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बदलते मौसम के साथ साथ शरीर में भी काफी परिवर्तन आते हैं। मौसम का मिजाज जब गर्म हो उठता है तब सूरज की गर्मी के कारण त्वचा झुलस उठती है एवं शरीर में पानी की कमी होकर त्वचा का रूखापन, कालापन, जी घबराना, भूख में कमी, प्यास की अधिकता एवं पाचन संबंधी अनेक दोष पैदा होने लगते हैं। 

गर्मी के मौसम में हमें सेहत का ध्यान काफी रखना पड़ता है। जरा सी लापरवाही भी कई बीमारियों को  आमंत्रित करती है। ऐसे में मौसमी फल सब्जियां ही ऐसे अमूल्य कुदरती सौंदर्य प्रसाधन है जो हमें सिर्फ सौंदर्य ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य भी प्रदान करती है। 

गर्मी में मिलने वाले फलों की विशेषता यह होती है कि इन में करीब 80 से 90% तक पानी होता है साथ ही विटामिन, फाइबर, मिनरल्स एवं एंटीऑक्सिडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन फलों में फैट की मात्रा बहुत कम होती है। मौसम के अनुसार ही यह शरीर को स्वस्थता प्रदान करते हैं।

तो आईए जानते हैं गर्म मौसम में ठंडे-ठंडे फलों से स्वास्थ्य एवं सौंदर्य बनाए रखने के कुछ गुणकारी नुस्खे। अपने सौंदर्य को फलों से निखारिये और बदले में पाइए फूलों सा सौंदर्य........


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गर्मी के दिनों में त्वचा की देखभाल के लिए कौन से फल खाने चाहिए ?
Fruits to eat in Summer for Skin care in Hindi 

