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मित्रों, आज हृदयाघात या Heart Attack से सम्बंधित लेख लिखने की एक खास वजह हैं। कल ही हमारे हॉस्पिटल में एक 25 वर्षीय हार्ट अटैक का पेशेंट आया था। आपने सही पढ़ा 25 वर्षीय ! आधुनिक युग में जहां हर काम तेजी से हो रहा हैं वही कई बुढ़ापे में होनेवाली बीमारियाँ भी अब तेजी से कम आयु में होना शुरू हो गयी हैं।

उस रोगी को केवल सिने में भारीपन और पेट में गैस की शिकायत थी पर ECG और अन्य ह्रदय जांच में उस मरीज को हार्ट अटैक की पृष्टि हुई और समय पर ईलाज मिलने से अब मरीज ठीक हैं। हर युवा व्यक्ति इतना भाग्यशाली नहीं होता हैं। अधिकतर ऐसे मामलों में युवा गैस की तकलीफ मानकर स्वयं मेडिकल से कुछ दवा लेते है और फिर समय पर योग्य उपचार न मिलने से रोगी की मृत्यु भी हो जाती हैं।

हार्ट अटैक क्या है और इसके लक्षण क्या है इसकी जानकारी हम पहले ही प्रकाशित कर चुके है। आप यहाँ click कर यह जानकारी पढ़ सकते हैं - हार्ट अटैक के लक्षण ! लोगों में व्यायाम का अभाव और खानपान के बिगड़ते तरीके के कारण युवा आयु में ही लोगों को यह समस्या हो रही हैं। इस समस्या को रोकने के लिए आज इस लेख में हम हार्ट अटैक से स्वयं को बचाने के लिए क्या करना चाहिए इसकी जानकारी दे रहे हैं।

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हार्ट अटैक से बचने के लिए क्या करना चाहिए ?

Tips to prevent Heart attack in Hindi

 हार्ट अटैक से बचने के लिए आपको निचे दी हुई बातों का खास ख्याल रखना चाहिए :
  • समतोल पौष्टिक आहार / Healthy Balanced Diet : हमारा शरीर वैसा ही बनता है जैसा हम आहार लेते हैं। अगर हम पौष्टिक आहार लेते है तो ह्रदय भी स्वस्थ रहता है। अगर हम अधिक तलाहुआ, मसालेदार और फ़ास्ट फ़ूड आहार लेते है तो रक्त नलिका में ब्लॉकेज होकर हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए समतोल आहार लेना बेहद जरुरी हैं। समतोल आहार कैसा होता है और इनमे किन चीजों का समावेश होता है यह पढ़ने के लिए यहाँ click करे - समतोल आहार कैसा होता हैं ?
  • व्यायाम / Exercise : चाहे आप 8 घटे ड्यूटी करते है या 12 घंटे, आपको अपने स्वास्थ्य के लिए दिन की बाकि भागदौड़ को छोड़कर कम से कम आधा घंटा समय जरूर निकालना चाहिए। आप अपने क्षमता के अनुसार कोई भी व्यायाम से शुरू कर सकते है, जैसे की चलना, जॉगिंग, साइकिल चलना, तैराकी, जिम, नाचना, एरोबिक इत्यादि। व्यायाम करते से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है और रक्त के थक्के / clots जमा नहीं होते है। केवल हफ्ते में 5 दिन व्यायाम कर ही आप हार्ट अटैक की संभावना को 50% तक कम कर सकते हैं। 
  • जीवनशैली / Lifestyle : आजकल की आधुनिक जीवनशैली भागदौड़ और तनाव भरी हैं।  स्वास्थ्य के प्रति बेहद लापरवाह बन चुके हैं। कुछ लोग ऐसे है जो अधिक से अधिक पाने के लिए दिन रात तनाव में मेहनत कर रहे है और कुछ लोग ऐसे है जो दिनभर केवल मोबाइल या लैपटॉप पर आराम से बैठकर अपना काम कर रहे है। यह दोनों जीवनशैली आपके ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। आपको आहार, नींद, काम, व्यायाम और आराम में योग्य सामंजस्य बैठाकर अपने स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेह बनना चाहिए। रोज अपने दिन को सही तरीके से प्लान करे और हर चीज को महत्व दे। केवल धन प्राप्ति जीवन का उद्देश नहीं हैं। 
  • नशा / Habits : अगर आप तम्बाखू, गुटखा, शराब, सिगरेट या बीड़ी जैसा कोई भी नशा करते है तो हार्ट अटैक को आमंत्रण देते हैं। जो लोग इन नशे के आदि होते है उन्हें हार्ट अटैक का खतरा 75% अधिक होता हैं। स्वयं धुम्रपान न करे और यदि कोई करता है तो या तो उसे मना करे या फिर उस धुए से बचकर रहे। नशा कैसे छोड़े यह जानने के लिए यहाँ click करे - नशा छोड़ने के उपाय !
  • रोग / Disease : अगर आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की अधिकता जैसा कोई रोग है तो डॉक्टर के उचित मार्गदर्शन और दवा से इन्हे नियंत्रित रखना चाहिए। जिन्हे यह बीमारी होती है उन्हें हार्ट अटैक आने की संभावना बेहद ज्यादा होती हैं। इन रोगियों ने कभी भी अपने बीमारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर डॉक्टर को दिखाते रहना चाहिए। कोशिश करे की आपका ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हमेशा नियंत्रण में रहे। 
  • शारीरिक जांच / Physical Examination : अगर आपको कोई भी शारीरिक तकलीफ हो या हार्ट अटैक का कोई भी लक्षण नजर आता है तो मेडिकल पर दवा लेने की जगह पहले डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करानी चाहिए। अगर आपके परिवार में किसी को डायबिटीजहाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की अधिकता का ईतिहास रहा है तो 20 वर्ष आयु के पश्च्यात ही हर वर्ष डॉक्टर के पास जाकर अपनी सम्पूर्ण शारीरिक जांच कराना चाहिए। ऐसा करने से आप आगे जाकर होने वाली किसी बड़ी बीमारी को पहले ही पकड सकते है और उचित उपचार पहले से शुरू कर उस बीमारी के प्रभाव को कम कर सकते हैं।   
  • तनाव / Stress : आज हर किसी को कोई न कोई समस्या या तनाव है पर ऐसी भी कोई समस्या या तनाव नहीं है जिसका कोई समाधान नहीं हैं। समस्या का अपना कोई साइज़ नहीं होता है वह तो हमारे हल करने की क्षमता के अनुसार छोटी या बड़ी रहती हैं। हमेशा तनाव रहित रहने की कोशिश करे। इसके लिए आप योग और लाफ्टर थेरेपी का सहारा भी ले सकते हैं। शरीर मे सभी चीजे ठीक होने पर भी केवल तनाव के कारण भी अचानक हार्ट अटैक आ सकता हैं। 
  • मोटापा / Obesity : डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की तरह मोटापा भी एक बड़ी समस्या बन चुकी हैं। अगर आपका वजन सामान्य से अधिक है और आपका BMI 25 से ऊपर है तो आपको हार्ट अटैक आने की संभावना दोगुनी हो जाती हैं। व्यायाम, योग और आहार परिवर्तन के साथ वजन को नियंत्रण करने की कोशिश करे। वजन कम करने की पूरी गाइड हमने इस ब्लॉग पर प्रकाशित की हैं। आप वजन कम करने के उपाय यहाँ click कर पढ़ सकते हैं - वजन कम / Weight loss कैसे करे ?  
  • योग / Yoga : शरीर को निरोगी रखने का सबसे बेहतर माध्यम योग है। हार्ट अटैक से बचने के लिए और अपने ह्रदय / हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए आप निचे दिए हुए योग करे। योग की विधि और लाभ की सम्पूर्ण जानकारी पढने के लिए केवल योग के नाम पर click करे। 
  1. अनुलोम विलोम 
  2. कपालभाति 
  3. शीतली प्राणायाम 
  4. उज्जयी प्राणायाम 
  5. त्रिकोणासन 
  6. ताड़ासन 
  7. भुजंगासन
  8. सूर्यनमस्कार 
  9. पश्चिमोत्तानासन 
  10. पवनमुक्तासन 
मित्रों, भगवान ने हमें हाथ, पैर, आँखे, किडनी और फफड़े दो-दो दिए है पर ह्रदय केवल एक ही दिया है, इसलिए हमें अपने लिए और अपने परिवार के लिए इसका अच्छे से ख्याल रखना जरुरी हैं। आशा है आप आज से ही अपने स्वास्थ्य का बेहतर देखभाल करेंगे और निरोगी जीवन की और अग्रेसर होंगे।

