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पौष्टिक तत्वों से भरपूर मूंगफली (Peanuts) को गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि यह सूखे मेवों से कई गुना किफायती और गुणकारी होता है। प्रोटीन का भरपूर खजाना मूंगफली में समाया होता है, साथ ही चिकनाई और नैसर्गिक शर्करा भी मौजूद होती है। शाकाहारी व्यक्तियों के लिए प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत माना जाता है। 

समान मात्रा में अगर हम मूंगफली और दूध या एग ले तो इन दोनों से कई गुना ज्यादा प्रोटीन मूंगफली में पाया जाता है। मूंगफली का प्रोटीन दूध से मिलता जुलता होता है जबकि इसके चिकनाई घी से मिलती जुलती होती है। मूंगफली खाने से दूध, बादाम और घी तीनों की पूर्ति हो जाती है। स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के कारण यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। मूंगफली को कच्चा या भून कर सेवन कर सकते हैं। मूंगफली से कई स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं। मूंगफली का तेल भी स्वाद और स्वास्थ्य के लिए प्रचलित है।

मूंगफली के गुण, उपयोग और मूंगफली खाने से होनेवाले फायदों की जानकारी निचे दी गयी हैं : 


मूंगफली में छिपा है सेहत का खजाना !


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मूंगफली खाने के फायदे  Health Benefits of Peanuts in Hindi

मूंगफली में मौजूद पोषक तत्व 

करीब 100 gm मूंगफली में 166 कैलोरीज, 26 gm प्रोटीन, 49 gm कार्बोहाइड्रेट्स, 14 gm फैट्स, 2.6 gm फाइबर्स, 17 mg कैल्शियम, 203 mg पोटैशियम, 111 mg फॉस्फोरस, 88 mg सोडियम होता है। इतने सारे पौष्टिक तत्व से युक्त मूंगफली को एक संपूर्ण आहार माना जाता है। 

मूंगफली के गुण 

मूंगफली यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है और खाने में रुचिकर होती है। इसमें तेल का अंश होने से यह वातनाशक होती है पर जो कि यह थोड़ी गर्म करती है इसलिए पित्तकर होती है। इसे सर्दी के मौसम में खाना ज्यादा अच्छा रहता है। 

मूंगफली खाने से क्या फायदे होते हैं ? Health benefits of eating Peanuts in Hindi

मूंगफली खाने से निचे दिए हुए स्वास्थ्य लाभ होते हैं :
  • पाचन शक्ति : मूंगफली खाने से पाचन शक्ति विकसित होती है और साथ ही भूक भी अच्छे से लगती है। 
  • स्तनपान : नित्य कच्ची मूंगफली खाने से दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की मात्रा बढ़ती है। 
  • प्रेगनेंसी : सगर्भावस्था में 60 ग्राम मूंगफली नीत्य खाने से गर्भस्थ शिशु का विकास अच्छा होता है। इसमें विटामिन B 12 होता है। 
  • कब्ज : रोजाना मूंगफली खाने से और दूध पीने से कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है। 
  • कुपोषण : बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए उन्हें रोजाना मूंगफली खिलानी चाहिए। प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत होने के साथ ही इसमें मौजूद अमाइनो एसिड बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। 
  • श्रेष्ठ आहार : बच्चों को खास तौर पर मूंगफली खिलाने की आदत डालनी चाहिए इससे उनका पोषण भी अच्छे से होगा और वह जंक फूड खाने से भी बचेंगे। आप चाहे तो बच्चों को मूंगफली और गुड़ भी खिला सकते हैं या मूंगफली की चिक्की, नमकीन मूंगफली, मुंगफली चाट आदि टेस्टी व्यंजन भी बनाकर खिला सकते है। 
  • हड्डियों की मजबूती : कैल्शियम और विटामिन डी का स्रोत होने से मूंगफली खाने से हड्डिया मजबूत होती है। अगर आप किसी कारणवश दूध नहीं पीते हो तो मूंगफली आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन है।
  • खांसी : मूंगफली गीली खांसी में भी उपयोगी है, इसके रोजाना सेवन से आमाशय और फेफड़ों को मजबूती मिलती है। अगर सर्दी के मौसम में मूंगफली खाएंगे तो शरीर गर्म रहेगा। 
  • कोलेस्ट्रॉल : रोजाना मूंगफली खाने से कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता है  और इसमें मौजूद तेल हार्ट फ्रेंडली होने से दिल की बीमारी होने का खतरा भी कम होता है। 
  • खून की कमी : हर रोज खाना खाने के बाद 50 से 100 ग्राम मूंगफली अगर हम खाए तो इससे खाने का पाचन भी अच्छा होता है, सेहत भी बनती है और खून की कमी नही होती है। 
  • कैंसर : मूंगफली में मौजूद तत्व त्वचा के कैंसर होने की संभावना को कम करते हैं। 
  • रूखी त्वचा : सर्दियों में त्वचा में सूखापन आ जाता है इसीलिए हर रोज मूंगफली का तेल, दूध और गुलाब जल मिलाकर त्वचा की मालिश करें और करीब 20 मिनट बाद नहाए। इससे त्वचा का रुखापन दूर हो कर त्वचा मुलायम होगी। 
  • मुलायम होट : नहाने से पहले प्रतिदिन थोड़ा मूंगफली का तेल लेकर होठों पर कुछ देर मसाज करें। होंठ मुलायम रहेंगे। 
  • विटामिन : प्रतिदिन 1 मुट्ठी मूंगफली खाना से आपके शरीर को प्रोटीन, विटामिन K, E, B, कैलोरीज आदि पोषक तत्व मिलेंगे। 
  • बढ़ती उम्र को रोके : ओमेगा 6 से युक्त मूंगफली त्वचा को मुलायम बनाए रखती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे बारीक रेखाएं और झुर्रियों को जल्दी बनने से रोकता है। 

