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ज्यादातर लोग को स्वस्थ और फिट रहने के लिए सुबह उठते ही गर्म पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीते हैं। इसे लेने से वजन कम होता है और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुडी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है जैसे, शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, पाचन संबंधी समस्या दूर होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और त्वचा में चमक आती है। 

इसके अलावा किसी प्रकार की भी समस्या आने पर लोग हल्दी वाला दूध पीते हैं। लगभग हम सभी लोग गर्म पानी में नींबू मिलाकर और हल्दी वाले दूध पीने के फायदे के बारे में जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इस मिश्रण में थोड़ी सी हल्दी में मिला दी जाए तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। यकीन नहीं हो रहा है ना लेकिन हल्दी वाला पानी स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर होता है। 

आइये जानते है पानी में हल्दी मिलाकर पिने से क्या चमत्कारिक फायदे होते हैं :

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हल्दी वाला पानी पीने के फायदे Health benefits of drinking Warm Turmeric Water in Hindi

  • पचन दुरुस्त रखें / Digestion : कई सालों से यह बात साबित हुई है कि नियमित रुप से हल्दी का सेवन करने से पित्त ज्यादा बनता है जिससे आप का आहार आसानी से हजम हो जाता है और आहार के अच्छे से हजम होने से आप पेट संबंधी बीमारियों से बचे रहते हैं। इसलिए अगर आप अपने पाचन को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो आज से ही अपनी दिनचर्या में हल्दी वाला पानी को शामिल करें। 
  • शरीर की सूजन कम करें / Swelling : हल्दी में करक्यूमिन नामक केमिकल की मौजूदगी के कारण यह दवा के रूप में काम करता है और यह शरीर की सूजन को कम करने में सहायक होता है। शरीर में चाहे कितनी भी सूजन क्यों न हो हल्दी वाला पानी पीने से कम हो जाती है। इसके अलावा करक्यूमिन के कारण यह जोड़ों के दर्द और सूजन को दूर करने की दवाइयों से भी ज्यादा अच्छी तरह से काम करता है।
  • मोटापे को करे दूर / Weight loss : हल्दीवाला दूध पिने से पाचन दुरस्त रहता है और फैट का पाचन ठीक रहने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं होती हैं। मोटापे से पीड़ित लोगो के लिए यह मिश्रण बेहद उपयोगी हैं। 
  • दिमाग तेज करें / Mind : हल्दी दिमाग़ के लिए बहुत अच्छी होती है। अगर आप सुबह के समय गर्म पानी में हल्दी मिलाकर पीते हैं तो यह आपके दिमाग के लिए बहुत अच्छा रहता है। भूलने की बीमारी जैसे डिमेंशिया और अल्जाइमर को भी इसके नियमित सेवन से कम किया जा सकता है। 
  • दिल को दुरुस्त रखे / Heart : हल्दी वाला दूध दिल के सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है। इसे पीने से खून जमता नहीं है और साथ ही यह खून साफ करने में भी मदद करता है। इसके अलावा इससे खून की धमनियों में जमाव भी हटा जाता है। हल्दी वाला पानी भी दिल को दुरुस्त रखने के लिए ऐसे ही काम करता है। 
अवश्य पढ़े : गर्म पानी में निम्बू और शहद मिलाकर पिने के अदभुत फायदे 
  • कोलेस्ट्रॉल पर रखे नियंत्रण / Cholesterol : हल्दीवाला पानी पिने से शरीर में खतरनाक कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण नियंत्रित रहता हैं। कई अध्ययनों में यह बात साबित भी हो चुकी हैं। 
  • लिवर के रक्षा करें / Liver : हल्दी का पानी विषैली चीजों से आपके लिवर की रक्षा करता है और खराब लीवर सेल्स को दोबारा ठीक करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पित्ताशय के काम को ठीक करने में मदद करता है इससे आपके लीवर की रक्षा होती है। 
  • एंटी कैंसर गुणों से भरपूर / Cancer : हल्दी में करक्युमिन केमिकल की मौजूदगी इसके एक ताकतवर एंटीआक्सीडेंट बनाता है जो कैंसर पैदा करने वाले कोशिकाओं से लड़ती है। 
  • उम्र के असर को करें बेअसर / Anti-Ageing : गर्म पानी में नींबू, हल्दी पाउडर और शहद मिलाकर पीने से यह शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकालने में बहुत मददगार होता है। इसके अलावा इसे नियमित रूप से पानी से भी फ्री रेडिकल से लड़ने की मदद मिलती है जिससे शरीर पर उम्र का असर कम और धीरे-धीरे पड़ता है

हल्दी वाला पानी बनाने का तरीका How to make Warm Turmeric Water in Hindi

सामग्री 
  1. 1/2 - नींबू 
  2. 1/4 चमच्च - हल्दी पाउडर 
  3. 1 गिलास - गर्म पानी 
  4. 1 चम्मच - शहद 
अवश्य पढ़े : भूक बढ़ाने के घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे 

हल्दी वाला पानी बनाने की विधि

  1. एक गिलास में आधा नींबू निचोड़े।   
  2. अब उसमें हल्दी और गर्म पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें।  
  3. इस मिश्रण में स्वाद अनुसार शहद मिलाएं। 
  4. हल्दी कुछ समय बाद नीचे बैठ जाती है इसलिए पीने से पहले अच्छे से हिलाकर पिए। 
  5. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट पिए।  
  6. यह हल्दीवाला पानी पीने के बाद आधा घंटे तक कुछ और न पिए या खाये। 
इस तरह आप घर पर ही यह आयुर्वेदिक हल्दीवाला पानी पीकर अपने शरीर को निरोगी और युवा रख सकते है और साथ ही अपनी रोग प्रतिकार शक्ति / Immunity को मजबूत रख सकते हैं।

Image Source - http://vkool.com/turmeric-for-arthritis/
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सूखे मेवों में बादाम के पश्चात अखरोट का अपना खास महत्व होता है। इसे अंग्रेजी में Walnut कहा जाता है।  अखरोट की गिरी स्वादिष्ट, पुष्टिकारक तथा शक्तिवर्धक होती है। अखरोट बोने के 30 से 40 वर्ष बाद इस पर फल लगते हैं। फलों को तोड़ कर किसी सुरक्षित स्थान पर रख देते हैं। तीन मास बाद इन फलों के अंदर का  दूध सुख कर गिरी का रूप धारण करता है। 

ऊंचे पर्वतों पर पाए जाने वाला अखरोट पौष्टिक और रुचिकारक होता है। आयुर्वेद के अनुसार यह स्निग्ध, वीर्यवर्धक, कफपित्तकारक एवम दस्तकारी होता है। यह वातशामक होने से वात रोग में खासकर आमवात में विशेष लाभकारी होता है।