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आप सभी को आंतरराष्ट्रीय योग दिवस / International Yoga Day 2016 की हार्दिक शुभकामनाये ! आज का दिवस सभी भारतीय लोगों के लिए विशेष गौरव करने का दिवस है क्योंकि भारत के योग रूपी इस प्राचीन धरोहर का महत्त्व आज सम्पूर्ण विश्व ने माना है और निरोगिकाया के लिए इसे अपनाया भी हैं।

योग और प्राणायाम दिखने में तो सरल लगते है परन्तु इनका सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरुरी हैं। कई लोग अज्ञानवश कही से भी पढ़कर गलत तरीके से योग करते है और तकलीफ पाते हैं और उसका सारा दोष योग को दे देते हैं।

योग और प्राणायाम का सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए जिन नियमों का पालन करना चाहिए उनकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

योग और प्राणायाम के नियम

योग और प्राणायाम के 21 विशेष नियम 

Do's and Don'ts for Yoga and Pranayama in Hindi 
  1. शुरुआत में योग करते समय हमेशा योग विशेषज्ञ के देखरेख में ही योग करे और पूर्णतः प्रशिक्षित होने के बाद ही अकेले योग करे। 
  2. योग से जुड़ा कोई भी प्रश्न मन में हो तो विशेषज्ञ से जरूर पूछे। 
  3. योग करना का सबसे बेहतर समय सुबह का होता हैं। सुबह सूर्योदय होने के आधा घंटे पहले से लेकर सूर्योदय होने के 1 घंटे बाद तक का समय विशेष लाभदायक होता हैं। 
  4. सुबह योग करने से पहले आपका पेट साफ होना आवश्यक हैं।  
  5. नहाने के 20 मिनिट पहले या बाद में योग नहीं करना चाहिए। 
  6. योग का सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए रोजाना नियमित अभ्यास करना जरुरी हैं। केवल हफ्ते में एक या दो दिन योग करने से आपको कोई विशेष लाभ नहीं होंगा। 
  7. योग करने के लिए हमेशा साफ, स्वच्छ हवादार और समतल जमीन हो ऐसी जगह ही योग करे। 
  8. योग करते समय जमीन या फर्श पर दरी, चटाई या योगा मैट अवश्य बिछाना चाहिए। 
  9. योग और प्राणायाम खाली पेट करना चाहिए। 
  10. अगर खाना खाने के बाद योग और प्राणायाम करना है तो आहार लेने के 2 घंटे बाद ही करे। केवल वज्रासन योग ही खाने के तुरंत पश्च्यात किया जा सकता हैं। 
  11. योग करने के 30 मिनिट बाद ही कुछ आहार लेना चाहिए। 
  12. योग करते समय अगर आपको छींक आती है या पेशाब लगती है तो इन वेग को रोककर नहीं रखना चाहिए। 
  13. हमेशा पहले प्राणायाम करे और बाद में योग आसन करे। 
  14. हर दो अलग प्राणायाम या योग आसन के बीच 1 से 2 मिनिट का अंतराल रखे। 
  15. सभी आसन समाप्त होने के बाद 5 मिनिट तक शवासन अवश्य करे। 
  16. अगर आप बीमार है या अन्य कोई तकलीफ है तो अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ही योग करे। 
  17. महिलाओं ने मासिक / Menstrual Periods के समय योग और प्राणायाम नहीं करना चाहिए। 
  18. गर्भावस्था के समय महिलाओं से योग विशेषज्ञ और अपने डॉक्टर की सलाह से ही योग करना चाहिए। गर्भावस्था में केवल कुछ ही योग किया जा सकते है। 
  19. योग करते समय कोई जल्दबाजी न करे और शांत मन से योग पर ध्यान केंद्रित कर योग करना चाहिए।
  20. कोई भी योग करते समय अगर आपको चक्कर आना, जी मचलाना, सिरदर्द, जकदाहट या अन्य कोई समस्या होती है तो योग को रोक कर अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। 
  21. योग करते समय योग की समय अवधि अभ्यास के साथ धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। प्रथम दिवस से ही अपेक्षा से अधिक करने से हानी हो सकती हैं।   
मित्रों, योग और प्राणायाम यह शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और निरोगी रखने का सबसे सरल और उपयुक्त माध्यम हैं। योग और प्राणायाम से जुड़े 40 लेख सरल हिंदी भाषा में हम अब तक प्रकाशित कर चुके है जिन्हे आप यहाँ click कर पढ़ सकते हैं - योग और प्राणायाम !

