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अगर आप रोजाना चिड़चिड़े उदास या तनाव में रहते हैं और हार्मोन संबंधी समस्या भी है तो ऐसे में #विपरीत करनी मुद्रासन या जिसे अंग्रेजी में Legs up the wall कहा जाता हैं, लाभकारी हो सकता है। मानसिक तनाव और चिंता को दूर कर मन को शांत करने के लिए यह एक उपयोगी योग हैं। शरीर को बलशाली बनाने, बुढ़ापे को दूर रखने और कामशक्ति (सेक्स पॉवर) बढ़ाने के लिए यह श्रेष्ठ आसन माना जाता हैं।   

विपरीत करनी मुद्रासन की विधि, लाभ और सावधानी से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :
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विपरीत करनी मुद्रासन की विधि 

  • एक समान। सपाट और स्वच्छ जगह पर दरी / चटाई या योगा मैट बिछाये। 
  • अब इस पर पीठ के बल सीधे लेटे। 
  • दोनों हाथों को सीधा रखें। 
  • सांस लेते हुए घुटनों को ऊपर की ओर मोड़ो। 
  • दोनों हाथों को कूल्हों (Hips) के नीचे लाएं व कोहनी (Elbow) को फर्श पर टिका कर रखें। 
  • अब हाथों की सहायता से पैरों को ऊपर की तरफ सीधा उठाएं। 
  • सामान्य सांस लेते हुए क्षमता अनुसार रुके।  
  • सांस छोड़ते हुए घुटनों को माथे की ओर मोड़े  व धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाएं। 
  • इसे दो से तीन बार दोहराएं। 
  • इस आसन के पश्च्यात शवासन करे। 
  • इस आसन को आप दीवार का सहारा लेकर भी कर सकते हैं। 
विपरीत करनी मुद्रासन के लाभ 
  • यह आसन निम्न रक्तचाप (Low BP), पैरों में सूजन, नाडी के रोग, ग्रंथि की सक्रियता में कमी, पेट व किडनी संबंधी रोगों में आराम पहुंचाकर उर्जा और रक्त संचार को बढ़ाता है। 
  • मानसिक तनाव दूर होता हैं। 
  • रक्त संचार सुचारू रूप से होता हैं। 
  • खासकर महिलाओं में अनियंत्रित हॉर्मोन की समस्या को दूर करने के लिए बेहद उपयोगी आसन हैं।  
  • रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती हैं। 
  • बुढ़ापे को दूर भगाने और सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिए श्रेष्ठ आसन माना जाता हैं। 
  • शरीर की थकावट दूर होती हैं। 
विपरीत करनी मुद्रासन में सावधानी 
  • 14 साल से कम उम्र के बच्चे यह अभ्यास ना करें। 
  • इसे सुबह खाली पेट ही करें 
  • उच्च रक्तचाप (High BP), चक्कर आने व रीड की हड्डी में तकलीफ होने पर इसका अभ्यास ना करें। 
  • महिलाओं ने मासिक धर्म के समय और गर्भावस्था में यह आसन नहीं करना चाहिए। 
किसी भी योग को करते समय उसे अपने क्षमतानुसार ही करे और धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाना चाहिए। आसन करते समय कोई परेशानी होने पर योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए। अपने शरीर को सशक्त, स्वस्थ और युवा बनाये रखने के लिए इस योग का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। 

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Image By Kennguru - Own work, CC BY 3.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=25223503

मां बनना स्त्री के जीवन में गौरव की बात होती है और स्तनपान कराना स्त्री का परम सौभाग्य होता है। 
अक्सर स्त्रियों या माताओं के सामने यह समस्या होती है कि वह स्तनपान के दौरान अपना आहार-विहार कैसे रखें क्योंकि उन्हें अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य की फिक्र रहती है और ऐसे में जब उन्हें अपने रिश्तेदार, अडोस-पडौस या डॉक्टर से अलग-अलग सलाह मिलती है तो वे और भी कंफ्यूज हो जाती है । इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए हमने यह लेख लिखा है और कोशिश की है आपको पौष्टिक और आसान आहार बता सके जो माता और शिशु दोनों के लिए सही हो। 

स्तनपान के दौरान आपको एक विशेष बात का ख्याल रखना है कि आपका आहार पोष्टिक हो और आपकी जरूरत के हिसाब से हो यानी कि आपको जितनी बार भूख लगे आप उतनी बार खाना खा सकते हैं क्योंकि स्तनपान आपकी भूख भी बढ़ाता है अतः अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें। 

स्तनपान के दौरान माता ने कैसा आहार लेना चाहिए इसकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :


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कैसा होना चाहिए #स्तनपान के दौरान #माता का #आहार ?

