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योग हस्त मुद्रा यह योग की एक विशेष पद्धति है जिसमे हाथ को खास तरह से रखकर शरीर की प्राण ऊर्जा का उपयोग कर मनचाहा लाभ लिया जाता हैं। योग हस्त मुद्रा से शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखा जा सकता है साथ ही शारिरिक और मानसिक विकारों को दू किया जा सकता हैं।  

अगर आप अधिक तनाव या अवसाद से परेशान रहते है और आपका मन किसी भी कार्य में नहीं लग रहा है तो आप योग हस्त मुद्रा में शिवलिंग हस्त मुद्रा कर अपने तनाव को दूर भगा सकते हैं और ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं। शिवलिंग मुद्रा को ऊर्जा दायक मुद्रा भी कहा जाता है।

शिवलिंग हस्त मुद्रा क्या है, इसे कैसे किया जाता है और इसके लाभ क्या है इसकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

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शिवलिंग हस्त मुद्रा - विधि और लाभ
Shivling Mudra Steps and Benefits in Hindi

शिवलिंग हस्त मुद्रा क्या हैं ?
Shivling Mudra in Hindi

अगर आप कभी भगवान शिव के मंदिर में गए है तो अपने वहा पर शिवलिंग अवश्य देखा होंगा। शिवलिंग हस्त मुद्रा में भी आपके हाथ का आकार शिवलिंग के समान ही होता हैं। शिवलिंग हस्त मुद्रा को अंग्रेजी में Upright Mudra कहा जाता हैं। जब भी आप तनाव या किसी बात से परेशान हो तो ऐसे में आप इस मुद्रा के अभ्यास से स्वयं को बहुत ही ऊर्जान्वित महसूस करेंगे इसके अलावा इस मुद्रा के अभ्यास से आरोग्य में भी वृद्धि होती है। 

शिवलिंग हस्त मुद्रा की विधि
Steps of Shivling Mudra in Hindi

  1. सबसे पहले पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में बैठ जाये। 
  2. अपने बाएं हाथ (Left Hand) को प्याले की आकृति जैसा बनाएं और नाभी के सामने रखे। सभी उंगलिया एक दूसरे से जुडी होनी चाहिए।  
  3. इसके बाद दाए हाथ (Right Hand) का मुक्का (Fist) बनाकर बाए हाथ के ऊपर रखें। 
  4. अंगूठा ऊपर उठा होना चाहिए। 
  5. अपने हाथों को पेट की सीध में रखते हुए इस मुद्रा का अभ्यास करें। 
  6. इस मुद्रा को आप अपनी इच्छा अनुसार कितनी भी देर कर सकते हैं। 
  7. दिन में 2 बार 4 मिनट के लिए इस मुद्रा का अभ्यास करना फायदेमंद है। 

शिव लिंग हस्त मुद्रा का लाभ
Health Benefits of Shivling Mudra in Hindi
 

  1. इस मुद्रा को उर्जा संवर्धक मुद्रा माना जाता है। 
  2. ऐसे में थकान, असंतुष्टि या सुस्ती होने पर इस मुद्रा के अभ्यास द्वारा आप स्वयं को ऊर्जान्वित कर सकते हैं। 
  3. अवसाद की स्थिति से निबटने के लिए यह मुद्रा काफी प्रभावशाली है। 
  4. किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव और दबाव की स्थिति में यह मुद्रा आपके लिए उपयोगी है। 
  5. इस मुद्रा से शरीर में Heat उत्पन्न होती है इसलिए ठण्ड के दिनों में यह मुद्रा अधिक उपयोगी हैं। 
  6. वजन कम / Weight loss करने में शिव लिंग हस्त मुद्रा उपयोगी हैं। 
शिवलिंग हस्त मुद्रा दिखने में आसान और साधारण लगती है पर इसके लाभ अनेक हैं। अगर आपको एसिडिटी की समस्या अधिक रहती है तो यह शिवलिंग हस्त मुद्रा नहीं करनी चाहिए। इस मुद्रा का अभ्यास सुबह या शाम के समय ही करे। दिन में अधिक तापमान  रहने पर यह मुद्रा न करे। तनाव को दूर करने के लिए और सकारात्मक सोच को बढ़ाने के लिए शिवलिंग मुद्रा का अभ्यास अवश्य करे।
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आजकल के दौड़भाग के आधुनिक युग में तनाव और आहार की गलत आदतों के चलते कई लोग नींद की कमी यानि की अनिद्रा / Insomnia से परेशान हैं। ' जैसा अन्न, वैसा मन ', यह कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो अन्न हम खाते हैं उसका हमारी नींद पर गहरा प्रभाव पड़ता है तथा हमारी भोजन संबंधित आदतो से हमारी नींद भी प्रभावित होती है। 