आशा है आप सभी आज से ही योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे और हमारे ऋषि-मुनियों के इस अदभुत ज्ञान का लाभ लेंगे।

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हर किसी की चाहत होती है की उसकी पर्सनालिटी आकर्षक होना चाहिए। एक attractive व्यक्तिमत्व के लिए लंबी हाइट और सुडौल शरीर का होना बेहद जरुरी होता हैं। यही कारण है की हमें हर रोज ईमेल, निरोगिकाया एंड्राइड एप्प और व्हाट्सप्प पर कई लोगो से हमें यह प्रश्न जरूर मिलता है की, अपने हाइट / लम्बाई को कैसे बढ़ाए ? (How to increase height) या फिर हाइट बढ़ाने के लिए क्या आहार लेना चाहिए ? (Diet tips to increase height)

किसी भी व्यक्ति की लम्बाई अधिकतर 18 वर्ष के आयु तक ही बढ़ती है और उसके बाद लम्बाई का बढ़ना बेहद मुश्किल होता हैं। लड़कों की तुलना में लड़कियों की हाइट बढ़ना जल्दी शुरू हो जाती हैं। भारत में औसतन पुरुषों की लम्बाई 5 फुट 5 इंच है और महिलाओं की औसत लम्बाई 5 फुट हैं। पुरुष चाहते है की उनकी हाइट कम से कम 5 फुट 8 इंच से अधिक हो तो अधिकतर महिलाओं की भी इच्छा होती है की उनकी लम्बाई 5 फुट 5 इंच से अधिक होनी चाहिए। 

ऐसे तो किसी भी व्यक्ति की लम्बाई उसके जींस / Genes पर निर्भर करती है और इसे एक हद से अधिक बढ़ाना मुश्किल होता हैं। कई कारणों से लोगो की हाइट अपने जेनेटिक हाइट से भी कम हो सकती हैं। आज हम यहाँ पर ऐसे ही उपाय बताने जा रहे है जिससे आपकी लम्बाई सामान्य से कम न रहे और उसे कुछ प्रमाण में उसे बढ़ाया भी जा सके। इन उपाय को अपना कर आप 18 वर्ष की आयु के पश्च्यात भी अपनी लम्बाई को कुछ प्रमाण में बढ़ा सकते हैं।  

लम्बाई / Height बढ़ाने के विविध उपाय, आहार, योग और व्यायाम से जुडी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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लम्बाई / हाइट बढ़ाने के लिए कैसा आहार लेना चाहिए ?

Diet Tips / Chart to Increase Height in Hindi

लम्बाई और हाइट बढ़ाने के लिए आपने पौष्टिक आहार लेना बेहद जरुरी हैं। शरीर को सभी पोषक तत्व पर्याप्त प्रमाण में मिलने पर शारीरिक वृद्धि सही तरीके से होती हैं। 
  1. आपने अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में Calcium और Vitamin D3 लेना अवश्य लेना चाहिए। लम्बाई बढ़ने के लिए आपकी हड्डिया मजबूत और लम्बी होना बेहद जरुरी होता हैं। अपने आहार में दूध, दही, पनीर, चीज और शरीर पर सबह सूर्यप्रकाश लेना बेहद जरुरी होता हैं। 
  2. शरीर को बढ़ाने के लिए प्रोटीन बिल्डिंग ब्लॉक की तरह कार्य करता हैं। आहार में मूंगफली, दालें, मांस, मछली, सोयाबीन अंकुरित अनाज का समावेश करे। बच्चों में प्रोटीन की कमी से उनका शारीरिक और मानसिक विकास होना बंद हो जाता हैं। प्रोटीन युक्त आहार की अधिक जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे - प्रोटीन का महत्त्व 
  3. आहार में पर्याप्त मात्रा में Zinc होना बेहद आवश्यक हैं। जिंक की कमी से बच्चों में कद छोटा रह सकता हैं। आहार में डार्क चॉकलेट, पालक, काजू, चिकन, मशरूम, दूध, दही, बादाम और तरबूज के बिज जैसे पदार्थ  समावेश करे। 
  4. शरीर को सही पोषण मिलना शरीर की वृद्धि के लिए बेहद जरुरी होता हैं। शरीर को सही मात्रा में संतुलित आहार कैसे दे यह जानने के लिए यह पढ़े - बच्चो को कैसे दे संतुलित आहार

लम्बाई / हाइट बढ़ाने के लिए कौन से योग करना चाहिए ?