मुंगफली खाते वक्त यह सावधानी ले Side-effects of Peanuts in Hindi

  • मूंगफली को हर उम्र के लोग खा सकते हैं अगर किसी को गैस की शिकायत होती हो तो उन्हें मूंगफली को भून कर खाना चाहिए। 
  • मूंगफली को हमेशा छिलकों के साथ खाइए क्योंकि इस के छिलकों में भी विटामिंस का स्त्रोत रहता है। 
  • मूंगफली को पानी में कम से कम 6 घंटे भिगोकर फिर खाना चाहिए ताकि उसमें के कुछ हानिकारक तत्व निकल सके जिसे आयुर्वेद में पित्त कहा जाता है। बिना भिगोई हुई मूंगफली खाने से कई बार अरुचि और त्वचा पर दाने निकल सकते हैं या किसी को एलर्जी हो सकती है। 
  • मूंगफली को ऐसे ही या गुड के साथ या सब्जी, खिचड़ी, खीर आदि में डाल नित्य खाना चाहिए। यह वात विकारों को भी नष्ट करती है।
  • मूंगफली शरीर में गरमी करती है इसलिए पित्त प्रकृति के व्यक्ति को इसका सेवन सावधानी पूर्वक करना चाहिए। 
  • मूंगफली का जरूरत से ज्यादा सेवन कई बार एलर्जी लेकर आता है खासकर सेंसिटिव स्किन में , जैसे की शरीर पर चकत्ते, गले और मुंह पर सूजन या अस्थमा जैसे लक्षण इसीलिए इस तरह के कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और मुंगफली का सेवन बंद करें।
तो यह है मूंगफली के अनमोल फायदे। शाकाहारी व्यक्ति मूंगफली खा कर अपनी प्रोटीन की जरूरत को काफी हद तक पूरा कर सकते हैं इसलिए मूंगफली खाये सेहत बनाए।

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आज भारत में हर चार में से एक व्यक्ति को डायबिटीज / मधुमेह हैं। लगभग 25 % भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं। डायबिटीज के इतने रोगी होने के बाद भी भारत में डायबिटीज के प्रति जागरूकता निर्माण नहीं हुई हैं। आज भी ज्यादातर युवा वर्ग के लोग न तो कोई व्यायाम करते है और नाही आहार में कोई विशेष सावधानी बरतते हैं। 

डायबिटीज से पीड़ित लोग स्वस्थ खानपान और जीवन भर हेल्थी डाइट योजना पर अमल कर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। डायबिटीज को रोकने और नियंत्रित करने के लिए कदम उठाते हुए आहार अभाव का कष्ट सहन करने की जरूरत नहीं है, नाही आपको मिठाई को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत है, बल्कि जीवन भर हेल्दी डाइट लेना महत्वपूर्ण है। 

फाइबर से उच्च और शुगर और फैट में कम और दिल के लिए स्वस्थ आहार डायबिटीज प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होता है। डायबिटीज से पीड़ित लोग स्वस्थ खानपान और दैनिक आहार योजना बनाकर शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। डायबिटीज के रोगियों ने कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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डायबिटीज के रोगियों ने कैसा डाइट लेना चाहिए Diet Chart for Diabetes patients in Hindi

डायबिटीज को नियंत्रण करने के लिए आपको कुछ उपायों पर अमल करना होगा .इसके लिए आपको अपने आहार को छोटे भागों में विभाजित करना होगा। नियमित रूप से अपने सभी आहार को लेने की कोशिश करें। इसके अलावा अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट, मिनरल और फाइबर से परिपूर्ण खाने के कई आइटम को जोड़ने का प्रयास करें। 

क्या डायबिटीज होने पर चीनी बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए ? 

मधुमेह होने पर चीनी का बिल्कुल नहीं लेना यह हम सभी के दिमाग में बैठा हुआ है लेकिन अच्छी खबर यह है कि स्वस्थ आहार योजना को ठीक से लागू करने पर आप अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थों का आनंद ले सकते हैं। मिठाई को सीमा से दूर रखने की जरूरत नहीं है जब तक यह एक स्वस्थ भोजन योजना का हिस्सा है और व्यायाम के साथ जुड़ा हुआ है। रक्त में ग्लूकोस की मात्रा नियंत्रण में होने पर आप अन्य आहार का प्रमाण कम कर अपने डॉक्टर की सलाह से सप्ताह में एक-दो बार चीनी खा सकते हैं। 

क्या डायबिटीज में हाई प्रोटीन आहार सबसे अच्छा होता है ? 

अध्ययन से पता चला है कि बहुत ज्यादा प्रोटीन विशेष रुप से पशु प्रोटीन खाना इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बन सकता है जो वास्तव में डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण कारक है। संतुलित आहार स्वास्थ्य की कुंजी है। एक स्वस्थ आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा शामिल होता है। हमारे शरीर को ठीक ढंग से काम करने के लिए तीनों की जरूरत होती है इसलिए केवल हाई प्रोटीन आहार लेने से लाभ होने की जगह नुकसान होता हैं। 

क्या डायबिटीज के रोगियों ने कार्बोहाइड्रेट में कटौती करनी चाहिए ? 

संतुलित अहार खाना सेहत की कुंजी होती है। सर्विंग का साइज और कार्बोहाइड्रेट का प्रकार विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। इसलिए साबुत अनाज (होल ग्रेन) कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान दें क्योंकि है फाइबर का अच्छा स्त्रोत है, आसानी से पच जाता है और रक्त में शुगर के स्तर को सही रखता है। 

क्या डायबिटीज में दूध का सेवन करना चाहिए ?

