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दिनभर ऊर्जावान और फिट रहने के लिए रात की अच्छी नींद (Sound Sleep) मिलना बेहद जरुरी होता हैं। आजकल के बढ़ते तनाव और दौड़भाग की जिंदगी के कारण लोगों के जीवन से सुख और चैन की नींद गायब हो चुकी हैं। नींद ही वह समय है जब हमारे शरीर और मन को आराम मिलता है और दिनभर होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसान को ठीक किया जाता हैं। 

कई अध्ययन में भी यह पाया गया है की जो लोग रोजाना रात में कम से कम 6 से 7 घंटे की अच्छी नींद सोते है उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और ऐसे लोग जल्द बीमार भी नहीं पड़ते हैं। भारत में ही लगभग 15 से 20 प्रतिशत लोगों को Insomnia से पीड़ित है और अच्छी नींद लेने के लिए दवा का सहारा लेना पड़ता हैं। व्यक्ति को अगर लम्बे समय तक अच्छी नींद न मिले तो वह मानसिक रोगी भी बन सकता हैं। 

आज इस लेख में हम आपको ऐसे 10 उपाय बताने जा रहे जिन्हे अपनाकर आपको रोजाना अच्छी नींद आएँगी :
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अच्छी नींद आने के 10 उपाय और घरेलु नुस्खे  

Top 10 Home remedies for Sound sleep in Hindi

  1. व्यायाम और योग : रोज रात को खाने के 10 मिनिट बाद 25 से 30 मिनिट तक खुली हवा में जरूर टहले। आप अगर तेजी से चले तो और भी अच्छा। अगर सुबह आपको समय नहीं मिलता तो शाम को 5 से 7 के बिच आप अपने क्षमता के अनुसार Gym में व्यायाम या चलना, साइकिलिंग, तैराकी, जॉगिंग जैसे व्यायाम कर सकते हैं। रात को सोने से पहले बिस्तर पर बैठकर 10 मिनिट अनुलोम-विलोम प्राणायाम अवश्य करे। व्यायाम और योग करने से रात में मन शांत रहता है और नींद अच्छी आती हैं। 
  2. आहार / Diet : भारत में ज्यादातर लोग दिन में कम खाते है और रात में बेहद ज्यादा आहार लेते हैं जबकि हमारे सेहत के हिसाब से हमने रात के समय अल्पाहार लेना चाहिए। रात के समय अधिक तीखा, तला हुआ और क्षमता से अधिक आहार नहीं लेना चाहिए। रात को सोने में और खाने में कम से कम 2 घंटे का अंतर तो होना ही चाहिए। यह नियम अच्छी नींद और बेहतर पाचन शक्ति के लिए जरुरी हैं। 
  3. पेय / Drink : कॉफी, चाय,एनर्जी ड्रिंक , शराबऔर इस तरह की उत्तेजित करने वाले पेय से दूर रहे। 
  4. कमरा / Room : अपने सोने के कमरे में एक आरामदायक तापमान बनाएं। बहुत गर्म या ठंडे कमरे में नींद नहीं होती। शांत और अंधेरा कमरा शरीर में सेरेटोनिन के स्त्रावण में मदद करता है जिसका संबंध नींद से है। 
  5. दिनचर्या / Time-Table : रोज रात सोने और सुबह जागने का समय एक ही रखें। अपनी दिनचर्या में हमेशा समय के पाबंध रहे। छुट्टीवाले दिन भी आपको अपने सोने के समय में ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। 
  6. तनाव / Stress : रात को सोते समय अपने दिमाग में किसी प्रकार के तनाव को न रखे। अपना ध्यान तनाव से भटकाने के लिए कोई ऐसी बात याद करे जिससे आपको ख़ुशी मिलती है या फिर आपकी जिस भगवान में श्रद्धा है उनका कोई मंत्रोपचार धीरे-धीरे मन में करे। आपको अच्छी नींद आएँगी।  
  7. नहाना / Bath : कुछ लोगों को रात को सोने के आधा घंटा पहले गुनगुने गर्म पानी से नहाने की आदत होती हैं। रात को सोने से पहले नहाने से दिनभर की थकावट दूर होती है और बेहतर नींद आती हैं। 
  8. मसाज / Massage : रात को सोने से पहले सिर की 10 मिनिट तक तेल से हलकी मालिश करने से भी बेहतर नींद आती हैं। ऐसा करने से सिर की मांसपेशियों का व्यायाम होता है और नींद अच्छी आती हैं। 
  9. पानी / Water : रात को सोने के पहले अधिक पानी न पिए। रात को सोने से कुछ समय पहले ही अधिक पानी पिने से आपको बार-बार पेशाब जाने के लिए उठना पड़ सकता है जिससे आपकी नींद ख़राब हो सकती हैं। रात को सोने के पहले पेशाब कर सोये। रात को अधिक समय तक पेशाब रोके रखने से पेशाब में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता हैं। 
  10. सूर्यप्रकाश / Sunlight : दिनभर में कम से कम 30 मिनिट सुबह शरीर पर सूर्य की किरणें जरुर पड़ने देना चाहिए। इससे हमें विटामिन डी मिलता है जिससे शरीर में सेरेटोनिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है जिससे तनाव भी कम होता है और नींद भी अच्छी आती हैं। 
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अच्छी नींद के लिए इनसे बचे

