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एक अनुमान के मुताबिक भारत में 8 से 10 करोड़ लोगों को Diabetes है और यह संख्या हर वर्ष तेजी से आगे बढ़ रही है। हमारी बिगड़ी हुई जीवन शैली और खानपान की आदतों के कारण भारत में डायबिटीज संक्रामक बीमार की तरह फैल रहा है।

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो कि अगर एक बार हो जाए तो अधिकतर मरीजों को इसका उपचार जिंदगी भर करना होता है। डायबिटीज के रोगियों का मुख्य उद्देश उनके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखना होता है। डायबिटीज से होने वाले दुष्परिणाम से बचने के लिए आपके ब्लड शुगर की मात्रा नियंत्रण में होना बेहद जरूरी होता है। 

शुक्र है की डायबिटीज के रोगी पहले की तुलना में इस रोग की देखभाल को लेकर सतर्क हो गए हैं। घर पर ब्लड शुगर की जांच करने के लिए अब Glucometer उपलब्ध होने से डायबिटीज की देखभाल सहज और सस्ती हो गयी हैं। अब आप घर पर ही ग्लूकोमीटर की सहायता से आसानी से अपने ब्लड शुगर की मात्रा का पता लगा सकते हैं और शुगर लेवल बेहद बढ़ जाने या कम हो जाने की स्तिथि में तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। 

डायबिटीज के रोगियों ने ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए इसकी जानकारी आज इस लेख में हम दे रहे हैं। अगर आप डायबिटीज के रोगी है या आपके जान पहचान में किसी को डायबिटीज है तो यह लेख आपने अवश्य पूरा पढ़ना चाहिए और इसे अपने डायबिटीज से पीड़ित मित्र-परिवार के साथ शेयर भी करना चाहिए। 


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कैसे करे Glucometer का सही उपयोग ? How to use Glucometer in Hindi

आजकल बाजार में कई तरह के ग्लूकोमीटर मौजूद है परंतु सभी प्रकार के ग्लूकोमीटर का काम करने का तरीका लगभग एक सा है। ग्लूकोमीटर में प्रमुख 3 चीजे होती हैं - ग्लूकोमीटर मशीन, सुई और ग्लुको स्ट्रिप 
  • सबसे पहले आपको ग्लूकोमीटर मशीन को चालू करना होता है। इस पर दिए हुए बटन को दबाकर आप इसे चालू कर सकते हैं। अगर स्क्रीन पर चालू करने के बाद कुछ नहीं आ रहा है तो आप यह देखें कि उसमें बैटरी या सेल डाला हुआ है या नहीं। 
  • ग्लूकोमीटर चालू करने के पश्चात ग्लूकोमीटर के साथ मिली हुई ग्लुको स्ट्रिप को ग्लूकोमीटर के अंदर डालिए। ग्लूकोमीटर के स्ट्रिप की 2 बाजू होती है। एक तरफ आपको ब्लड का ड्राप लगाना होता है तो दूसरी और जहां लाइनिंग होती है वह आपको ग्लूकोमीटर के अंदर डालना होता है। 
  • ग्लूकोमीटर में स्ट्रिप डालने पर उस पर ब्लड ड्रॉप का चिन्ह आता है इसका मतलब ग्लूकोमीटर अब तैयार है। 
  • ग्लूकोमीटर में उंगली से ब्लड निकालने के लिए एक सुई / needle होती है जिसे डॉक्टर लांसेट भी कहते हैं। कुछ ग्लूकोमीटर में सुई को मजबूती से पकड़ने के लिए लैंसेट होल्डर भी होता है। 
  • उंगली से ब्लड का सैंपल लेने से पहले उसे स्पिरिट से साफ करें और स्पिरिट को सूखने दे। 
  • अब जिस उंगली से ब्लड सैंपल लेना है उसे दबाकर रखें और बाद में सुई चुभाए।चिकित्सक सलाह देते हैं कि उंगली का पहला ड्रॉप इस्तेमाल ना करें, उसे कॉटन से साफ करे। दूसरा ड्रॉप ग्लुको स्ट्रिप पर लगाएं। 
  • ब्लड ड्राप को टेस्ट स्ट्रिप पर रखने के 5 से 45 सेकंड में ग्लूकोमीटर ब्लड शुगर लेवल बता देता है। इसके बाद लैंसेट और स्ट्रीप दोनों को सही से डस्टबिन (Bio Medical Waste) में फेंक दे। 
  • एक ही उंगली से बार-बार ब्लड ड्राप नहीं निकाले। एक ही सुई का बार-बार उपयोग ना करें ताकि इन्फेक्शन और दर्द ना हो। एक्सपायर हो चुके टेस्ट रिप से ब्लड शुगर जांचेंगे तो गलत परिणाम मिलेंगे।
  • कुछ ग्लूकोमीटर में टेस्ट स्ट्रिप्स के हर पैकेट के साथ एक कोड आता है जिसे ग्लूकोमीटर में लगाना जरूरी होता है। इसके बाद ही ग्लूकोमीटर ठीक से काम करता है। 
  • ग्लूकोमीटर के साथ में मैन्युअल की बुकलेट भी आती है जिसमे ग्लूकोमीटर को उपयोग करने की सारी जानकारी होती हैं। मैन्युअल के अंदर एरर कोड की सूची भी होती है जो कि ग्लूकोमीटर में कोई एरर दर्शाने पर आपके काम आ सकती है। 

