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Early Symptoms of Pregnancy in Hindi या Pregnancy के प्रारंभिक लक्षण, जैसे की यह लेख का title बता रहा है आज इस लेख में हम आपको Pregnancy के कुछ ऐसे शुरूआती symptoms की जानकारी देने जा रहे है जिससे आपको इस बात का अंदाजा आ जायेगा की आप Pregnant है या नहीं।

ऐसे तो हम डॉक्टर के पास जाकर सोनोग्राफी या फिर Urine Pregnancy Test कर गर्भावस्था यानि Pregnancy है या नहीं यह पता कर सकते है पर इससे भी पहले pregnant होने पर महिलाओं के शरीर कुछ हॉर्मोनल बदलाव होने से शरीर कुछ शुरूआती लक्षण बता देता है जिससे आप Pregnancy का अंदाजा लगा सकते हैं।

तो क्या है यह Early Symptoms of Pregnancy in Hindi या Pregnancy के प्रारंभिक लक्षण इसकी पूरी जानकारी निचे दी गयी हैं :
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11 Early Symptoms of Pregnancy in Hindi | Pregnancy के प्रारंभिक लक्षण 

Pregnancy के शुरूआती दिनों में महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन्स में तेजी से बदलाव होने लगता हैं। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्तिथि पर होता हैं। महिलाओं में होनेवाले कुछ ऐसे ही Early Symptoms of Pregnancy निचे बताये गए हैं :
  1. मिजाज / मूड बदलना (Mood): शरीर में होनेवाले हॉर्मोनल बदलाव का असर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर होता हैं। इसके कारण महिलाए अक्सर तनाव, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। इसका प्रमाण हर महिला में अलग-अलग होता हैं। 
  2. कमजोरी (Weakness) : Pregnancy के शुरूआती दिनों में महिलाओं को अधिक कमजोरी और थकान महसूस होती हैं। 
  3. स्तनों में बदलाव (Breast Changes) : स्तनों में भारीपन और दर्द महसूस होना। कुछ महिलाओं को स्तन में सूजन महसूस होती हैं। यह लक्षण शुरुआती तीन महीने तक रहता हैं। 
  4. जी मचलाना (Nausea) : यह Pregnancy का एक अहम शुरुआती लक्षण हैं। शरीर में बढ़ रहे एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कारण यह लक्षण निर्माण होता है ऐसा माना जाता हैं। खाना देखकर या केवल खाने की सुगंध से ही जी मचलाने लगता हैं। ऐसे भोजन जो पहले आपकी बेहद पसंद था उसे अब देखकर भी जी मचलाने लग सकता हैं। पढ़े - प्रेगनेंसी में जी मचलाने का घरेलु आयुर्वेदिक उपचार 
  5. पेट फूलना (Abdominal Fullness) : आमतौर पर महिलाओं को जैसे मासिक से पहले पेट फुला हुआ लगता है ठीक उसी तरह प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में जब आपका गर्भाशय छोटा होता है तब भी पेट फुला हुआ लगता है और कपडे भी टाइट होने लगते हैं। 
  6. कब्ज (Constipation) : Pregnancy के शुरूआती दिनों में ज्यादातर महिलाओं को कब्ज की समस्या भी होती हैं। पढ़े - कब्ज का घरेलु आयुर्वेदिक उपचार 
  7. बार-बार पेशाब लगना (Frequent Urination) : प्रेगनेंसी में शरीर में होनेवाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण किडनी की ओर खून का बहाव बढ़ने लगता है जिस वजह से शरीर में पेशाब अधिक तैयार होता है और बार-बार पेशाब जाना पड़ता हैं। यह लक्षण प्रेगनेंसी में अंत तक रहता हैं। जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है गर्भ में पल रहे बच्चे का प्रेशर पेशाब की थैली पर पड़ता है और पेशाब बार-बार जाना पड़ता हैं। 
  8. खून के धब्बे (Spotting) : लगभग 25% महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआत में हल्का सा योनिगत रक्तस्त्राव / bleeding होता है जिसे spotting कहते हैं। यह क्यों होता है इसका कोई ठोस कारण का अभी तक पता नहीं चला है पर विशेषज्ञों के अनुसार अंडा गर्भाशय में स्थापित होने से ऐसा ब्लीडिंग होता हैं। अगर ऐसा ब्लीडिंग अधिक हो और साथ में पेट में दर्द अधिक हो तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाकर जांच कराना चाहिए क्योंकि यह लक्षण miscarriage या ectopic Pregnancy का भी हो सकता हैं। 
  9. तापमान (Temperature) : Pregnancy के शुरूआती दिनों में एस्ट्रोजन हॉर्मोन बढ़ने से शरीर का तापमान हमेशा से थोड़ा अधिक रहता है और बुखार जैसा महसूस होता हैं। 
  10. धड़कन तेज होना (Heart Rate) : Pregnancy के शुरूआती दिनों में हॉर्मोन्स में बदलाव के कारण महिलाओं की ह्रदय गति सामान्य से तेज रहती हैं। 
  11. मासिक न आना (miss period) : हॉर्मोन्स के बदलाव के कारण महिलाओं में हर महीने होनेवाले मासिक स्त्राव बंद हो जाता हैं। यह एक खास लक्षण है जिस वजह से ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी की आशंका होती है वह प्रेगनेंसी की जांच कराती हैं।
जरूर पढ़े - प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनो में कैसा आहार लेना चाहिए
तो यह कुछ विशेष लक्षण है जो Pregnancy के शुरूआती दिनों में होते है जिन्हे पहचान कर आप गर्भावस्था की आशंका कर सकते हैं। यह सभी लक्षण पहली प्रेगनेंसी में अधिक दिखाई देते हैं। 