  1. रात को सोने से पहले बहुत तेल युक्त भोजन लेने से बचें। 
  2. सोने से तुरंत पहले धूम्रपान में अल्कोहल का सेवन नुकसानदायक होता है। 
  3. बिस्तर में जाने के बाद TV है वीडियो गेम्स न खेले। 
  4. अपने बिस्तर के नजदीक किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ना रखें। 
  5. जहां तक हो सके दिन में झपकी या कुछ घंटों की नींद से बचें यह रात की नींद की गुणवत्ता खराब करती है। 
  6. नींद के बारे में बहुत ज्यादा चिंता न करें। चिंता करने से नींद नहीं आती। 
जिस तरह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए समतोल आहार आवश्यक होता है ठीक उसी तरह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छीं नींद बेहद जरुरी होती हैं। अगर आप अच्छी नींद की कमी से परेशान है तो ऊपर दिए हुए 10 उपाय से आपको sound sleep अवश्य आएँगी और आपको धीरेधीरे नींद की दवा लेने की जरुरत भी महसूस नहीं होंगी। 
अगर यह लेख आपको सेहत के दृष्टिकोण से उपयोगी लगता है तो कृपया इसे share अवश्य करे !

नीम (Neem), भारत मे पाये जाने वाला एक ऐसा पेड़ है जिसका हर भाग प्रयोग किया जाता है। पत्ती, तना, गोंद, निंबोनि, दातुन या फिर पतले महीन नाजुक फूल। इसीलिए इसे  'सर्वरोगनिवारिणी ' याने सब रोगों की दवा इस नाम से भी जाना जाता है।  नीम का उपयोग आयुर्वेद, यूनानी , नेचरोपैथी, होमियोपैथी आदि चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। इसे Indian lilac भी कहा जाता है। संस्कृत में इसे अरिष्ट कहते है , जिसका मतलब होता है श्रेष्ठ और कभी न खराब होने वाला।
 
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीसेप्टिक, एन्टीपायरेटिक, एन्टीफंगल, एन्टीडाईबेटिक, एनाल्जेसिक, रक्तशुद्धिकर आदि गुण होते है। इतने सारे गुण और प्रॉपर्टीज से युक्त निम कई सारी बीमारियों में राहत देता है। 
इसका प्रयोग आभ्यन्तर और बाहर दोनों तरीकों से किया जाता है। स्वाद में कड़वी नीम के फायदे अनेक होते है।