ग्लूकोमीटर का उपयोग करते समय क्या ध्यान रखे ?

  1. अगर आपको भूखे पेट शुगर जांच करना है तो कम से कम 8 से 10 घंटा भूखा होने के बाद ही खाली पेट जांच करें। अगर आपके खाली पेट शुगर जांच की संख्या 70 से 110 mg/dl से कम या ज्यादा आती है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 
  2. अगर आपको खाना खाने के बाद की शुगर जांच करनी है तो खाना खाने के 2 घंटे बाद ग्लूकोमीटर से जांच करें। इसकी संख्या अगर 110 से कम या 140 से ज्यादा आती है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 
  3. अगर आप डायबिटीज के रोगी है और आपको घर पर अचानक चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होता है तो तुरंत अपनी शुगर टेस्ट करें। शुगर लेवल 60 mg/dl से कम आने पर तुरंत कुछ मीठा खा लें और अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 
  4. अगर ग्लूकोमीटर में आपके ब्लड शुगर की मात्रा HI लिखकर आती है तो इसका मतलब है कि आपकी ब्लड शुगर की मात्रा 500 से अधिक है और ऐसी स्थिति में भी आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 
  5. अगर ग्लूकोमीटर में आपके ब्लड शुगर की मात्रा LO लिखकर आती है तो इसका मतलब है कि आपकी ब्लड शुगर की मात्रा 50 से कम है और ऐसी स्थिति में भी आपको कुछ मीठा खाना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 
  6. हमेशा अपने ब्लड शुगर का रिकॉर्ड रखें और डॉक्टर को जब भी दिखाने जाए तब यह रिकॉर्ड अपने साथ रखें। 
  7. हर दो-तीन महीने में ग्लूकोमीटर और लेबोरेटरी दोनों में एक साथ ब्लड टेस्ट कराएं और दोनों के जांच के रिपोर्ट का तुलना करें। अगर दोनों में काफी अंतर है तो फिर आपको ग्लूकोमीटर बदल देना चाहिए। 
इस तरह Glucometer यह डायबिटीज के रोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और उपयोगी मशीन है जिसे हर डायबिटीज के रोगी ने अपने घर में जरूर रखना चाहिए। ग्लूकोमीटर की मीटर की सहायता से आप अपने डायबिटीज को अच्छी तरह से नियंत्रित कर सकते है और साथ ही इमरजेंसी में जल्द अपनी ब्लड शुगर का पता लगा सकते हैं।

अगर आपको यह Diabetes के रोगियों के लिए Glucometer के उपयोग से जुडी जानकारी उपयोगी लगती है तो कृपया इस जानकारी को शेयर अवश्य करे !  

योनि मार्ग से होनेवाले गाढ़े, सफेद या हल्के पीले स्त्राव को Leucorrhoea या श्वेत प्रदर कहा जाता है। सामान्य भाषा में इसे ही "सफ़ेद पानी जाना" या White discharge भी कहा जाता हैं। श्वेत प्रदर के बहुत से कारण होते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन इसका मुख्य कारण होता है। 

लगभग हर महिला को कभी न कभी कुछ समय के लिए यह समस्या होती है और कुछ महिलाओं में तो यह सफ़ेद पानी की समस्या इतनी बढ़ जाती है की डॉक्टर से मिलकर इसका लम्बा उपचार कराना पड़ता हैं। आज इस लेख में हम सफ़ेद पानी जाने से जुडी सारी जानकारी देने जा रहे हैं। 

श्वेतप्रदर या सफ़ेद पानी जाने के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलु नुस्खों से जुडी सारी जानकारी निचे दी गयी हैं :  
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सफ़ेद पानी (श्वेतप्रदर) जाने का कारण, लक्षण और उपचार Safed pani ka desi gharelu ilaj