अखरोट जल, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज,  विटामिन बी, इ एवं लोह तत्व, कैल्शियम से युक्त होता है। यह कोलेस्ट्रॉल रहित होता है साथ ही इसमें सोडियम की मात्रा भी कम होती है। भारत में अखरोट का प्रयोग  लड्डू, केक, कुकीज, चॉकलेट्स और शेक आदि में किया जाता है।

अखरोट खाने से होनेवाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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अखरोट खाओ : फिट रहो

अखरोट खाने के फायदे और नुक्सान 
Health benefits and side effects of Walnut in Hindi

अखरोट खाने के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Walnut in Hindi 

1. मस्तिष्क की कमजोरी / Sharp Mind 

प्रकृति ने हमें कुछ ऐसी चीजे दी है जिन का आकार, वर्ण या सुगंध से हम इनके फायदे के बारे में जान सकते हैं।  अखरोट का आकार मस्तिष्क के आकार से काफी मिलता जुलता होता है। इसलिए इसे ब्रेन फूड भी कहा जाता है। विटामीन E, ओमेगा 3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्त्रोत होने से इसके रोजाना सेवन से मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है। जो विद्यार्थी अपना दिमाग तेज और चुस्त करना चाहते हैं, साथ ही अपनी स्मरण शक्ति बढ़ाना चाहते हैं उन्हें रोजाना अखरोट का सेवन करना चाहिए। 

बुढ़ापे में होने वाली अल्ज़ाइमर्स जैसी बीमारी के रोकथाम लिए भी अखरोट का नियमित सेवन लाभकारी होता है। अखरोट को एक गिलास दूध के साथ सेवन करने से इसका फायदा ज्यादा होता है। अखरोट की गिरी 25 ग्राम की मात्रा में भोजन के साथ लगातार तीन मास तक खाने से मस्तिष्क की दुर्बलता नष्ट होती है।

प्रयोगविधि - कढ़ाई में थोड़ा देसी घी डालकर उसमें अखरोट की गिरी को थोड़ा देर भूनिये। फिर उसमे चीनी मिलाकर शीतल होने पर खाइए।

2. हृदय के लिए हितकारी / Strong Heart 

अखरोट में L arginine मौजूद होता है, इसके सेवन से दिल दुरुस्त रहता है और हृदय रोगों की संभावनाएं भी कम होती है। अखरोट के सेवन से तनाव का स्तर कम होकर ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। 

3. एक्ज़िमा के लिए / Skin Disorder 

अखरोट की गिरी को एक्जिमा वाले स्थान पर लगाएं करीब 1 महीने में एक्जिमा ठीक हो जाएगा। 

4. शक्तिवर्धक / Health Tonic 

8 अखरोट की गिरी , 4 बादाम गिरी और 8-10 मनूका प्रतिदिन सुबह खाए और इसके पश्चात दूध पीए। इसके रोजाना सेवन से वृद्धों में भी ताकत आती है।

5. बच्चों में कृमि / Deworming

कुछ दिन शाम को बच्चों को दो अखरोट खिलाकर ऊपर से दूध पिलाएं इससे पेट में रहे कृमि बाहर निकल जाएंगे। 

6. पेट में मरोड़ / Abdominal Pain 

जिनको पेट में मरोड़ आती है एक अखरोट को पीसकर उसका लेप नाभि पर करें , मरोड़ आना बंद हो जाएगी।

7. पथरी का इलाज / Stone Problem

अखरोट को छिल्के सहित कूटकर छान लें। 1 चम्मच सुबह शाम लें और ऊपर से ठंडा पानी पिए कुछ दिनों में पथरी निकल जाएगी। 

8. बिस्तर में पेशाब / Bed-wetting

जिन बच्चों को रात में बिस्तर पर पेशाब करने की आदत हो उनके लिए दो अखरोट और करीब 20 किशमिश रात को खिलाए। ऐसा करीब 20 से 25 दिन करें यह आदत छूट जाएगी। 

9. फुंसिया / Acne

अगर फुंसियां अधिक निकलती हो तो साल भर नित्य 5 अखरोट खाने से धीरे-धीरे फुंसिया निकलना बंद हो जाएगी। 

10. सफेद दाग / Vitiligo 

अखरोट खाते रहने से धीरे धीरे सफेद दाग भी चले जाते हैं क्योंकि अखरोट में एक एसा तत्व होता है कि उसके जड़ों के पास की मिट्टी भी काली हो जाती है। 

11. अन्य उपयोग / Other
  • शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है इसीलिए अगर आप वेजिटेरियन है तो इसे रोजाना खाना शुरू करें। 
  • स्तनपान कराने वाली माताए अगर गेहूं के आटे में अखरोट के पत्तों का चूर्ण मिलाकर इसकी गाय के घी में बनी हुई पुरिया करीब हफ्ताभर खाए तो दूध में वृद्धि होगी। 
  • अखरोट के तेल को 20 से 40 मिले की मात्रा में दूध के साथ प्रातः पीने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती , पेट अच्छेसे साफ़ होकर पाचनतंत्र सही रहता है। 
  • अखरोट के सेवन से वजन घटाने में भी सहायता मिलती है। फाइबर की मात्रा अधिक होने से भूख पर नियंत्रण रहता है। जो व्यक्ति अपना वजन घटाना चाहते हैं उन्हें नित्य अखरोट का सेवन करना चाहिए।
  • टाइप टू डायबिटीज के मरीजों में अखरोट का सेवन लाभकारी होता है।
  • अखरोट में एंटी कैंसर तत्व पाए जाते हैं जिससे कई प्रकार के कैंसर से बचाव होता है।
  • जिन पुरुषों में स्पर्म काउंट की कमी हो उन्हें नित्य अखरोट का सेवन करना चाहिए। स्पर्म काउंट में वृद्धि होगी।
  • अगर आपको नींद नहीं आने की समस्या हो रही हो तो कुछ अखरोट रोजाना रात को दूध के साथ खाने की आदत डाल ले। धीरे-धीरे यह समस्या समाप्त हो जाएगी। 
  • रोजाना अखरोट का सेवन आपकी त्वचा को हेल्थी और ग्लोइंग बनाए रखता है। इससे त्वचा लंबे समय तक जवां रहती है, इसीलिए कई सौंदर्य उत्पादक में अखरोट का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • अगर आप ग्लोइंग स्किन पाना चाहते हैं तो चार अखरोट,  दो चम्मच ओटमील, एक चम्मच शहद और एक चम्मच मलाई का पेस्ट बना लें, इसमें थोड़ा जैतून का तेल मिलाकर इस फेस पैक को करीब 30 मिनट चेहरे पर लगाएं। त्वचा पर ग्लो आ जाएगा। 
  • चेहरे की डेड स्कीन और गंदगी हटाने के लिए वालनट स्क्रब का इस्तेमाल करें। इसके लिए दो चम्मच अखरोट पाउडर एक चम्मच शहद और आधा नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बनाएं इसे चेहरे पर 2 से 3:00 मिनट तक रगड़े और फिर कुछ देर रहने दें।  तत्पश्चात ठंडे पानी से धो लें इससे त्वचा की रूखी और बेजान डेड स्किन निकलकर त्वचा मुलायम और चमकदार हो जाएगी। 
  • अखरोट में जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसके तेल से बालों की नियमित मालिश करने से बाल घने मजबूत और सुंदर हो जाएंगे। 