इस संबंध में शोधकर्ताओं का मानना है कि अच्छी नींद में हमारे खान-पान की भूमिका बहुत अहम है। इस सम्बन्ध में अमेरिका में हुए 4 हजार से अधिक लोगों पर हुए शोध में यह पाया कि रोजाना 7 से 8 घंटे सोने के लिए शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम तथा सेलेनियम जैसे मिनिरल्स की आपूर्ति बहुत आवश्यक है। दूध, बादाम, आलू तथा केले में यह मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है एवं इनके सेवन से अधूरी नींद की संभावना में 15 से 20 फ़ीसदी की कमी आती है। 

नींद पूरी होने से अगले दिन सुबह ताजगी का अनुभव तो होता ही है साथ ही तनाव भी दूर होता है जिससे हमारी एकाग्रता में वृद्धि होती है तथा दिमाग भी तेज होता है। अनिद्रा की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए और रोजाना अच्छी गहरी नींद पाने के लिए हमें अपने आहार में किन आहार पदार्थों का समावेश करना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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अनिद्रा से छुटकारा पाने के लिए कैसा आहार लेना चाहिए ?Diet tips for Insomnia in Hindi Language

अनिद्रा से छुटकारा पाने के लिए निचे दिए हुए आहार पदार्थों का अपने दैनंदिन आहार में समावेश करना चाहिए : 
  • दूध / Milk : जिन व्यक्तियों को नींद आने में समस्या होती है वह यदि सोने से पहले गर्म दूध का सेवन करे तो अच्छी नींद आती है। इसका कारण यह है कि दूध में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता जो नींद में सहायक होता है। इसके अलावा चीज, दही तथा अन्य डेयरी के पदार्थ भी नींद के लिए उपयोगी होते हैं। 
  • बादाम / Almond : आमतौर पर लोग बादाम का सेवन दिमाग तेज करने के लिए करते हैं लेकिन हाल में हुए एक संशोधन में यह बात सामने आई है कि बादाम के सेवन से हमारे शरीर में उन रसायनों की पूर्ति होती है जो हमारी नींद में सहायक होते हैं। इस कारण से बादाम का सेवन हमारी नींद में सहायक होता है। 
  • चावल / Rice : आपने यह बात जरुर महसूस की होंगी कि चावल के सेवन के बाद हमारा शरीर भारी सा होने लगता है तथा हमें आलस का आभास होता है। परंतु हाल ही में हुए ऑस्ट्रेलिया में एक शोध में यह  पता चला है कि सफेद चावल में प्रचुर मात्रा में ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो हमारी नींद में सहायक होता है। सफ़ेद चावल का सेवन सिमित मात्रा में करे क्योंकि की इससे मोटापा बढ़ने का खतरा ही रहता हैं। 
  • नैसर्गिक चाय / Herbal Tea : कैमोमाइल टी तथा अन्य भी कई हर्बल चाय ऐसी है जिसे पीने से हमारी नसों को आराम मिलता है जिस वजह से हमें नींद सरलता से आती है। 
  • शहद / Honey : शहद में प्राकृतिक रूप से शक्कर तथा ग्लूकोस पाया जाता है जो हमारी नींद के लिए उपयोगी होता है। इसलिए हम शहद को अपने आहार में शामिल करके बेहतर नींद पा सकते हैं। अगर आप चाहें तो इसे कैमोमाइल टी तथा दूध के साथ भी ले सकते हैं। 
  • अनाज तथा दालें / Cereals : अनाज तथा दालें से कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं तथा यह सरलता से प्राप्त हो जाते हैं जो हमारे नींद के लिए उपयोगी होते हैं। 
  • वसा / Fat : वसा को पराया हम मोटापे से जुड़कर ही देखते हैं परंतु ऐसा नहीं है। कुछ वसायुक्त पदार्थ जैसे नारियल तेल तथा एमसीडी तेल हमारे नींद के लिए बहुत उपयोगी है। तथा कुछ वनस्पति तेल भी इसके लिए कारगर है। 
  • चेरी / Cherry : विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिदिन एक गिलास चेरी के जूस का सेवन अनिद्रा के रोग को पूरी तरह खत्म कर देता है। अतः आप चेरी का सेवन द्वारा अनिद्रा से मुक्ति पा सकते हैं। 
  • अखरोट / Walnut : अखरोट से हमें काफी मात्रा में ट्रिप्टफैन होता है जिसके कारण इसका प्रयोग हमें नींद के लिए बहुत कारगर होता है। 
  • मछली का तेल / Fish Oil : विभिन्न अध्ययनों द्वारा यह बात सिद्ध हुई है कि मछली का तेल का सेवन ना सिर्फ हमारे हृदय तथा मस्तिष्क के लिए उपयोगी होता है बल्कि यह हमारी नींद में भी सहायक होता है। 
जैसे अच्छा आहार और व्यायाम हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरुरी है ठीक उसी तरह अच्छी गहरी नींद भी हमारे शरीर को आराम और रिचार्ज करने के लिए बेहद जरुरी हैं। यह लेख हमे हमारे पाठक संदीप संघवी ने ग्वालियर से ईमेल द्वारा भेजा हैं। निरोगिकाया परिवार की ओर से उन्हें बहोतबहोत धन्यवाद। अगर आपके पास भी कोई उपयोगी स्वास्थ्य जानकरी है तो हमें अपने परिचय के साथ ceo.nirogikaya@gmail.com पर अवश्य भेजे। 
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हम अपने हाथों का इस्तेमाल कई तरह के काम करने के लिए करते हैं। खाने के लिए, लिखने के लिए, चित्र बनाने के लिए या अन्य कोई कार्य करने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करना एक आम बात हैं। इन सभी कामों के अलावा भी हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अपना हाथों का विशेष उपयोग कर सकते है जिसे योग मुद्रा (Yoga Mudra) या योग हस्त मुद्रा (Yoga Hasta Mudra) कहा जाता हैं। 