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गर्भावस्था के दौरान अधिकतर जिस प्रकार के पौष्टिक आहार का चयन करते हैं वह प्रक्रिया आपको अभी भी शुरू रखनी चाहिए आपका आहार न सिर्फ पौष्टिकता से पूर्ण बल्कि संतुलित भी होना चाहिए। आहार ऐसा हो जो प्रोटीन, कैल्शियम , आयरन और खासकर विटामिन  A , B 12 , C और जिंक जैसे खनिज से भरपूर हो, साथ ही जो आपको अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करे। कोशिश करें कि अधिक फैट और चीनी युक्त खाद्य पदार्थ कम ले, इनमें अधिक कैलोरीज के बावजूद पोषण मूल्य कम होता है। 

महिलाओं को आहार का चयन इस बात पर भी निर्भर करता है कि स्तनपान के शुरुआती 6 महीने है या अगले 6 से 12 महीने का समय क्योंकि शुरुआत 6 महीने में आहार की आवश्यकता, प्रोटीन और एनर्जी की मात्रा अधिक होती है। 
  • अपने आहार में दूध और दूध के उत्पादन, पुर्ण अनाज ( गेहूं, ज्वार, चावल, बाजरा, रागी, नाचनी आदि ), दालें,  फलिया,  हरी सब्जियां जैसे मेथी, पालक, बथुआ, सरसो एवं ताजे फलों खासकर ऑरेंज, निम्बू, पाइनापल, आम, पपया आदि का सेवन अधिक करें।  सिंगदाना, गुड़, नारियल आदि अधिक मात्रा में ले। 
  • कुछ विशेष खाद्य पदार्थ है जो स्तनपान कराने वाली माताओं को दिए जाते हैं जिनसे माताओं को मदद मिलती है। हालाँकि इनका सेवन सिमित मात्रा में करना चाहिए। 
  1. मेथी के बीज : मेथी में ओमेगा 3 वसा, बीटा केरोटीन, विटामिन, आयरन, कैल्शियम आदि का समावेश होता है जो माता और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। इन बीज का उपयोग हम सब्जी, परांठे, पूरी आदि में कर सकते हैं। 
  2. सौंफ : शिशु को गैस और पेट दर्द से बचाने के लिए नई मां को सौंफ दी जाती है। 
  3. जीरा : कैल्शियम और राइबोफ्लेविन से समृद्ध जीरा स्तन्य वृद्धि के साथ अपचन, कब्ज और पेट फुलना आदि से भी राहत देता है। 
  4. तिल के बीज : तिल के बीज में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जो कि स्तन्य आपूर्ति के लिए जरूरी होता है। तिल का उपयोग हम लड्डू,  पूरी, खिचड़ी, बिरयानी आदि में कर सकते हैं।
  5. तुलसी : तुलसी से स्तन्य वृद्धि तो नहीं होती है पर इम्यूनिटी बढ़ाने में यह सहायता करती है।
  6. सुवा : आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम से भरपूर सुवा के पत्ते दुग्ध उत्पत्ति के साथ पाचन और नींद में भी सहायक होते हैं। 
  7. लौकी, तोरी जैसी सब्जियां स्तन्य बनाती है, पौष्टिक होकर भी कम कैलोरी युक्त होती है। साथ ही आसानी से पच जाती है। पालक, मेथी, सरसों बधुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन, कैल्शियम और फोलेट जैसे खनिजों के स्रोत से समृद्ध होती है। 
  • स्तनपान कराने वाली माता के आहार में दिनभर में कम से कम 500 ml दूध जरूर होना चाहिए।
  • आहार में भोजन के बीच या जब भी जरूरत हो लिक्विड की मात्रा अधिक से अधिक रखें जैसे दाल , नारियल पानी, छांछ, लस्सी , ताजा फलों का रस , नींबू पानी आदि।  कोल्ड ड्रिंक के सेवन से बचे। 
  • दाल में रोटी चूरकर खाएं इससे दाल अधिक मात्रा में खा  पाएंगे। विशेषतः मसूर की दाल में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। 
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीए। हो सके तो सुबह  उठने के बाद दोपहर और रात में एक-एक ग्लास गर्म पानी पिए। 
  • स्तनपान के दौरान 5 से 6 बार आहार ले। जैसे की सुबह में दूध, फिर नाश्ता, मध्य सुबह का खाना ( 11 बजे के करीब जूस आदि ), लंच, मध्य दोपहर का खाना, शाम का आहार ( हल्का नाश्ता ), चाय या दूध , डिनर इस तरह से अपने आहार की योजना बनाये। 
  • पारंपरिक तौर पर स्तनपान कराने वाली माताओं को घी और मेवे से बने व्यंजन लड्डू आदि खिलाए जाते हैं लेकिन इनका उपयोग सीमित मात्रा में करें। वैसे तो मेवे काफी स्वास्थ्यकर होते हैं पर चीनी और घी की अधिक मात्रा की वजह से ये व्यंजन अधिक कैलोरीयुक्त हो जाते है। अतः इनका इस्तेमाल कम करें आप चाहे तो मेवों को दलीया, खीर आदि में डाल कर खाएं जिससे कि आप अधिक कैलोरी से बच सकते हैं। 
  • स्तनपान के दौरान आप वैसे तो अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थ ले सकते हैं पर कभी कभी देखने में आता है कि कुछ शिशु किसी विशिष्ट आहार सेवन पर अलग प्रक्रिया दिखाते हैं जैसे कि पेट दर्द,  चिड़चिड़ापन, अधिक रोना आदि। इसके पीछे कोई ठोस प्रमाण नही है। कभी-कभी इन प्रतिक्रियाओं की वजह कुछ अलग भी हो सकती है जैसे की नींद पूरी न होना, पेट भरा न होना, स्तनपान के बाद बच्चे को ठीक से डकार न देना या पेट में गैस आदि।  
  • ऐसा माना जाता है कि दूध और दुग्ध उत्पादन की वजह से कई बच्चों में पेट दर्द की शिकायत होती है और माता वो आहार लेना बंद कर दें तो शिशु को राहत भी मिलती है। इसी तरह कुछ अन्य खाद्य पदार्थ है जिस वजह से पेट दर्द हो सकता है जैसे कि बेसन,पत्तेदार सब्जियां ,प्याज,  पत्तागोभी ,  मसालेदार भोजन , राजमा , सोयाबीन।  
  • अगर आपको ऐसा लगता है कि बच्चा कोई आहार को लेकर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दिखाता है तो कुछ दिन के लिए बंद कर दीजिए। 
  • आहार के साथ-साथ आपको डॉक्टर की सलाह से आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम की उचित मात्रा लेना जरूरी होता है। कोई भी अलग दवाई लेने से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य ले क्योंकि कई दवाइयों का माता के दूध में अवशोषण होता है जिससे शिशु को नुकसान हो सकता है। 
  • हर बार स्तनपान से पूर्व एक ग्लास पानी या अन्य कोई तरल अवश्य लें क्योंकि स्तनपान कराते समय शरीर में ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन निकलता है जिसकी वजह से प्यास लगती है अतः जब भी प्यास लगे पानी पिए। अपने यूरिन के कलर पर ध्यान दें अगर हल्का पीला हो तो समझ लीजिए की आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ले रहे हैं। अगर गहरा पीला हो तो आप के शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा कम है अतः लिक्विड की मात्रा बढाये। 
याद रखिए स्तनपान बच्चे की भविष्य की सर्वोत्तम कुंजी होती है। स्तनपान करने वाले बच्चे का बौद्धिक विकास तेजी से होता है। ऐसे बच्चे सुद्रुढ , सक्रिय और होशियार होते हैं इसीलिए स्तनपान के दौरान हमें आहार का चयन उचित और संतुलित मात्रा में करना चाहिए ताकि हम हमारे बच्चे की स्वास्थ्य की नींव मजबूत कर सके। 