अखरोट खाने के नुक़सान Side effects of Walnut in Hindi

  • अगर आपको नट्स खाने से एलर्जी होती है जैसे स्किन रैश, गले में जकड़न, या सांस लेने में तकलीफ तो आपको अखरोट नहीं खाना चाहिए।
  • काले अखरोट नहीं खाने चाहिए। इसमें आयरन का अवशोषण घटाने वाले तत्व पाए जाते हैं जिससे एनिमिया हो सकता है। काले अखरोट के प्रयिग से किडनी और लिवर डैमेज के कुछ केसेस भी सामने आये है। साथ ही त्वचा पर इनका प्रयोग भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ कैंसर कारक तत्व पाए जाते हैं।
  • खांसी में अखरोट का इस्तेमाल ना करें यह शरीर में पानी की कमी करता है और बुखार में दी जाने वाली दवाई का असर भी कम करता है। 
  • अखरोट के जरूरत से ज्यादा सेवन से दस्त, पेट दर्द आदि समस्या हो सकती है। 

अखरोट कब और कैसे खाना चाहिए ? How to eat Walnuts in Hindi

  • अखरोट खाने का सही समय शीत ऋतु होता है क्योंकि पचने में भारी होने से यह इस ऋतु में आसानी से पचते हैं और शरीर को ताकत भी देते हैं। 
  • अखरोट की गिरी को कभी भी छिलके के साथ खाएं क्योंकि इसके छिलके में 90% से अधिक पोषक तत्व होते हैं।
  • आप 1 दिन में पांच से छह अखरोट खा सकते है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह ले। 
अखरोट के फायदे उसकी नुकसान की तुलना में कहीं ज्यादा अधिक है। इसलिए इस एक सीमित मात्रा में अपने दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया है और इसके लाभ का मजा उठाए।
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प्रेगनेंसी / गर्भधारण महिला के लिए एक अनोखा उपहार है। अगर महिला अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होती हैं तो इसमें कई तरह की जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता हैं। 20 वर्ष की आयु से 30 वर्ष की आयु तक का कालखंड किसी भी महिला को प्रेगनेंसी के लिए उपयुक्त समय होता हैं। 

आजकल पहले तो पढाई और उसके बाद शादी के बाद भी शुरुआत में कुछ वर्ष सेटल होने के लिए महिलाए पहले जॉब करने की सोचती है और बाद में प्रेगनेंसी के लिए प्लान करती हैं। कई महिलाए तो 35 वर्ष की होने के बाद प्रेगनेंसी प्लान करती हैं। अधिक उम्र में प्रेगनेंसी प्लान करना न सिर्फ महिला के लिए अनुचित है बल्कि होनेवाले बच्चे के लिए भी यह सही नहीं होता हैं। 

आइए जाने अधिक उम्र में गर्भावस्था / प्रेगनेंसी के बारे में कुछ तथ्य व बरतने वाली सावधानियां :


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35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंट होने में क्या खतरा है और इस समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
Pregnancy Care Tips in old age in Hindi

35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण करने को मेडिकल भाषा में Elderly Primi कहा जाता है। इस में महिलाओं को दो समूह में बांटा गया है :
  1. वह महिलाएं जो अधिक उम्र में शादी करती है व गर्भधारण जल्दी कर लेती है। 
  2. वह महिलाएं जो जल्दी शादी करती है पर गर्भधारण देर से करती है। 
दूसरे समूह की महिलाओं के गर्भ के दौरान जटिलता पहले समूह की तुलना में ज्यादा होती है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण प्रसव के दौरान मां व शिशु मृत्यु दर में कमी तो आयी है पर फिर भी 35 साल की महिलाओं में प्रसव संबंधित जटिलताएं कम उम्र की महिलाओं से काफी अधिक है। अधिक उम्र की गर्भावस्था के कारण होने वाली जटिलताओं को हम निम्न तरह में बांट सकते हैं :
  1. प्रेगनेंसी के पहले 
  2. प्रेगनेंसी के दौरान 
  3. प्रसव / डिलीवरी के दौरान 
  4. प्रसव / डिलीवरी के बाद

अधिक उम्र में गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशानीLate Pregnancy Complications in Hindi

  • उच्च रक्तचाप / हाय ब्लड प्रेशर : आमतौर पर 35 या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण होने पर भ्रूण में जन्मजात विकृति हो सकती है। इस उम्र में गर्भावस्था के दौरान Pre Eclampsia व Eclampsia की आशंका रहती है। हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी यह दिक्कत गर्भधारण से पहले भी हो सकती है। मरीज का वजन बढ़ना, हाथ-पैरों में सूजन, ब्लड प्रेशर का बढ़ना और पेशाब में प्रोटीन का आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। 
  • मोटापा और डायबिटीज : अधिक उम्र में मोटापे के कारण गर्भधारण से पहले हाय ब्लड प्रेशर और असामान्य प्रसव होने की आशंका रहती है। इसके अलावा कई मामलों में अधिक उम्र के चलते गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने की दिक्कत भी हो सकती है। इस वजह से शिशु का विकास जेनेटिक विसंगतियों से भरा, गर्भजल की अधिकता व जटिल प्रसव की आशंका अधिक होती है। 
  • गर्भाशय में गांठ / फाइब्रॉइड : अधिक उम्र में गर्भाशय में फाइब्रॉएड या गांठ बनने की आशंका से गर्भधारण में मुश्किलें वह बार-बार गर्भपात हो सकता है। इसके अलावा गर्भाशय के नीचे खिसकने से भी जटिल प्रसव का खतरा रहता है। 

डिलीवरी के दौरान परेशानियां Complications during Late Pregnancy in Hindi

  1. बार-बार गर्भपात, 
  2. समय पूर्व प्रसव, 
  3. प्रसव / डिलीवरी का समय से काफी बाद होना 
  4. प्रसव के दौरान गर्भाशय का असमान्य संकुचन 
  5. गर्भाशय के मुंह का देर से खुलना 
  6. योनि द्वार के लचीलेपन में कमी 
  7. शिशु का गर्भ में स्थान विसंगतिपूर्ण होने से सामान्य प्रसव की आशंका 
  8. प्रसूति के दौरान व बाद में ब्लड प्रेशर बढ़ना,
  9. बच्चेदानी फटना  
  10. नॉर्मल की बजाय सिजेरियन की आशंका अधिक होती है। 
सुरक्षित प्रसव के लिए जहां तक संभव हो प्रसव अस्पताल में ही कराएं। अस्पताल सभी जीवन रक्षक उपकरणों से सुसज्जित होने के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ भी उपस्थित होते हैं। 

