Latest Post

आज की हमारी जिंदगी में हमें तरह-तरह की बीमारियों ने घेरा हुआ है और कई बीमारियां हमें कम उम्र में ही होने लगी है, जैसे Diabetes, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां आदि। इसकी मुख्य वजह है हमारी आधुनिक जीवनशैली जिसमें असंतुलित आहार विहार, कसरत का अभाव, कम हो रही प्रतिकार क्षमता, बढ़ता जा रहा आलस्य ये सब जिम्मेदार है।  

आज डायबिटीज के मरीजों की संख्या इतनी बढ़ रही है कि कुछ ही दिनों में हमारा देश शायद डायबिटीज के रोगियों की संख्या में दुनिया में नंबर एक पर आ जाएगा। इस खतरे से बचने के लिए हमें सजग होना बहुत जरुरी हो गया है और साथ ही हमारी दिनचर्या, हमारे आहार विहार में परिवर्तन लाना हमारी जिम्मेदारी बन गई।

जिस तरह मां बाप की जायदाद बच्चों को मिल जाती है उसी तरह कुछ बीमारियां भी ऐसी है जो मां-बाप को होती है और अनुवांशिकता से बच्चों में आने के चांस काफी बढ़ जाते हैं जैसे कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन आदि। और ऐसे में हमारी बिगड़ी हुई जीवनशैली, मेहनत का अभाव, जंक फूड का अति सेवन आदी वजह से इन बीमारियों को रोक पाना हमारे लिए काफी मुश्किल हो रहा है।

डायबिटीज के मरीजों में कैलोरीज बर्न करना और ब्लड शुगर को नियंत्रण में लाने के लिए संतुलित आहार के साथ कसरत व योग का अपना अलग ही महत्व होता है। योग की मदद से डायबिटीज काफी हद तक नियंत्रण में आ सकता है, या यूं कहिए अगर हम संतुलित आहार के साथ योग को अपने जीवन का एक हिस्सा बनाएं तो आप डायबिटीज से निजात भी पा सकते हैं। कसरत व योग के द्वारा डायबिटीज का प्रतिबंध और चिकित्सा यह दोनों बातें साध्य हो सकती है।

yoga-for-diabetes-sugar-patients-in-hindi

डायबिटीज को ठीक करने के लिए कौन से योगा करे ? Yoga to control Diabetes in Hindi

योग का अंतिम ध्येय रहता है शरीर और मन का सामंजस्य। जब मन और शरीर का असंतुलन होता है तब रोगों की उत्पत्ति होती है। " फ्रीडम ऑफ डायबिटीज" इस संस्था द्वारा किए गए जांच में यह पता चला है कि मधुमेह यह एक जटिल बीमारी होने के बावजूद भी पूरी तरह ठीक हो सकती है, बशर्ते हम उस का पूरा ख्याल रखें तो। माना जाता है कि हर रोज करीब 200 कैलरीज बर्न हो इतनी कसरत और योगा मधुमेह,मोटापा, हाइपरटेंशन को ठीक करने के लिए काफी होता।

कई सालों से डायबिटीज की दवाइयां ले रहे मरीजों को अगर हम देखेंगे तो वह बाहर से तो हट्टे-कट्टे लगते हैं लेकिन अंदर से वह बीमार होते हैं। इस बीमारी की मुख्य वजह रहती है उनका निष्क्रिय हुआ अग्न्याशय याने Pancreas, मोटापा, आलस्य, चिंता, तनाव आदि।

अगर हम प्रतिदिन करीब 45 मिनट तक योग, प्राणायाम, शवासन, ध्यान आदि करें तो हमारे शरीर के साथ हमारा मन भी क्रियाशील और सकारात्मक होने लगता है। शरीर एवं मन का संतुलन एवं कार्य सुचारु ढंग से सिर्फ योग द्वारा ही हो सकता है। नियमित योगाभ्यास से ह्रदय, श्वसन संस्था पचन संस्था आदि शरीर की अनेक क्रियाएं सही तरीके से चलने लगती है।

मधुमेह में योगा करने से आपको दो लाभ होंगे , 
  1. आपका डायबिटीज नियंत्रण में रहेगा। 
  2. डायबिटीज से होने वाले दुष्परिणामों से आप लंबे समय तक बच पाएंगे।
शरीर में जमी हुई चर्बी कम होने के लिए योग के साथ कसरत का भी काफी महत्व होता है। इसके लिए हमें नाड़ी की गति बढ़ाने वाले व्यायाम करने होते हैं जैसे तेज चलना, दौड़ना, साइकिलिंग, स्विमिंग, नृत्य, ट्रेकिंग आदि एरोबिक गतिविधियों को भी योग के साथ करना चाहिए। 

निम्नलिखित योगाभ्यास को अपने जीवन शैली का हिस्सा बनाकर आपको डायबिटीज से लड़ना होगा। आप यह योगाभ्यास सुबह या शाम जिस भी वक्त आपको समय मिले कर सकते हैं। इसके लिए आपका पेट खाली होना आवश्यक है या फिर आप खाने के 3 से 4 घंटे बाद कर सकते हैं।