मैं यहाँ पर विशेष धन्यवाद देना चाहूंगा सिलवासा के डॉ भावना त्रिवेदीजी का जिन्होंने यह महत्वपूर्ण जानकारी हमें ईमेल द्वारा भेजी है और इसे यहाँ प्रकाशित करने की अनुमति दी हैं। 

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नाक बंद रहने की कई वजह हो सकती हैं। बहुत से लोग तुरंत नाक खोलने के लिए नेसल ड्रॉप्स / Nasal drops का उपयोग करते हैं। कई बार आवश्यकता होने पर डॉक्टर भी कुछ समय के लिए इसका प्रयोग करने की सलाह देते हैं। किन्तु कई लोग इसका बेहतरीन परिणाम देख, बिना अपने डॉक्टर की सलाह के आगे भी इसका उपयोग करते रहते हैं।

लंबे समय तक इन ड्रॉप्स के प्रयोग से अक्सर नाक बंद रहने लगती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह लंबे समय तक इन ड्रॉप्स का उपयोग करने से नाक पर घातक दुष्परिणाम होते हैं जिसे वैद्यकीय भाषा में Rhinitis Medico Mentosa कहा जाता हैं।

यह दुष्परिणाम क्या है और इससे कैसे बचे इसकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

nasal-drop-rhinitis-side-effects-in-hindi

नेसल ड्रॉप्स के दुष्परिणाम
Side effects of Nasal drops in Hindi

नाम में डालने के लिए उपयोग में लिए जानेवाले ड्रॉप्स में ऑक्सीमेटाजोलीन या जाइलोमेटाजोलीन तत्व होते है जो शुरू में नाक के अंदर के टिश्यू की सूजन को तुरंत कम कर देते हैं जिससे नाक तुरंत खुल जाती है और आपको बंद नाक की परेशानी से जल्द छुटकारा मिल जाता हैं। ऐसा तुरंत आराम पाकर हर मरीज खुश होता हैं और आगे जरा सी भी नाक बंद की तकलीफ होने पर सबसे पहले ड्राप का ही बिना सलाह इस्तेमाल करना शुरू कर देता हैं।

लंबे समय तक इन ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने से नाक के अंदर टिश्यू का लचीलापन कम होने लगता हैं। रक्तसंचार में असामान्यताएं व नाक के अंदर स्तिथ टर्बिनेट्स आकार में बढ़ जाते हैं जो रूकावट पैदा करते हैं, जिससे अक्सर नाक बंद रहने लगती हैं। इस प्रकार नाक पर पड़े उल्टे दुष्प्रभाव को rebound या chemical rhinitis भी कहते हैं।

नेसल ड्राप में रोगी की निर्भरता बढ़ जाती है जबकि इसका असर भी बहुत कम व कुछ समय के लिए ही रहता हैं जिससे इसे बार-बार अधिक मात्रा में उपयोग करना पड़ता हैं। नाक भी बार-बार बंद पड़ता है पर नाक से पानी नहीं आता और छींक भी नहीं आती।