अगर आपको यह Early Symptoms of Pregnancy in Hindi या Pregnancy के प्रारंभिक लक्षण की जानकारी उपयोगी लगती है तो आपसे निवेदन है की कृपया इसे Share अवश्य करे। 

आयुर्वेद व पंचकर्म का रिश्ता ऐसा होता है, जैसे शरीर व आत्मा। पंचकर्म यह आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण अंग है। बिना पंचकर्म के आयुर्वेद अधूरा होता है। पंचकर्म का प्रयोग आयुर्वेद में स्वस्थ व्यक्ति तथा बीमारी दोनों में होता है। आयर्वेद का प्रयोजन ही "स्वस्थस्य स्वास्थ रक्षणम, आतुरस्य विकारप्रशमनं च।" अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना व रोग ग्रस्त व्यक्ति को रोग मुक्त करना होता है।

अगर आपको कोई बीमारी नहीं है इसका मतलब आप स्वस्थ या Healthy हो ऐसा हम नहीं कह सकते क्योंकि कई बार हम बीमार तो नहीं रहते हैं पर पूरी तरह स्वस्थ भी नहीं रहते। हमारे शरीर में कई लक्षण ऐसे होते हैं जो यह बताते हैं कि हमें कोई बीमारी तो नहीं है लेकिन हम पूरी तरह स्वस्थ भी नहीं है, जैसे 
  1. भूख कम लगना, 
  2. अधिक प्यास लगना
  3. मुंह में बदबू, 
  4. शरीर के कोई भी हिस्से में अकारण खुजली होना, 
  5. आलस, 
  6. नींद बहुत कम या बहुत ज्यादा होना, 
  7. विभिन्न प्रकार के सपनों का आना, 
  8. बेचैनी, 
  9. दुर्बलता, 
  10. उत्साह की कमी,  
  11.  मैथुनइच्छा में कमी होना, 
  12. थकान आदि। 
इन लक्षणों की अनुभूति हमें हर बार जब मौसम बदलता है तब होती है। इसी लिए आयुर्वेद शास्त्र में ऋतुसंधिकाल का विशेष महत्व है, ये आयुर्वेद की एक विशेष संकल्पना है जो चिकित्सकों को रोगों के निदान एवम् रोगों की चिकित्सा में बहुत मददगार साबित होती है। हमें उपरोक्त लक्षणों को जानकर मौसम के अनुसार पंचकर्म जरूर कराना कराना चाहिए।