महिलाओं में सफ़ेद पानी जाने का कारण क्या हैं ? Safed pani ka karan

श्वेतप्रदर या सफेद पानी जाना इसे हम दो रूप में देख सकते है।
  1. स्वाभाविक - सामान्यतः यह non pathological होता है और कई बार यह अपने आप बंद होता है और कई बार फिर से शुरू होता है। माहवारी के पहले, माहवारी के बाद, अण्डोत्सर्ग के समय या यौन सम्बन्ध के वक्त सफेद स्त्राव होना स्वाभाविक होता है। सम्भोग के दौरान अगर स्त्राव कम मात्रा में होता है तो दर्द हो सकता है। कई बार यह लड़कियों में पहला मासिक आने के पहले भी होता है और इसे युवावस्था का लक्षण मान सकते हैं। कई बार नवजात बालिकाओं में भी कुछ समय तक सामान्य लिकोरिया रह सकता है।
  2. बीमारी या बीमारी का लक्षण स्वरूप - योनिगत संक्रमण या STD बीमारी के वजह से स्त्राव की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही  इसमें चिकित्सा की जरूरत होती है।

ल्यूकोरिया / सफ़ेद पानी का निदान कैसे करते हैं ?

जब हम योनि के स्त्राव का माइक्रोस्कोप में परीक्षण करते हैं अगर उसमे 10 से ज्यादा WBC मिलते हैं तब उस अवस्था को ल्यूकोरिया कहा जाता है। अगर सफेद स्त्राव कभी-कभी होता है और उसका प्रमाण भी कम रहता है तो यह सामान्य बात है इसमें कोई चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन अगर अत्यधिक स्त्राव होना, स्त्राव के रंग में बदलाव होना, उससे अजीब सी गंध आना यह लक्षण दिखाई दे तो यह या तो किसी संक्रमण , हार्मोन्स में बदलाव या कैंसर की वजह से हो सकता है इसके लिए योग्य चिकित्सा की आवश्यकता होती है। 

Physiologic leucorrhoea / स्वाभाविक श्वेतप्रदर क्या हैं ?

  • सामान्यतः एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्तेजित होने से होने वाले स्त्राव को फिजियोलॉजिकल लिकोरिया कहा जाता है।
  • यह कोई गंभीर समस्या नहीं है, पर इसे जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी सुलझाना अच्छा रहता है। 
  • कई बार यह शरीर की नैसर्गिक संरक्षण प्रक्रिया होती है जिसके तहत योनि का PH बनाए रखने के लिए साथ ही योनिगत पेशियों में लचीलापन रखने के लिए सामान्यतः थोड़ा स्त्राव होता है।
  • कई बार गर्भावस्था में भी एस्ट्रोजन के साथ योनि का रक्तसंचलन बढ़ने की वजह से सामान्य श्वेतप्रदर होता है। 
  • इसके अलावा अत्यधिक उपवास, अधिक वजन उठाने, कामुक चित्रदर्शन, अश्लील वार्तालाप, गलत तरीके से सम्भोग, रोगी व्यक्ति के साथ सम्भोग, योनि की अस्वच्छता,कॉपर टी के प्रयोग के कारण, बार बार गर्भपात करना, अनियमित जीवनशैली जैसे रात्री जागरण,अनियमित भोजन, क्रोध, मानसिक तनाव आदि कई वजहों से भी श्वेतप्रदर हो सकता है। 

Pathological leucorrhoea / संक्रमित श्वेतप्रदर क्या हैं ?

  • इसमें स्त्री के योनि से सफेद,पीला, मटमैला , गाढ़ा स्त्राव अधिक मात्रा में निकलता है। 
  • योनिगत श्लैष्मिक त्वचा में संक्रमण, सूजन या अन्य कोई बीमारी आदि की वजह से यह स्त्राव होता है। 
  • इस वजह से स्त्री कमजोर हो जाती है। 
  • कई बार शर्म या संकोच की वजह से ज्यादातर स्त्रिया यह बात छुपाती है जिस वजह से कई बार यह काफी गंभीर समस्या बन जाती है और इसकी चिकित्सा में समय भी अधिक लगता है।
  • स्त्राव के अलावा इसमें कुछ अन्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे की 
  1. योनिस्थान में खुजली
  2. कमरदर्द
  3. पेट के निचले हिस्से में दर्द
  4. बार बार पेशाब आना
  5. चक्कर या आंखों के सामने अंधेरा आना
  6. पिंडलियों में खिंचाव
  7. कमजोरी लगना
  8. चिड़चिड़ापन
  9. सिरदर्द
  10. भूक कम लगना
  11. कैल्शियम की कमी होना