  1. गन्ना : गर्मियों में गन्ना बेजोड़ है जो आपकी भूख प्यास मिटाकर आपकी सुस्त काया को स्फूर्ति प्रदान करता है। इस के रस के नियमित सेवन से निर्जीव त्वचा दमकने लगती है। गन्ने खाने से दांत मजबूत होते है। अगर आप गन्ने का रस बाजार में पीते है तो पीना बर्फ डालें पीना चाहिए। 
  2. संतरा : स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि सौंदर्य निखारने के लिए भी संतरा उत्तम है। सन्तरे के जूस में विटामिन C, फाइबर्स और मिनरल्स काफी मात्रा में पाए जाते है। यदि आपके चेहरे पर कील, दाग धब्बे है या धूप से त्वचा काली पड़ गई हो तो संतरे के छिलकों को केवल 2 मिनट गालों पर रगड़िए और 10 मिनट बाद धो डालिए। त्वचा में नई जान आएगी।
  3. ककड़ी / खीरा : ककड़ी में विटामिन ए, बी12, सी, डी, पोटैशियम, फास्फोरस आयरन आदि पाए जाते हैं। खीरे में 96 प्रतिशत पानी पाया जाता है। नियमित रूप से ककड़ी का जूस पीने से शरीर में ताकत आती है, साथ ही कब्ज से भी मुक्ति मिलती है। धूप में अगर आपका चेहरा काला पड़ गया हो तो चेहरे की त्वचा पर ककड़ी का रस मले। ककड़ी के टुकड़ों को आंखों पर कुछ देर रखने से आंखों को ठंडक मिलती है। लू में भी ककड़ी का रस फायदा करता है। ककड़ी के रस में नींबू रस एवं मसूर की दाल पीसकर उबटन लगाने से चेहरा चमक उठता है।
  4. नींबू : नींबू के गुण जितने गिनाए कम है। विटामिन C से भरपूर निम्बू के बारें मे एक वैज्ञानिक ने यहां तक कहां है कि आश्चर्य है कि नींबू सोने के भाव क्यों नहीं बिकता ?  प्रतिदिन सुबह एक गिलास गुनगुने पानी मे आधा नींबूरस डालकर पीने से बदन की अनावश्यक चर्बी घट कर काया छरहरी बनी रहती है। एवं दिनभर ताजगी बनी रहती है। त्वचा के सौंदर्य के लिए नींबू के रस का अधिक इस्तेमाल करें।
  5. अनार : नारी का सर्वाधिक बहुमूल्य प्रसाधन है अनार। अनार में प्रचुर मात्रा में विटामिन, ओमेगा फैटी एसिड्स,  एंटीऑक्सिडेंट्स, फोलिक एसिड, आयरन आदि तत्व पाए जाते हैं। प्रतिदिन अनार के सेवन से शरीर का रक्त के संचालन सुचारु रुप से होकर आयरन की कमी दूर होती है। चिलचिलाती धूप में अनार खाना या उसका जूस का सेवन करना शरीर को फायदेमंद होता है। अनार में एंटीएजिंग गुण भी पाया जाता है। अनार के छिलके सुखाकर कूट कर रख कर इस में नींबू और शहद मिलाकर सप्ताह में दो बार चेहरे पर पैक लगाएं। त्वचा चिकनी एवं कांतिवान हो उठती है। 
  6. खरबूजा : मीठा-मीठा खरबूजा भला किसे नहीं भाता ? पर आप यह नहीं जानतें कि इस के गुदे को बालों की जड़ में लगाने से गर्मियों में बाल शुष्क और बेजान नहीं होते बल्कि हमेशा खिले-खिले रहते हैं। साथ ही सिर में ठंडक भी बनी रहती है। खरबूजे का मज़ा आप खाने के साथ ले सकते या खाने के कुछ देर बाद भी इसे खा सकते हैं। विटामिन A, B, C, पोटैशियम, सोडियम, मैग्नेशियम से युक्त खरबूजा शरीर की थकान दूर करता है। इसमें मौजूद फोलिक एसिड की वजह से गर्भवती महिला व बच्चा स्वस्थ रहते हैं। सिर्फ एक बात का ख्याल रखना है कि खरबूजा खाकर तुरंत पानी न पिए।
  7. तरबूज़ : तरबूज तो गर्मी का खास फल है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इसमें विटामिन A, C, B 1,  B 2, B 3 , B 5, B 6 , electrolytes के साथ पानी की मात्रा काफी अधिक होती हैं। हर रोज तरबूज खाने से या तरबूज का जूस पीने से शरीर को चुस्ती और स्फूर्ति मिलती है। तरबूज को ज्यादातर दोपहर के वक्त खाएं क्योंकि इस वक्त शरीर में पानी की कमी रहती है। अतः तरबूज उस कमी को पूरा करता है साथ ही शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है। यह हमारे पाचन प्रक्रिया के साथ किडनी के लिए भी एक अच्छा फल है और शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदत करता है। 
  8. बेल : गर्मियों का सर्वश्रेष्ट फल है बेल। पके हुए बेल का शरबत पीने से पेट में दर्द और मरोड़, गैस आदि गर्मी के सभी विकार दूर होते हैं। बेल शरीर की गर्मी कम करता है। साथ ही बेल का गूदा चेहरे के लिए उत्तम मास्क है। 
  9. आम : आम को फलों का राजा कहा जाता है। आम का इंतजार लोगों को साल भर से होता है। गर्मी का मौसम आते ही सबसे पहले ख्याल आम का ही आता है। आम न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि आम का रस पीने से शरीर में ताकत और स्फूर्ति मिलती है। दूध में आम मिलाकर उसका शेक भी बनाया जाता है, लेकिन आम की तासीर गर्म होने से इसका सेवन मर्यादित मात्रा में ही करना चाहिए। आम का सेवन कैंसर के खतरे को कम करने में मदत करता है।
  10. आम का पना : गर्मियों में आम का पना जरूर पीना चाहिए। आम का पना लू से बचाता है। यह कच्चे आम से बनता है। कच्चे आम की तासीर ठंडी होती है। हर रोज आम का पन्ना पीने से पाचन सही रहता है एवं कब्ज एवम पेट की समस्याएं भी दूर होती है।
  11. स्ट्राबेरी : विटामिन सी से भरपूर स्ट्रॉबेरी आपकी शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ाता है। स्ट्रॉबेरी में एंटीआक्सीडेंट और कैंसर से लड़ने वाले तत्व होते हैं। एक स्ट्रॉबेरी का रस और थोड़ी मलाई की बुंदे मिलाकर होठों पर लगाने से होठों में प्राकृतिक लाली उभर आती है।
  12. पपीता : पपीते में बीटा कैरोटीन, विटामिन, फाइबर, पोटेशियम आदी होते हैं। साथ ही यह पाचन संस्था, कब्ज और वजन घटाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। आंखों की रोशनी के लिए, स्वस्थ दमकती त्वचा के लिए पपीता काफी फायदेमंद माना जाता है। चेहरे पर झुर्रियां हो तो पपीते का गुदा मले और पूरी तरह सुखने पर धो लें। कुछ ही दिनों में चेहरे में कसाव और अनोखी ताजगी महसूस होगी।
  13. अनानस : अनानस शरीर को ठंडा देता है साथी प्रोटीन और वसा का पाचन करने में मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज से निजात दिलाता है साथ ही शरीर की जलन कम करता है। 
  14. गुलकन्द : गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकन्द में विटामिन C, E, व  B काफी मात्रा में पाए जाते है। गुलकंद के प्रयोग से शरीर में ठंडक मिलती है। यह में डीहाइड्रेशन से बचाता है। साथ ही त्वचा को तरोताजा भी रखता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा प्रचुर होती है जो शरीर की प्रतिकारक क्षमता बढ़ाते हैं। गुलकंद माउथ फ्रेशनर का काम भी करता है।
  15. नारियल पानी : गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीते रहना चाहिए इससे शरीर में पानी की कमी तो पूरी होती है साथ ही शरीर में जरूरी लवणों की मात्रा भी संतुलित रहती है। शरीर में पानी की कमी होने पर, दस्त लगने पर, उल्टी होने पर नारियल पानी पीने से काफी राहत मिलती है।