योग हस्त मुद्रा विज्ञान के माध्यम से हम न केवल बेहतर मानसिक वह शारीरिक स्वास्थ्य पा सकते हैं बल्कि ध्यान एवं योग में इन मुद्राओं की सहायता से परमात्मा को या परमसुख को भी उपलब्ध हो सकते हैं। आयुर्वेद और योग में कई तरह की योग हस्त मुद्रा का वर्णन मिलता है जिनका अभ्यास कर हम शारीरक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रख सकते हैं। 

योग हस्त मुद्रा क्या है और इसके लाभ से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

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योग हस्त मुद्रा कैसे करे और इसके लाभ 

How to do Yoga Hasta Mudra and its Benefits in Hindi

योग हस्त मुद्रा क्या हैं ?

Yoga Hasta Mudra in Hindi Language 

हाथों की 10 अँगुलियों के द्वारा विशेष प्रकार की आकृति निर्माण कर पंचतत्वो और त्रिदोषों को नियंत्रित करने के विज्ञानं को योग मुद्रा कहा जाता हैं। ब्रह्मांड अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी, और जल इन पंच तत्वों से मिलकर बना है और मानव शरीर भी इन्हीं पंच तत्वों से मिलकर बना है। हथेली में मौजूद उंगलियां व अंगूठे पांचों तत्वों की ऊर्जा को अपने भीतर छिपाए हुए हैं जिन्हें मुद्राओं के माध्यम से उपयोग में लाया जा सकता है।  
पांचों उंगलियां पांचों तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है। जैसे :
  1. अंगूठा / Thumb : अग्नि तत्व  
  2. तर्जनी ( यानी दूसरी उंगली) / Index finger : वायु तत्व 
  3. मध्यमा (यानी तीसरी उंगली) / Middle finger : आकाश तत्व 
  4. अनामिका (यानी चौथी उंगली) / Ring finger : पृथ्वी तत्व 
  5. कनिष्का (यानी पाचवी उंगली) / Little finger : जल तत्व 

योग हस्त मुद्रा कैसे और कब करें ?
How and When to do Yoga Hasta Mudra in Hindi

मुद्राओं को कभी भी कही भी उठते-बैठते, चलते-फिरते, यहां तक कि लेटे-लेटे भी कर सकते हैं। परंतु इनका अधिक लाभ पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में करने से प्राप्त होता है। सुबह हो या शाम रात हो या किसी यात्रा के दौरान इसे बाहर बगीचे में, बंद कमरे में या ऑफिस में कहीं भी किया जा सकता है। 