पंचकर्म चिकित्सा क्या हैं ? What is Panchkarma in Hindi

पंचकर्म चिकित्सा के मुख्य 5 प्रकार होते है। 
  1. वमन - Vomiting
  2. विरेचन - Purgation
  3. बस्ती - Medicated Enema
  4. नस्य - Nasal drops
  5. रक्तमोक्षण - Blood Letting
पंचकर्म चिकित्सा को आयुर्वेद की LIC policy कह सकते है। जिस तरह हमें LIC का हर साल प्रीमियम भरना होता है उसी तरह हमें अपने शरीर स्वास्थ्य के लिए पंचकर्म रूपी प्रीमियम हर साल भरते रहना चाहिए ताकि हम सेहत का अनमोल खजाना पा सके और उसे लंबे समय तक बरकरार रख सके। स्वस्थ व्यक्ति में पंचकर्म ऋतुनुसार किया जाता है जैसे वर्षा ऋतु में बस्ती, शरद ऋतु में विरेचन और रक्त मोक्षण तथा वसंत ऋतु में वमन। 

पंचकर्मों के सारे प्रकारों के बारे में हम आपको एक-एक करके जानकारी देंगे। आज हम इस लेख के द्वारा आपको बस्ती चिकित्सा के बारें में बताने जा रहे है। आशा है आपको यह आयुर्वेद की जानकारी उपयोगी लगेगी और इसे आप सभी मित्रपरिवार के साथ share भी करेंगे !

आयुर्वेदिक बस्ती पंचकर्म चिकित्सा क्या है और इसके लाभ 

What is Basti Kriya and its benefits in Hindi

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बस्ती पंचकर्म चिकित्सा क्या हैं ? What is Basti Panchkarma in Hindi ?

बस्ती पंचकर्म चिकित्सा की मुख्य चिकित्सा मानी जाती है। बस्ती का अर्थ होता है, गुद मार्ग (Anus) द्वारा औषधिद्रव्य पेट मे ढकेलना। इस द्रव्य को पुनः  गुदद्वारा ही शरीर के बाहर निकाला जाता है जिस वजह से आंतों से मल पूर्णतः साफ हो जाता है और संचित दोषों का शोधन होता है। 

बस्ती के प्रकार कई तरह से आयुर्वेद शास्त्र में बताए गए है। जैसे बस्ती के घटक द्रव्यों नुसार प्रकार, बस्ती के प्रयोजन नुसार प्रकार, बस्ती के कर्मनुसार प्रकार, बस्ती की मात्रा नुसार प्रकार; इत्यादि।

व्यवहार दृष्टिकोण से स्थूलस्वरूप में बस्ती के 2 प्रकार ज्ञात होते है।
  1. निरुह / आस्थापन बस्ती : इसमें औषधी काढ़ा या क्षीर होता है। इसे देने के पश्चात करीब 15 मिनट में ही बस्ती द्रव्य शरीर के बाहर आ जाता है। यह बस्ती आयु को बढ़ाने वाली होती है इसीलिए इसे आस्थापन बस्ती भी कहा जाता है।
  2. अनुवासन / मात्रा बस्ती : इस में तिल तेल या औषधि सिद्ध तेल, घी आदि गुदद्वारा शरीर के भीतर जाता है। यह शरीर में कुछ समय रहना आवश्यक होता है।
इसके अलावा बस्ती का और एक प्रकार माना जाता है जिसे "उत्तरबस्ती" कहा जाता है। यह शरीर के उत्तर भाग से दी जाती है,  प्रायः गर्भाशय व मूत्राशय के विकारों में, मधुमेह मे उत्तर बस्ती का प्रयोग किया जाता है।