योनिस्राव के विविध स्वरूप 

  • योनि ग्रीवा से उत्पन्न श्लैष्मिक बहाव को योनिक स्त्राव कहा जाता है। 
  • योनिक स्त्राव एक सामान्य प्रक्रिया है जो मासिक चक्र के अनुसार होती रहती है। 
  • कई बार मासिक धर्म आने के पूर्व एवं बाद में तथा अंडोत्सर्ग के समय योनि से सफेद स्त्राव होता है यह एक सामान्य प्रक्रिया है। 
  • यह सफेद एवं चिकना, गंध रहित होता है। सामान्यतः इस में खुजली नहीं होती अगर इस में खुजली हो तो यह फंगल या मिक्स बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। 
  • साफ एवम पानी जैसा स्त्राव महिलाओं में कई बार होता है खासतौर पर भारी व्यायाम या वजन उठाने पर कई महिलाओं में इसकी शिकायत होती है लेकिन यह भी सामान्य रहता है। 
  • जब यह स्त्राव पीला, हरा, अधिक गाढ़ा, अधिक मात्रा या बदबू लिए होता है तब यह असामान्य होता है। उस वक्त डॉक्टर के पास जाकर चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

असामान्य यौनिक स्त्राव के कारण 

यह इन कारणों से हो सकता है :
  1. योनि में फंगल, बैक्टीरियल या मिक्स संक्रमण
  2. यौन सम्बन्धों से होनेवाला संक्रमण 
  3. शरीर की रोगप्रतिकारक क्षमता कम होने से होनेवाला संक्रमण। खासकर मधुमेह व्याधि में अक्सर फंगल इन्फेक्शन हो जाता है।

सफ़ेद पानी / ल्यूकोरिया का उपचार एवम बचाव Safed pani ka upchar 

  • श्वेत प्रदर के चिकित्सा में सबसे पहला उपाय है योनि की स्वच्छता रखें।
  • प्रत्येक बार मल मूत्र विसर्जन के पश्चात मिथुन के पश्चात योनि को साफ पानी से धोना आवश्यक होता है।
  • एक टब में गुनगुना पानी लेकर उसमें एक चम्मच बोरीक पाउडर डालें और इस में बैठे। इससे जननांगों की सफ़ाई और सिकाई भी होगी।
  • फिटकरी युक्त पानी से योनिमार्ग की सफाई करें।
  • बार बार गर्भपात कराने से भी संक्रमण होकर श्वेत प्रदर की समस्या हो सकती है इसलिए अनचाहे गर्भ स्थापन के प्रति सतर्कता बरतते हुए उचित गर्भनिरोधक उपायों का प्रयोग करें एवं एक या दो संतान उत्पत्ति के पश्चात नसबंदी का ऑपरेशन करा ले।
  • सफेद पानी की शिकायत होने पर बिना विलंब डॉक्टर को बताएं ताकि उसका जल्द-से-जल्द इलाज हो सके और उसकी वजह से ज्यादा संक्रमण ना हो पाए।
  • अगर आपको मधुमेह है तो रक्तशर्करा को नियंत्रण में रखे। 
  • कब्ज मत होने दे। 
  • असुरक्षित यौन सम्बन्धों से बचे। 
  • कामुक विचारों से दूर रहे। अच्छा साहित्य पढ़े।