इस प्रकार इन फलों को अपने नियमित दिनचर्या में शामिल करने से आप गर्मी में भी कूल-कूल महसूस करने लगेंगे। गर्मियों में चाय कॉफी एवं तली-भुनी चीजों का प्रयोग ना करें, बल्कि फलों के जूस, छाछ, ठंडाई, नींबू पानी, सब्जी के सुप आदि पीने से शरीर के आवश्यक तत्व का सामंजस्य बना रहता है और शरीर स्वस्थ बना रहता है। याद रहे, स्वास्थ्य में ही सौंदर्य समाया है।

ऊपर दिए हुए सभी फलों का इस्तेमाल करते समय हमें कुछ आहार संबंधी नियमों का पालन करना जरुरी होता हैं। Click करे और अवश्य पढ़े - फल खाने के विशेष नियम 

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लगभग हर महिला का डॉक्टर से यह सवाल जरूर होता है की Pregnancy में हर trimester में कैसी Diet लेना चाहिए। प्रेगनेंसी के हर 3 महीने में गर्भवती महिला ने अपने गर्भ में पल रहे शिशु की जरुरत के अनुसार डाइट लेना जरुरी होता हैं।

प्रेगनेंसी के आखरी तीन महीनों में गर्भाशय का आकार बढ़ने से पेट के ऊपर दबाव आ जाता है और इस वजह से महिला अधिक आहार नहीं ले पाती हैं। इसके विपरीत गर्भ का विकास हो जाने से उसे अधिक पोषक तत्व और ऊर्जा की जरुरत होती हैं। 