बस्ती यह क्रिया आधुनिक चिकित्सा पद्धति के एनिमा (Enema) जैसी ही लगभग होती है लेकिन इसकी कार्यपद्धति काफी अलग होती है। आचार्य चरक ने बस्ती चिकित्सा को श्रेष्ठ चिकित्सा माना है। बस्ती यह गुदद्वारा दी जाती है, जिससे औषधि का पाचन होने की आवश्यकता नहीं होती है एवं यह तुरंत अपना कार्य करके शीघ्र परिणाम देती है।

बीमार व्यक्ति तो कभी भी बस्ती ले सकता है, लेकिन हर स्वस्थ व्यक्ति ने वर्षा ऋतु में 8 दिन का बस्ती का कोर्स जरूर लेना चाहिए। इस 8 दिन के कोर्स में निरूह एवं मात्रा इन दोनों बस्तियों का अंतर्भाव होता है क्योंकि अगर हम सिर्फ निरुह याने काढ़े की बस्ती देंगे तो यह शरीर में रुक्षता बढ़ाएगी, इसीलिए साथ में मात्रा याने तेल बस्ती देना भी जरूरी होता है।

बस्ती पंचकर्म का क्या उपयोग है ? Benefits of Basti in Hindi

स्वस्थ व्यक्ति ने हर साल वर्षा ऋतु में बस्ती पंचकर्म जरूर लेना चाहिए। इसके अलावा कई बीमारियां ऐसी है, जिनकी एकमात्र मुख्य चिकित्सा बस्ती है, जैसे - 
  1. कब्ज, 
  2. यूरिन से जुड़ी समस्याएं, 
  3. पुरुषों में शुक्राणुओं की समस्या, 
  4. महिलाओं में माहवारी से जुड़ी समस्याएं, 
  5. बदन दर्द , पेट फूलना, पेटदर्द, कमरदर्द,आदि वातविकार इत्यादि। 
कई बार एसिडिटी, सरदर्द आदि की वजह कॉन्स्टिपेशन यानी कब्ज होती है, जिसमें बस्ती लेने से व्यक्ति को राहत मिलती है। 

अगर हम किसी कारणवश दूसरे पंचकर्म नहीं कर पा रहे हैं, फिर भी हमें साल में एक बार बस्ती अवश्य लेनी चाहिए क्योंकि बस्ती को मुख्यतः वातशामक कहा गया है और आयुर्वेद में हर बीमारी की जड़ वात को बताया गया है। वात से ही कफ व पित्त जुड़े होते हैं। आयुर्वेद में कफ और पित्त को पंगु कहा गया है और वात उन्हें जहां ले जाता है वहा वह व्याधि उत्पन्न करते हैं, इसलिए अगर वात की चिकित्सा की गई और उसे सम अवस्था में लाया जाए, तो हमारी आधे से ज्यादा बीमारियां ठीक हो जाती है। 

बस्ती चिकित्सा का सही समय 

वर्षा ऋतु याने बरसात का शुरुआती समय बस्ती के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस में बस्ती लेने से बारिश में होने वाली बहुत सी बीमारियों से हम बच सकते हैं।

कैसे किया जाता है बस्तिकर्म ? Basti procedure in Hindi

  • बस्ती चिकित्सा देने से पूर्व रोगी की प्रकृति व योग्यता अयोग्यता का परीक्षण चिकित्सक द्वारा किया जाता है। 
  • उसके बाद उसे कौन सी बस्ती देनी है व उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए इसका निर्धारण किया जाता है। 
  • इसके पश्चात रोग व रोगी के अनुसार औषध योग का निर्माण किया जाता है व चिकित्सक या योग्य प्रशिक्षक द्वारा वाम पार्श्व स्थिति में पेशेंट को लिटा कर बस्ती दिया जाता है। 
  • अलग-अलग व्याधि के अनुसार बस्ती का प्रकार व मात्रा बदलती रहती है। 
  • 1 से 2 मिनट लिटाने के बाद निरुह बस्ती में अगर रोगी को मल त्याग करने की इच्छा हो तब मलत्याग करवाया जाता है।