आज इस लेख में हम आपको  नीम के विभिन्न घरेलु उपयोग की जानकारी दे रहे हैं :


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कड़वी नीम में गुणों की मिठास  

नीम के घरेलु औषधीय उपयोग Health benefits and home remedies of Neem in Hindi

तो चलिए, हम नीम के घरेलु उपयोगी की जानकारी नीम के जड़ से शुरुआत करते हैं। 

  • नीम की जड़ को घिस कर माथे पर लेप करने से मन शांत होता है। साथ ही जड़ का लेप सिरदर्द का भी शमन करता है।
  • नीम के तने की छाल घिसकर लगाने से चेहरे की कांति बढ़ती है, साथ ही सभी प्रकार के दाग धब्बे चेहरे से दूर हो जाते हैं।  ब्लैक हेड्स का शर्तिया इलाज है इनके तने की छाल।
  • नीम की दांतोन की विशेषताएं तो सारी दुनिया जानती है। नीम की दातोंन दंत रोग, दुर्गंध, पायोरिया तथा मसूढ़ों की कमजोरी पर विशेष रुप से लाभकारी है। इसके प्रयोग से दांत मजबूत व चमकदार होते है। 
  • नीम की पत्तियां जल में उबाल ली जाए तो वह बेहतर एंटीसेप्टिक का कार्य करती है। चर्म रोगों की ख़ास औषधि है यह जल। 
  • नीम की नई पत्तियां खाने से रक्त शुद्ध होता है।
  • नीम की पत्तियों को जलाकर बनाया गया चूर्ण पथरी यानी स्टोन गलाने में सहायक होता है।
  • नीम की पत्तियों तथा मुल्तानी मिट्टी का लेप चेचक के दाग को दूर करता है, लेकिन इसका नियमित लंबे समय तक इस्तेमाल करना जरूरी होता है।
  • नीम की सूखी पत्तियां अनाज के भंडार में रखने पर कीड़े नहीं लगते। नीम प्राकृतिक किटकनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • नीम के फूल सूंघ लेने से नासिका के रोग दूर हो जाते हैं।
  • अंजुरी भर फूलों को गुनगुने पानी में डाल लीजिए और लगभग 1 घंटे तक रहने दीजिए। इसमें नींबू रस या गुलाब जल की कुछ बूंदे डालकर स्नानोपरांत अपने शरीर पर डालिए। आपको आश्चर्यजनक स्फूर्ति मिलेगी और एक अच्छी महक से आप अपने आपको सराबोर पाएंगे। 
  • या नहाने से पहले पूरे शरीर पर नीम का लेप करें और सूखने पर बिना साबुन के केवल पानी से नहाएं , इससे भी आपके शरीर की अच्छी सफाई होगी। आप चाहे तो नीमयुक्त साबुन भी इस्तेमाल कर सकते है।
  • नीम का फल यानी छोटी सी निंबोरी का चूर्ण बनाकर सुबह शाम शीतल जल व मिश्री के साथ खाएं। एक माह नियमित सेवन करने पर निश्चित रुप से बवासीर में लाभ मिलेगा।