दूध कार्बोहायड्रेट और प्रोटीन का सही संयोजन होता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। दैनिक आहार में दो ग्लास दूध पीना एक अच्छा विकल्प है। अगर आप रात के समय इन्सुलिन या डायबिटीज की गोली लेते है तो रात को सोने से पहले बिना शक्कर मलाई के एक ग्लास दूध पीकर ही सोना चाहिए जिससे रात में हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा कम हो जाता हैं। 

डायबिटीज के रोगी ने अपने आहार में कौन से फल-सब्जियां लेनी चाहिए ?

अपने आहार में उच्च फाइबर सब्जिया जैसे मटर, सेम, ब्रोकोली, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। इसके अलावा दालें भी एक स्वस्थ विकल्प है और इसे आपके आहार का हिस्सा होना चाहिए। फाइबर से भरपूर फल जैसे पपीता, सेब, संतरा, नाशपति और अमरूद का सेवन भी करना चाहिए। आम, केले और अंगूर में शुगर की उच्च मात्रा होने के कारण इन फलों का सेवन कम करना चाहिए। 

डायबिटीज में कृत्रिम (Artificial) स्वीटनर का उपयोग करना चाहिए ?

कृत्रिम स्वीटनर मूल रूप से शुगर से मिलने वाली कैलोरी को कम करता है। इन गोलियों का सेवन एक दिन में छह गोलियों से कम होना चाहिए। ज्यादा उपयोग लेने से इस के साइडइफेक्ट होने लगते हैं। हालाँकि संयम एक बेहतर तरीके से जीवन रहने के लिए महत्वपूर्ण होता है। मधुमेह नियंत्रित किया जा सकता है अगर डॉक्टर और रोगी संयोजन के साथ काम करें। 

डायबिटीज और मोटापे का क्या संबंध हैं ?

यदि आपका वजन ज्यादा है तो मधुमेह की रोकथाम वजन घटाने पर निर्भर हो सकती है। वजन का हर एक किलो कम करना आपके स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और आपके लिए आश्चर्यजनक हो सकता है। कम कार्बोहाइड्रेट आहार, व्यायाम और आहार योजना आपको वजन कम करने में मदद कर सकती है। 

डायबिटीज में विटामिन डी का क्या महत्त्व हैं ?

हम में से ज्यादातर लोग विटामिन डी को महत्वपूर्ण नहीं समझते हैं लेकिन यह मधुमेह से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसलिए विटामिन डी के स्तर की जांच की जानी चाहिए। कम विटामिन डी मधुमेह का कारण भी हो सकता है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है धूप। 

अवश्य पढ़े - विटामिन डी का महत्व और आहार स्त्रोत 

अपने यह कहावत तो सुनी ही होंगी की जो जैसा आहार लेता है वैसा हो जाता हैं। अगर आपको एक स्वस्थ लंबा और खुशहाल जीवन जिन है तो आपको सात्विक समतोल आहार लेना आवश्यक हैं। डायबिटीज को डाइट से नियंत्रण में रखने के लिए आप अपने डॉक्टर या डायटीशियन से डाइट चार्ट भी तैयार कर उसे अपना सकते हैं। यह स्वास्थय जानकारी हमें डायटीशियन रमेश पटेल ने बड़ोदरा से भेजी हैं। Diabetes diet in Hindi इस विषय पर लेख भेजने हेतु उनका बहोत-बहोत आभार !
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ज्यादातर लोग को स्वस्थ और फिट रहने के लिए सुबह उठते ही गर्म पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीते हैं। इसे लेने से वजन कम होता है और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुडी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है जैसे, शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, पाचन संबंधी समस्या दूर होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और त्वचा में चमक आती है। 

इसके अलावा किसी प्रकार की भी समस्या आने पर लोग हल्दी वाला दूध पीते हैं। लगभग हम सभी लोग गर्म पानी में नींबू मिलाकर और हल्दी वाले दूध पीने के फायदे के बारे में जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इस मिश्रण में थोड़ी सी हल्दी में मिला दी जाए तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। यकीन नहीं हो रहा है ना लेकिन हल्दी वाला पानी स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर होता है। 

आइये जानते है पानी में हल्दी मिलाकर पिने से क्या चमत्कारिक फायदे होते हैं :

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हल्दी वाला पानी पीने के फायदे Health benefits of drinking Warm Turmeric Water in Hindi