Yoga to increase Height in Hindi 

अधिकतर लोगों का मानना होता है की योग केवल ध्यान करना या लम्बी-लम्बी साँसे लेना ही होता हैं। योग केवल मानसिक शांति के लिए नहीं है बल्कि योग करने से शरीर निरोगी रहता है और शारीरिक वृद्धि भी बेहतर होती हैं। बच्चों को शुरुआत से ही योगा क्लास लगाना चाहिए जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास अच्छी तरह से होता हैं। 

लम्बाई बढ़ाने के लिए आप निचे दिए हुए योग कर सकते हैं। इन योग की विधि, लाभ और सावधानी से जुडी सम्पूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए केवल निचे दिए हुए योग के नाम पर click करे :
  1. सूर्यनमस्कार 
  2. ताड़ासन 
  3. भुजंगासन 
  4. पश्चिमोत्तानासन 
  5. त्रिकोणासन 
  6. चक्रासन 
  7. कपालभाती 
  8. अनुलोम-विलोम 

लम्बाई / Height बढ़ाने के लिए कौन से व्यायाम करना चाहिए ?

Exercise to increase Height in Hindi 

लम्बाई बढ़ाने के लिए आपको रोजाना व्यायाम अवश्य करना चाहिए। व्यायाम करने से आपके शरीर में growth hormone बढ़ता है जो की लम्बाई बढ़ने के लिए सबसे जरुरी हैं। आजकल के बच्चे खेलकूद की जगह कंप्यूटर या मोबाइल लेकर घंटों बैठे रहते है और यही वजह है की उनकी हाइट कम रहती है और पेट बड़ा रहता हैं। बच्चों का जहां तक हो सके दौड़-भाग करनेवाले मैदानी खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आप अपनी क्षमता और उपलब्ध सुविधा के अनुसार हाइट बढ़ाने के लिए निचे दिए हुए व्यायाम कर सकते हैं।
  1. चलना / Walking - यह सबसे सस्ता और आसान व्यायाम हैं। धीरे चलने की जगह तेज चलना / brisk walking करना चाहिए। चलने से होनेवाले विविध स्वास्थ्य लाभ की जानकारी पढ़ने के लिए यह पढ़े - रोजाना चलने के स्वास्थ्य लाभ 
  2. दौड़ना / Jogging - बच्चों और टीनएजर्स को जॉगिंग करना चाहिए। इससे ग्रोथ हॉर्मोन सक्रीय होकर लम्बाई बढ़ने में मदद होती हैं। 
  3. तैराकी / Swimming - तैराकी या स्विमिंग करने से सारे शरीर के स्नायु क्रियाशील होते हैं। यह हाइट बढ़ाने के  मददगार साबित होता हैं। 
  4. रस्सी कूदना / Skipping - यह हाइट बढ़ाने के लिए एक और बढ़िया कसरत हैं। रस्सी कूदने से ग्रोथ प्लेट्स सक्रीय होते है और मोटापा भी दूर रहता हैं। रोजाना 10 मिनिट रस्सी कूदने की कसरत अवश्य करे। 
  5. लटकना / Hanging - लम्बाई बढ़ाने की इस कसरत को हर कोई जानता हैं। लटकने से हाथ और पैर की मांसपेशियों में खिचाव आता हैं  मजबूत बनती हैं। हड्डियों की लम्बाई मजबूती को बढ़ाने के लिए इस व्यायाम का नियमित अभ्यास करना चाहिए।  
  6. पैर की उंगली पकड़ना / Catch Toe Exercise - सीधे खड़े रहकर और फिर आगे झुककर बिना घुटनों को मोड अपने पैरों की उंगली पकड़ने का व्यायाम करने से आपके स्पाइन की ग्रोथ अच्छे से होती हैं। इस व्यायाम से लम्बाई बढ़ाने में मदद होती हैं। 