प्रेगनेंसी के आखरी तीन महीनों में कैसा आहार लेना चाहिए और क्या सावधानी बरतनी चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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प्रेगनेंसी के आखरी तीन महीनो में महिला ने कैसा आहार लेना चाहिए ? Pregnancy third trimester diet tips in Hindi

गर्भावस्था के आखरी तीन महीनों में महिला ने आहार संबंधी निचे दी हुई बातों का ख्याल रखना चाहिए :
  • अल्प आहार / Small Diet : प्रेगनेंसी के third trimester में गर्भ का विकास होने से पेट के ऊपर दबाव आता है और पेट में आमाशय / Stomach के लिए कम जगह रहती हैं। इस वजह से थोड़ा सा खाने पर भी पेट भरा हुआ लगता है और महिला अधिक आहार नहीं खा पाती हैं। गर्भवती महिला को और गर्भ को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा और पोषण मिले इसलिए महिला ने हर 2 - 3 घंटे पर अल्पाहार करना चाहिए। थोड़ा-थोड़ा आहार खाने से पेट पर दबाव भी नहीं आता और माँ - गर्भ को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिलता हैं। 
  • पानी / Water : प्रेगनेंसी के third trimester में गर्भाशय का दबाव पेट के निचे हिस्से पर आने से महिला को बारबार पेशाब लगती है और साथ में पेट पर दबाव आने से महिला अधिक पानी नहीं पि पाती है। शरीर में पानी की मात्रा पर्याप्त बनाये रखने के लिए महिला ने थोड़-थोड़ा पानी पिटे रहना चाहिए और दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए। 
  • कैल्शियम / Calcium : प्रेगनेंसी के third trimester में शिशु के हड्डियों का विकास लगभग हो जाता है और उसमे कैल्शियम संचय होना जारी रहता हैं। ऐसे समय गर्भवती महिला और शिशु को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में होने के लिए दूध, दही, पनीर, बादाम, अंजीर और कैल्शियम की गोली का सेवन जरुरी होता हैं। प्रेग्नेंट महिला को इस समय 1000 से 1300 मिलीग्राम कैल्शियम रोजाना मिलना जरुरी होता हैं।         
  • फोलिक एसिड / Folic Acid : गर्भवती महिला हिमोग्लोबिन 12 ग्राम से ऊपर होना चाहिए। अगर रक्त में हिमोग्लोबिन की कमी है तो डॉक्टर से मिलकर हिमोग्लोबिन आयरन और फोलिक एसिड की दवा शुरू करना चाहिए। आयरन का पेट में अच्छे से अवशोषण होने के लिए साथ में विटामिन सी युक्त आहार भी साथ में लेना चाहिए। शरीर में खून की कमी दूर करने के लिए कौन सा आहार खाना चाहिए यह जानने के लिए यह लेख पढ़े – खून की कमी दूर करने के लिए कौन सा आहार खाना चाहिए ?         
  • फाइबर / Fiber : प्रेगनेंसी के तीसरे तिमाही में गर्भाशय के दबाव से महिलाओं को अक्सर कब्ज और बवासीर की शिकायत हो जाती है जो की प्रेगनेंसी में एक गंभीर समस्या हैं। कब्ज से छुटकारा पाने के लिए इस दौरान दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी और अधिक फाइबर युक्त अनाज खाना चाहिए। साबुत अनाज, दलिया, फल, हरी पत्तेदार सब्जी, चुकंदर, गाजर, ककड़ी, टमाटर का सेवन करना चाहिए।  
  • प्रोटीन / Protein : प्रेगनेंसी के अंतिम तीन महीनो में शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता हैं। स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग के लिए प्रोटीन बेहद जरुरी होता हैं। इसलिए प्रेगनेंसी के अंतिम तीन महीनो में गर्भवती महिला ने अधिक प्रोटीन युक्त आहार जैसे दालें, सोयाबीन, सुकमेवा, दूध, दही,पनीर को अपने आहार में समावेश करना चाहिए। प्रोटीन के सभी आहार स्त्रोत की जानकारी के लिए यह पढ़े - प्रोटीन के आहार स्त्रोत       