डायबिटीज के रोगियों ने कौन से योग करना चाहिए ? Yoga in Diabetes in Hindi 

डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए डायबिटीज के रोगियों ने निचे दिए हुए योग करना चाहिए। योग की सम्पूर्ण विधि, लाभ और सावधानी की पूरी जानकारी पढने के लिए आप योग के नाम के उपर click करे।
  • सूर्यनमस्कार : डायबिटीज के व्यक्तियों के लिए सबसे लाभकारी और सरल आसन है। इस योगासन में करीब 12 आसनों का समावेश होता है। इसे करने से पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण की क्रिया सुचारू रूप से चलती है। शरीर के सभी अवयवों के कार्यों में सुधार आता है। हर रोज करीब 6 से 8 सूर्यनमस्कार करना चाहिए। अपनी ताकत के अनुसार आप इनकी संख्या भी बढ़ा सकते हैं।
  • पश्चिमोत्तानासन : डायबिटीज में उपयोगी यह आसन करने से शरीर में प्राण ऊर्जा बढ़ती है। श्रोणि एवं पेट के अवयव सक्रिय होते हैं। शरीर को आगे के साइड मोड़ने से चेहरे का रक्त संचार अच्छे तरीके से होता है तथा मन को शांति भी मिलती है। इस आसन को करने से पेट, जांघ एवं बाहू स्नायुओं को मजबूती मिलती है।
  • योगमुद्रासन : यह आसन अग्न्याशय की कार्यक्षमता बढ़ाकर इन्सुलिन की निर्मिति बढ़ाता है। यह आसन करनेसे पेट की अतिरिक्त चर्बी कम होकर वजन कम होने में मदत मिलती है। कब्ज एवं पाचन संबंधी रोगों को दूर करता है। साथ ही रीढ़ की हड्डी को मजबूत एवं लचीली बनाता है।
  • वज्रासन : खाने के बाद भी कर सकने वाला वाला यह एकमेव सरल आसन है। इससे पाचन तंत्र  मजबूत बनता है एवं मन को शांति मिलती है। रीढ़ की हड्डी के नीचे रहनेवाले अवयवों का इस आसन द्वारा मसाज होता है। 
  • बलासन : डायबिटीज को जड़ से समाप्त करने में मदद करने वाला यह आसन बच्चों की मुद्रा नाम से भी जाना जाता है। यह  थकान को दूर करता है एवं स्पाइन, जंघा तथा टखनों की स्ट्रेचिंग करने में मदद करता है। कमर दर्द कम करने में भी आसन मदद करता है।
  • अर्धमत्स्येन्द्रासन : रीढ की हड्डी को मजबूती प्रदान करने वाला यह आसन पेट के अंगों की मसाज करता है। फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है।
  • सुप्तमत्स्येन्द्रासन ; यह आसन पेट के अवयवों को सक्रिय बनाकर पाचन तंत्र में सुधार लाता है। यह आसन मधुमेह से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए अच्छा होता है।
  • उष्ट्रासन : उष्ट्रासन पेंक्रियाज को उत्तेजित कर, इंसुलिन के स्त्राव को मदद करता है, इस वजह से डायबिटीज कंट्रोल में रहने में मदद मिलती है। अगर आप सही तरीके से यहां आसन करते हैं तो आपके पेट की चर्बी काफी कम होगी।
  • गोमुखासन : मधुमेह में यह आसन अत्यंत लाभकारी होने के साथ वजन कम करने में मदद करता है।
  • सेतूबन्धासन : यह आसन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है, साथ ही पाचन तंत्र में सुधार लाता है।
  • धनुरासन : मधुमेह के मरीजों के लिए अत्यंत लाभदायक यह आसन अग्न्याशय को सक्रिय बनाता है। इस आसन को नियमित करने से पीठ एवं रीढ की हड्डी का मसाज अच्छी तरह से होता है। कब्ज से भी यह आसन राहत दिलाता है।
  • भुजंगासन : भुजंगासन से रीढ़ की हड्डी लचिली बनती है। पेट की अतिरिक्त चर्बी कम होकर मोटापा कम होता है। कब्ज की शिकायत दूर होने में मदत होती है।
  • मण्डूकासन : डायबिटीज के लिए मरीजों के लिए हर रोज दो से तीन बार मंडूकासन करना, काफी फायदेमंद होता है।
  • चक्रासन : स्पाइन को स्ट्रेच करने के लिए एवं मसल्स को आराम देने के लिए इस आसन को सर्वोत्तम माना गया है, इसके साथ यह मस्तिष्क को भी रिलैक्स करता है।
  • हलासन : पोश्चर की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के लिए यह आसन वरदान माना गया है। यह थायराइड ग्रंथि, फेफड़ों तथा अन्य  अवयवों को उत्तेजित करता है जिस कारण शरीर में रक्त संचालन तेजी से होता है।
  • सर्वांगासन : थायराइड व पैराथाइरॉइड के कार्य को क्रियाशील करने के लिए आसन विशेष भूमिका निभाता है,  जिससे हारमोंस व  मोटापा नियंत्रित रहता है। इस आसन को नियमित करने से पाचन तंत्र, नर्वस तंत्र और श्वसन तंत्र सुचारु रुप से काम करते हैं।
  • शवासन : पूरे शरीर को शिथलता एवं आराम प्रदान करने वाला यह आसन व्यक्ति को ध्यान की गहरी अवस्था में ले जाता है। जिससे मन शांत एवं ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। डायबिटीज की चिकित्सा मे मन की चिकित्सा का भी अपना महत्व होता है।
  • कपालभाति प्राणायाम : कपालभाती प्राणायाम से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती है, पेनक्रियाज के बीटा सेल्स रीजनरेट होने में मदद मिलेगी। यह प्राणायाम रक्त संचरण को सुधारता है, साथ ही मस्तिष्क के तंत्रिकाओं में उर्जा प्रदान कर मानसिक शांति देता है। डायबिटीज के मरीज में आंखों की समस्या होने का डर रहता है, नियमित कपालभाति करने से आंखों की रोशनी लंबे समय तक अच्छी व तेज बनी रहेगी। डायबिटीज के मरीजों को हर रोज कम से कम 15 से 20 मिनट कपालभाति अवश्य करना चाहिए। जिस तरह डायबिटीज को ' मदर ऑफ ऑल डिसीज़ ' कहा जाता है, उसी तरह कपालभाति को मधुमेह के साथ सभी रोगों का नाश करने वाला कहा गया है।
  • अनुलोम विलोम प्राणायाम : मधुमेह के कारण होने वाले हृदय, किडनी, त्वचा, आंख आदि के होने वाले सारे दुष्परिणाम इससे दूर होते जाएंगे।  रोज करीब 10 से 15 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।
  • भ्रामरी प्राणायाम : चिंता, तनाव यह भी डायबिटीज का एक मुख्य कारण होता है। भ्रामरी प्राणायाम से मन शांत होकर चिंता तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • उज्जयी प्राणायाम : उज्जाई प्राणायाम से शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं साथ ही अतिरिक्त चर्बी कम होकर मोटापा कम होने में मदद मिलती है। चिंता और तनाव दूर करने में यह आसन अत्यंत लाभप्रद है।
  • भस्त्रिका प्राणायाम : इस प्राणायाम में पेट का उपयोग अधिक होने से पेट के अतिरिक्त चर्बी कम होने में मदद मिलती है साथ ही पाचन शक्ति में भी वृद्धि होती है। 
इस आर्टिकल में लिखे गए योगासनों को आपको अपने दैनिक कसरत जैसे चलना, दौड़ना, साइकिलिंग आदि जो भी आप करते हैं इसके अलावा समय देना होगा और साथ ही अपनी दवाइयां और अपना संतुलित आहार भी सही समय पर लेना होगा। दवाइयां अपने मन से बंद ना करे। दवाइयों का डोस एडजस्ट करना डॉक्टर पर छोड़ दे। समय समय पर खून की जांच करवाते रहे एवम डॉक्टर की सलाह लेते रहे।