  • पचन दुरुस्त रखें / Digestion : कई सालों से यह बात साबित हुई है कि नियमित रुप से हल्दी का सेवन करने से पित्त ज्यादा बनता है जिससे आप का आहार आसानी से हजम हो जाता है और आहार के अच्छे से हजम होने से आप पेट संबंधी बीमारियों से बचे रहते हैं। इसलिए अगर आप अपने पाचन को दुरुस्त रखना चाहते हैं तो आज से ही अपनी दिनचर्या में हल्दी वाला पानी को शामिल करें। 
  • शरीर की सूजन कम करें / Swelling : हल्दी में करक्यूमिन नामक केमिकल की मौजूदगी के कारण यह दवा के रूप में काम करता है और यह शरीर की सूजन को कम करने में सहायक होता है। शरीर में चाहे कितनी भी सूजन क्यों न हो हल्दी वाला पानी पीने से कम हो जाती है। इसके अलावा करक्यूमिन के कारण यह जोड़ों के दर्द और सूजन को दूर करने की दवाइयों से भी ज्यादा अच्छी तरह से काम करता है।
  • मोटापे को करे दूर / Weight loss : हल्दीवाला दूध पिने से पाचन दुरस्त रहता है और फैट का पाचन ठीक रहने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं होती हैं। मोटापे से पीड़ित लोगो के लिए यह मिश्रण बेहद उपयोगी हैं। 
  • दिमाग तेज करें / Mind : हल्दी दिमाग़ के लिए बहुत अच्छी होती है। अगर आप सुबह के समय गर्म पानी में हल्दी मिलाकर पीते हैं तो यह आपके दिमाग के लिए बहुत अच्छा रहता है। भूलने की बीमारी जैसे डिमेंशिया और अल्जाइमर को भी इसके नियमित सेवन से कम किया जा सकता है। 
  • दिल को दुरुस्त रखे / Heart : हल्दी वाला दूध दिल के सेहत के लिए भी बहुत अच्छा होता है। इसे पीने से खून जमता नहीं है और साथ ही यह खून साफ करने में भी मदद करता है। इसके अलावा इससे खून की धमनियों में जमाव भी हटा जाता है। हल्दी वाला पानी भी दिल को दुरुस्त रखने के लिए ऐसे ही काम करता है। 
अवश्य पढ़े : गर्म पानी में निम्बू और शहद मिलाकर पिने के अदभुत फायदे 
  • कोलेस्ट्रॉल पर रखे नियंत्रण / Cholesterol : हल्दीवाला पानी पिने से शरीर में खतरनाक कोलेस्ट्रॉल का प्रमाण नियंत्रित रहता हैं। कई अध्ययनों में यह बात साबित भी हो चुकी हैं। 
  • लिवर के रक्षा करें / Liver : हल्दी का पानी विषैली चीजों से आपके लिवर की रक्षा करता है और खराब लीवर सेल्स को दोबारा ठीक करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पित्ताशय के काम को ठीक करने में मदद करता है इससे आपके लीवर की रक्षा होती है। 
  • एंटी कैंसर गुणों से भरपूर / Cancer : हल्दी में करक्युमिन केमिकल की मौजूदगी इसके एक ताकतवर एंटीआक्सीडेंट बनाता है जो कैंसर पैदा करने वाले कोशिकाओं से लड़ती है। 
  • उम्र के असर को करें बेअसर / Anti-Ageing : गर्म पानी में नींबू, हल्दी पाउडर और शहद मिलाकर पीने से यह शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकालने में बहुत मददगार होता है। इसके अलावा इसे नियमित रूप से पानी से भी फ्री रेडिकल से लड़ने की मदद मिलती है जिससे शरीर पर उम्र का असर कम और धीरे-धीरे पड़ता है

हल्दी वाला पानी बनाने का तरीका How to make Warm Turmeric Water in Hindi

सामग्री 
  1. 1/2 - नींबू 
  2. 1/4 चमच्च - हल्दी पाउडर 
  3. 1 गिलास - गर्म पानी 
  4. 1 चम्मच - शहद 
अवश्य पढ़े : भूक बढ़ाने के घरेलु आयुर्वेदिक नुस्खे 

हल्दी वाला पानी बनाने की विधि

  1. एक गिलास में आधा नींबू निचोड़े।   
  2. अब उसमें हल्दी और गर्म पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें।  
  3. इस मिश्रण में स्वाद अनुसार शहद मिलाएं। 
  4. हल्दी कुछ समय बाद नीचे बैठ जाती है इसलिए पीने से पहले अच्छे से हिलाकर पिए। 
  5. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट पिए।  
  6. यह हल्दीवाला पानी पीने के बाद आधा घंटे तक कुछ और न पिए या खाये। 
इस तरह आप घर पर ही यह आयुर्वेदिक हल्दीवाला पानी पीकर अपने शरीर को निरोगी और युवा रख सकते है और साथ ही अपनी रोग प्रतिकार शक्ति / Immunity को मजबूत रख सकते हैं।

Image Source - http://vkool.com/turmeric-for-arthritis/
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सूखे मेवों में बादाम के पश्चात अखरोट का अपना खास महत्व होता है। इसे अंग्रेजी में Walnut कहा जाता है।  अखरोट की गिरी स्वादिष्ट, पुष्टिकारक तथा शक्तिवर्धक होती है। अखरोट बोने के 30 से 40 वर्ष बाद इस पर फल लगते हैं। फलों को तोड़ कर किसी सुरक्षित स्थान पर रख देते हैं। तीन मास बाद इन फलों के अंदर का  दूध सुख कर गिरी का रूप धारण करता है। 

ऊंचे पर्वतों पर पाए जाने वाला अखरोट पौष्टिक और रुचिकारक होता है। आयुर्वेद के अनुसार यह स्निग्ध, वीर्यवर्धक, कफपित्तकारक एवम दस्तकारी होता है। यह वातशामक होने से वात रोग में खासकर आमवात में विशेष लाभकारी होता है।

अखरोट जल, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज,  विटामिन बी, इ एवं लोह तत्व, कैल्शियम से युक्त होता है। यह कोलेस्ट्रॉल रहित होता है साथ ही इसमें सोडियम की मात्रा भी कम होती है। भारत में अखरोट का प्रयोग  लड्डू, केक, कुकीज, चॉकलेट्स और शेक आदि में किया जाता है।

अखरोट खाने से होनेवाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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अखरोट खाओ : फिट रहो

अखरोट खाने के फायदे और नुक्सान 
Health benefits and side effects of Walnut in Hindi

अखरोट खाने के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Walnut in Hindi 

1. मस्तिष्क की कमजोरी / Sharp Mind 

प्रकृति ने हमें कुछ ऐसी चीजे दी है जिन का आकार, वर्ण या सुगंध से हम इनके फायदे के बारे में जान सकते हैं।  अखरोट का आकार मस्तिष्क के आकार से काफी मिलता जुलता होता है। इसलिए इसे ब्रेन फूड भी कहा जाता है। विटामीन E, ओमेगा 3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्त्रोत होने से इसके रोजाना सेवन से मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है। जो विद्यार्थी अपना दिमाग तेज और चुस्त करना चाहते हैं, साथ ही अपनी स्मरण शक्ति बढ़ाना चाहते हैं उन्हें रोजाना अखरोट का सेवन करना चाहिए। 

