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प्राण का आयाम अर्थात नियंत्रण पूर्वक नियमन करते हुए विस्तार करना प्राणायाम है। इस सुष्ट्री के कारणीभूत दो मुख्य द्रव्य है - आकाश और प्राण। दोनों ही सर्वत्र व्याप्त है। प्राणवायु / Oxygen वह आंतरिक शक्ति है जो सकल जीवों में व्याप्त है। यह प्राणशक्ति जिसमे मन का भी समावेश होता है, उसे हम श्वास की माध्यम से प्राप्त करते है। इसी प्राणशक्ति का संचार नाड़ियों के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में होता है।

श्वास / Breathing, वायु का स्थूल रूप है और प्राण सूक्ष्म रूप। बाह्य वायु को भीतर लेना और बाहर छोड़ने का नाम श्वसन - क्रिया है। शरीर में श्वसन क्रिया जन्म से मृत्यु तक अविरत चलती रहती है। इसी श्वसन क्रिया का नियमन करना प्राणायाम कहलाता है।

पातञ्जल योगसूत्र में प्राणायाम की व्याख्या कुछ इस तरह से दी गई है, 
" तस्मिन्नसंति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम:।"  
अर्थात, श्वास और प्रश्वास की गति का विच्छेद प्राणायाम कहा जाता है।

आज हम प्राणायाम का आधार याने की अनुलोम विलोम प्राणायाम के बारें में जानेंगे। यह नए साधकों को प्राणायाम के लिए सक्षम व योग्य बनाने के लिए है। प्राणायाम सिखने की शुरुआत ही अनुलोम विलोम से की जाती है। फिर क्रमश: दूसरे प्रकारों का अभ्यास किया जाता है। अनुलोम विलोम को दीर्घ साधकर ही दीर्घ कुम्भक, कपालभाति, भस्त्रिका आदि किये जाते है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम को नाड़ीशोधक प्राणायाम भी कहा जाता है। अंगेजी में इसे Alternate Nostril Breathing नाम से भी जाना जाता हैं। इसमें साँस लेने की और छोड़ने की विधि बारबार की जाती है। अगर हर रोज इसे किया जाय तो सभी नाड़ियाँ स्वस्थ व निरोगी बनेगी। यह प्राणायाम हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है।
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अनुलोम विलोम प्राणायाम की विधि
  • सर्वप्रथम साफ़ सुथरी जगह पर दरी या कम्बल बिछाकर सुखासन, वज्रासन, या पद्मासन में बैठ जाए। 
  • आँखों को बंद रखे। 
  • बाए हथेली को बाए घुटने पर रखे।
  • प्रथम सांस बाहर निकालकर नासाग्र मुद्रा बनाये। 
  • दाएं हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बन्द करे। 
  • अंगूठे के पास वाली दोनों अंगुलियां तर्जनी और मध्यमा को भ्रूमध्य में रखे।
  • अब बाए छिद्र से सांस खींचे इसके पश्चात बाए छिद्र को अनामिका अंगुली से बन्द करे और दाए छिद्र से अंगूठा हटाकर साँस छोड़े।
  • अब इसी प्रक्रिया को बाए छिद्र से शुरुआत करके करे। 
  • सांस लेने में 2.5 सेकंड और सांस छोड़ने में 2.5 सेकंड इस तरह एक सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया 5 सेकण्ड की होती हैं।  
  • इस प्रकार यह एक आवर्तन हुआ ऐसे कम से कम 5 आवर्तनो से शुरू कर धीरे धीरे बढ़ाए।