लम्बाई बढ़ाने के अन्य उपाय / नुस्खे 

Other Remedies to Increase Height in Hindi

लम्बाई बढ़ाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखना भी जरुरी होता हैं। इनकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :
  1. नींद / Sleep : हमारा शरीर दिनभर कार्य करता रहता है और ऐसे में उसे पर्याप्त आराम की जरुरत होती हैं। रात में जब हम गहरी नींद सोते है तो शरीर के दिनभर में हुए नुक्सान की भरपायी की जाती हैं। अध्ययन में यह सामने आया है की युवा आयु में गहरी नींद में व्यक्ति की लम्बाई अच्छे से बढ़ती हैं। गहरी नींद के हमारे शरीर पर और भी कई महत्वपूर्ण लाभ होते है जिनकी जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं - गहरी नींद के स्वास्थ्य लाभ !  
  2. धूम्रपान / Smoking : धूम्रपान, शराब, गुठखा और तम्बाकू सेवन जैसे नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। इन नशीले चीजों में जहरीले तत्व होते है जो की आपके शरीर में वृद्धि कारक हॉर्मोन पर प्रतिकूल परिणाम कर आपके कद को बढ़ने से रोकते हैं। अगर आप धूम्रपान / स्मोकिंग करते है तो इसे छोड़ने के उपाय जानने के लिए यहाँ click करे - धूम्रपान कैसे छोड़े ? 
  3. आसन / Posture : चाहे आप अपने ऑफिस में काम कर रहे हो या घर पर आराम से बैठे हो हमेशा कमर सीधी रखकर बैठने का प्रयास करे। झुककर बैठने से ग्रोथ प्लेट्स पर असर पड़ता है और हाइट बढ़ने में रूकावट हो सकती हैं। 
  4. आहार / Diet : दिन में 3 बार आहार लेने की जगह 6 बार थोड़े अंतराल से थोडा-थोडा आहार लेना चाहिए। ऐसा करने से ग्रोथ हॉर्मोन का प्रमाण बढ़ता हैं। 
  5. पानी / Water : हाइट बढ़ने के लिए जैसे पोषक पदार्थों की जरुरत होती है ठीक उसी प्रकार पर्याप्त मात्रा में शरीर को पानी की जरुरत भी होती हैं। मौसम और अपने कार्य के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। 
  6. रोग प्रतिकार शक्ति / Immunity : बच्चों की लम्बाई 10 से लेकर 18 साल की उम्र तक बढती है और इस समय उनके स्वास्थ्य के बारे में हमें सजग रहना चाहिए। जो बच्चे हमेशा जल्द बीमार होते है उनकी हाइट भी कम रहती हैं। बच्चों को आसानी से बीमार होने से बचाने के लिए उनकी रोग प्रतिकार शक्ति का मजबूत होना बेहद जरुरी हैं। बच्चों की रोग प्रतिकार शक्ति को कैसा बढ़ाना चाहिए यह जानने के लिए यहाँ click करे - रोग प्रतिकार शक्ति को मजबूत करने के उपाय 
  7. मोटापा / Obesity : बच्चों की हाइट बढ़ने की उम्र में अगर बच्चे मोटापे के शिकार हो जाते है तो इसका प्रतिकूल परिणाम उनके ग्रोथ हॉर्मोन पर पड़ता है जिस कारण उनकी लम्बाई नहीं बढ़ती हैं। बच्चों और बड़ों में मोटापा रोकने के उपाय जानने के लिए यह पढ़े - मोटापा कम कैसे करे ?
  8. दवा / Medicine : अगर बच्चे का शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा है और वह बौनेपन का शिकार होता है तो जांच कर अगर बच्चे में ग्रोथ हॉर्मोन की कमी पाई जाती है तब उसे इस हॉर्मोन के इंजेक्शन और दवा देकर लम्बाई बढ़ाने का प्रयास किया जाता हैं। अगर बच्चों में प्रोटीन या कैल्शियम की कमी पाई जाती है तो बच्चों को इनका सप्लीमेंट दिया जाता हैं। 
  9. आयुर्वेदिक औषधि / Ayurveda Medicine : लम्बाई बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में योग के साथ कुछ मौखिक दवा का उपयोग भी किया जाता हैं। व्यक्ति के कुपित दोष और प्रकृति के अनुसार दवा दी जाती हैं। इसमें अश्वगंधा, शतावरी, बांस के करील का चूर्ण, शिलाजीत, यष्टिमधु, गुग्गुल, बला, गुडुची और आंवला जैसे औषधि का उपयोग किया जाता हैं।   
  10. शल्य क्रिया / Operation : आज कल मेडिकल साइंस इतना आगे बढ़ गया है की ऑपरेशन कर भी लम्बाई बढ़ाने का प्रयास किया जाता हैं। इसे आपके पैर के हड्डी को बिच से अलग कर बिच में टेलीस्कोपिक रोड डालकर हाइट को बढाया जाता हैं। 
हाइट बढ़ाने के लिए दिए हुए इन सभी उपायों का फल तत्काल नहीं मिलता है इसलिए संयम रखने की आवश्यकता होती हैं। यह सच है की किसी भी व्यक्ति सही आकलन उसकी बुद्धिमत्ता से होनी चाहिए न की उसकी हाइट को लेकर करना चाहिए। फिर भी, जीवन में अनेक बार हमें नौकरी के लिए, किसी कार्य लिए या अच्छे जीवनसाथी मिलने के लिए भी अच्छी हाइट की जरुरत पता चलती हैं।

लोगों की लम्बाई बढ़ाने के इसी इच्छा का फायदा कई कंपनी उठाती है जो हाइट बढ़ाने की दवा के नाम पर साधारण टॉनिक दवा दोगुने दाम में बेच देती हैं। हमें ऐसे प्रलोभन देनेवाली झूटी चीजों दूर रहना चाहिए और कोई भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पूर्व अपने चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए।
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Genetic या वैद्यकीय कारणों से औसत से कम लम्बाई होने की स्तिथि को बौनापन या Dwarfism कहा जाता हैं। अक्सर समाज में बौने व्यक्ति का मजाक उड़ाया जाता है और उन्हें उपेक्षित किया जाता हैं। गर्भावस्था और बचपन में ही जरा सी सावधानी बरतने पर इससे बचा जा सकता हैं। कद का छोटा होना और बौना होना, दोनों में अंतर हैं। जब किसी प्रौढ़ व्यक्ति की लम्बाई 20 वर्ष के आयु के पश्च्यात भी 147 cms या 4 फुट 8 इंच से कम होती है तब उसे बौना कहा जाता हैं। हर बौने व्यक्ति के शरीर के लक्षण एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

बौनेपन का कारण, प्रकार, लक्षण और उपचार से जुडी जानकारी निचे दी गयी हैं।

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बौनेपन के प्रकार Types of Dwarfism in Hindi

बौनेपन के मुख्य 2 प्रकार हैं।
  1. असंगत बौनापन / Disproportionate Dwarfism : असंगत बौने व्यक्ति के शरीर के सभी भागों की लम्बाई असंगत / disproportionate होती हैं। किसी के हाथ लम्बे होते है और पैर छोटे होते है या फिर पैर बड़े होते है और हाथ छोटे होते हैं। संगत बौने व्यक्ति के शरीर में सभी अंग समान छोटे होते हैं। बौने व्यक्ति का मस्तिष्क अग्रभाग काफी उभरा होता हैं। चेहरे की बनावट सामान्य से भिन्न होती हैं। जिस बीमारी के कारण बौनापन पाया जाता हैं उस बीमारी के लक्षण भी शरीर पर पाए जाते हैं।
  2. संगत बौनापन / Proportionate Dwarfism : संगत बौने व्यक्ति में प्रजनन क्षमता और मानसिक विकास भी कम होता हैं। हड्डियां कमजोर और लचीली होती हैं। रीढ़ की हड्डी की बनावट असामान्य और छोटी होने के कारण स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ता है जिससे हाथ और पैर कमजोर होते हैं।
शरीर के विभिन्न अंगों की लम्बाई और बनावट के आधार पर बौनेपन का वर्गीकरण निम्न प्रकार में किया जाता हैं :
  1. रोजोमेलिक : इस तरह के बौने व्यक्तिओं में बाजु और जांघ बहुत छोटे होते हैं। बाकि शरीर सामान्य होता हैं। 
  2. मिजोमेलिक : इस तरह के बौने व्यक्तिओं में बाजु के अग्रभाग और पैरों की लम्बाई सामान्य से बहुत कम होती हैं। बाकि शरीर सामान्य होता हैं। 
  3. अक्रोमेलिक : इस तरह के बौने व्यक्तिओं में पैर और हाथ दोनों ही छोटे होते हैं और शरीर की लम्बाई सामान्य होती हैं। 
  4. मैक्रोमेलीक : इस तरह के बौने व्यक्तिओं में हाथ और पैर की लम्बाई सामान्य से बेहद कम होती हैं। 
बौनेपन का कारण और निदान
Causes and Diagnosis of Dwarfism in Hindi