डिलीवरी के बाद समस्या और सावधानी Complication after Delivery in Late Pregnancy

अधिक उम्र में खून के थक्के संबंधी रोग अधिक होते हैं। सिजेरियन से होने वाले अधिकांश शिशुओं में मानसिक दिक्कतें हो सकती है। प्रसव के बाद महिला को आराम करने व स्तनपान और गर्भनिरोधक साधनों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। 

35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंट होने पर क्या ध्यान रखें ? Pregnancy care tips in Hindi

35 वर्ष की आयु के बाद प्रेग्नेंट होने पर निचे दी हुई सावधानी बरतनी चाहिए :
  • प्रसव पूर्व महिला को संपूर्ण मेडिकल जांच करानी चाहिए 
  • महिला को अगर ब्लड प्रेशर, शुगर या थायराइड की बीमारी है तो उसका निदान सही समय पर करवाना चाहिए 
  • गर्भधारण पूर्व टॉर्च टेस्ट, TB के यौन रोग की जांच भी जरूरी है। 
  • 35 साल से अधिक उम्र होने पर जेनेटिक जांच भी करानी चाहिए। 
  • डिलीवरी पूर्व फॉलिक एसिड की गोली चार से पांच माह पहले से ही ले जिससे विकृत गर्भ न हो। 
  • खून की जांच और सोनोग्राफी डॉक्टर की सलाह पर कराएं 
  • विशेष जांचे जैसे थैलेसीमिया रोग, नर्वस सिस्टम की विकृति के लिए ट्रिपल टेस्ट डॉक्टर की सलाह से जरूर कराए। 
  • अगर रक्त का ग्रुप RH Negative ग्रुप है तो पति का ब्लड ग्रुप व गर्भवती का एंटीबॉडी टायटर कराएं। सातवे माह में गर्भवती को Anti-D का टीका लगवाए। 
  • गर्भावती को कैल्शियम, विटामिन, प्रोटीन डॉक्टर की सलाह से बराबर लेते रहना चाहिए। 
  • अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूरी जांच जरुर करवाएं। 
  • यदि आप किसी रोग से पीड़ित है तो विशेषज्ञ को इस बारे में जरूर सलाह ले 
  • डिलीवरी के बाद की कमजोरी को दूर करने के लिए हरी सब्जियां, मौसमी फल व डेयरी प्रोडक्ट ले। 
गर्भावस्था केवल महिला के लिए नहीं बल्कि उस महिला से जुड़े पुरे परिवार के लिए एक बेहद अहम् समय होता हैं। ऐसे समय महिला की विशेष देखरेख बेहद जरुरी होती हैं। अगर आप अधिक उम्र में प्रेगनेंसी प्लान कर रहे है तो पहले डॉक्टर की राय अवश्य लेना चाहिए। यह जानकारी हमें डॉ निर्मला शर्मा से मेहसाणा से ईमेल द्वारा भेजी हैं। 
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हम लोग फिट रहने के लिए कई तरह के व्यायाम करते हैं। कुछ लोग सुबह वाकिंग करते है तो कुछ लोग जिम में जाकर पसीना बहाते हैं। हर तरह के व्यायाम शरीर को फायदा जरूर पहुचाते है पर अगर आप किसी ऐसे व्यायाम के तलाश में है जिसे हम सम्पूर्ण व्यायाम कह सके तो वह हैं तैराकी / Swimming

स्विमिंग / तैराकी एक थेरेपी की तरह काम करती है। तैराकी से शरीर पर जमी चर्बी कम होने लगती है और व्यक्ति कहीं ज्यादा उर्जावान महसूस करता है। हर रोज 30 मिनट की तैराकी शरीर से लगभग 440 कैलोरीज कम करती है। पानी की घनता हवा से 800 गुना ज्यादा होती है और इसलिए जब हम तैराकी करते है तो हमारे शरीर के मांसपेशियों की कसरत बेहतर होती हैं।  

तैराकी / Swimming के स्वास्थ्य लाभ और तैराकी करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं : 


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तैराकी के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Swimming in Hindi

  1. मांसपेशियों की मजबूती / Muscles : रेगुलर स्विमिंग करने से अन्य व्यायाम की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मांसपेशियां मजबूत होती है। जिमिंग के मुकाबले तैराकी में 10 गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव होने से शरीर के जोड़ भी मजबूत होते हैं। 
  2. दिल रहता तंदुरुस्त / Heart : स्विमिंग से पूरी बॉडी का मूवमेंट होता है। इससे रक्त-संचार बेहतर होता है। ऐसे में हृदय का काम भी सुचारु होने से यह अंग सेहतमंद रहता है। ह्रदय और दिमाग से जुड़े रोगों की आशंका काफी हद तक कम होने से तनाव भी कम होता है। 
  3. वजन पर नियंत्रण / Weight Loss : यह शरीर की एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। इससे शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती हैं और बॉडी शेप में रहती है। शरीर में लचीलापन लाने के लिए यह बेहतर व्यायाम है। 
  4. कोलेस्ट्रोल रहता नियंत्रित / Cholesterol : ह्रदय रोग और वजन बढ़ने से होने वाले रोगों की आशंका स्विमिंग करने से कम हो जाती है। साथ ही इससे शरीर के लिए जरूरी हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (HDL) की मात्रा बढ़ती है यह बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने से रोकता है। 
  5. डायबिटीज का कम होता खतरा / Diabetes : डायबिटीज 1 और 2 दोनों के मरीजों के लिए स्विमिंग एक थेरिपी की तरह काम करती है। तैराकी से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने लगती है जिससे वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इस वजह से शुगर लेवल में भी उतार चढ़ाव नहीं होता है। 
  6. तनाव / Stress : तैराकी करने से मन प्रसन्न रहता है और शरीर में तनाव कम करनेवाले हॉर्मोन का स्त्राव बढ़ता हैं। डिप्रेशन से लड़ने के लिए यह एक बेहतर थेरेपी हैं। 
  7. रोग प्रतिकार शक्ति / Immunity : अध्ययन से यह बात सामने आयी है की जो लोग हफ्ते में कम से कम 4 दिन तैराकी करते है उनकी रोग प्रतिकार शक्ति औरों के मुकाबले अधिक स्ट्रांग होती हैं। ऐसे लोग कम बीमार पड़ते है और बीमार पड़ते है तो जल्द भी ठीक हो जाते हैं। 

स्विमिंग के लिए कौन सी सुविधाएं है जरूरी ?