श्वेतप्रदर / सफ़ेद पानी से बचने के घरेलू उपाय Safed pani ka desi ilaj 

  1. पौष्टिक आहार लें जिससे कि आपकी रोगप्रतिकारक क्षमता बढें। जैसे चोकरयुक्त आटे की रोटी, दालें, जौ का दलिया, हरी सब्जियां, सलाद, फल, चुकंदर, टमाटर, गाजर, काली मिर्च, सुकामेवा आदि को अपने आहार में शामिल करें।
  2. मिर्च मसाले से युक्त, तला हुआ भोजन, बहुत अधिक मात्रा में बैंगन, लहसुन,प्याज, आलू, बासी खाना, अधिक खटाई युक्त आहार आदि अपने आहार में ना ले।
  3. चाय , कॉफी से दूर रहे।
  4. बबूल की छाल और अशोक की छाल पानी में उबाल लें और इस पानी को छानकर इसमें फिटकरी मिलाकर इससे योनि की सफाई करें।
  5. एक चौथाई चम्मच फिटकरी का पाउडर की फक्की सुबह शाम पानी के साथ लेने से भी श्वेत प्रदर ठीक होता है।
  6. गुलाब के ताजे फूलों की पत्तियों को मिश्री के साथ खाकर ऊपर से ठंडा मीठा दूध सुबह शाम पिये। इससे करीब 1 हफ्ते में श्वेत प्रदर के साथ पेशाब में जलन एवं शरीर की गर्मी भी कम हो जाएगी।
  7. आयुर्वेद के अनुसार चावल का धोवन यह श्वेत प्रदर के लिए काफी अच्छा रहता है। 10 ग्राम नागकेसर लेकर चावल के धोवन के साथ पीसे एवम इसमें मिश्री मिलाकर रोज एक कप पीने से कुछ दिनों में श्वेत प्रदर की समस्या कम हो जाएगी।
  8. 1 चम्मच शहद में आधा चम्मच आंवले का पाउडर करीब 1 महीने तक लेने से श्वेत प्रदर में आराम मिलेगा। 
  9. चावल के मांड में स्वादानुसार नमक या शक्कर और भुना जीरा मिलाकर आधा गिलास पीने से भी लाभ मिलेगा। आप चाहे तो आधा गिलास छाच एवं आधा ग्लास मांड मिलाकर भी पी सकते हैं।
  10. जीरा व मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर पीस कर रखे एवं इसे सुबह शाम एक एक चम्मच चावल के धोवन के साथ ले।
  11. केले का प्रयोग जरूर करें। चाहे तो आप खाने के बाद केला ले या दूध में केला मिलाकर खाए या केले में घी मिलाकर खाए। केले के प्रयोग से श्वेत प्रदर में काफी राहत मिलती है।
  12. बड़ी इलायची व माजूफल को समान मात्रा में लेकर पिस ले एवं इनके चूर्ण की दो-दो ग्राम की मात्रा में सुबह शाम पानी के साथ कुछ दिन तक लेने से प्रदर रोग ठीक हो जाएगा।
  13. गोंद को कुछ मात्रा में लेकर घी में तल लें फिर इसमें पानी व शक्कर डालकर उबालकर छानकर प्रतिदिन एक कप पिए, इस से सफेद पानी के साथ कमर दर्द, पिंडलियों में दर्द की तकलीफ भी कम होगी।
  14. आंवला चूर्ण करीब 3 gm की मात्रा में हर रोज सुबह शाम शहद के साथ करीब 1 महीने तक ले।
  15. मुलहठी के चूर्ण को सुबह शाम 1 ग्राम की मात्रा में कुछ दिनों तक ले।
  16. कमर दर्द या जोड़ों के दर्द के लिए त्रिफला गुग्गुल सुबह शाम पानी के साथ लें। अशोकारिष्ट, लोध्रसव जैसी दवाइयां भी आप डॉक्टर के सलाह से ले सकते है। 
  17. गाजर, पालक, गोभी एवं चुकंदर का सूप रोजाना पीने से गर्भाशय की सूजन कम होती है एवम श्वेत प्रदर में लाभ होता है। साथ ही आपका हीमोग्लोबिन भी बढ़ने में मदद होती है।
  18. रोजाना सुबह कच्ची भिंडी खाने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलेगा।
  19. मेथी दाने का पाक या मेथी के लड्डू खाने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलता है एवं शरीर भी पुष्ट होता है। गुड व मेथी का चूर्ण एक एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम खाने से प्रदर रोग में राहत मिलती है।
  20. फालसे का शर्बत पीने से भी श्वेत प्रदर में आराम मिलता है। 
  21. आप चाहे तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करके भी श्वेत प्रदर के चिकित्सा करा सकते हैं।
  22. अपने दैनंदिन जीवन में योग अभ्यास को जरूर शामिल करें।
जो महिलाएं शर्म के कारण डॉक्टर के पास नहीं जा सकती है या जिन्हें थोड़ी तकलीफ है वह यह घरेलू उपचार आजमा सकते हैं लेकिन अगर ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें। 
इस तरह योग्य आहार, उचित व्यायाम, योगा, शारीरिक स्वच्छता साथ ही आवश्यकता पड़ने पर घरेलू उपचार एवं डॉक्टर की चिकित्सा के द्वारा आप श्वेत प्रदर की समस्या से निजात पा सकते हैं।
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आंखें / Eyes मनुष्य का आईना होती है। यह अपने शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होती है। आँखों की असली खूबसूरती इनकी रौशनी होती है। इंसान के लिए दृष्टि एक अद्भुत वस्तु है, क्योंकि इसी से वह ज्ञान सरलता से हासिल करता है। इसीलिए इसे दोषरहित स्वस्थ बनाए रखना सभी के लिए वांछनीय है।