नीम के घरेलु नुस्खे 

अब जानते है नीम के कुछ खास घरेलु उपयोग 
  • बालों की समस्याओं का इलाज 
  1. एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल प्रॉपर्टीज होने के कारण नीम की निंबोरी को पीसकर सिर में लगाने से बालों में मौजूद डेंड्रफ और इन्फेक्शन दूर होता ही हैं साथ ही बालों की वृद्धि भी तेज होती है। सिर की खुजली एवम सूखापन दृर होता है।
  2. एक मुट्ठी नीम के पत्तों को चार ग्लास पानी में डालकर उबालें जब तक के पानी का रंग हरा ना हो जाए। तत्पश्चात शैंपू के बाद इस पानी को सिर पर डालकर बाल धोएं, यह कंडीशनर का कार्य करेगा।
  3. नीम के पाउडर को पानी में मिलाकर लेप बनाएं और इसे बालों की जड़ों में लगाएं। यह प्रयोग हर 2 दिन में एक बार करें जब तक कि बालों की रूसी ना खत्म हो।
  • सिर की जुओंका होगा सफाया
  1. नीम में नेचुरल इंसेक्टिसाइड प्रॉपर्टी होती है जिसकी वजह से सिर में मौजूद जुओं को खत्म करने के लिए यह विशेष कारगर होता है। साथ ही इससे सिर की जलन एवं खुजली भी दूर होती है।
  2. हफ्ते में दो बार किसी नीम युक्त शैंपू से बाल धोए और फिर पतली कंघी से जुए निकालें।
  3. नीम के पत्तों का पेस्ट बनाएं और बालों की जड़ों में लगाएं। कुछ समय पश्चात धो ले। यह उपचार करीब 2 महीने तक हफ्ते में दो से तीन बार करें।
  4. नीम के तेल से मालिश करने से भी जुए खत्म होती है। मालिश के पश्चात जुए निकालने वाली पतली कंघी का इस्तेमाल करें। आप चाहे तो रात को सोने के पहले भी नीम के तेल से मालिश कर सकती है।
  • स्किन प्रोब्लेम्स होंगे दृर 
  1. नीम में एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होने से त्वचा की कई तकलीफों जैसे मुहांसे, चकते, सोरियासिस, खुजली आदि में इससे आराम मिलता है।
  2. किसी भी प्रकार की स्किन प्रॉब्लम होने पर नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाकर स्किन पर लगाएं एवं सूखने का इंतजार करें। सूखने पर धो डालें। धीरे धीरे धीरे आप की समस्या खत्म हो जाएगी।
  3. 1 बड़े चम्मच नीम के तेल में 1/3 चम्मच जैतून का तेल या नारियल तेल मिलाकर त्वचा की मालिश करें। इससे त्वचा के सेल्स फिर से युवा हो जाएंगे, स्क्रीन की इलास्टिसिटी भी बढ़ेगी एवं त्वचा भी गोरी हो जाएगी।
  4. नीम के पानी से मुंह धोने से मुहासे भी नहीं होते हैं।
  5. कई प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों में भी नीम का इस्तेमाल किया जाता है।
  • मुँह को रखता है स्वस्थ
  1. नीम में मौजूद एंटीबैक्टीरियल व एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज की वजह से कैविटी, छाले, प्लेग, मसूढ़ों में सूजन एवम अन्य इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट होते हैं। यह मुंह को स्वस्थ रखने में मदद करता है, साथ ही मसूड़ों को बीमारियों से भी बचाता है। मुंह की बदबू दूर कर सांसों को लंबे समय तक तरोताजा रखता है। 
  2. नीम की पत्तियों का जूस निकालें एवं इस से दांतों को मंजन करें और फिर गर्म पानी से मुंह धो ले। यह नियमित करें।
  3. प्राकृतिक नीम से बने टूथपेस्ट, माउथवॉश या अन्य ओरल टॉनिक का इस्तेमाल करें।
  • रक्तशुद्धिकर नीम
  1. नीम एक शक्तिशाली रक्तशुद्धि कर के रूप में कार्य करता है। रक्त शुद्ध होने पर शरीर के विभिन्न अंगों को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की मात्रा अच्छे से मिलती है एवम विषाक्त पदार्थ शरीर के बाहर निकलते है। 
  2. इससे शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी, लिवर की कार्यक्षमता बढ़ती है एवम शरीर के डायजेस्टिव सिस्टम, रेस्पिरेटरी सिस्टम, यूरिनरी सिस्टम भी ठीक रहते है।