उपचार / Treatment

नाक के ड्राप के दुष्परिणाम निर्माण होने पर निचे दिए हुए उपचार और सावधानी बरतनी चाहिए :
  • इस तरह की तकलीफ निर्माण होने पर रोगी ने ड्रॉप्स का उपयोग पूर्णतः बंद कर देना चाहिए। 
  • रोगी इस पर निर्भर रहने के कारण शुरुआत में कुछ समय के लिए ड्राप की जगह स्टेरॉयड दवा खाने के लिए दी जाती हैं।
  • इन औषधियुक्त ड्राप की जगह सामान्य सलाइन ड्राप का इस्तेमाल करना चाहिए जो सुरक्षित है और जिसकी आदत भी नहीं होती हैं।  
  • भाप का प्रयोग लाभकारी होता हैं। दिन में 3 बार गर्म पानी में विक्स डालकर भाप लेनी चाहिए। सुबह उठने के बाद, दोपहर और रात को सोने से पहले भाप अवश्य लेना चाहिए। 
  • नाक बंद रहने की मूल वजह का निदान कर इलाज करना चाहिए। यदि इसका कारण पोलिप, हड्डी का टेडापन, गाँठ या साइनोसाइटिस है तो उसका डॉक्टर से उपचार कराना चाहिए।      
  • अगर आपको धूल, मिटटी, धुंआ, केमिकल इत्यादि की एलर्जी है तो उनसे बचकर रहे। एलर्जी का उपचार पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - एलर्जी का उपचार और बचने के उपाय !
  • नाक को बार-बार बंद होने से बचने के लिए आप निचे दिए हुए योग और प्राणायाम कर सकते हैं। योग की विधि जानने के लिए उस योग के नाम पर क्लिक करे:
  1. कपालभाति 
  2. अनुलोम-विलोम 
  3. ताड़ासन 
  4. त्रिकोणासन 
  5. भुजंगासन 
  • बार-बार नाक बंद होने की तकलीफ से बचने के लिए और रोग प्रतिकार शक्ति को बढाकर एलर्जी को कम करने के लिए आप आयुर्वेदिक औषधि जैसे यष्टिमधु, अश्वगंधा, गिलोय सत्व, आमला, शतावरी, मंजिष्ठा, मुलेठी, शंखभस्म इत्यादि का आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से उपयोग कर सकते हैं। पंचकर्म से औषधि युक्त तेल से नस्य करने से भी बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। 
बिना डॉक्टर की सलाह से कोई भी दवा एक बार लेने से भी तकलीफ हो सकती है इसलिए ऐसे ड्रॉप्स का अधिक उपयोग न करे। खासकर कई महिलाए छोटे बच्चो में इनका अधिक उपयोग करती है, उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए। इस लेख का अधिकतर अंश हमें इ.एन.टी स्पेशलिस्ट डॉ मेहुल सेठ ने रायपुर से ईमेल द्वारा भेजा हैं। निरोगिकाया ब्लॉग टीम और अपने सारे पाठकों की तरफ से उनका बहुत-बहुत धन्यवाद !

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आज कल कई कारणों से युवा दम्पति / couples को प्रेगनेंसी प्लानिंग में देरी हो रही हैं। प्रेगनेंसी प्लानिंग में देरी के कारण महिलाओं को गर्भावस्था प्राप्त करने में कई सारी मुश्किलें आ रही हैं। हमें हर हफ्ते ईमेल, Whatsapp या फेसबुक पेज पर हजारों पाठकों का यह सवाल आता है की गर्भावस्था को जल्द कैसे प्राप्त करे ? या How to get Pregnant fast in Hindi ?

कई पाठकों द्वारा इस एक ही सवाल को पूछे जाने से पता चलता है की यह समस्या अब गंभीर होते जा रही है और इस विषय का पूरा ज्ञान भी पाठकों नहीं मिल रहा हैं। आज इस लेख में हम आपको यही जानकारी देने जा रहे है जिससे उन सभी दम्पति को मदद मिलेंगी जिन्हें गर्भावस्था जल्द प्राप्त करना हैं और अपने परिवार को आगे बढ़ाना हैं।

Pregnancy / गर्भावस्था को जल्द कैसे प्राप्त करे इसकी अधिक जानकारी नीचे दी गयी हैं :