आधुनिक जीवनशैली में सबसे ज्यादा बुरा असर किसी चीज पर होता है तो वो है आँखे। इसकी कई वजह है जैसे -  घण्टों तक कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल पर आँखे जमाएं रखना, नींद की कमी, असंतुलित आहार जैसे फ़ास्ट फ़ूड का अतिसेवन जिससे की आँखों को Vitamin A जैसे कई पोषकतत्व का नही मिलना, आँखों की ठीक तरह से सफाई न रखना, तनाव, काम का बोझ, आनुवंशिकता, धूल- मिट्टी आदि। 

योग विज्ञान में आँखों के लिए कई उपयोगी एवम असरकारक आसन बताएं है। इन योगसनों का नियमित अभ्यास करने से आपकी आँखों की मांस पेशियां लचीली बनती है साथ ही आँखों को ऊर्जा मिलती है व आँखों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। 

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए कौन सा योग करे इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं : 




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आँखों को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए कौनसा योग करे ? Yoga for Healthy Eyes in Hindi

दृष्टि वर्धक अभ्यास आप जब चाहे तब कर सकते हैं फिर भी प्रातः और सायंकाल में करें साथ ही हरियाली के बीच करें तो इसका अधिक लाभ मिलेगा। प्रत्येक अभ्यास के बाद आधा मिनट आंख बंद करके रखें।

1. आँखों पर हथेलियां रखना   
  • उगते हुए सूरज के सामने आंखें बंद करके बैठे।
  • अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ कर गरम कर लें और उन्हें तुरंत आंखों पर रखिए। 
  • कुछ क्षण ऐसा अनुभव करे की हथेलियों की गर्माहट एवं शक्ति निकलकर आंखों में जा रही है।
  • हथेलिया ठंडी होने पर हटाइए। आंखें बंद रखें।
  • ऐसा तीन बार दोहराइए। 
2. पलके झपकाना   
  • ध्यान के किसी भी आसन में आराम से बैठ जाए। 
  • अपने आंखों को खुला रखे। अब तेजी से अपनी पलकें 10 बार झुकाईये और फिर करीब 10 सेकंड के लिए आंखें बंद करें। 
  • तत्पश्चात फिर से तेजी से 10 बार झपकाए और फिर 10 सेकंड के लिए आंख बंद कर के आंखों को विश्राम दें। 
  • यह क्रिया करीब 5 से 10 बार दोहराइये। 
3. दाएं बाएं देखना 
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  • ध्यान के किसी स्थान में बैठे। 
  • दोनों हाथों को कंधों की ऊंचाई तक दोनों ओरसे सीधे फैलाइए। अंगूठे ऊपर की ओर रखें।
  • अब केवल आंखों को क्रम से घुमाते हुए दृष्टि को क्रमशः बाएं हाथ के अंगूठे पर , भ्रूमध्य, दाए हाथ के अंगूठे पर, पैर के अंगूठे पर ले जाएं।
  • ध्यान रखे की सिर को हिलाना नही है। 
  • इस चक्र को 10 से 20 बार दोहराइये। 
  • आधा मिनट के लिए आंखें बंद करके विश्राम करे। पुनः विपरीत क्रम से 10 से 20 बार करें।
4. सामने और दाएं बाएं देखना 
  • ध्यान की पूर्व स्थिति में बैठे हुए बाए हाथ को अंगूठे को ऊपर की ओर कर के सामने फैला कर रखें।
  • दाए हाथ को दाई ओर कंधे की ऊंचाई पर सीधा फैलाएं। 
  • सिर को बिना हिलाए केवल दृष्टि को बाए हाथ के अंगूठे से दाएं हाथ के अंगूठे पर घुमाएं।
  • 10 से 20 बार करने के पश्चात विपरीत हाथ से भी यही क्रिया दोहराए। तत्पश्चात आधा मिनट विश्राम करें।
5. दृष्टि को व्रुत्ताकार घुमाना   
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  • ध्यान के कोई भी आसन में बैठे हुए बाया हाथ बाए घुटने पर एवं दाया हाथ दाएं घुटने पर रखें। 
  • अब अपनी आँखों को नीचें से शुरू करते हुए, बायीं ओर, दाहिनी और, नीचे और फिरसे बायीं ओर घुमाएं। 
  • ऐसा एक आवर्तन हुआ। ऐसे करीब 10 आवर्तन करे। ततपश्चात आधा min आँख बंद करके विश्राम करे। 
  • अब विपरीत दिशा में 10 आवर्तन करे। फिर आधा min आँख बंद कर विश्राम करे। 
  • आखिर में दोनों हथेलियों को एक दूसरे पर रगड़कर आँखों को ऊर्जा प्रदान करे। 
6. दृष्टि को ऊपर नीचे करना    
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  • अभ्यास के पूर्व स्तिथि में बैठे हुए दोनों हाथों की मुट्ठियों को घुटनों पर रखें। अंगूठे बाहर की ओर हो। 
  • भुजाओं को सीधा रखें। 
  • अब दाएं अंगूठे पर दृष्टि केंद्रित कर उसे ऊपर की ओर ले जाए।  साथ-साथ दृष्टि को भी ऊपर की ओर ले जाए।  सिर को हिलाना नहीं है। 
  • अब यही क्रिया बाए हाथ से करे। ऐसे प्रत्येक हाथ से 10 बार दोहराइए।
इसके अलावा योग में आंखों के लिए कई अन्य लाभकारी आसन बताए गए हैं, जिनका नियमित अभ्यास करने से आंखें स्वस्थ रहने में मदद होती है। इन आसनों में आते हैं - 
  1. शीर्षासन,
  2. सर्वांगासन
  3. सूर्य नमस्कार, 
  4. सूर्यभेदी प्राणायाम,  
  5. नेति क्रिया, 
  6. त्राटक आदि। 
इस तरह आप रोजाना यह योग कर अपने आँखों को स्वस्थ और निरोगी रख सकते हैं। यह योग करने से आपकी दृष्टी तेज होती है और चश्मे का नंबर कम होने में भी मदद होती हैं।