इन्हें एक ही समय में दोनो हाथों से किया जा सकता है। मुद्रा के दौरान उंगलियों को साधारण रखें उनमें कोई तनाव, खिंचाव या कसाव नहीं होना चाहिए। 

योग हस्त मुद्रा कितनी देर तक करे ?
Yoga Hasta Mudra duration in Hindi

मुद्राओं से लाभ प्राप्त करने के लिए किसी भी मुद्रा को प्रारंभ में कम से कम 10 मिनट तक अवश्य करना चाहिए फिर चाहे तो इस अवधि को 30 मिनट से लेकर 1 घंटे तक पढ़ाया जा सकता है। यदि एक साथ लंबे समय के लिए इन करना मुश्किल हो तो आप दिन में दो-तीन बार में कभी भी कर सकते हैं। यह इन मुद्राओं को जीवन में नियमित रुप से किया जाए तो साधारण कान के दर्द से लेकर हाट अटैक जैसे गंभीर रोग को ठीक किया जा सकता है। इन मुद्रा से कुंडलिनी की ऊर्जा के स्त्रोत को भी जागरूक किया जा सकता हैं। इन्हें योग का सार भी मन जाता हैं।   

भिन्न-भिन्न रोगों के लिए भिन्न-भिन्न योग हस्त मुद्रा की जाती हैं। इन्हें सही तरह से करने के लिए आपको योग विशेषज्ञ से मिलकर इनका अभ्यास करना चाहिए। हमारे ब्लॉग पर भी आप विभिन्न योग हस्त मुद्रा की जानकारी पढ़ सकते हैं। 
  1. अपान मुद्रा
  2. ज्ञान मुद्रा
  3. योग सामान्य मुद्रा - पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश, वायु, शुन्य मुद्रा  
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खूबसूरत दिखना किसे नही पसंद ? लेकिन कई बार इसी खूबसूरती में दाग लगाते है चेहरे या शरीर के अनचाहे बाल, दाग-धब्बे, मुहांसे आदि। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशान करते हैं चेहरे और हाथ पैर पर उगे हुए अनचाहे बाल। इन अनचाहे बालों को हटाने के लिए महिलाएं कई तरीके अपनाते हैं जैसे कि हेयर रिमूवल क्रीम का प्रयोग, वैक्सिंग, थ्रेडिंग, ब्लीचिंग आदि। यह सभी तरीके अस्थाई होते हैं और कुछ ही दिनों में फिर से नए बाल उग आते है। साथ ही इन प्रक्रियाओं में कभी त्वचा कट जाती है, कभी जल जाती है तो कभी त्वचा पर निशान हो जाते है। 

आज के युग में सौंदर्योपचार में कई नई और विकसित तकनीकों का अविष्कार हुआ हो जो त्वचा को कम से कम नुकसान करते हुए बेहतर परिणाम देकर खूबसूरती को एक नया आयाम देती है। ऐसी ही एक तकनीक है - लेज़र हेयर रिमूवल थैरेपी (LASER Therapy)। LASER पूरा नाम Light Amplification by Stimulated Emmision of Radiation है। इस तकनीक में बालों को जड़ों से मिटाया जाता है। 

आज कई महिलाए और पुरुष भी Laser Hair Removal Therapy का उपयोग कर अपने अनचाहे बालों से छुटकारा पा रहे है और अपनी खूबसूरती को बढ़ा रहे हैं। लेज़र थेरेपी से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

LASER-THERAPY-HAIR-REMOVAL-IN-HINDI

लेज़र थेरेपी से अनचाहे बालों को कैसे हटाया जाता हैं ?
Laser Unwanted Hair Removal Therapy in Hindi

लेज़र थेरेपी क्या हैं ?Laser Therapy in Hindi

लेज़र यह विशेष प्रकार की किरणें है जो सेलेक्टिव फोटोथेरमोलीसिस सिद्धांत पर काम करती है। इसमें प्रभावित हिस्से पर एक प्रोब के माध्यम से तय फ्रीक्वेंसी की किरणें डालते है। फ्रीक्वेंसी कितनी हो यह स्थान , मर्ज आदि पर निर्भर करता है। ये किरणे गर्म होकर मेलेनिन को टारगेट कर प्रभावित हिस्से को जहाँ पर हेयर फॉलिकल रहता है उन्हें नष्ट करती हैं। इससे आसपास की कोशिकाओं को कोई नुकसान नही होता है और न ही मरीज को जलन होती है। 