बस्ती पंचकर्म के क्या फायदे हैं ? Health benefits of Basti Panchkarm kriya in Hindi

वैसे तो बस्ती के कई फायदे हैं लेकिन हम आपको कुछ मुख्य फायदों के बारे में बता रहे हैं। 
  1. कब्ज से मिले मुक्ति / Constipation : जिन व्यक्तियों को कब्ज / Constipation की समस्या है उनके लिए बस्ती रामबाण उपाय है। कहते हैं, " पेट सफा हर रोग दफा "। अगर सुबह उठकर पेट साफ ना हो तो पूरा दिन बेकार जाता है। पेट फूलना, गैस, सिर दर्द, भूख न लगना आदि शारीरिक तकलीफों, के अलावा मन न लगना चिड़चिड़ापन आदि समस्याऐं भी होती है। बस्ती के नियमित कोर्स से इन तकलीफों से निजात मिलती है।
  2. कमरदर्द में दे राहत / Backache : कमर दर्द, साइटिका में बस्ती से काफी राहत मिलती है। 
  3. महिलाओं की सच्ची सहेली / Female problems : महिलाओं के लिए बस्ती चिकित्सा एक सच्ची सहेली की तरह होती है। महिलाओं का पूरा दिन काम में जाता है ऐसे में उन्हें गर्दन से लेकर कमर तक कहीं ना कहीं दर्द होता ही रहता है, अर्थात उनमें वात दोष और उससे जुड़ी समस्याएं लगी रहती है। वात और बस्ती का आपस में गहरा रिश्ता होता है, इसलिए बस्ती चिकित्सा महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा मानी गई है। इसके अलावा महिलाओं में बार बार यूरिन इन्फेक्शन, सफेद पानी की समस्या हो तो बस्ती से काफी लाभ होता है। 
  4. दूर करे आर्थराइटिस / Arthritis : जिनको गाउटी अर्थराइटिस, पैरों में सूजन, एड़ी में दर्द घुटनों में दर्द हो उनके लिए बस्ती रामबाण इलाज है। 
  5. पाइल्स में भी है लाभकारी / Piles : पाइल्स के पेशंट्स में बस्ती चिकित्सा काफी कारगर होती है। 
  6. प्रेग्नेंसी में बस्ती के फायदे / Pregnancy : अगर बच्चे की प्लानिंग करने के पूर्व माता पिता दोनों बस्ती का कोर्स लेते हैं तो वह एक स्वस्थ संतान को जन्म देने में सफल रहते हैं। प्रेगनेंसी में बस्ती लेने से आपको कई समस्याओं से राहत मिलती है जैसे कमर दर्द, पेट दर्द, कब्ज, सिर दर्द आदि। इतना ही नहीं नॉर्मल डिलीवरी होने में भी सहायता होती है पर ध्यान रखें, यह चिकित्सा आप किसी प्रशिक्षित वैद्य की निगरानी में ही ले।
  7. त्वचा विकार करे दूर / Skin : त्वचा विकार खासकर psoriasis में वमन विरेचन के साथ बस्ती से अच्छा परिणाम मिलता है।
  8. बढ़ाती है शारीरिक सौंदर्य / Beauty : बस्ती चिकित्सा से चेहरे पर झुर्रियां पड़ना, बालों का झड़ना, बालों का सफेद होना लंबे समय तक रोका जा सकता है। बस्ती से शरीर का वर्ण सुधरता है। युवावस्था को काफी समय तक बरकरार रख सकते है। 
  9. शारीरिक बल व यौनशक्ति बढ़ाने में है विशेष कारगर / Sex Problems : बस्ती द्वारा कमजोर शरीर वाले अपना कायापलट कर सकते है, साथ ही जिन्हें यौन कमजोरी हो, शुक्राणुओं की समस्या हो वह भी दूर होती है। बृहन बस्ती द्वारा कृष व्यक्ति सुडौल शरीर पा सकता है, वही लेखन बस्ती द्वारा मोटापा कम होता है।
  10. अन्य लाभ / Others : नियमित बस्ती लेने से मस्तिष्क को मजबूती मिलती है। साथ ही स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।इसके अलावा शरीर में खून बढ़ाना, शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाना,  हड्डियों को मजबूती देना, वजन बढ़ाना या कम करना आदि के लिए कुछ विशेष बस्ती भी बनाए गए हैं जो चिकित्सक की सहायता से लेना चाहिए।
  11. सम्पूर्ण आरोग्य प्राप्ति / Rejuvenation : बस्ती यह आयुर्वेद की एक ऐसी चिकित्सा है जो हमे पूर्ण आरोग्य प्रदान करती है और हमारे शरीर का सोना करने की क्षमता रखती है। सौ बीमारियों का एक इलाज ऐसा अगर बस्ती के बारे में कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