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आज भारत में यह हालात है की लगभग हर घर मे किसी न किसी व्यक्ति को उच्च या निम्न रक्तचाप / Blood pressure की समस्या जरूर होती हैं। ब्लड प्रेशर की समस्या इतनी आम हो चुकी है की घर में किसी को ब्लड प्रेशर जांचना आना जरुरी बन चूका हैं। ज्यादातर मामलों में ब्लड प्रेशर की समस्या का पता तब चलता है जब इससे शारीरिक नुकसान हो चुका होता हैं।

जिस तरह डायबिटीज का रोगी इमरजेंसी में घर पर ही ग्लूकोमीटर की सहायता से आसानी से अपनी ब्लड शुगर लेवल की जांच कर लेता है और ब्लड शुगर अधिक बढ़ जाने या कम हो जाने का पता कर सकता है ठीक उसी तरह ब्लड प्रेशर का रोगी भी ब्लड प्रेशर मापने का यन्त्र (Sphygmomanometer) की सहायता से अपना ब्लड प्रेशर कितना है यह पता कर सकता हैं और जल्द डॉक्टर से संपर्क कर सकता हैं। 

आप घर पर ब्लड प्रेशर कैसे जांच सकते हैं इसकी सम्पूर्ण जानकारी विस्तार में निचे दी गयी हैं :

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घर पर ब्लड प्रेशर की जांच कैसे करे ? How to check Blood Pressure at Home in Hindi

घर पर ब्लड प्रेशर की जांच करने के लिए हमें दो चीजों की जरुरत होती हैं :
  1. Stethoscope : जिसे अक्सर डॉक्टर एक बाजु से अपने कान में लगाते है और दूसरी ओर diaphragm से आपके सीने पर लगाकर धड़कन सुनते हैं। इसकी कीमत 500 रूपए से 10 हजार तक हो सकती हैं। घरेलु उपयोग के लिए आप 500 से 1 हजार रूपए तक का स्टेथोस्कोप खरीद सकते हैं।  
  2. Sphygmomanometer : इससे ब्लड प्रेशर की जांच की जाती हैं। यह सामान्य और डिजिटल दोनों प्रकार में मिलता हैं पर डिजिटल में ब्लड प्रेशर कम ज्यादा बता सकता हैं। जो डिजिटल मशीन सटीक BP बताती है वो काफी महँगी आती हैं (लगभग 50 हजार रूपए) घरेलु उपयोग के लिए आप Mercury Spygmomanometer ले सकते है जो की 1 से 2 हजार के बिच स्टैण्डर्ड कंपनी का मिल जाता हैं। 

ब्लड प्रेशर की जांच कैसे की जाती हैं ? Steps of Measuring Blood pressure in Hindi