  • अंत में दाई हथेली भी घुटनों पर रख दोनों नासिकाओं से 5 बार सांस भरकर पूरी सांस बाहर निकाल दीजिये।
  • प्रतिदिन 7 से 10 मिनिट करे। सामान्य अवस्था में 15 मिनिट तक और असाध्य रोगों में 30 मिनिट तक करे। 
  • इसकी विधि हम 2 तरीकों से कर सकते है। पहली विधि में साँस लेना है और छोड़ना है साँस रोकना नही है। सांस लेने व छोड़ने का समय बराबर रहना चाहिए। मन में गिनती करे। दूसरी विधि में अंतकुम्भक के साथ कर सकते है, मतलब समान अनुपात में सांस लेना और सांस को रोककर रखना , फिर दुगुने अनुपात में साँस छोड़ना।
अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ
  1. अनुलोम विलोम प्राणायाम से 72000 नाडियों की शुद्धि होती है इसीलिए इसे नाडीशुद्धि प्राणायाम भी कहते है।
  2. इस प्राणायाम से हृदय को शक्ति मिलती है साथ ही कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।  
  3. प्राणायाम में जब भी हम सांस भरते है शुद्ध वायु हमारे खून के दूषित पदार्थों को बाहर निकाल देती है, जिससे शुद्ध रक्त शरीर के सभी अंगो में जाकर पोषण देता है।
  4. वात, पित्त, कफ के विकार दूर कर गठिया, जोड़ों का दर्द, सूजन आदि में राहत मिलती है।
  5. इसके नियमित अभ्यास से नेत्रज्योति बढ़ती है। 
  6. रक्तसंचालन सही रहता है। 
  7. अनिद्रा में लाभदायक है। 
  8. तनाव घटाकर शान्ति प्रदान करता है।
  9. माइग्रेन / Migraine, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, क्रोध, कम स्मरणशक्ति से पीड़ित लोगो के लिए यह विशेष लाभकर है।  
  10. यह प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों गोलार्धो में संतुलन के साथ ही विचारशक्ति और भावनाओं में समन्वय लाता है।
  11. सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता हैं। 
अनुलोम विलोम प्राणायाम में सावधानियां
  1. साँस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया में आवाज नही होना चाहिए।
  2. कमजोर एवम अनैमिया पीड़ित व्यक्ति में यह आसन करते वक्त दिक्कत हो सकती है अतः सावधानीपूर्वक करे।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम दिखने और करने में बेहद सामान्य लगता है पर जब आप इसका नियमित अभ्यास करने लगते है तब आपको इस सामान्य दिखनेवाले प्राणायाम से होने वाले दिव्य लाभ की अनुभूति होती हैं। 
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आज कल हर पुरुष की इच्छा रहती है की उनका शरीर भी फिल्मों के हिरो की तरह गठीला होना चाहिए। 6 पैक एब्स और मस्कुलर बॉडी बनाने के लिए लोग घंटों जिम में पसीना भी बहाते हैं। बहुत परिश्रम करने के बावजूद भी कुछ लोग अपने शरीर का मनचाहा विकास नहीं कर पाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है की उन्हें इस बात का सही ज्ञान नहीं होता है की अपने फैट को कम कर स्नायु / मसल्स को कैसे विकसित करे।