बच्चो से जुडी 200 से 250 तरह की बिमारियों में से कोई एक बौनेपन का कारण होती हैं। लेकिन इनमे 70% मामलों में पियूष ग्रंथि (Pitutary Gland) से निकलने वाले वृद्धिकारक (Growth) हॉर्मोन की कमी यह मुख्य कारण होता हैं। इसके स्त्राव के कमी का मुख्य कारण पियूष ग्रंथि की बीमारी या आनुवंशिकता होता हैं। Gene में जन्मजात खराबी भी एक अहम कारण हैं।

प्रारंभिक अवस्था में बौनेपन की पहचान बाल्यावस्था में बच्चे के विकास की गति और लक्षणों से की जा सकती हैं। जब बच्चे की लम्बाई उम्र के अनुसार न होकर बहुत ही धीमी गति से होता हैं तब उनमे बौनेपन के लक्षण दिखाई देता हैं। बच्चे में बौनेपन की पहचान करने के लिए ग्रोथ हॉर्मोन की रक्त जांच की जाती हैं। अगर इस हॉर्मोन की कमी पायी जाती है तो इसका उपचार किया जाता हैं। अगर ग्रोथ हॉर्मोन की मात्रा सामान्य है तो बच्चे में वंशानुगत जांच FGFR-3 Gene की जांच की जाती हैं। इसमें किसी प्रकार की त्रुटि आने पर बच्चों में कम उम्र में ही बौनेपन बीमारी का निदान किया जाता हैं।

यदि बच्चे की लम्बाई कम हैं और सभी जांच सामान्य है तो उसे बौनापन नहीं कहकर छोटे कद का व्यक्ति कहा जाता हैं जो एक सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदगी जी सकता हैं।

बौनेपन का उपचार
Treatment of Dwarfism in Hindi

बौनेपन के 70% मामलों में पियूष ग्रंथि (Pitutary Gland) से निकलने वाले वृद्धिकारक (Growth) हॉर्मोन की कमी यह कारण होता हैं। चिकित्सक के देखरेख में इस हॉर्मोन के इंजेक्शन समय-समय पर देकर खून में इसके स्तर को सामान्य रखकर बच्चे का प्रारंभिक अवस्था में उपचार संभव हैं।

ग्रोथ हॉर्मोन के साथ थाइरोइड हॉर्मोन का नियंत्रण में होना भी बेहद जरुरी होता हैं। थाइरोइड हॉर्मोन की जांच कर आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में यह दिया जाता हैं।

बौनेपन से पीड़ित व्यक्तिओ को समाज में एक अलग नजरिए से देखा जाता हैं। उन्हें उपेक्षित और मजाकिया अंदाज में लिया जाता हैं। इन्हे वैवाहिक जीवन, सरकारी नौकरी व खेलकूद प्रतियोगिता में भी उचित स्थान नहीं दिया जाता हैं। इन सभी कारणों से बौने व्यक्ति तनाव और हीनभावना के शिकार होते हैं। समाज को समझना चाहिए की बौनेपन जीवन का अभिशाप नहीं है बल्कि की शरीर के वृद्धि की एक विकृति हैं। बौनेपन से पीड़ित व्यक्तिओं को समाज में हीनभावना से न देखकर इन्हे समाज में आदर व सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए। यह स्वास्थ्य जानकारी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ संजय लेले ने ईमेल द्वारा हमारे साथ share की हैं।

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आजकल ज्यादातर भारतीय लोगों के शरीर में विटामिन डी / Vitamin D की कमी पायी जाती हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण हैं आधुनिक युग की जीवनशैली। आपने अक्सर देखा होगा की आपके दादा या दादी के शरीर में आज भी विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में है पर अगर किसी हेल्थी नवजवान व्यक्ति का भी रक्त परिक्षण करे तो उसके रक्त में भी विटामिन डी की कमी पाई जाएँगी। पहले की तुलना में आजकल लोग सुबह की धुप और ताजा हवा में कम बाहर निकलते है और यही कारण है की उनके शरीर में त्वचा सूर्यकिरणों की कमी से विटामिन डी निर्माण नहीं करती हैं।

आजकल लोग AC में रहकर व्यायाम करना अधिक पसंद करते हैं और किसी के पास इतना समय नहीं है की सुबह की सुनहरी धुप का लाभ उठाए। शरीर के लिए विटामिन डी का क्या महत्त्व है, इसकी कमी के लक्षण क्या है और विटामिन डी की कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है इसकी अधिक जानकारी इस लेख में दी गयी हैं :

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विटामिन डी क्या हैं ?
Vitamin D in Hindi

विटामिन डी यह हमारे शरीर के लिए एक बेहद आवश्यक विटामिन हैं। यह विटामिन A, E और K की तरह एक Fat Soluble Vitamin हैं। विटामिन डी / Vitamin D को Sunshine Vitamin नाम से भी जाना जाता हैं। शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इस विटामिन की आवश्यकता होती हैं। विशेषज्ञ तो अब इस विटामिन डी को हॉर्मोन के समांतर मानने लगे हैं।