प्रेगनेंसी के तीसरे तिमाही में क्या न खाये ?
Foods to avoid in Third Trimester of Pregnanc

प्रेगनेंसी के अंतिम तीन महीनो में निचे दी हुई चीजों का सेवन न करे :
  1. शराब, धूम्रपान या तम्बाखू 
  2. चाय या कॉफ़ी 
  3. तीखा-मसालेदार 
  4. हॉटेल का खाना 
  5. बाजार में मिलनेवाला तैयार खाना 
  6. फ़ास्ट फ़ूड 
  7. कैफीन युक्त आहार 
Pregnancy के Third trimester में आप सही diet लेकर आप स्वयं को और अपने गर्भ में पल रहे शिशु स्वस्थ रखने के साथ सुरक्षित delivery की निश्चिती कर सकते हैं। आप इस दौरान अपने डॉक्टर द्वारा दी हुई विटामिन सप्लीमेंट्स भी जारी रख सकते हैं।    

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काजू अपने स्वाद के कारण मेवों की दुनियां का लोकप्रिय मेवा है। सूखे मेवे में काजू अपना एक अलग महत्वपूर्ण स्थान रखता है। काजू को हम मेवों का राजा भी कह सकते है। अपने स्वादिष्ट गुणों के साथ ही काजू अनेक रोगों पर काबू पाने व शरीर को स्वस्थ रखने की क्षमता रखता है।

काजू की दो किस्मे होती है एक श्वेत और एक श्याम। यह स्वाद में कसैला होता है। यह वायु, कफ, गुल्म, उदररोग, ज्वर, कृमि, व्रण, अग्निमांद्य, कोढ़, अर्श और अफरा को मिटाता है। यह वातशामक, भूख को बढ़ाने वाला तथा हृदय को हितकारी होता है। हृदय की दुर्बलता तथा स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए काजू लाभकर होता है। 

काजू में मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम, कॉपर, जिंक, आयरन, सेलेनियम जैसे जरूरी तत्व होते हैं। काजू में प्रचुर मात्रा में विटामिन ई होता है जिससे यह एंटी एजिंग का भी काम करता है। काजू का तेल हल्के पीले रंग का होता है तथा शुद्ध घी के बराबर पुष्टिकर होता है।

काजू के गुण और काजू से होनेवाले स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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काजू खाने के फायदे और नुकसान 

काजू खाने के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Cashew nuts in Hindi

शीतकाल में काजू की गिरी कच्ची, भुनी हुई, तली हुई, नमक मिर्च लगी हुई आदि अनेको प्रकार से खाई जाती है,  जो काफी स्वादिष्ट एवं बलवर्धक होती है। साथ ही मिठाईयां नमकीन और स्नैक्स में भी काजू का इस्तेमाल होता है। आजकल काजू का प्रयोग कई सब्जियों में ग्रेवी बनाने के लिए भी होता है इससे सब्जी काफी स्वादिष्ट बनती है। शाकाहारी व्यक्तियों के लिए काजू  प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत होता है।