बुढ़ापे में होने वाली अल्ज़ाइमर्स जैसी बीमारी के रोकथाम लिए भी अखरोट का नियमित सेवन लाभकारी होता है। अखरोट को एक गिलास दूध के साथ सेवन करने से इसका फायदा ज्यादा होता है। अखरोट की गिरी 25 ग्राम की मात्रा में भोजन के साथ लगातार तीन मास तक खाने से मस्तिष्क की दुर्बलता नष्ट होती है।

प्रयोगविधि - कढ़ाई में थोड़ा देसी घी डालकर उसमें अखरोट की गिरी को थोड़ा देर भूनिये। फिर उसमे चीनी मिलाकर शीतल होने पर खाइए।

2. हृदय के लिए हितकारी / Strong Heart 

अखरोट में L arginine मौजूद होता है, इसके सेवन से दिल दुरुस्त रहता है और हृदय रोगों की संभावनाएं भी कम होती है। अखरोट के सेवन से तनाव का स्तर कम होकर ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। 

3. एक्ज़िमा के लिए / Skin Disorder 

अखरोट की गिरी को एक्जिमा वाले स्थान पर लगाएं करीब 1 महीने में एक्जिमा ठीक हो जाएगा। 

4. शक्तिवर्धक / Health Tonic 

8 अखरोट की गिरी , 4 बादाम गिरी और 8-10 मनूका प्रतिदिन सुबह खाए और इसके पश्चात दूध पीए। इसके रोजाना सेवन से वृद्धों में भी ताकत आती है।

5. बच्चों में कृमि / Deworming

कुछ दिन शाम को बच्चों को दो अखरोट खिलाकर ऊपर से दूध पिलाएं इससे पेट में रहे कृमि बाहर निकल जाएंगे। 

6. पेट में मरोड़ / Abdominal Pain 

जिनको पेट में मरोड़ आती है एक अखरोट को पीसकर उसका लेप नाभि पर करें , मरोड़ आना बंद हो जाएगी।

7. पथरी का इलाज / Stone Problem

अखरोट को छिल्के सहित कूटकर छान लें। 1 चम्मच सुबह शाम लें और ऊपर से ठंडा पानी पिए कुछ दिनों में पथरी निकल जाएगी। 

8. बिस्तर में पेशाब / Bed-wetting

जिन बच्चों को रात में बिस्तर पर पेशाब करने की आदत हो उनके लिए दो अखरोट और करीब 20 किशमिश रात को खिलाए। ऐसा करीब 20 से 25 दिन करें यह आदत छूट जाएगी। 

9. फुंसिया / Acne

अगर फुंसियां अधिक निकलती हो तो साल भर नित्य 5 अखरोट खाने से धीरे-धीरे फुंसिया निकलना बंद हो जाएगी। 

10. सफेद दाग / Vitiligo 

अखरोट खाते रहने से धीरे धीरे सफेद दाग भी चले जाते हैं क्योंकि अखरोट में एक एसा तत्व होता है कि उसके जड़ों के पास की मिट्टी भी काली हो जाती है। 

11. अन्य उपयोग / Other
  • शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है इसीलिए अगर आप वेजिटेरियन है तो इसे रोजाना खाना शुरू करें। 
  • स्तनपान कराने वाली माताए अगर गेहूं के आटे में अखरोट के पत्तों का चूर्ण मिलाकर इसकी गाय के घी में बनी हुई पुरिया करीब हफ्ताभर खाए तो दूध में वृद्धि होगी। 
  • अखरोट के तेल को 20 से 40 मिले की मात्रा में दूध के साथ प्रातः पीने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती , पेट अच्छेसे साफ़ होकर पाचनतंत्र सही रहता है। 
  • अखरोट के सेवन से वजन घटाने में भी सहायता मिलती है। फाइबर की मात्रा अधिक होने से भूख पर नियंत्रण रहता है। जो व्यक्ति अपना वजन घटाना चाहते हैं उन्हें नित्य अखरोट का सेवन करना चाहिए।
  • टाइप टू डायबिटीज के मरीजों में अखरोट का सेवन लाभकारी होता है।
  • अखरोट में एंटी कैंसर तत्व पाए जाते हैं जिससे कई प्रकार के कैंसर से बचाव होता है।
  • जिन पुरुषों में स्पर्म काउंट की कमी हो उन्हें नित्य अखरोट का सेवन करना चाहिए। स्पर्म काउंट में वृद्धि होगी।
  • अगर आपको नींद नहीं आने की समस्या हो रही हो तो कुछ अखरोट रोजाना रात को दूध के साथ खाने की आदत डाल ले। धीरे-धीरे यह समस्या समाप्त हो जाएगी। 
  • रोजाना अखरोट का सेवन आपकी त्वचा को हेल्थी और ग्लोइंग बनाए रखता है। इससे त्वचा लंबे समय तक जवां रहती है, इसीलिए कई सौंदर्य उत्पादक में अखरोट का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • अगर आप ग्लोइंग स्किन पाना चाहते हैं तो चार अखरोट,  दो चम्मच ओटमील, एक चम्मच शहद और एक चम्मच मलाई का पेस्ट बना लें, इसमें थोड़ा जैतून का तेल मिलाकर इस फेस पैक को करीब 30 मिनट चेहरे पर लगाएं। त्वचा पर ग्लो आ जाएगा। 
  • चेहरे की डेड स्कीन और गंदगी हटाने के लिए वालनट स्क्रब का इस्तेमाल करें। इसके लिए दो चम्मच अखरोट पाउडर एक चम्मच शहद और आधा नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बनाएं इसे चेहरे पर 2 से 3:00 मिनट तक रगड़े और फिर कुछ देर रहने दें।  तत्पश्चात ठंडे पानी से धो लें इससे त्वचा की रूखी और बेजान डेड स्किन निकलकर त्वचा मुलायम और चमकदार हो जाएगी। 
  • अखरोट में जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसके तेल से बालों की नियमित मालिश करने से बाल घने मजबूत और सुंदर हो जाएंगे। 