विटामिन डी के मुख्य दो प्रकार हैं - विटामिन डी 2 (ErgoCalciferol) और विटामिन डी 3 (Cholecalciferol)
विटामिन डी के दोनों प्रकार हमें कुछ प्रमाण में आहार से प्राप्त होते है पर केवल विटामिन डी 3 सूर्यकिरणों से त्वचा में निर्माण हो सकता हैं।

विटामिन डी की कमी के लक्षण क्या हैं ?
Symptoms of Vitamin D deficiency in Hindi

विटामिन डी के कमी के लक्षण इस प्रकार हैं :
  • हड्डियों और मांसपेशी में दर्द
  • सिरपर अधिक पसीना आना 
  • थकान 
  • कमरदर्द 
  • मांसपेशी में खीचाव
  • ब्लड प्रेशर बढ़ना 
  • नींद की कमी 
  • वजन बढ़ना 
  • विटामिन डी की कमी से बच्चों में Rickets और बड़ों में Osteomalacia जैसे भयानक रोग निर्माण होते हैं।
विटामिन डी की कमी का निदान कैसे किया जाता हैं ?
Diagnosis of Vitamin D deficiency in Hindi

किसी भी व्यक्ति में विटामिन डी की कमी के लक्षण पाए जाने पर डॉक्टर व्यक्ति का विटामिन डी रक्त परिक्षण करवाते हैं। विटामिन डी की कमी का पता लगाने के लिए 25(OH)D यह सबसे उपयुक्त जांच हैं। Endocrine Society के अनुसार इस रिपोर्ट का आकलन इस प्रकार किया जाता हैं :
  1. विटामिन डी की बेहद कमी - 20 ng/ml से कम 
  2. विटामिन डी की कमी - 21 ng/ml से 29 ng/ml के बिच 
  3. पर्याप्त विटामिन डी की मात्रा - 30 ng/ml से 60 ng/ml के बिच 
  4. अधिक विटामिन डी - 60 ng/ml से अधिक 
विटामिन डी के स्त्रोत क्या हैं ?
Food / Diet Source of Vitamin D in Hindi

विटामिन डी के विभिन्न स्त्रोत की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • सूर्य किरने / Sun Rays : सूर्य की किरणे विटामिन डी का बेहतर स्त्रोत हैं। सूर्योदय के समय खुले बदन सूरज की किरणे लेने से विटामिन डी मिलता हैं। इसके लिए सुबह 8 बजे के पहले अपने शरीर पर ज्यादा से ज्यादा खुले क्षेत्र पर सूरज की किरणें लेना चाहिए। गोरी चमड़ी वालों की तुलना में काली चमड़ी वाले लोगों को सूरज की की किरणों से विटामिन डी बनाने में अधिक समय लगता हैं। हात या पैर की जगह पीठ पर सूरज की किरणे लेना ज्यादा फायदेमंद हैं। 
  • आहार / Diet : सूरज की किरणों के अलावा दूध, डेरी उत्पाद जैसे दही-चीझ, मशरूम, मछली, अंडा, कॉड लिवर ऑइल आदि का सेवन करे। विटामिन डी फोर्टीफाईड आहार जैसे ब्रेड, सोयामिल्क, दूध, पनीर भी ले सकते हैं।
  • दवा / Medicine : विटामिन डी की दवा बाजार में मिलती है पर इनका सेवन डॉक्टर की सलाह से उचित मात्रा में ही करना चाहिए। विटामिन डी की गोली 1000 IU में रोजाना देते है या फिर 60000 IU की मात्रा में हफ्ते में एक बार सुबह खाली पेट लेने की सलाह दी जाती हैं। यह गोली लेने के बाद आधा घंटा कुछ खाना या पीना नहीं चाहिए। गोली कितने मात्रा में देना है और कितने दिन देना है यह डॉक्टर आपको जांचने के बाद ही तय कर सकते हैं। आवश्यकता से अधिक मात्रा में यह दवा लेने पर शरीर को नुक्सान पहुंचता हैं। इसकी अधिकता से शरीर के विभिन्न अंगों, रक्त नलिकाओं और अन्य स्थानों पर एक प्रकार की पथरी निर्माण होती हैं।
विटामिन डी और कैल्शियम युक्त आहार और दवा का सेवन साथ में करने से शरीर को अधिक लाभ होता हैं।  

विटामिन डी के फायदे
Health Benefits Of Vitamin D in Hindi

विटामिन डी से होनेवाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  1. विटामिन डी हड्डियों को मजबूती प्रदान करती हैं। 
  2. यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण / absorption के लिए जरुरी हैं। 
  3. अस्थमा के रोगियों को लाभ मिलता हैं। 
  4. यह रोग प्रतिकार शक्ति के लिए आवश्यक हैं। 
  5. मस्तिष्क की कार्यप्रणाली चुस्त  रहती हैं। 
  6. अतिरिक्त वजन / मोटापा नहीं बढ़ता हैं। 
  7. TB के मरीजों के लिए लाभकारी हैं। 
  8. ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक हैं। 
  9. कैंसर की रोकथाम के लिए जरुरी हैं। 
  10. शोधों में यह साबित हो चूका हैं की गर्भावस्था में महिलओं को प्रचुर मात्रा में विटामिन डी / Vitamin D लेना चाहिए। इसकी कमी से शिशुओं को सांस लेने में तकलीफ हो सकती हैं और इससे उनकी पसलियां कमजोर हो सकती हैं। विटामिन डी की गम्भीर कमी बच्चों के सिर की खोपड़ी या पैरों की हड्डी पर भी असर डालती हैं। 
  11. विटामिन डी की कमी किडनी पर भी प्रभाव डालती है इसलिए जरुरी है की अभिभावक बच्चों को सुबह बाहर मैदानी खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करे और विटामिन डी युक्त भोजन व इससे जुड़े सप्लीमेंट उनके खानपान में शामिल करे। 
विटामिन डी की दैनिक आवश्यक मात्रा
Daily Requirement (Dose) of Vitamin D in Hindi 

विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन डी की आवश्यकता आयु के अनुसार बदलती हैं :
  1. जन्म से लेकर 1 वर्ष तक के बच्चों के लिए - 400 IU विटामिन डी प्रतिदिन चाहिए
  2. 1 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक के व्यक्ति के लिए - 600 IU विटामिन डी प्रतिदिन चाहिए
  3. 70 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति के लिए - 800 IU विटामिन डी प्रतिदिन चाहिए
  4. गर्भावस्था / Pregnancy और दुग्धपान / Lactation में महिलाओं को 600 IU विटामिन डी प्रतिदिन चाहिए 
विटामिन डी हमारे शरीर के लिए एक बेहद आवश्यक विटामिन है और इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए की सूर्य किरणे और आहार के माध्यम से प्राकृतिक विटामिन डी हमें पर्याप्त मात्रा में मिलता रहे।

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शरीर में होनेवाले ज्यादातर रोगों का केंद्र पेट ही होता हैं। ऐसे में खानपान के मामले में थोड़ी सी लापरवाही कई बिमारियों की वजह बनती हैं। ऐसे में सावधानी ही बचाव हैं।

कुछ समय पहले मैंगी में हानिकारक सीसा और सोडियम ग्लूटापेट मिलने से उसे बैन कर दिया गया था। भारत में रेडी तो ईट फूड्स और पैकेज्ड फूड्स के अलावा भी कई अन्य उत्पादों में प्रीझरवेटिव, स्वीटनर और कलरिंग उत्पाद मिलाये जाते हैं। ऐसे सभी उत्पाद न केवल हमारे शरीर के लिए स्लो पाइजन का काम करते है बल्कि घातक बिमारियों की वजह भी बनते हैं। इनसे बचने के लिए एक मात्र उपाय देसी और प्राकृतिक प्रोडक्ट्स को काम में लेना हैं।

बाजार में मिलनेवाले तैयार पैकेज्ड फूड्स और अन्य आहार में कौन से हानिकारक तत्व होते है और उनका हमारे शरीर पर क्या हानिकारक प्रभाव पड़ता है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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  • पोटैशियम ब्रोमेट - इसके सेवन से कैंसर का खतरा रहता हैं। इसे उन ब्रेड और बेकरी उत्पादों में मिलाया जाता है जिन्हे हम सब खाते हैं। यह आटे को लचीला बनाता हैं। इनसे बनी ब्रेड को उच्च तापमान पर नहीं पकाए तो यह ब्रेड में ही रह जाता हैं। 
  • सोडियम बेंजोएट - सॉस, फ्रूट, जैम और अचार में इस प्रीझरवेटिव का इस्तेमाल किया जाता हैं। इससे कैंसर होने का ख़तरा अधिक रहता है और नर्वस सिस्टम पर इसका बुरा असर होता हैं। 
  • सोडियम नाइट्रेट - हैम बर्गर, हॉट डॉग, सॉस में इसका इस्तेमाल होता हैं।  उत्पाद ज्यादा दिनों तक इस्तेमाल हो सके और उनका रंग भी अच्छा रहे इसलिए इसका उपयोग होता हैं। इसके अधिक सेवन से फेफड़े कमजोर होते हैं और अस्थमा की तकलीफ बढ़ती हैं। 
  • ऐस्परटेम - यह एक कृत्रिम स्वीटनर हैं। अक्सर मोटापे और डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी की जगह इसे इस्तेमाल किया जाता हैं। इसके अधिक सेवन करने से माइग्रेन, नेत्रदोष और सिरदर्द होने लगता हैं। 
  • नमक / Salt - आवश्यकता से अधिक नमक का सेवन हमारे सेहत के लिहाज से बिलकुल गलत है। पैक्ड वेजिटेबल, चिप्स, फ़ास्ट फ़ूड, नमकीन, सूप, अचार, पापड़ और आइसक्रीम में भी अधिक नमक का इस्तेमाल होता हैं। इससे शरीर में सूजन, ह्रदय रोग, किडनी रोग, ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर विकार निर्माण होते हैं। 
  • प्रोपाईल गैलेट - मीट, वेजिटेबल आयल, पोटैटो स्टिकस, च्युइंगगम, रेडी टु यूज़ सूप में इसका उपयोग होता हैं। इनके अधिक सेवन से पेट का कैंसर होने का ख़तरा रहता हैं। 
  • ट्रांस फैट - डेरी उत्पाद में प्राकृतिक रूप से ट्रांस फैट होता हैं। अब पैकेज्ड फ़ूड में वेजिटेबल ऑइल में हाइड्रोजन मिलाकर इसका इस्तेमाल किया जा रहा हैं। इसे खाने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा दोगुना बढ़ जाता हैं।  
  • रिफाइंड अनाज - साबुत अनाज की तुलना में रिफाइंड अनाज खाना शरीर के लिए खतरनाक होता हैं। सफ़ेद ब्रेड, सफ़ेद चावल और सफ़ेद पास्ता ह्रदय रोग के खतरे को बढ़ाते हैं। इनमे ग्लूटेन अधिक होता हैं। इसकी कलरिंग और स्टिचिंग भी की जाती हैं, जो की हमारे शरीर के लिए खतरनाक हैं। 
ऊपर दी हुई जानकारी पढ़कर हमें यह पता चलता है की खानपान में प्रोसेस्ड और प्रीझरवेटिव आहार की जगह हमें नैसर्गिक देसी आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसा करने से हमें न केवल कई रोगों मुक्ति मिलती हैं बल्कि सेहतमंद भी रहा जा सकता हैं। यह जानकारी हमें आहार विशेषज्ञ डॉ सुनील कांति ने मुंबई से भेजी हैं। 

अच्छे सेहत के लिए हमेशा अपने परिवार के खानपान के मामले में सजग रहे। स्वयं को और अपने बच्चे को पैकेज्ड फ़ूड से दूर रखे। 

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