स्विमिंग के लिए निचे दी हुई सुविधाएं होना जरुरी हैं। जैसे की :
  1. स्विमिंग पूल के पानी में क्लोरीन का स्तर 0.5 ppm होना चाहिए। 
  2. पानी की नियमित जांच हो ताकी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाव हो सके। 
  3. स्विमिंग ट्रेनर का होना जरूरी है। 
  4. बिगिनर्स के लिए लाइफ जैकेट या ट्यूब उपलब्ध होना चाहिए। 
  5. पुल के पास शॉवर व चेंजिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए। 

स्विमिंग करते समय क्या सावधानी बरते ? Which Precautions to follow while Swimming?

स्विमिंग तो फायदेमंद है ही लेकिन इस दौरान पुल का क्लोरीन युक्त पानी हमारे शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है। स्विमिंग शरीर के लिए संपूर्ण व्यायाम है। यह बॉडी का कई तरह से फायदा पहुंचाती है लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां बरतकर त्वचा आंखें और कान के इन्फेक्शन से बचाया जा सकता हैं। जाने कैसे करें बचाव :
  • आंखें / Eyes : क्लोरीन युक्त पानी आंखो की नमी को कम करता है। इस वजह से आंखों में खुजली और लालिमा जैसी दिक्कत हो सकती है। कंजक्टिवाइटिस इंफेक्शन हो सकता है। स्विमिंग गॉगल्स पहन कर ही स्विमिंग करें। गॉगल ऐसे चुनें जो आपकी आंखों पर फिट बैठता हो। 
  • त्वचा / Skin : जिनकी त्वचा बेहद संवेदनशील होती है उन्हें पूल के पानी से एलर्जी की आशंका रहती है। उन्हें त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं जिनसे खुजली और जलन होती है। जिनकी त्वचा स्विमिंग के बाद रूखी / Dry हो जाती है वह इससे पहले या बाद में मॉइस्चराइजर लोशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। नारियल तेल का प्रयोग भी ले सकते हैं। 
  • कान / Ear : स्विमिंग करने वाले अधिकतर तैराकी में स्विमर इयर्स की समस्या देखी जाती हैं। इस समस्या में तैराक को क्लोरीन युक्त पानी कान में जाने से सूजन, संक्रमण और दर्द होता है। इयरप्लग या कैप पहने। सर्दी जुखाम की समस्या में स्विमिंग न करें। स्विमिंग के बाद कान में खुजली एलर्जी से परेशानी हो तो ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं। 
  • बाल / Hairs : पूल के क्लोरीन युक्त पानी के कारण बाल रूखे कमजोर और बेजान हो जाते हैं। पूल में उतरने से पहले बालों में ओलिव ऑइल या नारियल तेल लगाएं। बालों को खुला ना छोड़ें। स्विमिंग कैप पहनें। 
इस तरह आप ऊपर दी हुई सावधानी बरतकर तैराकी का भरपूर लुफ्त उठा सकते हैं। हमारे स्वास्थ्य के लिए हर तरह के व्यायाम आवश्यक है इसलिए अपने क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार हर व्यायाम को समय देना चाहिए और फिट रहने की कोशिश करना चाहिए।
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क्या आप एक भारी लंच करने के बाद तुरंत टहलने के लिए निकल जाते हैं ? हो सकता है आप ना जाते हो लेकिन आप जैसे बहुत से लोग ऐसा रोज करते हैं। यह एक बहुत ही हानिकारक आदत है जिससे तुरंत रोका जाना चाहिए। एक्सपोर्ट के मुताबिक हमारा पाचन तंत्र इतना मजबूत है कि आप लंच में चाहे जो कुछ भी उल्टा सीधा क्यों न खा ले वह सब कुछ हजम कर लेगा। 

हमारा पेट खाने को अच्छी तरह से खाना हजम करके सारे जरूरी पोषण हमें एनर्जी के तौर पर देता है पर उसी समय हमारे पेट का सिस्टम थोड़ा संवेदनशील भी होता है। हमारा पाचन तंत्र उस समय ठीक से कार्य नहीं कर पाता जब आप उसे तकलीफ देते हैं। इसलिए दोपहर में लंच करने के बाद 15 से 20 मिनिट तक आराम करना जरुरी होता है। 

आइए जानते हैं कि लंच के बाद कई लोग क्या-क्या गलतियां करते हैं जिससे उनके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है :


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दोपहर के खाने के बाद क्या नहीं करना चाहिए ? Things to avoid after Lunch in Hindi

  1. दांतों को ब्रश करना : अगर आपने कोई सिट्रस एसिड वाला आहार खाया है तो दांतों को ब्रश करने से दातों की परत तुरंत उतर जाएगी। इस परत को Enamel कहते हैं। 
  2. बहुत ज्यादा पानी पीना : अगर आप खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा पानी पीते हैं तो इससे आपका पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे पेट की कई बीमारियां भी हो सकती है। पढ़े - खाना खाते समय पानी पिने के नियम। 
  3. फल / Fruit : कुछ लोगों को खाना खाने के बाद अलग-अलग फल खाने की आदत होती हैं। खाना खाने के बाद फल खाने से पेट के एसिड में फल सड़ने लगता है और गैस की समस्या बढ़ जाती हैं। अगर आपको फल खाना ही है तो खाना खाने के 1 घंटा पहले या खाना खाने के 2 घंटे बाद ही कोई फल खाना चाहिए। पढ़े - फल खाने के जरुरी नियम 
  4. धूम्रपान करना : लंच करने के बाद शरीर का ब्लड सरकुलेशन तेज होता है और जब उसके बाद आप धूम्रपान करते हैं उसका धुंआ आराम से आपके शरीर में घुसकर फेफड़ों और किडनी को नुकसान पहुंचाता है। 
  5. टहलना : लंच करने के सीधे बाद वॉक पर जाने से खाने का पोषण शरीर में अच्छी तरह से नहीं समां पाता है। खाना खाने के बाद आपके पाचन तंत्र को अधिक ब्लड की जरुरत होती है इसलिए खाना खाने के कम से कम 15 मिनिट बाद ही टहलना चाहिए। 
  6. ड्राइविंग : खाने को पचाने के लिए बहुत सारे खून की आवश्यकता पड़ती है और इसमें दिमाग सहायता करता है। अगर आप खाने के बाद ड्राइविंग करने पर अपना पूरा ध्यान लगा देंगे तो आप को भोजन को पचाने के लिए दिमाग को वह काम नहीं कर पाएगा। 
  7. चाय / Tea : खाना खाने के बाद चाय पिने की बुरी आदत भी कई लोगों को होती है। चाय में टैनिन होता है जिससे पेट में प्रोटीन का पाचन नहीं होता और आयरन का अवशोषण नहीं होता हैं। अगर चाय पीना ही है तो खाने के 2 घंटे बाद चाय पीना चाहिए। 
  8. सोना / Sleep : खाने के बाद सोने से कई पाचन संबंधित बीमारी हो सकती है। इससे आपको गैस, अपचन, त्वचा रोग, कब्ज जैसे समस्या हो सकती है। दोपहर में खाना खाने के बाद नहीं सोना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार दोपहर में खाना खाने के बाद सोने से शरीर में आम / Toxin निर्माण होता है जो काफी सारे बिमारियों की जड़ होता हैं। आयुर्वेद के कहा गया है की दोपहर में खाना खाने के बाद आप केवल 10 से 15 मिनिट ताल वाम कुक्षि / left lateral position में सो सकते है जिससे पाचन में भी मदद होती हैं। आयुर्वेदानुसार गर्मी में दोपहर के खाना खाने के बाद आधा घंटा सोने से कोई तकलीफ नहीं। 
यह जानकारी हमें मालेगांव से आयुर्वेदाचार्य डॉ विकास पाटिल ने भेजी हैं। सभी पाठकों और निरोगिकाया टीम द्वारा उनका बहोत-बहोत आभार। अगर आपके पास भी स्वास्थय से जुडी कोई उपयोगी जानकारी है तो हमारे साथ अवश्य शेयर करे। 
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सदियों से बादाम / Almond का नाम याददाश्त के साथ जुड़ा हुआ है। कभी हमे कोई चीज़ याद नही आती है , तो तुरंत बड़े बुजुर्ग कहते है, अब रोज 1 मुट्ठी बादाम खाया कर। यूँ तो बादाम से याददाश्त मजबूत होती है और साथ ही प्रोटीन का मुख्य स्रोत होने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होकर ताकत मिलती है लेकिन इसके अलावा भी बादाम के कई उपयोग है, जिनके बारेंमे आज हम जानेंगे। 