लेजर तकनीक से बालों की जड़ों को हमेशा के लिए नष्ट किया जाता है। यह तकनीक परमानेंट हेयर रिमूवल के लिए सबसे असरकारक है। इससे शरीर के किसी भी हिस्से के बालों को निकालने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। लेज़र का प्रयोग त्वचा को सख्त, मजबूत और कम उम्र की दिखाने के लिए भी किया जाता है। लेजर प्रक्रिया थोड़ी महंगी होती है लेकिन अनचाहे बालों को हमेशा के लिए हटाने में यह काफी कारगर चिकित्सा है। 

लेजर तकनीक का परिणाम दो बातों पर निर्भर करता है; बालों का कलर और त्वचा का प्रकार। लेज़र थेरेपी के लिए आदर्श कॉम्बिनेशन होता है लाइट कलर्ड स्कीन और डार्क हेयर। यह तकनीक सफेद, भूरे या हल्के कलर वाले बालों पर इतना काम नही करती है। लेजर तकनीक सिर्फ चेहरे के बालों के लिए ही नहीं बल्कि हाथ, पैर, अंडरआर्म्स, बिकिनी और शरीर के अन्य हिस्से हिस्से पर आए हुए अनचाहे बालों के लिए भी की जाती है। 

लेज़र चिकित्सा की मर्यादा Laser therapy limitation in Hindi

लेज़र तकनीक में 60 से 80 प्रतिशत तक बाल हमेशा के लिए नष्ट होते है और जो बचते हैं वो भी हल्के रंग के हो जाते है और उनकी visibility भी कम हो जाती है।

लेज़र चिकित्सा से अनचाहे बालों से छुटकारा पाने में कितना समय लगता हैं ? 

Laser Therapy duration in Hindi

लेज़र चिकित्सा एक बार में नही होती है। इसके लिए व्यक्ति को 6 से 8 सिटिंग्स लेनी होती है। 1 सिटिंग के बाद 3 हफ़्ते से लेकर 2 से 6 महीनों का गैप रखा जा सकता है। सिटिंग्स की संख्या जगह, कलर, बालों की घनता, अनचाहे बालों की वजह जैसे की मासिक धर्म की अनियमितता, हार्मोंन्स का असन्तुलन, अधिक वजन आदि कई बातों पर निर्भर करती है। माना जाता है कि हर सिटिंग के बाद करीब 20 प्रतिशत तक बाल कम होते है। 

लेज़र थेरेपी के दुष्परिणाम Side effects of Laser Therapy in Hindi

वैसे तो यह तकनीक काफी सुरक्षित है बशर्ते इसे प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर, डर्मेटोलॉजिस्ट या डॉक्टर के हाथों प्रशिक्षित व्यक्ति के हाथों हो। कई बार संवेदनशील त्वचा पर छोटे दुष्परिणाम होते है जैसे खुजली, लालिमा, हल्की सूजन जो दवाइयों की सहायता से 2 से 3 दिन में कम हो जाते है। 
बहोत कम प्रमाण में कुछ गम्भीर दुष्परिणाम भी हो सकते है जैसे की मुहांसे , त्वचा का रंग बदलना , त्वचा का जलना , सूजन। इसमें लक्षणों के आधार पर चिकित्सा की जाती है। 

लेज़र चिकित्सा में कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिये ? 