काजू खाने से होनेवाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • प्रोटीन / Protein : काजू का सेवन नाड़ी मंडल तथा पाचन प्रणाली की सक्रियता बढ़ाता है, साथ ही खून की कमी एवं कमजोरी पर नियंत्रण रखने में भी फायदेमंद होता। इसकी विशेषता यह है कि अत्यधिक प्रोटीन युक्त आहार होने के बावजूद इसके सेवन से शरीर में यूरिक एसिड नहीं बनता है, जो कि अन्य पदार्थों के अधिक सेवन से शरीर में बनता है वह शरीर को नुकसान करता है। काजू में मौजूद प्रोटीन का पाचन भी शरीर में जल्दी होता है।
  • मस्तिष्क की दुर्बलता करे : दुर्बल बालक या वयस्क अत्याधिक पढ़ने या दिमागी काम करने से थक जाते हैं या उन्हें सिर दर्द होने लगता है उनके लिए काजू का सेवन उपयोगी है। उम्र के अनुसार 10 से 25 ग्राम तक काजू की गिरी सुबह खाली पेट खा ले। ऊपर से थोड़ा सा शहद चाटले। इससे मस्तिष्क के नाड़ियों में शक्ति प्राप्त होगी। सर्दियों के मौसम में ऐसा लगातार 3 महीने तक करने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाएगी।
  • कमजोरी करे दूर : रोजाना कुछ मात्रा में काजू और किशमिश एक साथ खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
  • कब्ज की परेशानी से राहत : काजू खाने से शरीर का  मेटाबोलिज्म सही रहता है। प्रातकाल बिना कुछ खाए 10 काजू और 5 किशमिश खाने से कब की समस्या दूर होगी। पेट में गैस या अफारा हो तो काजू को पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें और इसमें नमक मिलाकर खाने से फायदा होगा।
  • काले मस्सों का इलाज : शरीर की त्वचा पर छोटे छोटे काले मस्से हो गए हो तो काजू के छिलकों का तेल लगाइए, इससे मस्से साफ हो जाएंगे।
  • एडियों की दरारे भरें : अगर एड़ियां फट गई हो तो दरारों वाली स्थान पर काजू का तेल लगाने से आराम मिलता है। 
  • मिले हड्डियों को मजबूती : हड्डियों को कैल्शियम के साथ मैग्नीशियम भी जरूरी होता है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 350 से 700 मिलीग्राम मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। काजू में प्रोटीन ओर मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होने से इसके प्रतिदिन सेवन से हड्डियों को अंदर से मजबूती मिलती है।
क्लिक करे हुए अवश्य पढ़े - मूंगफली खाने के फायदे और नुकसान 
  • डायबिटीज पर नियंत्रण : रिसर्च से पता चला है कि 2 से 4 काजू के नियमित सेवन से डायबिटीज का खतरा दृर रहता है और अगर आपको डायबिटीज  हो तो इसे बढ़ने से रोकता है। पर अधिक मात्रा में काजू खाने से बचे। 
  • हृदय रखे स्वस्थ : काजू में वसा की मात्रा अन्य में मेवों की तुलना में काफी कम होती है साथ ही इसमें मौजूद ओमेगा फैटी एसिड एवम ओलिक एसिड हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। एक्सीडेंट्स की वजह से और कम कोलेस्ट्रॉल के कारण यह दिल की बीमारियों से दूर रखता है। इसमें सोडियम की मात्रा कम होती है तथा पोटेशियम एवं मैग्नीशियम अधिक मात्रा में होता है इसलिए यह रक्तचाप पर नियंत्रण रखता है।
  • मजबूत मसूढ़े मजबूत दाँत : काजू के सेवन से दांत और मसूड़ों में मजबूती आती है साथ ही दातों को चमकदार बनाने में मददगार साबित होता है।
  • पेट के कीड़ों का इलाज : बच्चों के पेट में कीड़े हो तो रोजाना दूध के साथ काजू खाने से कीड़े निकल जाते हैं।
  • पूरी होती है खून की कमी : काजू में आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है जो कि खून बढ़ाने में मददगार होता है। इसके सेवन से आयरन की कमी पूरी होती है।
  • कैंसर से रखे दूर : काजू में मौजूद proanthocynidins नामक flavonols कैंसर से लड़ने की क्षमता रखता है। यह घटक ट्यूमर कोशिकाओं से लड़ने में शरीर की मदद करता है तथा पेट के कैंसर से भी दूर रखता है। साथ ही कैंसर में विटामिन E और सेलेनियम जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद रहते हैं जो कैंसर को पनपने से रोकते हैं। 
  • पित्त की पथरी से बचाव : रिसर्च से पता चला है कि नियमित रुप से काजू के सेवन से पित्ते की पथरी में करीब 25% तक बचाव होता है।
  • बढ़ाए बालों की मजबूती : काजू में कॉपर मौजूद होता है इससे यह बालों को घना, लंबा और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से बाल झड़ने की समस्या भी दूर होती है।
  • त्वचा के लिए फायदेमंद : काजू में प्रोटीन मौजूद होने से यह त्वचा के लिए लाभ करता है। काजू यह तैलीय व शुष्क दोनों त्वचा को फायदा पहुंचाता है। 
  1. अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो रात को कुछ काजू भिगोकर सुबह उसमें मुल्तानी मिट्टी और थोड़ा नींबू या दही और शहद मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा दमकने लगता है। 
  2. काजू का तेल शरीर पर मलने से त्वचा मुलायम होती है।
  3. काजू का तेल सफेद दाग पर लगाने से वह धीरे धीरे कम होने लगते हैं।
  4. कुष्ठ रोग से उत्पन्न त्वचा की शुन्यता काजू के तेल की मालिश से धीरे-धीरे दूर होती है।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए लाभ : काजू में भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं इसलिए यह गर्भवती मां एवं बच्चे दोनों के लिए लाभ करता है। इस तरह काजू के नियमित सेवन से शरीर में शक्ती, स्फुर्ती और उत्साह विकसित होता है।