  3. हर रोज सुबह 1 से 2 नीम के पत्ते शहद के साथ खाए या फिर नीम की टेबलेट भी आप डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं।
  • मधुमेह को करता है नियंत्रित 
  1. एक शोध में पाया गया है कि नीम के पत्तों के रस में ऐसे जरूरी तत्व होते हैं, जो मनुष्य के डायबिटीज के लिए जरूरी इंसुलिन की जरूरत को कम करते हैं।
  2. नीम की टेबलेट ब्लड ग्लूकोज लेवल को कम करने में मदद करती है तथा इसको डॉक्टर की सलाह से आप ले सकते हैं। 
  3. डायबिटीज के मरीजों ने हर सुबह 4 से 5 नीम के पत्ते चबाकर खाना चाहिए। 
  • पेट के कीड़े होते है खत्म 
  1. नीम में एन्टी पैरासायटिक प्रॉपर्टीज होने के कारण यह रोग से रक्षा भी करता है, साथ ही रोगों को ठीक भी करता है। 
  2. नीम में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो पेट के कीड़ों की खाने की क्षमता को कम कर देते हैं। जिससे उनकी लाइफ साइकिल खत्म हो जाती है और वह पेट के बाहर निकल आते हैं। उनसे हुई विषाक्तता को भी नीम नष्ट कर देता है। 
  3. रोज सुबह खाली पेट नीम की पत्तियां चबाए या नीम की चाय ले। 
  • बैक्टीरिया से लड़ता है नीम 
  1. हमारे शरीर में असंख्यात बैक्टीरिया होते हैं जिसमें से कुछ अच्छे होते हैं तो कुछ बुरे होते हैं। नीम उन हानिकारक बैक्टीरिया को आंतों में ही नष्ट कर देता है।
  2. आपके शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या जरूरत से ज्यादा होगी तो आप बुझे बुझे से रहेंगे और आप में ऊर्जा की कमी रहेगी क्योंकि आप की अधिकतर उर्जा हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में चली जाएगी। 
  3. नीम के सेवन से हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो कर आपकी उर्जा की बचत भी होगी और आप अपने आप को तरोताजा महसूस करेंगे। 
  • एलर्जी के लिए नीम 
  1. नीम का पेस्ट बनाकर उसकी छोटी छोटी गोलियां बना ले।  हर सुबह एक गोली शहद के साथ ले, इसके पश्चात 1 घंटे तक कुछ भी ना खाए ताकी नीम आपके शरीर में पूरी तरह से फैलकर अपना कार्य कर सकें। 
  2. यह प्रयोग त्वचा की,  किसी भोजन की या किसी और वजह से होने वाली कोई भी एलर्जी में फायदा करता है।  
  3. फंगल इन्फेक्शन से होने वाली खाज - खुजली में नीम का लेप या तेल लगानेसे फायदा होता है। आप सारी जिंदगी इसे ले सकते है। 
  • कैंसर में लाभकारी 
  1. नीम के फायदे काफी अविश्वसनीय होते हैं और उस में से एक है कैंसर के लिए नीम का उपयोग। हर किसी के शरीर में कैंसर की कोशिकाएं होती है, लेकिन वे बिखरी होती है। दिक्कत तब होती है जब वे एकजुट होकर उधम मचाती है और शरीर के अच्छी कोशिकाओं का नाश करती है। बस इन्हें तोड़ना होता है , इससे पहले की वे एकजुट हो सके। 
  2. अगर आप प्रतिदिन नीम का सेवन करते हैं तो कैंसर की कोशिकाओं की तादात एक सीमा में रहती है ताकि वे एकजुट ना हो सके। इसीलिए प्रतिदिन नीम का सेवन लाभदायक है।
  3. प्रतिदिन सुबह नीम का जूस लेने से शरीर के सारे विषाक्त तत्व बाहर आ जाते हैं।
  • वजन कम करने में सहायक 
  1. अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो प्रतिदिन नीम का जूस पीजिए। इससे आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ेगा और खाना फैट में नहीं बदलेगा,  जिससे वजन कम होने में मदद मिलेगी।
  • कानदर्द करता है कम 
  1. अगर आपको कान में दर्द की शिकायत हो रही है तो नीम के तेल के प्रयोग से आपका दर्द कम होगा। कई लोगों को कान बहने की शिकायत होती है, इसमें भी यह तेल लाभकारी होता है।
  • पीलिया में लाभ
  1. नीम का रस और शहद 2:1 के प्रमाण में मिलाकर पीने से पीलिया में लाभ होता। नीम के रस का फायदा मलेरिया में भी होता है। यह वायरस के प्रभाव को कम करता है और लिवर को ताकत प्रदान करता हैं।