बादाम पश्चिम एशिया, यूरोप, बलूचिस्तान, अफगानिस्तान कश्मीर, पंजाब आदि इलाकों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसका छिलका बहुत कठोर होता है जिसे तोड़कर बादाम की गिरी निकाली जाती है। इसके दो प्रकार होते हैं मीठी और कड़वी। उपयोग में मीठी गिरी लेते है। कड़वी गिरी खाने योग्य नहीं होती है। बादाम का तेल हल्का पीला,  साफ, हल्की गंध युक्त, स्वाद रहित और बहुत गुणकारी होता है। 

बादाम खाने के फायदे और घरेलु प्रयोग से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :


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बादाम : आता है बड़ा काम

बादाम खाने के फायदे Health benefits of Almond in Hindi

बादाम के गुण क्या हैं ?

मीठा बादाम मधुर, पौष्टिक, वीर्यवर्धक, वात पित्त नाशक,  कफकारक, स्निग्ध और गर्म होता है तथा रक्तपित्त के रोगियों के लिए हानिकारक होता है। कड़वा बादाम विषाक्त होने से सेवन के लिए अयोग्य होता है। बादाम में जरूरी विटामिंस और मिनरल्स जैसे विटामिन B1 ,B2 ,B5 ,B6 , vit E, कैल्शियम मैग्नीशियम, जिंक, ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन्स, अच्छे फैट्स, फाइबर्स आदि प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर को अलग अलग तरह से फायदा करते हैं। बादाम में सोडियम की मात्रा ना के बराबर होती है और यह एनर्जी से भरपूर होते हैं। 

बादाम के उपयोग कैसे करे ?

सूखे मेवे के रूप में बादाम का प्रयोग मिठाई, ठंडाई या मेहमानों की आवभगत में भी किया जाता है। पोष्टिकता, दिमागी शक्ति, स्नायविक सुदृढ़ता, बलवीर्य की वृद्धि, नेत्रज्योति की रक्षा आदि के लिए बादाम का सेवन काफी लाभप्रद होता है।

बादाम के प्रयोग की आसान विधि 

बादाम का सेवन करने की सबसे आसान और कारगर विधि यह है कि इसे चंदन की तरह पत्थर पर घिसकर दूध में मिलाकर पीना चाहिए। इस तरह सेवन करने से इसका पाचन आसानी से होता है और यह शरीर में शीघ्र असर करता है।

इसके अलावा कोशिश करें कि जब भी बादाम खाए इसे भिगोकर इसका छिलका निकाल कर ही खाएं।  क्योंकि इसके भूरे रंग छिलके में टैनिन नामक द्रव्य रहता है जो जरूरी पोषक तत्व के शोषण में अवरोध करता है। भीगा हुआ बादाम पाचन में भी आसान होता है।