काजू के नुकसान क्या हैं ? Side effects of Cashew nut in Hindi 

जरूरत से ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज का सेवन करने से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  1. अत्यधिक मात्रा में काजू खाने से पेट खराब हो सकता है, जिसे दस्त लग रहे हो ऐसे व्यक्ति को काजू का सेवन नहीं करना चाहिए।
  2. काजू गर्म होता है अतः अंगूर ( द्राक्ष / किशमिश ) शर्करा या शहद आदि के साथ इसका सेवन करना चाहिए। 
  3. अति मात्रा में काजू का सेवन करनेसे रक्तस्त्राव होने का खतरा होता है। 
  4. अधिक मात्रा में काजू के सेवन से वजन भी बढ़ सकता है। 
  5. वैसे तो काजू खाने से BP कंट्रोल में रहता है लेकिन कई लोग बाजार से नमकीन वाले काजू खरीद कर वह खाते हैं जिससे सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है और उसका परिणाम आपका BP बढ़ने में भी हो सकता है।
क्लिक करे और अवश्य पढ़े - बादाम खाने के फायदे और नुकसान
इस तरह सीमित मात्रा में काजू का नियमित प्रयोग कर आप काजू के अंदर मौजूद गुणों का खजाना पा सकते हैं और साथ ही कई बीमारियों से शरीर की रक्षा भी कर सकते हैं।
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गर्भावस्था / Pregnancy में महिला ने अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण होता हैं। प्रेगनेंसी में गर्भ में पल रहे शिशु की जरूरतों के अनुसार महिला ने पर्याप्त पोषक आहार लेना चाहिए। प्रेगनेंसी में हर तिमाही में अलग-अलग पोषक तत्वों की जरुरत कम-ज्यादा होती हैं। प्रेगनेंसी के पहले 3 महीनो में महिला ने कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी हमने पहले प्रकाशित की हैं। 

आज इस लेख में हम महिला ने प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यानि चौथे महीने से लेकर छठे महीने तक अपने आहार में क्या बदलाव करना चाहिए इसकी जानकारी दे रहे हैं। दुसरे तिमाहीं में महिला का वजन प्रेगनेंसी में 3 से 4 Kg तक बढ़ना चाहिए। इस दौरान आपके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास तेजी से होता हैं। 

अवश्य पढ़े - प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में कैसा आहार लेना चाहिए ?