अखरोट खाने के नुक़सान Side effects of Walnut in Hindi

  • अगर आपको नट्स खाने से एलर्जी होती है जैसे स्किन रैश, गले में जकड़न, या सांस लेने में तकलीफ तो आपको अखरोट नहीं खाना चाहिए।
  • काले अखरोट नहीं खाने चाहिए। इसमें आयरन का अवशोषण घटाने वाले तत्व पाए जाते हैं जिससे एनिमिया हो सकता है। काले अखरोट के प्रयिग से किडनी और लिवर डैमेज के कुछ केसेस भी सामने आये है। साथ ही त्वचा पर इनका प्रयोग भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ कैंसर कारक तत्व पाए जाते हैं।
  • खांसी में अखरोट का इस्तेमाल ना करें यह शरीर में पानी की कमी करता है और बुखार में दी जाने वाली दवाई का असर भी कम करता है। 
  • अखरोट के जरूरत से ज्यादा सेवन से दस्त, पेट दर्द आदि समस्या हो सकती है। 

अखरोट कब और कैसे खाना चाहिए ? How to eat Walnuts in Hindi

  • अखरोट खाने का सही समय शीत ऋतु होता है क्योंकि पचने में भारी होने से यह इस ऋतु में आसानी से पचते हैं और शरीर को ताकत भी देते हैं। 
  • अखरोट की गिरी को कभी भी छिलके के साथ खाएं क्योंकि इसके छिलके में 90% से अधिक पोषक तत्व होते हैं।
  • आप 1 दिन में पांच से छह अखरोट खा सकते है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह ले। 
अखरोट के फायदे उसकी नुकसान की तुलना में कहीं ज्यादा अधिक है। इसलिए इस एक सीमित मात्रा में अपने दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया है और इसके लाभ का मजा उठाए।
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प्रेगनेंसी / गर्भधारण महिला के लिए एक अनोखा उपहार है। अगर महिला अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होती हैं तो इसमें कई तरह की जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता हैं। 20 वर्ष की आयु से 30 वर्ष की आयु तक का कालखंड किसी भी महिला को प्रेगनेंसी के लिए उपयुक्त समय होता हैं। 

आजकल पहले तो पढाई और उसके बाद शादी के बाद भी शुरुआत में कुछ वर्ष सेटल होने के लिए महिलाए पहले जॉब करने की सोचती है और बाद में प्रेगनेंसी के लिए प्लान करती हैं। कई महिलाए तो 35 वर्ष की होने के बाद प्रेगनेंसी प्लान करती हैं। अधिक उम्र में प्रेगनेंसी प्लान करना न सिर्फ महिला के लिए अनुचित है बल्कि होनेवाले बच्चे के लिए भी यह सही नहीं होता हैं। 

आइए जाने अधिक उम्र में गर्भावस्था / प्रेगनेंसी के बारे में कुछ तथ्य व बरतने वाली सावधानियां :


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35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंट होने में क्या खतरा है और इस समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
Pregnancy Care Tips in old age in Hindi

35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण करने को मेडिकल भाषा में Elderly Primi कहा जाता है। इस में महिलाओं को दो समूह में बांटा गया है :
  1. वह महिलाएं जो अधिक उम्र में शादी करती है व गर्भधारण जल्दी कर लेती है। 
  2. वह महिलाएं जो जल्दी शादी करती है पर गर्भधारण देर से करती है। 
दूसरे समूह की महिलाओं के गर्भ के दौरान जटिलता पहले समूह की तुलना में ज्यादा होती है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण प्रसव के दौरान मां व शिशु मृत्यु दर में कमी तो आयी है पर फिर भी 35 साल की महिलाओं में प्रसव संबंधित जटिलताएं कम उम्र की महिलाओं से काफी अधिक है। अधिक उम्र की गर्भावस्था के कारण होने वाली जटिलताओं को हम निम्न तरह में बांट सकते हैं :
  1. प्रेगनेंसी के पहले 
  2. प्रेगनेंसी के दौरान 
  3. प्रसव / डिलीवरी के दौरान 
  4. प्रसव / डिलीवरी के बाद

अधिक उम्र में गर्भावस्था के दौरान होने वाली परेशानीLate Pregnancy Complications in Hindi

  • उच्च रक्तचाप / हाय ब्लड प्रेशर : आमतौर पर 35 या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण होने पर भ्रूण में जन्मजात विकृति हो सकती है। इस उम्र में गर्भावस्था के दौरान Pre Eclampsia व Eclampsia की आशंका रहती है। हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी यह दिक्कत गर्भधारण से पहले भी हो सकती है। मरीज का वजन बढ़ना, हाथ-पैरों में सूजन, ब्लड प्रेशर का बढ़ना और पेशाब में प्रोटीन का आना जैसे लक्षण सामने आते हैं। 
  • मोटापा और डायबिटीज : अधिक उम्र में मोटापे के कारण गर्भधारण से पहले हाय ब्लड प्रेशर और असामान्य प्रसव होने की आशंका रहती है। इसके अलावा कई मामलों में अधिक उम्र के चलते गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने की दिक्कत भी हो सकती है। इस वजह से शिशु का विकास जेनेटिक विसंगतियों से भरा, गर्भजल की अधिकता व जटिल प्रसव की आशंका अधिक होती है। 
  • गर्भाशय में गांठ / फाइब्रॉइड : अधिक उम्र में गर्भाशय में फाइब्रॉएड या गांठ बनने की आशंका से गर्भधारण में मुश्किलें वह बार-बार गर्भपात हो सकता है। इसके अलावा गर्भाशय के नीचे खिसकने से भी जटिल प्रसव का खतरा रहता है। 