बादाम के स्वास्थ्य लाभ Health benefits of Almond in Hindi 

  • बलवान शरीर : शरीर को पुष्ट, सशक्त और सुंदर बनाने के लिए एक बादाम की गिरी को एक कप पानी में सुबह भिगोकर रख दें। शाम को इस गिरी का छिलका उतारकर इसे साफ पत्थर पर घिस कर इसके लेप को एक कप ठंडे  दूध में डाल दे और एक से दो चम्मच शहद डालकर घोल ले, फिर इसे पी ले। इसी तरह शाम को भी एक गिरी भिगो कर रखे और सुबह  भी पी ले। सुबह-शाम यह प्रयोग करें। प्रतिदिन एक-एक बादाम बढ़ाते जाएं और इनकी संख्या वहां तक सुनिश्चित करें कि जितने बादाम का पाचन आसानी से हो सके। पानी में 10 से 12 घंटे भिगोने के बाद उसमें एक ऐसा तत्व तैयार होता है जो पाचन क्रिया को बल देता है और शरीर को ताकत देता है।
  • महिलाओं के लिए : विद्यार्थियों में तथा दुग्धपान कराने वाली माताओं को इसी प्रयोग में साथ में 5 ग्राम अश्वगंधा और 5 ग्राम शतावरी का चूर्ण मिलाकर पीना गुणकारी रहेगा। इसे आप इस तरह से प्रयोग में लाए :- दोनों चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाट लें और फिर बादाम मिला हुआ दूध पी लें। यह प्रयोग करीब 40 से 60 दिन तक नियमित रुप से करें। छात्र छात्राओं, युवाओं और प्रौढ़ स्त्री पुरुष के लिए यह प्रयोग  शरीर को पुष्ट और बलशाली करने वाला, कमजोरी मिटाने वाला, नेत्र ज्योति बढ़ाने वाला, बल वीर्य की वृद्धि करने वाला , स्त्रियों के  स्तन पुष्ट और सुडोल करने वाला, चेहरा भरने वाला तथा कमर को शक्ति प्रदान करने वाला होता है। 
  • दुबलापन : जो व्यक्ति काफी दुबले होते हैं या जिनके गाल अंदर धंसे हुए होते हैं, ऐसे व्यक्ति रात को एक बादाम की गिरी भिगो कर सुबह इसका लेप बनाकर उसमें मक्खन मिलाकर डबलरोटी पर लगाएं और ऊपर से मिश्री बुरक दे। इसे खा कर इसके ऊपर ठंडा दूध पिए। यह प्रयोग करीब 3 से 6 महीने तक करने पर शरीर सुडौल और सुगठित बनेगा। चेहरा भी भरेगा , स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी। इससे बच्चों का हकलाना या तुतलाना भी धीरे-धीरे कम होगा। 
  • बच्चों का दिमागी विकास : प्रतिदिन रात को तीन से चार बादाम भिगोकर सुबह बच्चों को खाली पेट छिलके निकाल कर दें। इसमें vit E मौजूद होता है। इससे धीरे-धीरे बच्चों के दिमाग का विकास होगा। स्मरणशक्ति भी बढ़ेगी और शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा। नियमित रुप से बादाम खाने से आपकी याददाश्त अच्छी रहती है और बुढ़ापे में अल्जाइमर्स डिसीस होने का खतरा कम होता है। 
  • कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण : उच्च कोलेस्ट्रोल हृदय रोग और दिल की धमनियों में रुकावट सहित कई रोगों को जन्म देता है। बादाम में काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट रहते हैं। प्रतिदिन बादाम का सेवन आपके कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखेगा। साथ ही गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढ़ाएगा। बादाम में पाए जाने वाला  फॉलिक एसिड ब्लड में मौजूद होमोसिस्टीन अमीनो एसिड के स्तर को बढ़ाता है जिसकी वजह से आपकी रक्तवाहिनियों में प्लेक नहीं बन पाता है और आप atherosclerosis  जैसे गंभीर बीमारियों से भी बचते हैं। 
  • हृदय के लिए हितकारी : प्रतिदिन बादाम का सेवन आपको दिल की कई बीमारियों से दूर रखेगा। साथ ही आप अगर उच्च रक्तचाप के रोगी है तो प्रतिदिन बादाम खाना आपके लिए रामबाण साबित होगा। इसमें अल्फा टोकोफेरोल यह तत्व मौजूद होता है जो  रक्तचाप को बनाए रखता है, साथ ही सोडियम का प्रमाण कम रहता है और पोटेशियम अधिक होता है जिस वजह से उच्च रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
  • इन्फ्लेमेशन / सूजन होता है कम : बादाम शरीर में मौजूद C Reactive Protein के स्तर को कम करता है जिससे इन्फ्लेमेशन कम होकर आपकी रक्तवाहिनियों को नुकसान नही होता है। 
  • डार्क सर्कल में असरकारक : अगर आप का आंखों के नीचे के काले घेरों से परेशान हैं तो प्रतिदिन रात को सोने के पहले बादाम के तेल की मालिश आंखों के चारों बाजू करें करीब 1 महीने तक ऐसा करते रहे इसमें आपको जरूर अंतर महसूस होगा। 
  • गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए मदत : बादाम के अंदर फोलिक एसिड नामक तत्व होता है, जो गर्भस्थ शिशु के दिमागी विकास के लिए और नर्वस सिस्टीम को मजबूत करने में मद्त करता है। इसके लिए बादाम को भिगोकर खाएं ताकि गर्भिणी स्त्री उसका पाचन आसानी से कर सके। 
  • वजन घटाने में भी करता है मदत : जिन लोगों को अपना वजन कम करना है उन लोगों में एक छोटा सा बादाम भी काफी असरकारक होता है। भीगे हुए बादाम में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड रहता है, यह आपका पेट भरा महसुस कराने में और भूख को कम लगने में मदद करता है। साथ ही इसमें प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं , जो कि आपके मसल्स बनाने में और फैट को बर्न करने में मदद करते हैं। बादाम युक्त लो कैलोरी डाइट आपका वजन कम करने में मदद करते हैं। भीगे हुए बादाम अगर छिलका निकाल कर खाए तो पचने में आसान होते हैं। कच्चे बादाम  में छिल्का होने की वजह से प्रोटीन को जल्दी तोड़ते हैं। जबकि भीगे हुए बादाम छिलका निकल जाने के बाद उसमें मौजूद एंजाइम्स भी निकल जाते हैं और फैट को आसानी से तोड़ते हैं। इस वजह से पाचन और पोषण तत्व तत्व का अवशोषण भी आसानी से होता है। साथ ही यह आपको एक्सरसाइज कराने में एनर्जी देता है। फाइबर से भरपूर होने के कारण कब्ज की समस्या से भी निजात दिलाता है। मल को सॉफ्ट करके शरीर के बाहर निकालता है और आंतों की सफाई करता है। भीगे हुए बादाम खाना मेटाबोलिक सिंड्रोम से लड़ने में मदद करता है जो की मोटापे का एक बड़ा कारण है। 
  • वजन भी बढ़ाता है बादाम : बादाम ना सिर्फ आपका वजन कम करता है बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है। इसके लिए आपको करना यह होगा कि हर दिन करीब 20 से 40 बादाम सुबह और उतना ही शाम में खाना होगा लेकिन यह संख्या आप को धीरे-धीरे बढ़ाने होगी और जितना क्या आपका शरीर पचा सकता है उतने बादाम आपको खाने होगे। अपने रेगुलर डाइट के साथ आप यह हेल्थी तरीका भी वजन बढ़ाने के लिए अपना सकते हैं।
  • कैंसर रखे दूर : रिसर्च के अनुसार बादाम में कैंसर विरोधी विटामिन बी 17 पाया जाता है और साथ में ही विटामिन ई की अधिकता रहती है इस वजह से यह कैंसर से लड़ने की उम्र लंबी करने की क्षमता रखता है। हम यह कह सकते हैं कि इसमें मौजूद प्रबल एंटीऑक्सिडेंट्स कई तरह के कैंसर जैसे कोलोन , ब्रेस्ट , प्रोस्टेट आदि को रोकने में अहम भूमिका निभाता है।
  • मिले एनर्जी का डोज़ : अगर आपको कई बार थकान कमजोरी महसूस होती है , कोई काम में आपका दिल नहीं लगता है, सिर दर्द या चक्कर आने की शिकायत रहती है तो इसकी वजह ऊर्जा की कमी भी हो सकती है। इसके लिए आप हर रोज सुबह 8 से 10 भिगोए बादाम दूध के साथ खायें। आप चाहे तो जिम से लौटने के बाद भी बादाम खा सकते हैं इससे आपकी एनर्जी लेवल बढ़ेगी। 
  • मधुमेह में बादाम : मधुमेह पीड़ित व्यक्ति  नियमित रुप से बादाम का सेवन करता है तो उसका ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है। 
  • हड्डियोंकी बढ़ती है ताकत : बादाम में मौजूद कई जरूरी विटामिंस और मिनरल्स जैसे की कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों की मरम्मत और विकास के लिए जरूरी होते हैं। रोजाना बादाम का सेवन आपके भविष्य के हड्डियों की मजबूती लंबे समय तक बनाए रखता है। 
  • बढ़ाता है प्रतिकारक्षमता : बादाम में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिंस आपकी इम्यूनिटी पावर को बढ़ाता है और कई बीमारियों से लड़ने की ताकत भी देता है। 
  • त्वचा के लिए भी है उपयोगी : प्रतिदिन बादाम का सेवन आपकी त्वचा को बनाता है स्वस्थ सुंदर और बेदाग। बादाम का सेवन आपकी त्वचा के कई प्रॉब्लम जैसे पिंपल्स, ब्लैकहेड्स, चेहरे के दाग धब्बे, झुर्रियां आदि से निजात दिलाता है। 
  1. रात में पानी में कुछ बदाम भिगो कर सुबह इनका दूध मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर करीब आधा घण्टा लगाकर रखें। धीरे धीरे आपकी त्वचा सुंदर और बेदाग होगी। 
  2. अगर आपकी त्वचा डार्क और रहे हो रही है तो बादाम के पेस्ट में शहद मिलाकर लगाकर रखें इससे धीरे धीरे त्वचा को मॉइश्चराइजर मिलकर त्वचा का पोषण होगा और त्वचा ग्लो करेगी। बादाम के पेस्ट में 1 - 2 बूंद चंदन का तेल और गुलाबजल मिलाकर रोजाना लगाने से चेहरे का कालापन कम होता है। 
  3. ब्लैक हेड्स के लिए बादाम के पाउडर में गुलाबजल मिलाकर ब्लैक हेड्स पर लगाएं और रगड़ कर धो ले इसे ब्लैक हेड्स कम हो जाएंगे। 
  4. बादाम तेल से हर रोज रात को सोने के पहले चेहरे की मसाज करने से भी चेहरे की त्वचा चमक उठेगी। 
  5. आंखों के काले घेरों के लिए प्रतिदिन बादाम के तेल से मालिश करने से धीरे-धीरे कालापन कम हो जाएगा। 
  • बालों को देता है पोषण : बादाम के तेल से हर रोज सिर की मालिश करने से बालों को अच्छा पोषण मिलता है।  बालों की कई तरह की समस्या जैसे सफेद बाल , बालों में रूसी , बालों का झड़ना आदि में बादाम के तेल के प्रयोग से लाभ मिलता है। बादाम की गिरी में पाए जाने वाला मैग्नीशियम बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है। नियमित रुप से बादाम का सेवन कर आप काले , लंबे , घने बाल जरूर पा सकते हैं। 