नीम का प्रयोग करते वक्त कुछ बातों का रखे ध्यान 

  1. नीम  का रस हमेशा ताजा ही पिए। अगर आपको उसकी गंध अच्छी नहीं लगती है तो इसे कुछ देर के लिए फ्रीजर में रखें या आइस क्यूब डाल दें लेकिन इसे बनाने के बाद आधे घंटे के भीतर ही इसे उपयोग में लाएं।
  2. जहां तक हो सके नीम का रस सुबह खाली पेट ले और उसके आगे से 1 घंटे तक कुछ ना खाएं।
  3. नीम का रस काफी कड़वा होने से कई लोग इसे पसंद नहीं करते हैं। पर आप चाहे तो इसमें थोड़ा मसाला या नमक और काली मिर्च डाल दें तो इसमें थोड़ा स्वाद आ जाएगा।
  4. अगर आपको नीम के रस का पूरा फायदा उठाना है तो इसमें चीनी बिल्कुल ना मिलाएं।
  5. एक अध्ययन के अनुसार रोजाना करीब 2 मिलीग्राम से कम नीम का रस पीना चाहिए। अगर अधिक मात्रा में इसे लिया जाए तो यह पुरुष प्रजनन क्षमता पर प्रभाव डालता है। इससे पुरुष शुक्राणु भी कम होते हैं।
कड़वी होते हुए भी नीम में गुणों का भंडार है। इसीलिए इसे गाँव का दवाखाना भी कहा जाता है। बात सिर्फ दृष्टि की है अगर कड़वाहट देखेंगे तो वह मिलेगी और अगर आप उसमें मिठास तलाशेंगे तो आपको मिठास मिलेगी। अगर आप आजीवन स्वस्थ रहना चाहते हैं तो नीम का का प्रयोग अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में सुबह खाली पेट जूस,  टैबलेट या किसी अन्य रूप में अवश्य करें यह आपकी कई बीमारियों से रक्षा करेगा और आपको एक स्वस्थ जीवन प्रदान करेगा।

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बच्चों की रोगप्रतिकार शक्ति बढ़ाने के 8 उपाय

माँ, मेरी नाक बंद है और मैं सांस भी नहीं ले पा रहा हूँ, कुछ करो ना!जब से मेरे शिशु ने बोलना शुरू किया है, यह बात हर कुछ महीने में मुझे सुनने को मिलती है। ये शब्द सुनते ही डर की वजह मैं यह तक समझ पाती कि करना क्या है, खांसी कई हफ्तों तक बनी रहती है, इसके साथ बहती नाक और बुखार जैसी बीमारियां भी चलती रहती हैं। और फिर गर्म सूप बनाना, बार-बार बहती नाक पोंछना, हाथों को कई बार धोना, दवाइयों को अपने साथ रखना और कुछ रातें बिना सोऐ निकालना जैसी रस्मों की शुरूआत होती है।

सर्दियों की शुरूआत के साथ ही, यह विचार आता है कि मेरा बच्चा मौसमी बुखार का शिकार बन सकता है पर मैं इसके लिये कुछ भी नहीं कर सकती। यही बात मैंने जान-पहचान के कई माँ-बाप से सुनी है। कुछ और सवाल मैनें सुने हैं जो मुझे खुद भी हैरान करते हैं कि - मैं कैसे अपने शिशु को बार-बार बीमार होने से बचा सकती हूँ? मैं कैसे अपने शिशु की बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ा सकती हूँ?


