आज कल अखबारों में आए दिन Leptospirosis और इसके कारण होनेवाली मृत्यु के बारे में अखबारों में पढने को मिल रहा है। हर दिन कोई न कोई इस कारण अपनी जान गवा रहा है फिर भी आश्चर्य की बात है की इस रोग के बारे में विस्तार में बहुत कम जानकारी प्रकाशित हो रही है।

Leptospirosis के कारण, लक्षण और उपचार संबंधी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

Leptospirosis-symptoms-causes-treatment-in-Hindi

Leptospirosis क्या है ?

Leptospirosis  यह एक संक्रामक रोग है जो की Leptospiro नामक जीवाणु से होता है। यह रोग संक्रमित चूहा, एक  काला सफ़ेद अमेरिकी जानवर (Skunk),लोमड़ी,गाय,घोडा,सूअर,कुत्ता इत्यादी प्राणियों के मल मूत्र से फैलता है। वर्षा ऋतु में जब तेज बारीश होती है तब प्राणियों के मल मूत्र में उपस्थित यह जीवाणु बारिश के पानी के साथ कीचड़ और मिट्टी में घुल जाता है।

यह जीवाणु मानव शरीर में प्रवेश किसी चोट द्वारा,सक्रमित खाना खाने से,संक्रमित पानी पिने से और आँखे,नाक,मुंह और साइनस के त्वचा का संक्रमित जल या मिट्टी के संपर्क में आने से हो सकता है।
पशुचिकित्सक,पालतू पशु के विक्रेता,सफाई कर्मचारी और खेतो में काम करने वाले किसान और मजदूरो में यह रोग होने की आशंका ज्यादा होने से बारिश के मौसम में विशेष ध्यान रखना चाहिए।

Leptospirosis के लक्षण क्या हैं ?

Leptospirosis रोग संक्रमन होने के 2 से 25 दिनों के भीतर शरीर में फैलता है। इस रोग के मुख्य 2 अवस्था है:

1. प्रथम अवस्था (First Phase) 

प्रथम अवस्था में फ्लू समान लक्षण दिखाई देते है। जैसे की -
  • सरदर्द 
  • स्नायु में दर्द खास कर पैरो में 
  • आँखों में दर्द होना 
  • आँखे लाल होना 
  • ठंडी लग कर तेज बुखार आना 
  • नाक और आँख में से पानी आना 
यह सभी लक्षण 5 या 9 वे दिन से ठीक हो जाते है।


2.   दूसरा अवस्था (Second Phase)

प्रथम अवस्था के लक्षण ठीक हो जाने के कुछ दिनों बाद दुसरी अवस्था के लक्षण दिखाई देते है। जैसे की -
  • तेज बुखार 
  • गर्दन में दर्द और जकडन  
  • पेट के दायी और उपरी हिस्से में तेज दर्द 
  • जुलाब 
  • उलटी 
  • शरीर की नसों में दर्द और जकडन 

इस बीमारी का असर जब Liver और Kidney पर होता है तब आँखों में पीलापन दिखाना शुरू हो जाता है इसे Weil's Syndrome भी कहा जाता है।

Leptospirosis का निदान कैसे किया जाता है ?

Leptospirosis के लक्षण दिखने वाले व्यक्तियों में निदान हेतु निम्नलिखित जांच की जाती है। जैसे की -
  1. खून की जांच - Leptospira Antibody Levels 
  2. Leptospira जीवाणु का संक्रमित खून,Spinal Fluid या मूत्र का कुत्रिम उत्पन्न (Culture) परिक्षण कर। 

Leptospirosis का उपचार कैसे किया जाता है ?

डॉक्टर इस रोग में Antibiotic और रोगी के लक्षण अनुसार दवा देते है। Leptospirosis का उपचार शुरूआती दौर में आसानी से हो सकता है। जैसे जैसे यह रोग शरीर में फैलता है इसे ठीक करना और कठिन हो जाता है।  

Leptospirosis - क्या सावधानिया बरते ? 

जैसे की हम सभी जानते है,"रोकथाम इलाज से बेहतर है! " और इसी लिए हम निचे दिए हुए कुछ सामान्य एहतियात बरत कर हम Leptospirosis से बच सकते है।
  • पानी से भरे हुए कीचड़ में पैर न रखे। उस जगह पर बारिश का पानी और मिटटी के साथ साथ कचरे और गन्दा पानी भी हो सकता है जिसमे Leptospira जीवाणु मौजूद हो सकता है। 
  • अगर आप को उस रस्ते से जाना अनिवार्य है तो घर पहुच कर अपने जुते-चप्पल और पैरो को अच्छे से स्वच्छ पानी से साफ़ करे। पैरो की अंगुलियों के बिच भी अच्छे से साफ़ करे। 
  • ज्यादा समय तक कीचड़ में या ठहरे पानी में खड़े न रहे। 
  • अच्छे जूतों का इस्तेमाल करे। पैरो के साथ जूतों की सफाई भी करे। बिना जूतों के सिर्फ पैरो की सफाई करने पर कोई लाभ नहीं होंगा।
  • अपने हाथ भी अच्छे से धोना चाहिए।
  • हाथ धोते समय साबुन से अच्छा झाग बनाकर १५ सेकंड तक बहते पानी में हाथ को अच्छी तरह से धोए और बाद में स्वच्छ कपडे से हाथ को अच्छी तरह से साफ़ करे। 
  • नल बंद करने के लिए उसी साफ कपडे का इस्तेमाल करे जिससे हाथ को दुबारा दूषण (Contamination) न हो।
  • अगर आप को कोई चोट या खरोच लगी हो तो उसे स्वच्छ कर अच्छे से मलम पट्टी (Dressing) करवा दे। बारिश के पानी से गिला होने पर उसे तुरंत बदल कर जखम को साफ़ करे और नई मलम पट्टी करे।
  • अगर आपने Pedicure / पैरो की सफाई कराई है तो बारिश के  कर रहे। 
  • वर्षा ऋतु में हाथ और पैरो के नाखू छोटे रखे और उनकी नियमित सफाई करे। लम्बे नाखुनो के बिच में मैल जमा हो जाता है जो की खाना खाते वक्त खाने के साथ हमारे पेट में जाकर कई बिमारीया उत्पन्न कर सकता है। 
  • सर्दी-खांसी-बुखार को हलके में न ले। कोई भी Leptospirosis के लक्षण दिखने पर अपने डॉक्टर से तुरंत जांच करवाना चाहिए।  

ध्यान रहे,Leptospirosis यह  सामान्य रोग है जो शुरुआती दौर में आसानी से ठीक हो सकता है। उपचार में विलम्ब होने पर यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है।

इसलिए कृपया इस लेख अधीक से अधिक लोगो तक पहुचाए ताकि सभी लोग सामान्य एहतियात को अपनाकर इस रोग से बच सके।

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