बस्ती पंचकर्म क्यों कराना जरुरी होता हैं ?

जिस तरह हम हमारे गाड़ी की नियमित सर्विसिंग कराते हैं, नियमित सर्विसिंग ना कराएं तो गाड़ी तो चलेगी पर उसका एवरेज जरूर कम होगा और उसमें कुछ न कुछ प्रोब्लेम्स आते रहेंगे। इसी तरह हमारे शरीर रूपी गाड़ी को चलाने के लिए, उसका एवरेज बढ़ाने के लिए हमें शरीर की नियमित पंचकर्म रूपी सर्विसिंग याने शोधन ( सफाई ) कराना चाहिए। ध्यान रहे, पंचकर्म द्वारा शरीर शोधन करने के पश्चात रसायन चिकित्सा अवश्य ले, जिससे आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी साथ ही आपका बल, वर्ण, तेज, स्वास्थ्य लम्बे समय तक बरकरार रहेगा।

इस तरह अगर आप जोशीले, फुर्तीले याने लंबे समय तक चुस्त दुरुस्त, एवरग्रीन और स्वस्थ रहना चाहते हो तो आपको आयुर्वेद में प्रशिक्षित वैद्य द्वारा हर साल पंचकर्म और खासकर बस्ती का कोर्स जरुर लेना चाहिए।
यह लेख 'आयुर्वेद चिकित्सक' द्वारा सामान्य जन के जानकारी हेतु स्थूल स्वरूप में लिखा गया है, अत: इसमे कई मुद्दों का सूक्ष्म विवेचन इरादतन टाला गया है, ताक़ि सामान्य लोगों को यह लेख समझने में आसानी हो।

हम यहाँ पर विशेष धन्यवाद देना चाहेंगे डॉ भावना त्रिवेदी और डॉ विशाल अग्रवाल जी का जिन्होंने यह लेख लिखने में विशेष सहयोग दिया हैं और सरल हिंदी भाषा में पाठकों तक यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचाना संभव किया हैं।

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भारत में हर साल लाखों लोग Food Poisoning के शिकार होते हैं। Fast food के बढ़ते चलन और हर शहर में खुले चौपाटी जैसी जगह जहा खुलें में चटपटे व्यंजन बेचे जाते हैं के कारण लोगों को पेट से जुडी समस्या बढ़ने लगी हैं। स्वच्छता के अभाव में Food Poisoning का खतरा बढ़ जाता हैं। 

गर्मी के दिनों में डायरिया, डिहाइड्रेशन, उलटी, पेट दर्द, गैस या फिर अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स काफी बढ़ जाती है।  विशेष रूप से बाहर का खाना खाने से ऐसी समस्या ज्यादा होती है। कई बार जब आपका काम आपको यात्राओं के लिए मजबूर करता है तो आपको ना चाहकर भी बाहर का भोजन करना पड़ता है। रिसर्च से पता चला है कि 50 से 70 फ़ीसदी यात्री अक्सर Food Poisoning के शिकार हो जाते हैं। 