आज इस लेख में हम आपको शरीर को गठीला और मस्कुलर बनाने के लिए व्यायाम के साथ अन्य किन बातों का ख्याल रखना चाहिए इसकी जानकारी देने जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़े :

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शरीर में स्नायु / Muscles बढ़ाने के लिए व्यायाम के साथ प्रोटीन और आराम की ख़ास जरुरत होती हैं। आप कितनी भी कसरत क्यों न करे पर अगर आप सही आहार नहीं लेते है तो मसल्स की जगह केवल आपका वजन ही बढ़ेगा। आहार की तरह शरीर को विकसित होने के लिए आराम की भी जरुरत हैं। आवश्यकता से अधिक व्यायाम और आराम की कमी से स्नायु को क्षति भी पहुंच सकती हैं।

प्रोटीन / Protein 
  • अच्छे मसल्स चाहिए तो आपको डाइट में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होनी चाहिए। यह अलग-अलग शरीर और वजन के हिसाब से होती हैं। आप चाहे तो इसके लिए आहार विशेषज्ञ / Dietitian की मदद भी ले सकते हैं। 
  • विशेषज्ञों का कहना है की सामान्य डाइट में कार्बोहायड्रेट की मात्रा अधिक रहती हैं लेकिन यदि भरपूर बॉडी चाहिए तो कार्बोहायड्रेट कम कर प्रोटीन की मात्रा धीरे-धीरे करके 30% बढ़ा लेनी चाहिए।  
  • आपका जितना वजन है उसके 30 गुना ज्यादा आपको कैलोरीज की आवश्यकता होती है। अगर आपका वजन 60 किलो है तो आपको 1800 कैलोरीज की आवश्यकता होती हैं। अधिक व्यायाम करने पर इसका प्रमाण बढ़ भी सकता हैं। 
  • ऐसे तो अधिकतर लोग प्रोटीन लेने के लिए मांसाहार लेते है पर अब लोग शाकाहार लेकर बॉडी बनाना पसंद करते हैं। शाकाहार से प्रोटीन लेने के लिए आप जैतून का तेल, पनीर, शहद, मूंगफली, आंवला, बेसन का लड्डू, अखरोट, छुहारे, किशमिश, च्यवनप्राश को अपने आहार में शामिल करे। वेज प्रोटीन डाइट में काबुली चने, टोफू, सोयाबीन, सोयमिल्क, पनीर, विभिन्न फलियां और दालों को शामिल करे। 
  • कसरत करने से पहले आपको ऐसा आहार लेना है जिससे धीरे-धीरे आहार से शरीर को एनर्जी मिलती रही जैसे की पास्ता या चावल जैसे कार्बोहायड्रेट। 
  • कसरत करने के बाद ऐसा आहार ले जिससे जल्द एनर्जी और प्रोटीन मिले जैसे की प्रोटीन पाउडर, दूध और शक्कर मिलाकर बनाया हुआ प्रोटीन शेक। 
  • अपने आहार का ठीक से प्लानिंग करे। आहार में अनुशासन सबसे ज्यादा जरुरी हैं। आपका वजन अगर 60 किलोग्राम है तो आप एक दिन में 150 ग्राम प्रोटीन ले सकते हैं। 
  • आप चाहे तो अपने डायटीशियन की सलाह से आहार में प्रोटीन सप्लीमेंट को शामिल कर सकते हैं। 
आराम / Rest 

आप जिम या घर में मसल्स का व्यायाम करते है तो फिर उन्हें रिकवर और रिपेयर होने के लिए आराम देना भी जरुरी हैं। एक्सपर्ट का कहना है की आपको कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेना चाहिए और अपने वॉकआउट को भी बदलते रहना चाहिए। रोजाना कसरत की जगह आप को हफ्ते में एक से दो दिन शरीर को आराम भी देना चाहिए। केवल हैवी वर्कआउट करने की बजाय एरोबिक भी करना चाहिए। 

हमारे शरीर की मरम्म्त का काम रात  हैं। अधिकतर लोग रात के समय जरूर उठते हैं। रात को सोने से पहले अपने पास एक बड़े बर्तन में शहद मिला दूध रखे और रात में जब भी नींद टूटे इस दूध को पीकर सो जाये। ये वजन बढ़ाने में और मसल्स का विकास करने में मदद करता हैं। 

गर्मी के मौसम में अधिक कसरत न करे। सर्दी के मौसम में आप अधिक कसरत कर सकते हैं। सर्दी में मसल्स की रिकवरी और ग्रोथ ज्यादा बेहतर तरीके से होती हैं। 

मसल्स बनाने के लिए आपको कौनसा व्यायाम करना है यह आपके कोच अधिक बेहतर बता सकते है। अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो बिना किसी की सलाह से अधिक वजन वाले व्यायाम न करे। गलत व्यायाम करने से आपके मसल्स को क्षति पहुंच सकती हैं। 

बॉडी बनाने के लिए कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे - बॉडी बनाने के लिए कैसा आहार लेना चाहिए ?

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Cord Blood के नाम के बारे में आपने अक्सर सुना होगा और अगर आप अभी माँ या बाप बनने वाले है या प्रेगनेंसी प्लान करने की सोच रहे है तो अवश्य इसके बारे में विस्तार में जानना चाहेंगे। चिकित्सा क्षेत्र में पिछले दशक से जबरदस्त क्रांति हो रही है और कैंसर, रक्त रोग और डायबिटीज जैसे रोग से लड़ने के लिए करोडो रूपए खर्च कर उपचार ढूढने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसी प्रयास का एक हिस्सा है Cord Blood !