डिलीवरी के दौरान परेशानियां Complications during Late Pregnancy in Hindi

  1. बार-बार गर्भपात, 
  2. समय पूर्व प्रसव, 
  3. प्रसव / डिलीवरी का समय से काफी बाद होना 
  4. प्रसव के दौरान गर्भाशय का असमान्य संकुचन 
  5. गर्भाशय के मुंह का देर से खुलना 
  6. योनि द्वार के लचीलेपन में कमी 
  7. शिशु का गर्भ में स्थान विसंगतिपूर्ण होने से सामान्य प्रसव की आशंका 
  8. प्रसूति के दौरान व बाद में ब्लड प्रेशर बढ़ना,
  9. बच्चेदानी फटना  
  10. नॉर्मल की बजाय सिजेरियन की आशंका अधिक होती है। 
सुरक्षित प्रसव के लिए जहां तक संभव हो प्रसव अस्पताल में ही कराएं। अस्पताल सभी जीवन रक्षक उपकरणों से सुसज्जित होने के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ भी उपस्थित होते हैं। 

डिलीवरी के बाद समस्या और सावधानी Complication after Delivery in Late Pregnancy

अधिक उम्र में खून के थक्के संबंधी रोग अधिक होते हैं। सिजेरियन से होने वाले अधिकांश शिशुओं में मानसिक दिक्कतें हो सकती है। प्रसव के बाद महिला को आराम करने व स्तनपान और गर्भनिरोधक साधनों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। 

35 वर्ष के बाद प्रेग्नेंट होने पर क्या ध्यान रखें ? Pregnancy care tips in Hindi

35 वर्ष की आयु के बाद प्रेग्नेंट होने पर निचे दी हुई सावधानी बरतनी चाहिए :
  • प्रसव पूर्व महिला को संपूर्ण मेडिकल जांच करानी चाहिए 
  • महिला को अगर ब्लड प्रेशर, शुगर या थायराइड की बीमारी है तो उसका निदान सही समय पर करवाना चाहिए 
  • गर्भधारण पूर्व टॉर्च टेस्ट, TB के यौन रोग की जांच भी जरूरी है। 
  • 35 साल से अधिक उम्र होने पर जेनेटिक जांच भी करानी चाहिए। 
  • डिलीवरी पूर्व फॉलिक एसिड की गोली चार से पांच माह पहले से ही ले जिससे विकृत गर्भ न हो। 
  • खून की जांच और सोनोग्राफी डॉक्टर की सलाह पर कराएं 
  • विशेष जांचे जैसे थैलेसीमिया रोग, नर्वस सिस्टम की विकृति के लिए ट्रिपल टेस्ट डॉक्टर की सलाह से जरूर कराए। 
  • अगर रक्त का ग्रुप RH Negative ग्रुप है तो पति का ब्लड ग्रुप व गर्भवती का एंटीबॉडी टायटर कराएं। सातवे माह में गर्भवती को Anti-D का टीका लगवाए। 
  • गर्भावती को कैल्शियम, विटामिन, प्रोटीन डॉक्टर की सलाह से बराबर लेते रहना चाहिए। 
  • अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूरी जांच जरुर करवाएं। 
  • यदि आप किसी रोग से पीड़ित है तो विशेषज्ञ को इस बारे में जरूर सलाह ले 
  • डिलीवरी के बाद की कमजोरी को दूर करने के लिए हरी सब्जियां, मौसमी फल व डेयरी प्रोडक्ट ले। 
गर्भावस्था केवल महिला के लिए नहीं बल्कि उस महिला से जुड़े पुरे परिवार के लिए एक बेहद अहम् समय होता हैं। ऐसे समय महिला की विशेष देखरेख बेहद जरुरी होती हैं। अगर आप अधिक उम्र में प्रेगनेंसी प्लान कर रहे है तो पहले डॉक्टर की राय अवश्य लेना चाहिए। यह जानकारी हमें डॉ निर्मला शर्मा से मेहसाणा से ईमेल द्वारा भेजी हैं। 
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हम लोग फिट रहने के लिए कई तरह के व्यायाम करते हैं। कुछ लोग सुबह वाकिंग करते है तो कुछ लोग जिम में जाकर पसीना बहाते हैं। हर तरह के व्यायाम शरीर को फायदा जरूर पहुचाते है पर अगर आप किसी ऐसे व्यायाम के तलाश में है जिसे हम सम्पूर्ण व्यायाम कह सके तो वह हैं तैराकी / Swimming

स्विमिंग / तैराकी एक थेरेपी की तरह काम करती है। तैराकी से शरीर पर जमी चर्बी कम होने लगती है और व्यक्ति कहीं ज्यादा उर्जावान महसूस करता है। हर रोज 30 मिनट की तैराकी शरीर से लगभग 440 कैलोरीज कम करती है। पानी की घनता हवा से 800 गुना ज्यादा होती है और इसलिए जब हम तैराकी करते है तो हमारे शरीर के मांसपेशियों की कसरत बेहतर होती हैं।  

तैराकी / Swimming के स्वास्थ्य लाभ और तैराकी करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं : 