पढ़े - पानी में हल्दी मिलाकर पिने के आयुर्वेदिक फायदे 

कुछ सावधानी अपनाये तो बाहर का भोजन करने के बावजूद आप इस समस्या से खुद को काफी हद तक बचा सकते हैं। Food Poisoning से बचने के लिए क्या एहतियात बरतने चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :
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फूड पॉइजनिंग से बचने के उपाय

Food Poisoning se bachne ke 6 upay

  1. बर्फ ना डलवाए : अगर आपको ड्रिंक या फलों का रस पी रहे हैं तो उसमें पर डलवाने से बचे। यह अक्सर प्रदूषित पानी की बनी होती है या फिर इंडस्ट्रियल वर्क होती है। बेहतर होगा कि इसके बजाय सादा पानी की ठंडी की हुई बोतल ही ले या फिर नारियल पानी अथवा कैन वाला डिब्बाबंद जूस ऑर्डर करें। दूषित पानी से बने बर्फ से आपके पेट में संक्रमण हो सकता हैं। 
  2. ताजा और गर्म भोजन ले : भोजन के लिए कोई ऐसा ढाबा या रेस्टोरेंट चुने जहां ताजा और गर्म भोजन परोसा जा रहा है। पनीर जैसी सब्जियों से बचें। संभव हो तो कुछ अतिरिक्त पैसे देकर डिस्पोजेबल प्लेट में खाना परोसने की मांग करें। इन जगहों पर बर्तनों की सफाई में अक्सर लापरवाही बरती जाती है। खाना हमेशा ताजा और गर्म ही ऑर्डर करें। गर्म खाने में बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम होती है। 
  3. सॉस से दूर रहे : रेस्टोरेंट में टेबल पर रखी टोमेटो सॉस की बोतल को खुद से दूर ही रखें। गर्मी के दिनों में टेंप्रेचर पर रखी चीजें अक्सर जल्दी खराब हो जाती है और नुकसान देती है। बेहतर होगा इस सॉस को ना खाएं। 
  4. ज्यादा सब्जी वाले आइटम नहीं लेना चाहिए : ऐसे आइटम आर्डर करने से बचे जिनमें तरह-तरह की वेजिटेबल्स का प्रयोग किया गया है। अक्सर इन होटल में बची खुची सब्जियों को मिलाकर तैयार किया जाता है। रेस्टोरेंट वाले एक स्ट्रेटेजी के तहत ऐसे आइटम मेनू में रखते हैं ताकि ढेर सारी सब्जियों को बर्बाद होने से रोक सके। मिक्स वेजिटेबल में कोई ख़राब सब्जी मिक्स होने पर Food Poisoning हो सकता हैं। 
  5. पॉपुलर आइटम ही मंगाए : रेस्टोरेंट मैं आपको वही खाना ऑर्डर करना चाहिए जो खूब बिकता हो। यह आपको हमेशा ताजा ही मिलेगा जबकि कम चलने वाले आइटम होटल वाले रेफ्रिजरेटर में रखते हैं ताकि आर्डर मिलने पर उसे बनाकर पेश कर दें। इन की गुणवत्ता अक्सर कम हो जाती है। 
  6. सुप बेहतर विकल्प है : अगर आपको हल्की-फुल्की भूख लगी है यह किसी रेस्टोरेंट का खाना पसंद नहीं आ रहा है तो बेहतर विकल्प है सुप ऑर्डर करना। इसे उच्च तापमान पर पकाया जाता है इसके लिए इसे खराब होने के जोख़िम बहुत कम रहता है। 
पढ़े - बच्चों की रोगप्रतिकार शक्ति बढ़ाने के उपाय
इस तरह ऊपर दी हुई सावधानी बरत कर आप बाहर का खाना खाने के बावजूद भी Food Poisoning की समस्या से बच सकते हैं। 
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सर्दियों में हमारी Skin काफी Dry हो जाती है और ऐसे में अगर ध्यान न दिया जाये तो त्वचा फटने लगती हैं। ऐसे में त्वचा को मुलायम रखना बेहद जरुरी हो जाता हैं। अक्सर लोग सर्दियों में अपने चेहरे की त्वचा की तरफ तो ध्यान देते है पर बाकि शरीर की त्वचा का ख्याल रखना भूल जाते हैं।  