बादाम के कुछ अन्य घरेलू प्रचलीत प्रयोग Almond Home Remedies in Hindi

  1. हर रोज रात को कुछ बादाम पानी में भिगो दीजिए और सुबह में उनका नीचे बताए हुए अलग अलग तरीकों से अलग अलग समस्याओं के लिए प्रयोग कीजिए। 
  2. लगातार हो रही खासी और निकलनेवाले कफ से आप परेशान हैं तो मिश्री में 5 बादाम का पेस्ट मिलाकर दिन में 2 बार खाएं इससे आपको आराम मिलेगा। 
  3. चिंता और तनाव को दूर करने के लिए कुछ बादाम का पेस्ट  आधा चम्मच जायफल और एक चुटकी सौंठ पावडर मिलाकर दूध या पानी से लेने पर लाभ मिलेगा। 
  4. कुछ हफ़्तों तक लगातार हर रोज सुबह 10 बादाम दूध के साथ खाने से एनीमिया में फायदा होगा। 
  5. पीलिया में 6 बादाम , तीन छोटी इलाइची और दो छुआरा याने कि सूखे खजूर को रात को पानी में भिगोकर सुबह इन का पेस्ट बनाकर मिश्री और मक्खन के साथ खाने में फायदा होगा। 
  6. याददाश्त बढ़ाने के लिए 10 बादाम का पेस्ट दो चम्मच मक्खन और थोड़ी सी मिश्री में मिलाकर दूध के साथ लेने से स्मरण शक्ति बढ़ेगी। 
  7. जिन व्यक्तियों को सिर दर्द की समस्या हो उन्होंने हर रोज अपने नाक में बादाम के तेल की दो दो बूंदें कुछ समय के लिए डालिए।  इससे सिर दर्द कम होगा और मानसिक दुर्बलता भी दृर होगी। 
  8. जो बच्चे देरी से बोलना सीख रहे हैं उन्हें रात को भिगोई हुई और छिली हुई बादाम की गिरी मक्खन के साथ खिलाएं। वह बोलने लगेंगे।

रोजाना कितने बादाम खाना चाहिए ?

बादाम खाने के सीमा प्रति व्यक्ति अलग अलग हो सकती है। अगर आपको वजन बढ़ाना है तो आपको बादाम खाने की संख्या बढ़ाने होगी और कम करना है तो थोड़ी कम करनी होगी। प्रतिदिन आप करीब 20 बदाम तक खा सकते हैं। साथ ही कोशिश कीजिए कि आप बादाम को छिल्के सहित या छिलकेरहित पर भिगोकर ही खाएं इससे इन के पोषण तत्वों में वृद्धि होगी। कभी भी तले हुए या रोस्टेड बादाम ना खाए। अगर आपको कच्चा बादाम खाना है तो इसे इसके ब्राउन स्किन के साथ खाएं क्योंकि इसमें फ्लेवोनॉइड्स होते हैं। 

बादाम खाने के नुक़सान क्या हैं ?

जहां एक तरफ बादाम असीम गुणों से भरा हुआ है वही अगर इसे गलत तरीके से या आवश्यकता से अधिक मात्रा में खाया जाए तो इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं जैसे कि :- 
  1. जरूरत से ज्यादा सेवन आपके पेट में गड़बड़ी कर सकता है जैसे की कब्ज दोस्त पेट दर्द मरोड़ आना जी मचलाना आदि। 
  2. बादाम का अतिसेवन आपका मोटापा भी बढ़ाता है। 
  3. किडनी, गॉल ब्लेडर में स्टोन वालों को बादाम का सेवन नुकसान पहुंचाता है। 
  4. विटामिन ए की अधिकता के कारण सिर दर्द , आंखों का धुंधलापन , दस्त आदी समस्याएं भी हो सकती है। 
  5. अगर किसी को बादाम खाने से एलर्जी है तो उसे इसके सेवन से बचना चाहिए। 
इस तरह बादाम एक बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक ड्रायफ्रूट माना जाता है और पूरी दुनिया में इसका काफी उपयोग होता है। हर रोज एक मुट्ठी भर ड्रायफ्रूट जिसमें बादाम और अखरोट अवश्य हो, को खाने से आप स्वास्थ्य के कई लाभ हो सकते हैं।
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