प्रेगनेंसी में 4 थे से 6 वे महीने (2nd Trimester) में कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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प्रेगनेंसी में 4 थे से 6 वे महीने (2nd Trimester) में कैसा आहार लेना चाहिए ? Pregnancy 2nd trimester diet tips in Hindi


प्रेगनेंसी के दूसरे तिमाही में कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

  • उर्जा / Energy : गर्भावस्था में महिला को सामान्य से ज्यादा calories की आवश्यकता होती है। इस दौरान महिला को उपवास बिलकुल नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिला ने अधिक उर्जा देने वाले पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए जैसे की दलिया, बाजरा, दालें, चावल, दूध, हरी सब्जिया, फल इत्यादि। 
  • आयरन / Iron : गर्भवती महिला हिमोग्लोबिन 12 ग्राम से ऊपर होना चाहिए। अगर रक्त में हिमोग्लोबिन की कमी है तो डॉक्टर से मिलकर हिमोग्लोबिन आयरन और फोलिक एसिड की दवा शुरू करना चाहिए। आयरन का पेट में अच्छे से अवशोषण होने के लिए साथ में विटामिन सी युक्त आहार भी साथ में लेना चाहिए। शरीर में खून की कमी दूर करने के लिए कौन सा आहार खाना चाहिए यह जानने के लिए यह लेख पढ़े – खून की कमी दूर करने के लिए कौन सा आहारखाना चाहिए ?
  • कैल्शियम / Calcium : दुसरे तिमाही में गर्भ में बच्चे का विकास होते समय हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम की जरुरत होती हैं। इस दौरान आपको कैल्शियम की जरुरत को पूरा करने के लिए दूध, दही, पनीर, चीज, रागी, हरी पत्तेदार सब्जिया या जरुरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेने की जरुरत भी पड़ सकती हैं। कैल्शियम के साथ आपको इन आहार से विटामिन डी भी प्राप्त होता हैं। भोजन में अतिरिक्त आधा कटोरी दाल या दही लेकर आप कैल्शियम और प्रोटीन की अतिरिक्त जरुरत को पूरा कर सकते हैं। 
  • फाइबर / Fiber : प्रेगनेंसी के दुसरे तिमाही में महिलाओं को अक्सर कब्ज की शिकायत हो जाती है जो की प्रेगनेंसी में एक गंभीर समस्या हैं। कब्ज से छुटकारा पाने के लिए इस दौरान दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी और अधिक फाइबर युक्त अनाज खाना चाहिए। साबुत अनाज, दलिया, फल, हरी पत्तेदार सब्जी, चुकंदर, गाजर, ककड़ी, टमाटर का सेवन करना चाहिए।  
  • ओमेगा 3 / Omega 3 : गर्भावस्था में बच्चे के ब्रेन का विकास अच्छे से होने के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड जरुरी होता हैं। इनमे शामिल हैं अवकाड़ो, ब्रोकोली, पत्तागोभी, दही, चीज, सूर्यफूल बिज, सुकामेवा गाजर इत्यादि। 
  • आयोडीन / Iodine : बच्चे के मानसिक विकास के लिए आयोडीन बेहद जरुरी होता हैं। आपको भोजन में हमेशा आयोडीन युक्त नमक का सेवन ही करना चाहिए। अगर आपको थाइरोइड की समस्या है तो गर्भावस्था के समय यह नियंत्रण में होना जरुरी हैं। आपको गर्भावस्था में कई बार थाइरोइड की जाँच करना पड़ सकता है और रिपोर्ट के अनुसार अपने गोली की मात्रा में फेरबदल करना पड़ सकता हैं। 
Click करे और पढ़े – प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए 

इस तरह आपको प्रेगनेंसी के दुसरे तिमाही में पर्याप्त पौष्टिक आहार लेना चाहिए आप चाहे तो 
अच्छे डायटीशियन से मिलकर अपने हफ्ते भर का डाइट चार्ट तैयार कर सकते हैं। 

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