how-to-get-pregnant-tips-in-hindi

गर्भावस्था को जल्द कैसे प्राप्त करे ?
How to get Pregnant fast in Hindi

गर्भावस्था को प्राप्त करने के लिए आप को नीचे दी हुई महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखना चाहिए। जैसे की :
  • वैद्यकीय जांच / Medical Examination : गर्भावस्था हर शादी शुदा स्त्री और पुरुष के जीवन का अहम् हिस्सा होता है और इसे प्लान करने से पहले गर्भावस्था में कोई दिक्कत न हो इसलिए स्त्री और पुरुष दोनों ने अपने फॅमिली डॉक्टर के पास जाकर अपना मेडिकल चेकअप कराना चाहिए जिससे कोई मेडिकल प्रॉब्लम होने पर उसे पहले ही ठीक किया जा सके। 
  1. महिलाओं में मधुमेह, थाइरोइड रोग, रक्त की कमी, कम ब्लड प्रेशर और PCOD जैसी समस्या से गर्भावस्था प्राप्त करने में और सुरक्षित गर्भावस्था में कई दिक्कत आती हैं। इनका निदान गर्भावस्था से पहले कर इन्हें नियंत्रित कर आप आगे होने वाले समस्या को रोक सकते हैं। PCOD की जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - PCOD कारन, लक्षण और उपचार हिंदी में !
  2. पुरुष और महिला को हेपेटाइटिस, एड्स या अन्य किसी रोग का संक्रमण होने पर उसका निदान प्रेगनेंसी से पहले होना जरुरी होता हैं। 
  3. प्रेग्नेंट होने के पहले से ही महिला ने पौष्टिक आहार लेकर अपना वजन नियंत्रित करना चाहिए और हीमोग्लोबिन लेवल को कम से से कम 10 से ऊपर रखना चाहिए। मोटापा होने पर महिला को गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। मोटापे की समस्या को कम करने के उपाय जानने के लिए यह पढ़े - मोटापा कैसे कम करे ?
  4. ऐसी कई दवा है जिन्हें लेने के बाद 3 से 6 महीने तक प्रेगनेंसी प्लान नहीं करना चाहिए वरना होने वाले बच्चे को क्षति पहुच सकती हैं। अगर आप कोई दवा नियमित ले रहे है तो अपने डॉक्टर से प्रेगनेंसी प्लान करने के पहले वह दवा सुरक्षित है की नहीं यह जरुर जान लेना चाहिए। 
  • संबंध कब बनाये / When to have Sex : गर्भावस्था को प्राप्त करने के लिए जरुरी है की महिला और पुरुष तब संबंध (Sex) बनाये जब गर्भावस्था को प्राप्त करने के chance सबसे अधिक होता हैं। 
  1. औसतन महिलाओं का मासिक धर्म / Menstrual Cycle 30 दिन का होता हैं। जिस दिन महिलाओं में योनि भाग से रक्तस्त्राव शुरू होता है उसे अगर प्रथम दिन पकडे तो इस दिन के बाद के 10 वे दिन से लेकर 20 वे दिन तक के समय में प्रेग्नेंट होने के मौके ज्यादा होते हैं। इस अंतराल को ही Ovulation Phase कहते है जब महिलाओं के अंडाशय (Ovary) से अंडा (Egg) बाहर निकलता है और उसी दौरान वह शुक्राणु (Sperm) से मिलने पर महिला प्रेग्नेंट भी हो सकती हैं। 
  2. मासिक धर्म के 10 से लेकर 20 दिन तक के 10 दिन के समय में भी 14 से 18 दिन का समय अधिक महत्वपूर्ण होता हैं। 
  3. पुरुष के शुक्राणु गर्भाशय में 48 से 72 घंटों तक जीवित रह सकते है इसलिए जरुरी है की इन दिनों में एक दिन छोड़कर पति और पत्नी प्रेग्नेंट होने के लिए सम्बन्ध बनाते रहे।  
  • संबंध कैसे बनाये / Sex technique : पति और पत्नी दोनों Ovulation दिनों में यानि मासिक धर्म के 10 वे दिन से 20 वे दिन के समय संबंध बनाना चाहिए और इस समय के तुरंत पहले पहले और तुरंत बाद संबंध नहीं बनाना चाहिए जिससे की शुक्राणु और अंडाशय का स्वास्थ्य सही रहे और वह गर्भ का निर्माण कर सके। 
  1. Ovulation Phase के 4-5 दिन पहले एक बार संबंध बनाना चाहिए जिससे की पुरुष के semen में मृत शुक्राणु जमा न रहे और नए स्वस्थ युवा शुक्राणु की संख्या अधिक रहे।  
  2. प्रेगनेंसी का मौका बढ़ाने के लिए संबंध (Sex) बनाते समय स्त्री ने पुरुष के नीचे रहना चाहिए और संबंध बनाने के बाद में स्त्री ने कुछ समय तक अपने नितम्ब (Hip) के नीचे तकिया या अन्य कोई सामान रख अपने कमर और हिप का हिस्सा 10 से 15 मिनिट तक ऊपर रखना चाहिए जिससे शुक्राणु बाहर न निकल जाये।
  3. सम्बंध बनाने के तुरंत बाद महिला ने कोई भारी काम नहीं करना चाहिए।   
  4. सम्बन्ध बनाते समय किसी तरह के क्रीम, जेल या तेल का उपयोग न करे। 
  • स्वस्थ शुक्राणु / Healthy Sperms : गर्भावस्था को प्राप्त करने के लिए पुरुष के Semen में शुक्राणु की संख्या और उनकी गतिशीलता (Motility) अधिक होना जरुरी होता हैं। शुक्राणु को स्वस्थ बनाये रखने के लिए इन बातों का ख्याल रखे :
  1. शराब से दुरी बनाये रखे। शराब पिने से शरीर में टेस्टेस्टेरोन हॉर्मोन में कमी आती है जिससे शुक्राणु की संख्या कम हो जाती हैं। 
  2. तम्बाखू, धूम्रपान और गुटखा इत्यादि का सेवन न करे। इन पदार्थो के सेवन से शुक्राणु की गतिशीलता कम हो जाती हैं। 
  3. अगर आपका वजन ज्यादा है तो अपना मोटापा कम करे। मोटापे से पीड़ित लोगो में शुक्राणु की संख्या कम पायी जाती हैं। 
  4. समतोल पौष्टिक आहार लेना चाहिए जिसमे Zinc, Folic acid, Calcium और Vitamin C पर्याप्त मात्रा में मिलना चाहिए। 
  5. अंडकोष / Testicles को अधिक तापमान से बचाने के लिए अधिक गर्म पानी से स्नान, सॉना बाथ और अधिक गर्म कपडे / जीन्स न पहने। अधिक तापमान से अंडकोष में शुक्राणु समाप्त हो जाते हैं। 
  6. शुक्राणु की संख्या और स्वास्थ्य बढ़ाने के अन्य उपाय पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - स्वस्थ शुक्राणु की संख्या बढ़ाने के उपाय !
  • अन्य / Others 
  1. समतोल और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। हमारे आहार का हमारे DNA और Genes पर भी असर पड़ता है इसलिए जरुरी है की इस समय प्राकृतिक और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। अधिक तीखा मसालेदार और फास्टफूड से दुरी बनाकर रखे। 
  2. आहार में दूध, फल और हरी सब्जियों का समावेश करे। 
  3. रोजाना कम से कम 30 मिनिट व्यायाम और योग करे। व्यायाम और योग से शरीर की flexibility बनी रहती है जिससे गर्भावस्था में कोई परेशानी नहीं होती हैं। 
  4. तनाव से दुरी बनाये रखे। हमेशा प्रसन्न रहे। 
  5. सकारात्मक रहे। पॉजिटिव किताबे पढ़े और पॉजिटिव फिल्मे देखे। 
  6. अपने धर्म के अनुरूप धार्मिक किताबे अवश्य पढ़े। 
  7. अगर आपको कोई बीमारी है तो समय-समय पर डॉक्टर को दिखाकर उसे ठीक करे / नियंत्रण में रखे। 
  8. अपने जीवनसाथी को समझे और उसे खुश रखने का प्रयत्न करे। किसी बात पर बहस करने की जगह एक दुसरे की पूरी बात सुनकर किसी नतीजे पर पहुचे। प्रेगनेंसी के लिए दोनों में आपसी समझ भी बेहद जरुरी हैं। 
अगर आपको प्राकृतिक रूप से गर्भावस्था प्राप्त होनी है तो ऊपर दिए हुए उपाय से 6 महीनो के प्रयास में 10 में से 8 दम्पति में गर्भावस्था प्राप्त हो जाती हैं। अगर 6 महीने के प्रयास के बाद भी गर्भावस्था प्राप्त नहीं हो रही है तो आपको स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मिलकर जांच और उपचार कराना चाहिए। आप जितना समय बर्बाद करेंगे या जितना अधिक आपकी आयु होंगी उतनी ही ज्यादा मुश्किल आपको प्रेगनेंसी पाने में होंगी। गर्भावस्था में देरी होने पर पुरुष और महिला दोनों की जांच होनी चाहिए। अक्सर पुरुष महिला को इसका दोषी मानते है जो की पूर्णतः गलत हैं।  