Laser Therapy precautions in Hindi

  • अगर आप लेजर हेयर रिमूवर तकनीक अपनाना चाहते हैं तो यह चिकित्सा शुरू करने के 1 महीने पहले से और चिकित्सा के दौरान भी वैक्सिंग या बाल निकालने के अन्य  तरीकों को आजमाना बंद कर दें। चिकित्सा के दौरान अगर बाल उगते हैं तो उन्हें आप सिर्फ रेज़र से ही निकाल सकते हैं।
  • चिकित्सा के बाद 2 से 4 दिनों तक आप त्वचा और एलोवेरा जेल कूलिंग और स्मूथिंग के लिए लगा सकते है।  
  • चिकित्सा शुरू होने के बाद से आप को नियमित तौर पर मॉइस्चराइजर एवम सनस्क्रीन लगाना जरूरी होता है और कोशिश करें कि धुप से अपनी त्वचा की रक्षा करें। सूरज की किरणों के डायरेक्ट संपर्क में ना आए। 
  • लेजर चिकित्सा नए उगने वाले बालों पर काम नहीं करती है इसलिए लेजर चिकित्सा के बाद भी नए बाल कम प्रमाण में उग सकते हैं लेकिन वह पहले से अधिक पतले और कम नजर आते हैं।  आप चाहे तो उनके लिए दोबारा लेजर चिकित्सा करा सकते हैं।
अनचाहे बाल यह महिलाओं के साथ साथ पुरुषों की भी समस्या रही है और आजकल लेजर चिकित्सा के स्थाई परिणाम की वजह से हर कोई इसकी तरफ आकर्षित हो रहा है। लेज़र थेरेपी की सुविधा फिलहाल देश के मेट्रो और बड़े शहरों में उपलब्ध है लेकिन बाकी जगह के लोग धीरे-धीरे इसके प्रति जागरुक हो रहे हैं। लेज़र / Laser थेरेपी का प्रयोग कर आप अपने अनचाहे बालों को आसानी से हटा सकते है और पा सकते है खूबसूरत एवम साफ़ सुथरी और दमकती त्वचा।
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Image By Justin Nugent (http://www.affordable-laser-hair-removal.com/) [CC BY-SA 3.0], via Wikimedia Commons

सर्दियों के मौसम में गुड़ (Jaggery) खाने का भी अपना ही एक मजा हैं। गुड़ केवल एक खाद्यपदार्थ नहीं तो बल्कि एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि भी हैं। भारत में नित्य प्रयोग के अलावा गुड़ का धार्मिक महत्त्व भी हैं। गुड़ का छोटा टुकड़ा किसी कार्य के शुरुआत में खाने से कार्य सफल होता है ऐसे मान्यता आज भी प्रचलित हैं।

नए गुड़ की तुलना में एक वर्ष पुराना गुड़ स्वास्थ्य के दृष्टि से अधिक गुणकारी माना जाता हैं। जहा नए गुड़ से कफ और कृमि पैदा होती है वही पुराना गुड़ त्रिदोषनाशक, श्रमनाशक और बलकारी माना जाता हैं। पुराना गुड़ अदरक के साथ सेवन करने से कफ को, हरड़ के साथ सेवन करने से पित्त को और सौंठ के साथ सेवन करने से समस्त वात विकारों को दूर करता हैं।

विभिन्न रोगों से निजात पाने के लिए गुड़ का कैसा उपयोग करे इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

health-benefits-jaggery-in-hindi

गुड़ के विभिन्न स्वास्थ्य लाभ और घरेलु नुस्खे
Health Benefits of Jaggery in Hindi
 