सर्दियों में महिलाओं को अधिकतर एक ही परेशानी से गुजरना पड़ता है। ठंड की शुरुआत होती महिलाओं में एड़ियां फटने की शिकायत शुरू हो जाती है। कई बार किसी कार्यक्रम या पार्टी में फटी एड़ियों के कारण हमें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती हैं। डायबिटीज के रोगियों को तो अपने पैरों का खास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि पैर में एक छोटी सी जखम भी बड़ी मुश्किल कर सकती हैं। 

कुछ घरेलू उपाय अपनाकर आप सर्दियों में अपनी एड़ियों को फटने से रोक सकते हैं। आइए जानें कुछ घरेलू आयुर्वेदिक और आसान तरीके : 


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सर्दियों में एड़ियों को फटने से बचाने के घरेलु आयुर्वेदिक उपाय  

Fati Ediyo ke Gharelu Ayurvedic Upay / Nuskhe

  1. एक कप सरसों / नारियल या जैतून का तेल, एक मोमबत्ती, एक छोटा चम्मच फिटकरी, एक बड़ा चम्मच वैसलीन, दो - तीन चम्मच एसेंशियल ऑयल ले। सरसो के तेल में मोमबत्ती डालकर पिघला ले। इसके बाद वैसलीन डालकर इसमें कुछ देर तक मिलाएं। चाहे तो मिक्सर में भी डाल कर मिला सकते हैं। इसके बाद इसमें फिटकरी डालें। यह क्रीम जैसा बन जाएगा। इसे अब किसी डिब्बे में भरकर रख लें। इसे एक से 2 महीने तक इस्तेमाल कर सकते हैं। रात में इसे लगाने से पहले पैर को धोकर मृत / dead स्किन निकालने के बाद क्रीम लगाकर सॉक्स पहन ले। 
  2. एक मोमबत्ती, एक चम्मच घी, 4 चम्मच कलौंजी का तेल या नारियल तेल. दो विटामिन ई के कैप्सूल ले। एक बाउल में मोम को पिघला ले। पिघलने के बाद इसमें घी, कलौंजी का तेल और कैप्सूल डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद एक डिब्बे में रख लें। क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले पैरों को साफ कर ले और मृत त्वचा को निकाल दे। इसके बाद क्रीम लगाएं। 
  3. एक केला, एक चम्मच नारियल का तेल लेकर अच्छी तरह से मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। इसे 10 से 15 मिनट तक पैरों में लगाकर रखे और सूखने पर गुनगुने गर्म पानी से साफ करे।  हफ्ते में 2 -3 बार लगाएं। फटी एड़ियों में राहत मिलेगी। 
  4. शहद  इस्तेमाल से त्वचा सॉफ्ट बनती हैं और त्वचा का रूखापन कम होता हैं। एक बाल्टी गतं पानी में आधा कप शहद मिक्स करे। अब इसमें अपनी एड़ियों को 20  भिगोकर रखे। एड़ियां फटना बंद हो जायेगा। 
  5. एक चम्मच वैसलीन में 3 छोटी चम्मच नींबू का रस लेकर अच्छी तरह से मिलाएं और क्रीम को एक डिब्बे में रख लें। इसे लगाने से पहले पैरों को हलके गर्म पानी में डालकर साफ कर ले। 
इस तरह आप आसानी से ऊपर दिए हुए घरेलु आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर अपने एड़ियों को फटने से बचा सकते हैं।
अगर आपको यह सर्दियों में एड़ियों को फटने से बचाने के घरेलु आयुर्वेदिक उपाय की जानकारी उपयोगी लगती है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे ! 

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