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किसी भी महिला के गर्भवती / Pregnant होने या पहली बार माँ बनने पर घर वाले, रिश्तेदार, पडौसी और यहाँ तक की मोहल्ले वाले भी उसे तरह-तरह की सलाह देने लगते हैं। लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार यह सुझाव महिला के लिए परेशानी की सबब भी बन जाते हैं।

प्रेगनेंसी जैसे महत्वपूर्ण अवस्था में महिला को सभी बातों का ख्याल रखना बेहद जरुरी होता हैं। इस दौरान लिए गए किसी गलत फैसले से महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे पर प्रतिकूल परिणाम पड़ सकता हैं।

आइए जानते हैं समाज में गर्भावस्था से पहले व डिलीवरी के बाद में जुड़े भ्रम और उनकी सच्चाई के बारे में।

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1. जिन महिलाओं का पेट आगे की ओर बढ़ता है उन्हें लड़का होता हैं !
सच - यह एक बिलकुल गलत धारणा है और इसका लड़का या लड़की होने से कोई लेना देना नहीं हैं। गर्भावस्था में महिला के पेट का आकर बच्चे के विकास पर निर्भर करता हैं। कई बार मोटापे से ग्रसित महिला का पेट भी इस तरह बढ़ जाता हैं।

2. गर्भवती महिला को एक करवट पर नहीं लेटना चाहिए !
सच - गर्भवती महिला को जिस स्तिथि में सोना आरामदायी लगे वह उस स्तिथि / position में लेट सकती हैं। विशेषज्ञों की माने तो बाई करवट / Left lateral position में लेटने से गर्भ को Blood circulation अच्छी तरह से होता है और बच्चे का विकास भी बेहतर होता हैं।

3. Pregnancy में अधिक समय सोनेवाली महिला को लड़की होती हैं !
सच - Pregnancy में महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे महिला को जल्द थकान आती है और नींद भी आती हैं। इसका लड़का या लड़की होने से कोई संबंध नहीं हैं।

4. प्रेगनेंसी में दही नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे पर सफ़ेद परत जम जाती हैं !
सच - प्रेगनेंसी में जब बच्चा समय से पहले / Premature पैदा होता है तो उस पर इस प्रकार की सफ़ेद परत जमा होती हैं जिसे कुछ लोग दही समझ लेते हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे के सुरक्षा के लिए यह परत होती है और जैसा-जैसा बच्चा गर्भ में बड़ा होता हैं यह परत कम हो जाती हैं।