कई तरह के रोगों को ठीक करने के लिए हजारों वर्षों से आयुर्वेद और घरेलु नुस्खों में गुड़ का सफल उपयोग होता रहा हैं। ऐसे ही गुड़ के कुछ स्वास्थ्य उपयोगी नुस्खों की जानकारी निचे दी गयी हैं।
  • जुखाम / Cold : 10 ग्राम गुड़ को 40 ग्राम ताजा दही और 3 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण के साथ मिलाकर सुबह के समय तीन दिन लेने से जुखाम, नाक-मुंह से दुर्गन्ध आना, गला बैठ जाना खांसी आदि में अच्छा असर दिखता हैं। 
  • रक्त की कमी / Anemia : अगर रक्त की कमी है तो सुबह-शाम गुड़ और मूंगफली के लड्डू बनाकर खाये। गुड़ खाने से शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और साथ ही रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती हैं। 
  • शुष्क त्वचा / Dry Skin : नहाने के पानी में गुड़ का टुकड़ा डाले और यह घुल जाने के बाद उस पानी से नहाये। इससे त्वचा कोमल और मुलायम बनेगी।  
  • अस्थमा / Asthma : 10 ग्राम गुड़ लेकर समान भाग सरसों के तेल में मिलाकर 21 दिन तक सेवन करते रहने से लाभ मिल जाता हैं। कफज रोगों में गुड़ और देसी घी को समभाग में मिलाकर उपयोग करे। 
  • वीर्य वुद्धि / Sperm Count : गुड़ को आँवले के चूर्ण के साथ सेवन करने से वीर्यवृद्धि होती हैं। 
  • मोटापा / Obesity : अगर आप मोटापे से परेशान है और अपना वजन कम करना चाहते है तो चीनी (Sugar) का इस्तेमाल कम करे और उसकी जगह पर गुड़ का उपयोग करना शुरू करे। शुरुआत में आपको अटपटा लगेगा पर जल्द ही गुड़ से वही मीठा स्वाद मिलेगा जो आपको चीनी से मिलता था और आपका वजन भी कम होना शुरू हो जायेगा। 
  • प्रसूति / Pregnancy : पुराना गुड़ प्रसूति संबंधी विकारों को दूर करता हैं इसलिए हमारे यहाँ पुराने गुड़ के लाभकारी योग बनाकर प्रसूता को खिलाया जाता हैं। 
  • पाचनशक्ति / Digestion : गुड़ के साथ जीरा मिलाकर खाने से पाचनशक्ति बढ़ती हैं। 
  • नींद की कमी / Insomnia : रात को सोने से पहले 1 कप मलाई में 10 ग्राम गुड़ मिलाकर खाने से रात को गहरी नींद आती हैं। 
  • बवासीर / Piles : गुड़ के साथ हरड़ का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम खाने से बवासीर में लाभ होता हैं। 
  • कब्ज / Constipation : खाना खाने के बाद 20 ग्राम गुड़ खाने से कब्ज की शिकायत नहीं होती है और इससे गैस बनने की शिकायत भी कम रहती हैं। 
  • रुसी / Dandruff : गुड़ को पानी में भिगो कर रखे। आप इस पानी से सुबह नहाने से पहले अपने बाल धोये और आधा घंटे तक इसे रखे। इसके बाद साफ़ पानी से अपने बाल साफ करे। हफ्ते में दो बार ऐसा करने से आपके बालों का डेंड्रफ दूर होंगा और बाल भी स्वस्थ रहेगे। 
  • जोड़ो में दर्द / Arthritis : 5 ग्राम गुड़ और 5 ग्राम सौंठ का चूर्ण साथ में मिलाकर सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से लाभ होता हैं। इससे दर्द और सूजन में कमी आती हैं। 
  • याददाश्त / Memory : रोजाना गुड़ खाने से याददाश्त (Memory) अच्छी रहती हैं। बच्चो को स्कूल जाने से पहले एक टुकड़ा गुड़ का अवश्य खिलाये ताकि वे एनरजेटिक रहे और पढ़ा हुआ उन्हें याद रहे। 
गुड़ केवल स्वाद में ही मीठा नहीं है बल्कि इसमें अनेक पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे तो गुड़ का Glycemic Index चीनी से कम है पर अगर आपको मधुमेह / Diabetes हैए तो गुड़ का उपयोग करने से पहले आपको अपने डॉक्टर की राय अवश्य लेनी चाहिए। गुड़ का उपयोग ठण्ड के दिनों में करने से अधिक लाभ होता हैं।
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हस्थमैथुन / Hasthamaithun या अंग्रेजी में जिसे Masturbation कहा जाता है युवा आयु में लगने वाली एक ऐसी आदत है जिससे छुटकारा पाना बेहद मुश्किल हो जाता हैं। ऐसे तो अगर कोई व्यक्ति हस्थमैथुन कभी-कभी करता हो तो इससे कोई विशेष नुकसान नहीं होता हैं पर अगर किसी व्यक्ति को रोजाना हस्थमैथुन की आदत पद जाये तो इससे छुटकारा पाना बेहद जरुरी होता हैं।

कम उम्र में उचित सलाह और यौन शिक्षा न मिलने के कारन अक्सर बच्चे और युवा हस्थमैथुन के शिकार हो जाते हैं। हस्थमैथुन क्या है और इसके फायदे और नुकसान के बारे में हम विस्तार में पहले ही जानकारी दे चुके हैं। आज इस लेख में हम हस्थमैथुन की आदत से छुटकारा पाने के उपाय की जानकारी दे रहे हैं।

पढ़े : हस्थमैथुन के फायदे और नुकसान 

हस्थमैथुन या मुठ मारने की आदत से छुटकारा पाने के विविध उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :

how-to-stop-masturbation-hindi-hastmaithun-chutkara-pane-ke-upay

हस्थमैथुन से छुटकारा पाने के उपाय
Hasthamaithun ki lat chodne ke upay
How to stop Masturbation Tips in Hindi