इस तरह डॉक्टर द्वारा दी गई दवाई, योग, आयुर्वेदिक प्राकृतिक दवाइयां ( डॉक्टर की सलाह से ), संतुलित आहार, कसरत एवं समय समय पर नियमित जांच करके आप मधुमेह को नियंत्रित रख सकते हैं एवं स्वस्थ जीवन का आनंद ले सकते हैं।
अगर यह Yoga to control Diabetes in Hindi लेख पसंद आया है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे ! 

Liver यह शरीर में चयापचय / Metabolism का मुख्य अवयव होता है। Liver में ही फैट बनता है एवं लिवर की मदद से दूसरे अवयव तक फैट पहुंचता है। यह ब्लड में से भी फैट को निकालता है। हमारे लिवर में कुछ फैट सामान्यतः रहता है लेकिन अगर यह लीवर के वजन से 5 से 10% बढ़ जाए तो इसे Fatty Liver कहा जाता है। 

Fat याने Liver पर Glucose और Tryglycerides ( विशिष्ट प्रकार का Cholesterol ) की अत्याधिक मात्रा जमा हो जाती है। ज्यादा फैट लिवर की कार्यप्रणाली को धीमा कर देता हैं। यह एक परिवर्तनीय स्तिथि है। आजकल के बिगड़ते जीवनशैली के कारण कई लोगों में Fatty liver की समस्या पायी जाती हैं। 

Fatty liver क्या होता हैं और इसका उपचार कैसे किया जाता है इसकी जानकारी आज इस लेख में हम देने जा रहे हैं :


fatty-liver-causes-symptoms-treatment-yoga-in-hindi

Fatty Liver का कारण, लक्षण, उपचार, घरेलु उपाय और योग Fatty Liver causes, symptoms, treatment and Home remedies in Hindi 

Fatty Liver क्या होता हैं ? What is Fatty Liver in Hindi 

सामान्यतः Fatty Liver, यह समस्या शराब पिने वाले व्यक्ति में होती है फिर भी यह किसी में भी हो सकती है। Liver में सामान्य से ज्यादा Fat जमा होने की स्तिथि को Fatty Liver कहा जाता हैं। साधारणता 10 में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित होता है। 

Fatty Liver के मुख्य दो प्रकार होते हैं  
  • Alcoholic Fatty Liver Disease (AFLD) : बहुत ज्यादा प्रमाण में शराब / अल्कोहल का सेवन करने वाले व्यक्तियों में यह पाया जाता है। कभी-कभी एक साथ बहुत अधिक मात्रा में ड्रिंक करने के तुरंत बाद भी इसे देख सकते हैं। यह अनुवांशिक भी हो सकता है। इसके अलावा ALD होने की दूसरी वजह यह भी हो सकती है - 
  1. हेपेटाइटिस सी : इससे लीवर में सूजन आ सकती है    
  2. शरीर में बहुत ज्यादा मात्रा में आयरन होना
  3. अतिमोटापा
  • Non Alcoholic Fatty Liver Disease (NAFLD) : इसमें liver की सेल्स को fat को तोड़ने में परेशानी होती है, जिस वजह से liver में अधिक मात्रा में fat जमा होता है। सामान्यतः liver में जमा fat का उपयोग हमारा शरीर आवश्यकतानुसार करता है पर जब यह fat अधिक होता है और उसका उपयोग कम होता है ( आरामदायी जीवनशैली के कारण ) तो यह Fatty Liver में बदल जाता है। इस प्रकार की कुछ खास वजह नहीं होती है। कई बार यह सदियों से पीढ़ियों में भी चलता है। कुछ अलग कारण यह भी हो सकते हैं। जैसे की :

  1. कुछ विशिष्ट प्रकार की दवाइयां जैसे एस्पिरिन, स्टेरॉइड्स, टेट्रासाइक्लिंन आदि का अतिसेवन
  2. वायरल हिपेटाइटिस
  3. ऑटोइम्यून ऑर इनहेरिटेड लीवर डिजीज
  4. तेज गति से वजन कम होना
  5. कुपोषण 
  6. व्यायाम ना करना 
  7. एक शोध के अनुसार छोटी आंत में बैक्टीरिया का प्रमाण अधिक होना या छोटी आंत में कुछ बदलाव होना भी फैटी लीवर को बढ़ावा देता है। 
  8. बदलती लाइफस्टाइल और अयोग्य आहार विहार की वजह से फैटी लीवर के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

  • नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिसीज के 2 प्रकार किए जाते हैं। 