5. डिलीवरी के पहले भरपेट खाकर हॉस्पिटल जाना चाहिए !
सच - प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला ने भरपेट नहीं खाना चाहिए। ऐसे समय हल्का खाना बेहतर रहता हैं। भर पेट खाने से उलटी होना, खाना अन्ननलिका से ऊपर आकर श्वास नलिका में फंसने का खतरा रहता हैं।

6. नारियल खाने से बच्चा गोरा होता हैं !
सच - प्रेगनेंसी में नारियल खाने से बच्चे का रंग प्रभावित नहीं होता हैं। ऐसे नारियल पौष्टिक होने के कारण आप गर्भवती महिला को जरूर दे सकते हैं।

7. घी खाने से डिलीवरी आसानी से होती हैं !
सच - घी खाने का डिलीवरी से कोई विशेष संबंध नहीं हैं। प्रेगनेंसी में जितना आवश्यक है उतना ही घी खाना चाहिए।

8. डिलीवरी के बाद कम पानी पीना चाहिए !
सच - डिलीवरी के समय महिला का काफी सारा रक्त निकल सकता है जिससे ब्लड प्रेशर कम होने का खतरा भी रहता हैं। डिलीवरी के बाद महिला ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, कब्ज नहीं होती हैं और टाकों पर दबाव नहीं आता हैं।

9. नवजात बच्चे को माँ का दूध / स्तनपान एक दिन बाद ही कराना चाहिए !
सच - डिलीवरी के बाद माँ के स्तन से जो पहले पिला गाढ़ा दूध निकलता है उसे Colostrum कहते है। यह दूध बच्चे को अवश्य पिलाना चाहिए। इस दूध में कई सारे पौष्टिक तत्व और बच्चे की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने वाले एंटीबाडीज जैसी महत्वपूर्ण तत्व होते है। बच्चे को जन्म के पश्च्यात गाय का दूध या शहद देने की जगह यह दूध पिलाना चाहिए।

10. प्रसव के बाद डेढ़ महीने तक आराम करना चाहिए !
सच - प्रसव के बाद महिला को आराम अवश्य करना चाहिए पर अत्याधिक आराम करने से महिला को पैरो में सूजन, मोटापा, गैस, कब्ज और  पैर की नस में खून का थक्का जम जाना जैसी समस्या निर्माण हो सकती हैं।प्रसव के बाद नियमित सुबह शाम सैर और हल्का व्यायाम करने से यह तकलीफे नहीं होती हैं।  

गर्भावस्था यह महिला के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है और ऐसे समय किसी के बातों में आकर कोई फैसला लेना या भ्रम पालने से अच्छा है की समय-समय पर अपने डॉक्टर से जांच कराये और अपने मन में उठ रहे सभी छोटेबड़े सवालों का सही जवाब प्राप्त करे।

यह जानकारी रायपुर से डॉ प्रीतम कोठारी जी ने ईमेल द्वारा भेजी हैं। निरोगिकाया ब्लॉग और सभी पाठकों की ओर से उनका बहोत-बहोत धन्यवाद !

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माँ का दुध नवजात शिशु के लिए अमृत समान होता है। बच्चे का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आधार माँ का दूध ही होता है। हेवल एलिस के अनुसार ' बालक के लिए माँ के दूध का महत्व है वह किसी अन्य प्रकार से प्राप्त नही किया जा सकता है। '


माँ के दूध में बच्चे के विकास के लिए जरूरी सारे पोषक तत्व मौजूद होते है, जिससे की बच्चा स्वस्थ और निरोगी रह सके। पहिले 6 महीने तक केवल स्तनपान लेने वाले बच्चा सामान्य बिमारी से तो दूर रहता हे साथ ही उसमे रोगों से लड़ने की शक्ति भी बढ़ती है।


नवजात बच्चों को स्तनपान कराना बेहद जरुरी होता हैं। स्तनपान कैसे कराये, स्तनपान का महत्व और स्तनपान के विविध लाभ संबंधी अधिक जानकारी नीचे दी गयी हैं :

health benefits of breastfeeding in hindi

माँ के दूध के घटक

Contents of Breast Milk in Hindi
 
माँ के 100 ml दूध में नीचे दिए हुए महत्वपूर्ण घटक द्रव्य होते हैं :

  1. 3 से 5 % फैट, 
  2. 0.8 से 0.9 % प्रोटीन्स, 
  3. 6.9  से 7.2 % कार्बोहाइड्रेट्स लैक्टोज के रूप में, 
  4. 0.2 % मिनरल्स, 
  5. एनर्जी 60 से 75 kcal होती हैं। 
  6. महत्वपूर्ण एंटीबॉडीज 

स्तनपान के क्या लाभ हैं ?