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तैराकी के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Swimming in Hindi

  1. मांसपेशियों की मजबूती / Muscles : रेगुलर स्विमिंग करने से अन्य व्यायाम की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मांसपेशियां मजबूत होती है। जिमिंग के मुकाबले तैराकी में 10 गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव होने से शरीर के जोड़ भी मजबूत होते हैं। 
  2. दिल रहता तंदुरुस्त / Heart : स्विमिंग से पूरी बॉडी का मूवमेंट होता है। इससे रक्त-संचार बेहतर होता है। ऐसे में हृदय का काम भी सुचारु होने से यह अंग सेहतमंद रहता है। ह्रदय और दिमाग से जुड़े रोगों की आशंका काफी हद तक कम होने से तनाव भी कम होता है। 
  3. वजन पर नियंत्रण / Weight Loss : यह शरीर की एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। इससे शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती हैं और बॉडी शेप में रहती है। शरीर में लचीलापन लाने के लिए यह बेहतर व्यायाम है। 
  4. कोलेस्ट्रोल रहता नियंत्रित / Cholesterol : ह्रदय रोग और वजन बढ़ने से होने वाले रोगों की आशंका स्विमिंग करने से कम हो जाती है। साथ ही इससे शरीर के लिए जरूरी हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (HDL) की मात्रा बढ़ती है यह बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने से रोकता है। 
  5. डायबिटीज का कम होता खतरा / Diabetes : डायबिटीज 1 और 2 दोनों के मरीजों के लिए स्विमिंग एक थेरिपी की तरह काम करती है। तैराकी से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने लगती है जिससे वजन और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इस वजह से शुगर लेवल में भी उतार चढ़ाव नहीं होता है। 
  6. तनाव / Stress : तैराकी करने से मन प्रसन्न रहता है और शरीर में तनाव कम करनेवाले हॉर्मोन का स्त्राव बढ़ता हैं। डिप्रेशन से लड़ने के लिए यह एक बेहतर थेरेपी हैं। 
  7. रोग प्रतिकार शक्ति / Immunity : अध्ययन से यह बात सामने आयी है की जो लोग हफ्ते में कम से कम 4 दिन तैराकी करते है उनकी रोग प्रतिकार शक्ति औरों के मुकाबले अधिक स्ट्रांग होती हैं। ऐसे लोग कम बीमार पड़ते है और बीमार पड़ते है तो जल्द भी ठीक हो जाते हैं। 

स्विमिंग के लिए कौन सी सुविधाएं है जरूरी ?

स्विमिंग के लिए निचे दी हुई सुविधाएं होना जरुरी हैं। जैसे की :
  1. स्विमिंग पूल के पानी में क्लोरीन का स्तर 0.5 ppm होना चाहिए। 
  2. पानी की नियमित जांच हो ताकी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाव हो सके। 
  3. स्विमिंग ट्रेनर का होना जरूरी है। 
  4. बिगिनर्स के लिए लाइफ जैकेट या ट्यूब उपलब्ध होना चाहिए। 
  5. पुल के पास शॉवर व चेंजिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए। 

स्विमिंग करते समय क्या सावधानी बरते ? Which Precautions to follow while Swimming?

स्विमिंग तो फायदेमंद है ही लेकिन इस दौरान पुल का क्लोरीन युक्त पानी हमारे शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है। स्विमिंग शरीर के लिए संपूर्ण व्यायाम है। यह बॉडी का कई तरह से फायदा पहुंचाती है लेकिन इस दौरान कुछ सावधानियां बरतकर त्वचा आंखें और कान के इन्फेक्शन से बचाया जा सकता हैं। जाने कैसे करें बचाव :
  • आंखें / Eyes : क्लोरीन युक्त पानी आंखो की नमी को कम करता है। इस वजह से आंखों में खुजली और लालिमा जैसी दिक्कत हो सकती है। कंजक्टिवाइटिस इंफेक्शन हो सकता है। स्विमिंग गॉगल्स पहन कर ही स्विमिंग करें। गॉगल ऐसे चुनें जो आपकी आंखों पर फिट बैठता हो। 
  • त्वचा / Skin : जिनकी त्वचा बेहद संवेदनशील होती है उन्हें पूल के पानी से एलर्जी की आशंका रहती है। उन्हें त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं जिनसे खुजली और जलन होती है। जिनकी त्वचा स्विमिंग के बाद रूखी / Dry हो जाती है वह इससे पहले या बाद में मॉइस्चराइजर लोशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। नारियल तेल का प्रयोग भी ले सकते हैं। 
  • कान / Ear : स्विमिंग करने वाले अधिकतर तैराकी में स्विमर इयर्स की समस्या देखी जाती हैं। इस समस्या में तैराक को क्लोरीन युक्त पानी कान में जाने से सूजन, संक्रमण और दर्द होता है। इयरप्लग या कैप पहने। सर्दी जुखाम की समस्या में स्विमिंग न करें। स्विमिंग के बाद कान में खुजली एलर्जी से परेशानी हो तो ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाएं। 
  • बाल / Hairs : पूल के क्लोरीन युक्त पानी के कारण बाल रूखे कमजोर और बेजान हो जाते हैं। पूल में उतरने से पहले बालों में ओलिव ऑइल या नारियल तेल लगाएं। बालों को खुला ना छोड़ें। स्विमिंग कैप पहनें। 
इस तरह आप ऊपर दी हुई सावधानी बरतकर तैराकी का भरपूर लुफ्त उठा सकते हैं। हमारे स्वास्थ्य के लिए हर तरह के व्यायाम आवश्यक है इसलिए अपने क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार हर व्यायाम को समय देना चाहिए और फिट रहने की कोशिश करना चाहिए।
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