हस्थमैथुन या मुठ मारने की आदत से छुटकारा पाने के विविध उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • योग / Yoga : हस्थमैथुन से छुटकारा पाने के लिए हमारा अपने मन पर काबू पाना बेहद जरुरी होता हैं। योगासन, प्राणायाम और मैडिटेशन का अभ्यास कर हम हम काफी हद तक अपने विचारों और चंचल मन पर काबू पा सकते हैं। रोजाना मैडिटेशन और अनुलोम-विलोम का अभ्यास करे। 
  • दृढ़ संकल्प / Determination : हस्थमैथुन की लत से छुटकारा पाने के लिए दृढ़ संकल्प होना जरुरी होता हैं। जब कभी आपकी हस्थमैथुन की इच्छा हो तब आपको अपने संकल्प को याद करे और किसी अन्य काम में खुद को व्यस्त करे। आप चाहे तो कोई अच्छी किताब पढ़ सकते है या फिर कोई मोटिवेशनल विडियो देख सकते हैं। 
  • समय / Time : हस्थमैथुन का ख्याल अक्सर तब आता है जब व्यक्ति अकेला या बिन काम का होता हैं। हम सभी जानते है की खाली दिमाग शैतान का घर होता है और इसलिए ऐसा कोई विचार मन में ना आये इसलिए आपको अपने पुरे दिन का टाइम टेबल सेट करना चाहिए। अपने काम को, परिवार को और सेहत के लिए व्यायाम को पर्याप्त समय दे और इस तरह से प्लान बनाये की कोई बेकार समय न रहे। 
  • कामुक चीजे / Porn Material : अपने मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर और आसपास की सभी पोर्न / कामुक किताबे, विडियो आदि सामग्री को delete या नष्ट कर दे। इन्टरनेट पर भी आपके device से ऐसी कोई सामग्री surfing न हो इसलिए parenting control में जाकर adult चीजों को ब्लॉक कर दे। ऐसे मित्रों से भी दुरी बनाये जो आपका समय पोर्न से जुड़े जोक्स या कामुक बातें कर बर्बाद करते हैं। 
  • व्यायाम / Exercise : रोजाना कोई व्यायाम करने से आपका शरीर फिट रहेगा और सोच भी सकारात्मक रहेगी। अगर समय मिले तो शाम को भी व्यायाम करे और रात को भोजन करने के बाद टहले। ऐसा करने से रात में नींद जल्दी आएगी। अक्सर हस्थमैथुन की इच्छा रात में अधिक होती है और रात में थककर जल्द सोने से आप ऐसी इच्छा से बच सकते हैं।
  • आयुर्वेद / Ayurveda : आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ और दिमाग को तेज रखने के लिए ब्रम्हचर्य का महत्त्व बताया गया हैं। आयुर्वेद में यह भी कहा गया है की अत्याधिक हस्थमैथुन से शरीर का सार जिसे ओज कहा जाता है वह कम हो जाता है, जिससे शरीर निस्तेज और कमजोर हो जाता हैं। हस्थमैथुन को कण्ट्रोल करने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर अश्वगंधा, शतावरी, ब्राम्ही जैसे आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करते है जिससे मन और विचारों पर काबू पाया जा सकता है और बुरी आदतों से बचा जा सकता हैं। 
  • विशेषज्ञ की सलाह / Specialist opinion : अगर ऊपर दिए हुए सभी उपाय करने के बाद भी आप अधिक हस्थमैथुन की आदत से छुटकारा नहीं पा रहे है तो आपको विशेषज्ञ डॉक्टर या मनोचिकित्सक से मिलकर उनकी सलाह लेनी चाहिए।  
ऐसे तो कभी कबार हस्थमैथुन करने से कोई नुक्सान नहीं होता है पर समस्या यह है की एक दो बार इसे करने पर पुरुष या महिला को इसकी लत लग जाती जिससे शरीर पर शारीरिक और मानसिक विपरीत परिणाम हो सकते हैं। आशा है आपको यह जानकारी उपयोगी लगी होगी। अगर आपके पास भी हस्थमैथुन छुड़ाने का कोई अन्य उपाय है तो निचे comment में अवश्य लिखे हम उसे लेख में जरूर ऐड करेगे। 
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