  • सबसे पहले व्यक्ति (रोगी) के बाए (Left) हाथ पर BP मशीन का कफ बांधे। कफ इस तरह बांधे के कफ का निचला हिस्सा कोहनी (Elbow) से थोड़ा सा ऊपर ख़त्म होगा। कफ बेहद टाइट या बेहद ढीला बंधा नहीं होना चाहिए। कफ इस तरह बांधे की कफ को लगी दो नली व्यक्ति के हाथ के अंदर की ओर यानि शरीर के साइड में होनी चाहिए। 
  • रोगी का हाथ और BP की मशीन दोनों समांतर होना चाहिए। रोगी खड़ा और BP मशीन निचे या BP मशीन ऊपर और रोगी निचे बैठा हुआ ऐसा नहीं होना चाहिए। 
  • अब स्टेथोस्कोप को कान में लगाकर रोगी के कोहनी के ऊपर diaphragm को रखे। 
  • BP मशीन के बॉल के वाल्व को घुमाकर टाइट करे और बॉल को दबाते हुए BP की मशीन का प्रेशर बढ़ाये। जिस प्रेशर पर आपको कोहनी में  pulse का आवाज स्टेथोस्कोप से सुनना बंद हो जाये उससे 10 अंक अधिक तक प्रेशर को बढ़ाये।  
  • अब वाल्व को धीरे से थोड़ा ढीला करे और BP की मशीन का प्रेशर कम करे। 
  • BP की मशीन में पारा (Mercury) के जिस अंक पर पहली बार आपको स्टेथोस्कोप से pulse की आवाज सुनाई देंगी वह नोट करे। इसे ऊपर का ब्लड प्रेशर यानि Systolic Blood pressure कहा जाता हैं। 
  • अब धीरे-धीरे बॉल का वाल्व को घुमाकर ढीला करते रहे और जब Pulse की आवाज सुनायी देना बंद कर देती है वह अंक नोट करे। इसे निचे का BP यानि Diastolic blood pressure कहा जाता हैं। 
  • अंत में पूरा वाल्व खोल दे और कफ को दबाकर पूरी हवा निकाल दे। 
  • अगर आपके पास स्टेथोस्कोप नहीं है तो आप BP मशीन और हाथ से केवल आप ऊपर का BP जांच सकते हैं। इसके लिए कलाई पर हाथ रख नस का परिक्षण करे और प्रेशर बढाकर कम करते समय जब आपको उंगली से कलाई में नस का एहसास पहली बार होता हैं वह ऊपर का BP हैं।  
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ब्लड प्रेशर की जांच करते समय किन बातों का ख्याल रखे ? Things to remember while measuring Blood Pressure in Hindi

  1. किसी भी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर तुरंत नहीं लेना चाहिए। व्यक्ति को पहले 5 मिनिट शांति से लेटने दे और उसके बाद ही ब्लड प्रेशर जांचे। ब्लड प्रेशर लेते समय व्यक्ति शांत और संतुलित होना चाहिए। कोई व्यायाम, सीढ़ी चढ़ना, तेज चलना, तनाव या घबराहट के कारण भी कभी-कभी थोड़े समय की लिए ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता हैं। 
  2. स्टेथोस्कोप से आपको आवाज न आये तो इसे निचे से diaphragm को घुमाकर देखे, diaphragm पर स्पर्श करने से कान में आवाज आना चाहिए तब उसे चालू समझे।  
  3. व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 140/90 mmHg से अधिक या 90/60 mmHg आने पर 3 बार BP जांचे और तीनों का average निकाले। एक सामान्य वयस्क व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg रहता हैं। 
  4. व्यक्ति के दोनों हाथों में ब्लड प्रेशर की जांच करे और जिस हाथ में अधिक ब्लड प्रेशर आता है वह सही ब्लड प्रेशर मानना चाहिए। 
  5. समय-समय पर ब्लड प्रेशर की मशीन और स्टेथोस्कोप सही है या नहीं या इनमे कुछ गड़बड़ी हैं इसकी डॉक्टर से दिखाकर जांच कराये।   
  6. अगर व्यक्ति का BP 140/90 mmHg या इससे अधिक है या 90/60 mmHg या इससे कम है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 
  7. डिजिटल मशीन में BP जांचना आसान होता है। इसमें केवल ऊपर दिए हुए तरीके से आपको केवल कफ बांधना है और मशीन चालू करना होता हैं। Start दबाने पर मशीन अपने आप कफ में हवा भरता है और धीरे-धीरे प्रेशर कम करता हैं। अंत में मशीन में आपका BP दर्शाता हैं। अगर आपको सामान्य मशीन से BP करने में दिक्क्त होती है तो आप बेसिक डिजिटल BP की मशीन ले सकते है जो 2500 से 5000 तक आती है। इस मशीन में BP 10 से 20 अंक तक कम-ज्यादा दिखाता हैं।  
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ब्लड प्रेशर जांचने की यही जानकारी यहाँ पर हम पाठकों के लिए केवल इसलिए दे रहे है ताकि आप अपने या अपने घर के सदस्यों का समय-समय पर ब्लड प्रेशर का रिकॉर्ड रख सके और ब्लड प्रेशर की तकलीफ बढ़ जाने से पहले डॉक्टर से इसका ईलाज करा सकते हैं।  

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