  1. Isolated Fatty Acids
  2. Non Alcoholic Steato Hepatitis ( NASH ): NASH यह फैटी लीवर का एडवांस और डेंजर रूप है। इसमें लिवर सेल्स में फैट के साथ सूजन और डैमेज हो जाता है जिस वजह से सिरोसिस, ब्लीडिंग, लीवर फेलियर, लिवर कैंसर आदि कॉन्प्लिकेशन्स होते हैं।

  • Pregnancy में Fatty Liver की समस्या : यह प्रकार काफी कम देखा जाता हैं। मां और बच्चा दोनों के लिए रिस्की होता है। दोनों में से किसी एक में लीवर या किडनी फेलियर भी हो सकता है। इस प्रकार में कई बार सीरियस इंफेक्शन या ब्लीडिंग होने की संभावना रहती है। प्रेगनेंसी में फैटी लीवर की कुछ खास वजह पता नहीं चली है पर हो सकता है यह हार्मोन में बदलाव के कारण होता हो। जैसे ही इसका निदान होता है, महिला की तुरंत डिलीवरी करनी चाहिए। पेशेंट को कुछ दिन इंटेंसिव केयर में रखने की जरूरत हो सकती है और कुछ हफ्तों में ही उसका लिवर सामान्य हो जाता है।

फैटी लिवर के लक्षण क्या हैं ? Fatty Liver symptoms in Hindi 

कई बार हमें फैटी लीवर होता है पर इसका पता नहीं चलता। शुरुआत में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखायी देते हैं, खासकर मध्यम अवस्था तक। कई बार तो बरसों बाद या गम्भीर अवस्था में कुछ ऐसे लक्षण सामने आ सकते हैं। जैसे की :
  1. थकावट 
  2. वजन कम होना 
  3. भूक न लगना 
  4. कमजोरी 
  5. जी मचलना 
  6. अत्याधिक पसीना
  7. संभ्रम 
  8. फैसला लेने में दिक्कत 
  9. एकाग्रता का अभाव आदि
कुछ दूसरे लक्षण भी देख सकते हैं। जैसे की :
  1. लीवर की साइज बड़ी होना, 
  2. पेट के बीचमें या दाई और दर्द होना,  
  3. गर्दन और आर्म्स के नीचे की त्वचा गहरे रंग की होना इत्यादि।
  4. अगर आपको AFLD है तो इसमें बहुत ज्यादा ड्रिंक करने के बाद लक्षण बढ़ सकते हैं। धीरे-धीरे आपको सिरोसिस या ( scarring of liver ) लिवरक्षति हो सकता है, जिसमें आपके शरीर मे द्रव जमा होना, मांस पेशियों का अपक्षय ( wasting of muscles ), शरीर के अंदर रक्तस्त्राव , पीलीया ( yellowish discoloration of eyes and skin ) लीवर फेलियर आदि समस्याएं हो सकती है। 
हमारे आहार द्वारा शरीर में आने वाले तथा खून में रहने वाले हानिकारक पदार्थों को liver detoxify करता है।अगर लीवर में फैट ज्यादा जमा हो जाए तो यह प्रक्रिया धीमी होती जाती है। लिवर नई कोशिकाएं बनाकर इस क्षति को पूरी करने की कोशिश करता है, लेकिन यह क्षति होती रहती है, जिससे लिवर पर कई जख्म हो जाते हैं जिसे सिरोसिस कहा जाता है। इस अवस्था की कोई चिकित्सा नही है। इसका एकमात्र इलाज लिवर ट्रांसप्लांट है।

Fatty Liver का निदान कैसे किया जाता है Fatty liver disease diagnosis in Hindi

कई बार हम डॉक्टर द्वारा रुटीन चेकअप करवाते हैं या किसी और वजह से सोनोग्राफी होती है तो हमें Fatty Liver का पता चलता है, जब की शुरुआती अवस्था में हमें इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं।
Fatty Liver का निदान में निचे दी गयी जांचे की जाती हैं :
  1. खून जांच : इस टेस्ट में Liver enzymes जैसे की SGPT का प्रमाण ज्यादा होना फैटी लीवर की ओर इशारा करता है।
  2. Sonography / CT Scan : सोनोग्राफी और एमआरआई की मदद से हम फैटी लीवर का निदान कर सकते हैं।
  3. बॉयोप्सी : इसमें डॉक्टर द्वारा सुई की मदद से लीवर का छोटा नमूना लिया जाता हैं जिनकी बॉयोप्सी की जाती है, जिससे लीवर के फैट, इंफ्लामेशन , डैमेज सेल्स का पता चलता है।
Fatty Liver की चिकित्सा कैसे की जाती हैं ? Fatty Liver treatment in Hindi 
  • Fatty Liver के लिए कोई विशेष चिकित्सा नहीं है। अगर आपको ALD है और आप अधिक शराब पीते है तो आपको तुरंत शराब पीना बंद करना चाहिए, यही इसकी मुख्य चिकित्सा है। अगर नहीं किया तो धीरे-धीरे आपको Alcoholic Hepatitis या Cirrhosis हो सकता है जो कि एक गंभीर निशानी है।
  • अगर NALD है तो आपने शराब नहीं पीना चाहिए। 
  • NASH  पर बहुत सी दवाइयों का रिसर्च हुआ है लेकिन इस बीमारी को कम करने में कोई भी ड्रग परिणामकारक नहीं मिला है। NASH के साथ बहुत सी और बीमारियां जुड़ी होती है जैसे कि उच्च रक्तचाप, डिसलिपिडेमिया, मधुमेह आदि। उनकी चिकित्सा बीमारी के अनुसार करनी चाहिए। सामान्यतः आइसोलेटेड फैटी लीवर NASH में रूपांतरित होने के चान्सेस बहोत कम होते है। 
  • अगर आपका वजन ज्यादा है, आप ओवरवेट हैं तो आपको इसे धीरे-धीरे कम करना चाहिए लेकिन एक हफ्ते में 1 से 2 पाउंड से अधिक वजन कम ना करें। मोटापा काम करने के उपाय जानने के लिए यहाँ क्लिक कर पढ़े - मोटापा कैसे कम करे ?
  • आपको एक संतुलित और स्वस्थ आहार लेना चाहिए। तला हुआ आहार, फ़ास्ट फ़ूड, चावल, आलू , ब्रेड, कॉर्न आदि को काफी कम कर देना चाहिए। अगर आप नॉनवेज लेते है तो इसे बंद कर दीजिए या कम कर दीजिए। उच्च कैलोरीयुक्त आहार से परहेज करें।
  • अधिक शुगर वाले ड्रिंक जैसे स्पोर्ट ड्रिंक जूस ना ले।
  • नियमित कसरत करें। कसरत में एरोबिक प्रकार की एक्सरसाइज को शामिल करें, जैसे चलना, दौड़ना, साइकिलिंग, स्विमिंग आदि जो आपके लिवर की आस पास की चर्बी को कम करने में मदद करेंगे।
  • फैटी लीवर में होने वाले दर्द के लिए आप बैठकर किए जाने वाले व्यायाम जैसे कर्ल्स, शोल्डर प्रेसेस, चेस्ट प्रेस आदि कर सकते है। यह पेट के न्यूनतम सहयोग द्वारा किए जानेवाले प्रतिरोधक व्यायाम है जिसमें बैठ कर या आधा लेट कर हाथों के द्वारा वजन उठाया जाता है।
  • अगर आपको डायबिटीज है तो उसकी योग्य चिकित्सा लेकर शुगर को नियंत्रण में रखे।  
  • कई बार फैटी लीवर में बैरियाट्रिक सर्जरी भी करते हैं।
  • लिवर की समस्याओं के लिए आयुर्वेद में काफी अच्छी चिकित्सा होती है। आप चाहे तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से उपचार करा सकते हैं।