Health Benefits of #Breastfeeding for Infants and Mother in Hindi

स्तनपान ना केवल बच्चे के लिए बल्कि माता के लिए भी फायदेमंद होता है। आइये, जानते है स्तनपान के स्वास्थ्यवर्धक लाभ के बारें में :


माता के लिए
स्तनपान कराना बच्चे के साथ साथ माँ के सेहत के लिए भी वरदान होता है।
  • नियमित रूप से स्तनपान कराने से गर्भावस्था में हुए शारीरिक बदलाओं को ठीक करने में मदत मिलती है।
  • स्तनपान प्रसव पीड़ा को भुलाकर अपने बच्चे के दुलार में खोने मे मदत करता है। 
  • माँ का बेटे से रिश्ता गहरा होता है।
  • स्तनपान प्रसवोत्तर खून की कमी को नियंत्रित करता है।
  • स्तनपान के दौरान मासिक चक्र देरी से आता है जिससे स्त्रीबीज जनन शक्ति याने पुनश्च माँ बनने की अवधि बढ़ती है, इसे ही Lactational Amenorrhea कहते है।
  • स्तन कैंसर एवम गर्भाशय और स्तन के कैंसर का खतरा कम होता है।
  • जब तक स्तनपान कराओ वजन भी नियंत्रित रहता है। उचित मात्रा में स्तनपान कराते समय प्रतिदिन करीब 500 कैलोरीज बर्न होती है जिससे की मोटापे का खतरा कम होता है।
  • स्तनपान काफी किफायती होता है। फार्मूला मिल्क से होने वाले खर्चे से राहत मिलती है।  
  • बोटल का दूध बारबार बनाना, बोटल को बारबार धोना, क्लीन रखना आदि झंझटो से मुक्ति मिलती है।
बच्चों के लिए 

बच्चो के लिए स्तनपान के लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • स्तनपान करने वाले बच्चे फार्मूला मिल्क लेने वाले बच्चों से कहीं अधिक हेल्थी होते है।
  • स्तनपान में बोटल के दूध से होनेवाले पेट के इन्फेक्शन का खतरा साथ ही रोटा वायरस के संक्रमण का खतरा कम होता है। 
  • नियमित रूप से स्तनपान लेने वाले बच्चों में सर्दी कफ, न्यूमोनिया और डायरिया जैसी बीमारी होने का खतरा कम होता है। साथ ही अस्थमा ,फूड एलर्जी,  सिलियाक डिसीज़, टाइप 2 डायबिटीज और लुकेमिया जैसी बीमारियां भी कम मात्रा में होती है।
  • दूध में कैल्शियम होने से बच्चे की हड्डियां मजबूत होने में मदत मिलती है।
  • स्तनपान से कृत्रिम दूध से होने वाले एलर्जी से राहत मिलती है।
बच्चों को स्तनपान कैसे और कब कराये ?
How to breast feed baby in Hindi


बच्चों को स्तनपान कैसे करे इसकी जानकारी नीचे दी गयी हैं :
  • स्तनपान बेबी के जन्म के तुरन्त बाद 10 min में शुरू करे।
  • बच्चों को स्तनपान कराते समय उनके सिर का भाग बाकी शरीर से ऊपर रखना चाहिए। 
  • बच्चे को स्तनपान कराते समय अगर बच्चा सो जाये तो उसके कान को सहलाना चाहिए जिससे वो दुबारा फीडिंग कर सके। 
  • स्तनपान कराने के बाद बच्चे को कंधे पर सीधा ऐसा रखे की पेट का भाग कंधे पर रहे जिससे दूध पीते समय जो हवा पेट में गयी है वह डकार के साथ बाहर निकल सके। 
  • बच्चे को 6 महीने तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराये। 
  • 6 महीने तक विटामिन डी के अलावा और कोई भी आहार जैसे की शक्कर, शहद, ग्राईप वाटर , नारियल पानी या कोई दवाई देने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • स्तनपान शुरू करने पर प्रथम 3 से 4 दिन तक जो गाढ़ा और कम मात्रा में द्रव निकलता है उसे कॉलेस्ट्रम कहते है, यह एंटीबाडीज, प्रोटीन्स से भरपूर होता है। यह नवजात शिशु को बीमारियो से बचने के लिए प्रतिकारक्षमता बढ़ाता है। 
  • इसमें शूगर की मात्रा कम होती है इसलिए इसकी कम मात्रा भी नवजात शिशु के लिए काफी होती है। इसे बच्चे को अवश्य पिलाये।
  • 3 से 4 दिन के पश्चात जो दूध निकलता है वो मात्रा में अधिक, पतला होता है, उसमे शूगर की मात्रा भी ज्यादा रहती है, क्योंकि अब बच्चे को ज्यादा कैलोरीज और ज्यादा दूध की आवश्यकता होती है ताकि उसका विकास तेजी से हो सके।
  • वैसे तो सामान्य तौर से हर 2 घण्टे में स्तनपान कराये लेकिन 1 मान्यता यह भी है की बेबी जितनी बार और जितना चाहे उतना स्तनपान कराये। कभी कभी यूरिन या पॉटी के वजह से 2 घण्टे के भीतर भी उसे भूक लग सकती है।
  • सामान्यतः दिन में 8 से 12 बार स्तनपान कराये। बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होगा वैसे-वैसे स्तनपान की मात्रा कम होती जाएगी। 
  • एक बार फिर स्तनपान शुरू कर दे तो इसे 1 से 2 वर्ष तक हम बच्चों को दे सकते हैं। 
  • 6 महीने के बाद ऊपर के पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान भी देते रहे।
इस तरह स्तनपान नवजात के लिए आदर्श पोषण होता है। यह बच्चे की इम्यून सिस्टम स्ट्रांग करके सुरक्षा कवच की भाँति कार्य करता है।

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