तो मैनें मौसमी बीमारी से लड़ने के साथ-साथ शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत बढ़ाने में मदद करने वाले कुछ आसान इलाज और बचाव के तरीकों का पता लगाने का फैसला किया जिन्हे जानकर आपको भी तसल्ली मिलेगी।


यहाँ कुछ हाथों-हाथ अपनाने वाली बाते हैंः



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बच्चों की रोगप्रतिकार शक्ति बढ़ाने के 8 उपाय. 8 ways to increase child immunity in Hindi

1. सेहतभरा खाना : संतुलित खाना, ज्यादा विटामिन-सी, विटामिन-, ओमेगा-3, कारोटेनोइड्स और प्रोबिओटिक्स वाला खाना आपके शिशु के शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाते हैं। तो ये चीजें शिशु को ठीक मात्रा में मिलना तय करने के लिये आपको उसकी खुराक में क्या शामिल करना चाहिये ?    
  • विटामिन-सीः अमरूद, पपीता, संतरा, ब्रोकोली, गोभी, कीवी, शिमला मिर्च और स्ट्राब्री जैसी चीजें।
  • विटामिन-ईः पालक, टोफू, बदाम, जैतून का तेल, ब्रोकोली, लौकी और कद्दू
  • ओमेगा-3 : अखरोट, मछली (सामन और सार्डिन), सोयाबीन, टोफू और झीगां
  • कारोटेनोइड्सः मीटा आलू, पालक, गाजर, ब्रोकोली और कद्दू
  • प्रोबिओटिक्सः दही इसका सबसे अच्छा भंडार है।
2. शिशु के लिये माँ का दूध : माँ का दूध, शिशु के पैदा होते ही उसके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत बढ़ाने का सबसे अच्छा जरिया होता है। माँ के दूध में बीमारी से लड़ने वाले बहुत से तत्व होते हैं जो संक्रमण, एलर्जी, मूत्र की नली का संक्रमण, यहाँ तक कि अकस्मात षिषु मृत्यु (एस.आई.डी.एस.)के खतरे को कम करता है।

3. पूरी नींद लेना : नींद की कमी आपके शिशु को बुरी तरह से थका सकती है, जो संक्रमण का खतरा बढ़ाता है या उसकी सेहत में सुधार की गति को धीमा करता है। नये शिशु को कम से कम 18 घंटे की नींद की जरूरत होती है, घुटनें से चलने वाले या नया-नया चलना सीखने वाले शिशु को कम से कम 12 से 13 घंटे नींद की जरूरत होती है जबकि बालविहार जाने वाले शिशु को 10 घंटे नींद की जरूरत होती है। अगर आपके शिशु को नींद नहीं रही या उसे सोने में परेशानी हो रही है तो शिशु के डाक्टर से सलाह लेना मददगार रहता है।

4. टीकाकरण नियम से करायें : टीके लगवाना बचपन की बहुत सी बीमारियों से लड़ने के लिये शरीर की ताकत बढ़ाता है। इसलिये सलाह है कि तयशुदा टीकों को शिशु की उम्र के हिसाब से और तय समय पर लगवायें। कुछ डाक्टर शिशु को खास वजहों से अलग से कुछ और टीके लगवाने की सलाह देते हैं जिन्हें स्थिति को समझते हुये और इसके फायदे-नुकसान को देखते हुये लगवाया जा सकता है।

5. व्यायाम : घर से बाहर खेलने के लिये शिशु का हौसला बढ़ायें। जांच से पता चला है कि रोजाना 30 मिनट की खेल-कूद सर्दी लगने के खतरे को 50 प्रतिशत कम कर देती है। तो बाहर निकल कर थोड़ा टहलना शुरू करें, उसके साथ पार्क में जायें या उसके साथ खेल कर अच्छा समय बितायें जो शिशु के शारीरिक व्यायाम के लिये जरूरी है। 