Fatty Liver के लिये कुछ घरेलू आयुर्वेदिक उपचार Fatty Liver home remedies in Hindi

  • अपने आहार में आपको प्रोसेस ग्रेन के बजाए साबुत अनाज (whole grain) का सेवन करना चाहिए। यह लीवर को डेटॉक्सीफाय करने में मदद करता है।
  • अपने आहार में कच्चे टमाटर को शामिल करें।
  • ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स लीवर के लिए फायदा करते हैं।
  • विटामिन सी से युक्त साइट्रस फ्रूट जैसे निंबू, संतरा आदि का सेवन अधिक करें। यह लिवर के लिए अच्छे होते हैं।
  • करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो पर यह लीवर के लिए मीठा होता है इसलिए अपने आहार में करेले को भी शामिल करें। आप चाहे तो करेले का जूस भी पी सकते हैं।
  • अपने रोजमर्रा के आहार में फल व जूस अधिक ले। पानी अधिक पीए। 
  • क्रैश डायटिंग से बचे। अधिक देर तक भूखे रहने से फैटी लीवर की समस्या और भी बढ़ सकती है।
  • दोपहर के खाने के बाद लस्सी या छाछ में काला नमक, हींग, जीरा, काली मिर्च,  डालकर पीना लीवर के लिए उत्तम होता है।
  • आधे नींबू का रस एक गिलास पानी में और उसमें थोड़ा नमक डालकर दिन में दो से तीन बार पिए। इसमें चीनी ना डालें।
  • 200 से 250 gm पके हुए जामुन हर रोज खाने से भी लीवर की खराबी दूर होती है।

Fatty liver से छुटकारा पाने के लिए कौन से योग करना चाहिए ? Yoga for Fatty Liver in Hindi

Fatty Liver से छुटकारा पाने के लिए नियमित योग करे। योग की सम्पूर्ण विधि, लाभ और सावधानी की जानकारी पढ़ने के लिए निचे दिए हुए उस योग के नाम click करे :
  1. कपालभाति 
  2. मत्स्येन्द्रासन 
  3. वज्रासन 
  4. गोमुखासन 
  5. सर्वांगासन 
  6. भुजंगासन 
  7. सूर्यनमस्कार 
  8. सेतुबंधासन 
  9. पश्चिमोत्तानासन 
  10. धनुरासन  
यह योगासन रोजाना करने से आपके Liver की कार्यक्षमता बढती हैं, liver जमा हुआ fat कम होता है और साथ ही पाचन भी सुधरता हैं। 

Fatty liver से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतें ? 

फैटी लीवर से बचने के लिए निम्न सावधानियां बरतें :- 
  1. शराब का सेवन ना करें या बंद करें। 
  2. धूम्रपान का सेवन बंद करें। 
  3. हानिकारक खाद्य पदार्थ जैसे फास्ट, फूड जंक फूड, ड्रग्स आदि सेवन से बचें।
  4. नियमित व्यायाम करें।
  5. स्वस्थ एवम समतोल आहार ले।
  6. अपना वजन नियंत्रण में रखे। 
  7. हमेशा स्वच्छ पानी पिए। 
इस तरह अगर आप स्वस्थ एवं सुरक्षित रहना चाहते हो तो फैटी लीवर से संबंधित इस जानकारी को अपना कर अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं एवं बेहतर स्वास्थ्य पाए। 
अगर आपको यह Fatty liver के कारण, लक्षण, उपचार और बचाव से जुडी जानकारी उपयोगी लगी है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे !


Pregnancy यानि गर्भावस्था का समय हर स्त्री के लिए बहुत खास होता है। खासकर पहले बच्चे के जन्म का समय। अक्सर ऐसी स्थिति में महिलाओं को मानसिक और शारीरक तौर पर बहुत से तकलीफ और डर रहता है। वे अपनी सेहत को लेकर अक्सर कन्फ्युज होती है। क्या करना ठीक हैक्या करना ठीक नहीं हैयही सवाल उनके दिमाग में होते हैं जिनका जवाब या तो वें किताबों और इंटेरनेट से पढ़कर ढूंढती है या फिर किसी बूढ़े-बुजुर्ग की मदद से जाती है। 

ज़्यादातर डॉक्टर प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में खास सावधानी रखने की हिदायत देते हैं। प्रेग्नेंसी में सभी महिलाओं के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन कुछ चीज़ें/बातें ऐसी हैं जिनका ख्याल रखना हर गर्भवती के लिए ज़रूरी हैं।


प्रेगनेंसी के शुरूआती महीनों में गर्भवती महिला ने किन विशेष बातों का ख्याल रखना है इसकी जानकारी आज इस लेख में हम आपको देने जा रहे हैं :


pregnancy-care-tips-in-hindi
Source : cdv.gov

प्रेगनेंसी में शुरूआती दिनों में महिला क्या ख्याल रखे ? Pregnancy care tips in Hindi

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में महिलाओं ने निचे दिए हुए बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए :
  • डॉक्टर से परामर्श ले:- गर्भावस्था में नियमित रूप से डॉक्टर से जाँच करवाना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए एक डॉक्टर को कुछ-कुछ समय अंतराल पर दिखाते रहे जिससे की वो आपको आपके और आपके शिशु की सेहत में हो रहे बदलाव के बारे में और ज़रूरी उपचार के बारे में बता सकें। अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी मे हम कई बार सिर दर्द या बदन दर्द होने पर कुछ  दवाइयाँ लेते है। कई दवाइयां ऐसी भी होती है जो  गर्भ  पर सीधा असर करती है। यहाँ तक इससे आपका गर्भपात भी हो सकता है। या फिर दोबारा गर्भधारण करने मे मुश्किल भी आ सकती है। इसलिए कभी भी बिना डॉक्टर के परामर्श के दवाई न ले। और इसके अतिरिक्त आप किसी भी तरह की दवाई का सेवन कर रहे हे तो उसके बारे मै चिकित्सक से परामर्श कर ले। 
  • धूम्रपान न करें:-  गर्भावस्था में अपनी और अपने बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। इसके लिए धूम्रपान छोड़ना बहुत ज़रूरी है क्योंकि धूम्रपान करते समय जो धुआँ निकलता है वो बहुत हानिकर होता है। धूम्रपान करने से मम्मी और बच्चे को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इससे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • आयोडीन युक्त आहार:- गर्भवती महिलाओं के शरीर के लिए आयोडीन बहुत ज़रूरी होता है।  यह बच्चे के मानसिक विकास  में  सहायक होता है। साथ ही आयोडीन तंत्रिका तंत्र के विकास में भी मदद करता है। आयोडीन की कमी से बच्चे को घेंघा रोग हो जाता है। इसलिए जरुरी है की गर्भवती महिला आयोडीन को आपने आहार में शामिल करें। दूध पीना शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे शरीर में कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है जो  मम्मी और बच्चे दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन ध्यान रखें कि जब आप गर्भवती हो तो गरम दूध  का नहीं बल्कि हल्के गुनगुने दूध पीना चाहिए।
  • तनाव लेने से बचें:- जिंदगी मे हर किसी को किसी न किसी वजह से तनाव जरूर होता है। परन्तु यह तनाव आपके लिए सही नहीं होता है। अगर आप गर्भवती महिला है तो आप कोशिश करे की ज्यादा से ज्यादा खुश रहे। तनाव लेना आपके शरीर और बच्चे के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है।आप चाहे तो मैडिटेशन का सहारा भी ले सकती है। इससे आप तनाव को तो काम करेगी ही साथ में सकारात्मक ऊर्जा अपने अंदर महसूस करेंगी। गर्भवती महिला का स्वस्थ रहना बहुत जरुरी है। यह इसलिए जरूरी है ताकि आप दिमागी और शारीरिक दोनों तरह से स्वस्थ रहे।
  • लगातार उलटी होने पर सावधानी बरतें- अक्सर गर्भावस्था में स्त्रियॉं को सुबह उलटी होती है या बार-बार जी मचलता है। इसे मॉर्निंग सिकनेस के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में ध्यान रखने वाली बात ये है कि ऐसे अवस्था में  शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। अगर उलटी की तीव्रता अधिक रही और काफी लंबे समय तक रहती है तो इसमें समय से पहले बच्चे का जन्म होना, बच्चे का वजन कम होना आदि दिक्कत आ सकती है।
  • पौष्टिक और अच्छा खाना:- गर्भावस्था में उचित और पौष्टिक भोजन खाना बहुत ज़रूरी होता है। भोजन भी ऐसा होना चाहिए जिसकी मदद से शरीर में शुगर की मात्रा बनी रही। साथ-ही-साथ खाने में फोलिक एसिड और प्रोटीन की स्तर भी उचित रखें। गर्भावस्था में अच्छा खाना और थोड़े-थोड़े समय अंतराल पर खाना बहुत ज़रूरी है। गर्भावस्था के दौरान जंक फूड खाने से परहेज करना ही बेहतर होगा. इसमें उच्च मात्रा में फैट होता है, जिसकी वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है। शरीर में पानी का स्तर बनाकर रखें- गर्भावस्था  में शरीर में पानी की कमी न होने दें। हर आधे या एक घंटे में थोड़ा पानी पिएँ। अगर आपको मचली/उल्टी (वोमीटिंग) जैसा महसूस हो तो पानी में थोड़ा चीनी और नमक मिलाकर पानी पिएँ।
ऊपर दी हुई बातों का ख्याल रखकर गर्भिणी स्त्री अपने प्रेगनेंसी में होनेवाली जटिलताओं से बच सकती हैं। 
यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 

अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगती है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे !

आजकल ग्रीन टी (Green Tea) का चलन काफी चल रहा है। सेहत के लिए फायदेमंद चीजों में ग्रीन टी काफी लोकप्रिय होती जा रही है। स्वस्थ रहने के लिए कई लोग अब सामान्य चाय को छोड़कर हर्बल या ग्रीन टी पीना पसंद कर रहे हैं। 

हम जो सामान्य चाय पीते है उसमे ना तो कोई विशेष पौष्टिक तत्व होते है बल्कि ऐसी चाय पिने Acidity की समस्या बढ़ जाती हैं। ऐसे में सुबह-सुबह तरोताजा महसूस करने के लिए सामान्य चाय की जगह आप Green Tea का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

Green Tea क्या हैं, इसे पिने का सही समय, तरीका और बनाने की विधि क्या है ऐसे सभी विषयों की जानकारी आज इस लेख में हम देने जा रहे हैं। Green Tea से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं : 

green-herbal-tea-fayde-hindi

Green Tea पिने के फायदे और बनाने की विधि Health benefits of Green Tea in Hindi

कैसे बनती है Green Tea ?

यह चाय के नरम पत्तियों से बनती है। इन्हें सुखाकर बनाया जाता है। इसे प्रोसेस नहीं किया जाता। यह काफी गुणकारी होती है। यह herbal तरीके से बनायीं जाती है और इसमें chemicals का अधिक प्रयोग नहीं किया जाता हैं। 

ग्रीन टी पिनेका सही तरीका क्या हैं ? How to make Green Tea at home in Hindi

  • ग्रीन टी बिना दूध और बिना चीनी के पिये तो काफी फायदेमंद होती है। इसमें कैलोरीज भी नही होती है। 
  • ग्रीन टी सेहत के लिए और भी लाभदायक बन जाती है जब इससे ऑर्गेनिक या हर्बल टी बनाई जाती है।
  • ग्रीन टी को अगर आप शहद, अदरक, तुलसी या निम्बू के साथ ले तो इससे अधिक लाभ होगा। 
  • शहद से कैलरीज बर्न होने में भी मदद मिलेगी। 
  • आपको हर रोज कम से कम एक कप ग्रीन टी पीनी चाहिए। 
  • आप दिन में 2 से 3 बार भी Green Tea पी सकते हैं।

ग्रीन टी पिने का सही समय क्या हैं ? When to drink Green Tea in Hindi ?

  • ग्रीन टी आप दिन के कोई भी समय में ले सकते हैं। 
  • खाना खाने के आधा घंटा पहले या खाने के 1 से 2 घंटे बाद ग्रीन टी पिए तो इससे काफी लाभ होगा। 
  • खाली पेट ग्रीन टी न ले, इससे अल्सर हो सकता है। 
  • शाम के टाइम पर फ्रूट्स या स्नैक्स के साथ भी आप ग्रीन टी ले सकते है।

ग्रीन टी बनाने की विधि Green Tea recipe in Hindi

  • ग्रीन टी बनाने के लिए करीब 200 ml पानी को उबाल लीजिए। 
  • फिर इसमें करीब 3 ग्राम ( 1 tsp से थोड़ी कम ) ग्रीन टी डालकर ढक्कन रख दीजिए और 5 मिनट के पश्चात आप छान दीजिए। 
  • अब आपकी ग्रीन पर तैयार है। 
  • आप इसे पी सकते हैं। 
  • कम से कम 5 मिनट ढक कर रखना आवश्यक होता है क्योंकि इतने समय में ग्रीन टी के अंदर के योगिक उस पानी में आते हैं और 5 मिनट से ज्यादा अगर आप रखेंगे तो टी के अंदर मौजूद फ्लेवोनॉयड्स आदि तत्व का नाश हो सकता है।
  • ग्रीन टी में कई अलग अलग प्रकार आते है, जैसे की 
  1. आर्गेनिक टी - इस टी में किसी तरह के केमिकल्स या पेस्टिसाइड्स नहीं होते हैं। यह पूरी तरह नैसर्गिक होती है और इसके लाभ भी काफी होते हैं।
  2. व्हाइट टी - यह कोमल, नरम और ताजी पत्तियों द्वारा बनाई जाती है। इसमें प्रोसेस प्रक्रिया काफी कम होती है। इस में कैफीन की मात्रा काफी कम होती है और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा होते है। इसका स्वाद हल्का मीठा और अच्छा होता है।
  3. हर्बल टी - हर्बल टी में कुछ जड़ी-बूटियां जैसे अश्वगंधा, तुलसी इलायची, दालचीनी, ब्राह्मी आदि मिलाई जाती है। यह ज्यादातर दवाई के जैसे इस्तेमाल होती है। हर्बल टी कई तरह की होती है, जैसे स्ट्रेस रिलीविंग इसमें ब्राह्मी होती है, दालचीनी ताजगी व स्फूर्ति देती है। तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है स्लिमिंग में वजन कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं

ग्रीन टी के फायदे Health benefits of Green Tea in Hindi

  • ग्रीन टी में होते है एक्टिव एजेंट - ग्रीन टी में मौजूद एक्टिव तत्व जैसे कैटेचिन, ईजीसीजी शरीर मे एंटीऑक्सीडेंट का कार्य करते है, जो शरीर को बढ़ती उम्र से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाते है। साथ ही विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर कर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं।
  • दे स्फूर्ति का अहसास - हर प्रकार की चाय में कैफीन मौजूद होता है, जो शरीर के  सेल को स्टिमुलेशन देता है एवं ताजगी का अहसास देता है।  लेकिन कैफीन की मात्रा का मर्यादित सेवन होना चाहिए।
  • बढ़ती है Memory - ग्रीन टी में मौजूद तत्व मनुष्य के मस्तिष्क के न्यूरॉन्स पर सुरक्षात्मक प्रभाव छोड़ते हैं, जिससे मनुष्य की स्मृति को बढ़ावा मिलता है। अल्ज़ाइमर्स, डिमेंशिया आदि बीमारियां होने का अवधि बढ सकता है।
  • डायबिटीज में फायदेमंद - ग्रीन टी में मौजूद एक्टिव तत्व शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ाते हैं, जो ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करती है साथ ही डायबिटीज की दवाइयों के हानिकारक प्रभाव को भी कम करने में मदद करती है। ग्रीन टी का सेवन शरीर में टाइप टू डायबिटीज से होने वाले दुष्प्रभाव जैसे आंखे, हृदय , गुर्दों को हानि होना आदि को भी कम करने में मदद करता है।
  • कोलेस्ट्रॉल को करे कम - जो लोग ग्रीन टी का नियमित सेवन करते हैं, उन लोगों में ग्रीन टी में मौजूद तत्व शरीर में LDLकोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं और HDL याने अच्छे कोलेस्ट्रॉल कि मात्रा को बढ़ाते है।
  • रक्तचाप नियंत्रित करे - हाइपरटेंशन के व्यक्तियों के लिए ग्रीन टी लाभदायक होती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार रोज एक कप ग्रीन टी पीने से करीब 50% उच्च रक्तचाप में कमी आती है। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स ह्रदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  • किडनी कॉम्प्लिकेशन में है लाभदायक - डायबिटीज के मरीजों में किडनी का फंक्शन सामान्य नहीं होता, जिस वजह से उन्हें किडनी से जुड़े हुए कई प्रॉब्लम्स होते हैं, इसमें से एक है एल्बुमिन की काफी मात्रा यूरिन में बदल जाना। ईस वजह से डायबिटीज के मरीजों को यूरिन के लिए बार बार जाना पड़ता है। एल्बुमिन वह प्रोटीन है जो खून में पाया जाता है और जिसे किडनी फ़िल्ट्रेट करती है। ग्रीन टी और कॉफी में मौजूद पॉलीफिनोल एल्ब्यूमिन को यूरिन में बदलने से रोकता है, जिससे यूरिन प्रोब्लेम्स नही होती। 
  • वजन कम करने मे सहायक - अगर आप अधिक वजन से परेशान हैं तो अपने डेली रूटीन में ग्रीन टी को अवश्य शामिल करें। ग्रीन टी के सेवन से BMR यानी बेसल मेटाबोलिक रेट बढ़ता है, इसलिए वजन कम होने में मदद होती है। ग्रीन टी के सेवन से शरीर में वसा भी कम होने लगता है खासतौर पर पेट के आसपास में जमी वसा। साथ ही इसमें मौजूद तत्व से कैलोरी बर्न होती है।
  • पाचन क्रिया होती है दुरुस्त - ग्रीन टी के सेवन से पाचनतंत्र में सुधार आता है , जिससे पेट की बीमारियां कम होती है।
  • बाल झड़ने होंगे कम - ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स की वजह से बाल झड़ना कम होता है। साथ ही बालों की वृद्धि होने लगती है। अगर बाल धोने के पश्चात ताजी बनी ग्रीन टी जिले बालों में 10 मिनट लगा कर रखें और फिर धोएं। इससे डैंड्रफ और ड्राइनेस जैसी समस्या कम होने में मदद मिलेगी।
  • ग्रीन टी से होगी स्किन केअर - ग्रीन टी को अगर फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं तो इससे आपके कॉन्प्लेक्शन में निखार आएगा। ग्रीन टी में एंटी एजिंग तत्व होते है जिस से झुर्रियां कम होती है। सनबर्न से भी ग्रीन टी रक्षा करती है।
  • दांत होंगे स्वस्थ - ग्रीन टी में मौजूद फ्लोराइड, पॉलीफेनोल्स, कैटेचिन जैसे तत्व दांतों की रक्षा करते हैं। दंतक्षय, सांस में बदबू आदि लक्षणों से निजात देकर दांतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

Green Tea पीते समय क्या सावधानियां बरते ?

  • ग्रीन टी में कॉफी के मुकाबले कैफीन कम मात्रा में रहता है, लेकिन इसका सेवन अगर अधिक मात्रा में करें तो इसके लाभ से आप वंचित रह सकते हैं।
  • हर रोज पांच सबसे अधिक ग्रीन टी पीने से जी मचलाना,  उल्टी,  पेट दर्द, कब्ज, सिर दर्द, बेचैनी आदि शिकायत हो सकती है।
  • जिन व्यक्तियों को  अल्सर, एसिडिटी की शिकायत हो उन्हें ग्रीन टी सीमित मात्रा में पीनी चाहिए।
  • जिन्हें एनीमिया हो उन्होंने ग्रीन टी की मात्रा कम लेनी चाहिए, क्योंकि ग्रीन टी में मौजूद ट्रेनिंन आयरन की अवशोषण में अवरोध उत्पन्न करता है।
  • अधिक मात्रा में ग्रीन टी लेने से शरीर में कैल्शियम का अब्जॉर्प्शन ठीक से नहीं हो पाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस की शिकायत हो सकती है।
  • गर्भावस्था में अगर ग्रीन टी का सेवन जरूरत से ज्यादा किया जाए, तो गर्भपात होने की संभावना रहती है।
  • अगर ग्रीन टी की एक बार आदत हो जाए तो वह नहीं मिलने पर चिड़चिड़ापन आता है एवम थकान भी लगती है। 
  • ग्रीन टी से भूक कम होती है एवम नींद में भी कमी आ सकती है।
यह रहे Green Tea से होनेवाले फायदे और नुकसान। आशा है, यह लेख पढ़कर आप मर्यादित मात्रा में ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे और इससे मिलनेवाले लाभ उठाएंगे। साथ ही, आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि कोई भी वर्कआउट, योग या संतुलित आहार को Green Tea रिप्लेस नही कर सकती। इसीलिए मेहनत तो आपको करनी ही होगी। और हाँ, अगर आप दूध के चाय के आदि हो तो आप इसे जरूर Green Tea के साथ रिप्लेस करे, इससे आपको फायदा ही होगा।
Designed by Freepik

अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगती है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे !
Keywords : #greentea #fayde #Hindi #Green_tea_ke_fayde #herbaltea

खास आपके लिए !

Author Name

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.