भी समझाए, इनका यही कहना रहता हैं की, '' अकेले मेरे नहीं करने से क्या दुनिया साफ़ हो जाएँगी ?"

कचरा और गन्दगी फैलाने वाले व्यक्ति, सड़क और बाहर की दीवारे ही नहीं बल्कि अस्पताल जैसी जगह जहा स्वच्छता की बहोत जरुरत हैं, वहाँ भी गन्दगी फैलाते हैं। हमने हमारे अस्पताल में गन्दगी को रोकने के लिए, अस्पताल में गंदगी और कचरा फैलाने वाले लोगो के लिए रु 500 का Fine भी रखा हैं। यह करने के उपरान्त भी लोग कचरा करकट करने और बेसिन में पान तंबाखू थूकने से बाज नहीं आते हैं। कई मरीज तो ऐसे है जिन्हे बिमारी प्यारी है मगर वह तंबाखू और गुटखा खाना नहीं छोड़ सकते हैं। कर्करोग जैसे बीमारी का डर भी इन्हे सताता नहीं हैं। इनका जवाब भी टिपिकल होता है - साहब ! सबको एक दिन जाना ही हैं तो क्यों न अपनी इच्छा पूरी कर ले !!

आज भारत में जहा Swine Flu जैसी बीमारी जिससे देशभर में सालभर में कुछ हजार एक मौत होती है उसे मीडिया में जोर शोर से दिखाया जाता हैं। इससे विपरीत, गन्दगी के कारण फैलने वाली बिमारी जैसे की Cholera, Typhoid, Malaria और Dengue के कारण हर सालो कई लाखो लोगो के मौत होती है परन्तु इस संबंधी जागरूकता इतने प्रमाण में नहीं फैलाई जा रही हैं। अगर हम लोग सिर्फ थोड़ी से जागरूकता फैलाए और स्वच्छता रखे तो इन लाखो जानो को बचाया जा सकता हैं।

हमें स्वच्छता का सिर्फ सन्देश नहीं फैलाना हैं, स्वच्छता को हमें अपनी आदत बनाना हैं। हर एक व्यक्ति अगर ठान ले की वह अपने आस पास कही भी कूड़ा करकट नहीं फैलायेंगा, तो हमारे भारत देश को एक साफ़ और सुन्दर देश बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। छोटे बच्चे हमेशा अपने बड़ो का ही अनुसरण करते हैं। अगर हम उनके सामने कूड़ा करकट न फैलाए और उन्हें भी स्वच्छता रखने की सिख देते हैं तो धीरे धीरे स्वच्छता एक आदत बन जाएंगी। अपने लिए नहीं तो अपने आने वाले पीढ़ी के लिए हमें एक स्वच्छ और स्वस्थ भारत का निर्माण करना हैं।

Image courtesy : Victor Habbick at FreeDigitalPhotos.net
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