6. दूसरों के बीड़ी-सिगरेट के धुंये से बचें : जो शिशु देर तक दूसरों के बीड़ी-सिगरेट के धुंयेे आस-पास रहते हैं वो कान के संक्रमण, ब्रोंकाइटिस, सर्दी-खांसी और दूसरी सांस की समस्याओं के लिये ज्यादा नाजुक हो जाते हैं। सिगरेट का धुंआ घर के अन्दर देर तक बने रहने के लिये जाना जाता है और घर के साज-सामान जैसे सोफा, कालीन, बिस्तर की चादर और पर्दों में सिगरेट के बुझ जाने के बाद भी काफी समय तक बना रहता है। छोटे बच्चों की सांस लेने की दर तेज होती है और बड़ों की तुलना में वह ज्यादा जहरीले तत्व (4000 तक जाने-पहचाने जहरीले तत्व) सांस के साथ अपने अंदर लेते हैं। अपने शिशु को दूसरों के बीड़ी-सिगरेट के धुंये से बचाने के लिये यह करना चाहियेः
  • अपने घर बीड़ी-सिगरेट पीने पर पूरी तरह से रोक लगायें।
  • घर में बीड़ी-सिगरेट पीने वाले लोगों को बाहर और घर से दूर जाकर ऐसा करने के लिये मनायें।
7. दवाइयां देने में जल्दबाजी करें : ज्यादा दवाइयां लेना शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को दबाता है और शरीर को कमजोर करता है। आपको शिशु के बीमार होते ही उसे तुरंत दवाई देने से बचना चाहिये, जब तक यह डाक्टर की सलाह की मुताबिक हो। एंटीबाॅडी दवाइयों को लगातार देने से आपके शिशु की शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को गंभीर रूप से कम कर सकती है और यह कि कभी-कभी अपना शरीर खुद ही दवा के असर को नकारने के लिये तैयार हो जाता है। 

8. साफ-सुथरा माहौल और साफ-सफाई को बरकरार रखें : रोगाणू होने की जगह में रहना शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाता है लेकिन इसमें ज्यादा देर तक रहने से यह बीमारी से लड़ने की ताकत पर उल्टा असर करता है। घर के माहौल को हमेशा शुद्ध रखें, हाथों को बार-बार साफ करने के लिये हौसला बढ़ायें, अपनी साफ-सफाई की आदतो पर अमल करना जैसे दिन में दो बार दांत मांजना, दांत साफ करने के ब्रश को कुछ महीनों में बदलना, नहाना और साफ कपड़े पहनना, आपके शिशु को सेहतमुद रखने और उसमें साफ-सफाई की आदत लाने के कुछ सबसे अच्छे तरीके हैं। 

जैसे-जैसे आपका शिशु बड़ा होगा, उसकी शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत भी बढ़ेगी। इस बीच मैं उम्मीद करती हूँ कि ऊपर लिखी बातें आपके शिशु की सेहत को बढ़ायेंगी और उसकी बीमारी से लड़ने की ताकत में इजाफा करेगी। 1 से 3 साल के शिशु को एक साल में 8 से 10 बार सर्दी होना सामान्य बात है और यह शिशु की बीमारी से लड़ने की ताकत को भी बढ़ाता है। आप शिशु को बीमार होने से नहीं बचा सकते पर रहन-सहन के तरीके में बदलाव लाकर आप शिशु की रोग प्रतिकारक ताकत को बढ़ाने और अपने परिवार को सेहतमंद रखने में दूर तक जा सकते हैं।

सारांश-
1 से 3 साल के शिशु को एक साल में 8 से 10 बार सर्दी होना सामान्य बात है। आप शिशु को बीमार होने से नहीं बचा सकते पर उसके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाना बहुत जरूरी है।

यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 

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