बच्चे के गर्भनाल से निकले Cord Blood और उसमे मौजूद Stem Cell का उपयोग कर कई गम्भीर रोगों का सफल उपचार पिछले दशक से किया जा रहा हैं। Cord Blood क्या है और उसे हम कैसे सुरक्षित रख सकते है इसकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

BLOOD-BANKING-STEM-CELL-IN-HINDI-BENEFITS
Cord Blood क्या होता हैं ?
What is Cord Blood in Hindi?

बच्चे के जन्म के पश्च्यात गर्भनाल (Umbilical Cord) और अपरा (Placenta) में जो रक्त शेष रह जाता है उसे गर्भनाल रक्त या Cord Blood कहा जाता हैं। अभी कुछ दशकों तक इस रक्त को किसी विशेष उपयोग का न समझकर फेंक दिया जाता था। अब अध्ययन से यह पता चला है की Cord Blood के अंदर बेहद महत्वपूर्ण कोशिकाए होती है जिन्हे Stem Cells कहा जाता हैं। इन Stem Cells का उपयोग आगे जाकर व्यक्ति को किसी विशेष रोग में उपचार या अंग प्रत्यारोपण / Transplantation में होता हैं।

Cord Blood का महत्त्व को ध्यान में रखकर अब कई सारे Cord Blood Bank खोली जा चुकी है जहाँ पर इस Cord Blood का संग्रह किया जाता हैं।

Cord Blood Stem Cells क्या होता हैं ?
What is Cord Blood Stem Cells in Hindi ?

गर्भनाल और अपरा में Cord Blood Stem Cells काफी मात्रा में होती है। यह कोशिकाए अंडे से, बालक या वयस्क व्यक्ति के शरीर से निकले हुए कोशिकाओं से भिन्न होती हैं। यह Cord Blood Stem Cells को जरुरत पड़ने पर रक्त कोशिका, सफ़ेद कोशिका या भिन्न प्रकार की कोशिकाओं में आवश्यकतानुसार विकसित किया जा सकता हैं। Stem cell यह किसी पौधे के बिज के समान होते हैं। जिस तरह बिज आगे जाकर पेड़, पत्ते, फल, फूल, शाखाए आदि में विकसित होता है ठीक उसी तरह Stem cell में भी हमारे शरीर की सारी जानकारी होती है और जरुरत के अनुसार इससे जो चाहे वो निर्माण किया जा सकता हैं।

Cord Blood का संग्रह कैसे किया जाता हैं ?
How is Cord Blood collected and stored / banked in Hindi ?

Cord Blood को निकालते समय न तो माँ और नाही बच्चे को किसी प्रकार की कोई तकलीफ होती हैं। प्रसव / Delivery के बाद बच्चे की गर्भनाल को बाँधकर काट देने के बाद बची हुई गर्भनाल / Umbilical cord और Placenta से Cord Blood को निकालकर संग्रहीत किया जाता हैं। साधारण कमरे के तापमान में यह रक्त 1 से 2 दिन तक सामान्य रहता है इसलिए इतने समय में इसे Cord Blood Bank में ले जाया जाता है और विशेष निर्जन्तुक विभाग में इस पर प्रक्रिया कर संग्रहीत / Storage किया जाता हैं। यहाँ पर यह Cord Blood कई दशकों तक सुरक्षित रह सकता हैं।

Cord Blood का क्या महत्त्व हैं ?
Importance of Cord Blood in Hindi

आज कई जगहों पर Stem cells प्रत्यारोपण में अस्थिमज्जा / Bone Marrow की जगह Cord Blood Stem Cells का उपयोग किया जा रहा हैं। यही नहीं कैंसर, अनुवांशिक रोग, रक्त रोग (सिकल सेल, थैलेसेमिया) और चयापचय रोग जैसे 80 गम्भीर विकारों में इसका सफल उपयोग हो रहा हैं। आज 70% Stem cells प्रत्यारोपण रोगियों को उनका Cord Blood पहले संग्रहीत न किये जाने के कारण मेल खाने वाले Stem cell की खोज में इधर-उधर भागना पड़ता हैं। अस्थिमज्जा / Bone Marrow दान करनेवाले लोगों की संख्या भी देश में बेहद कम हैं। यह कमी Cord Blood के संग्रहण करने से मीट सकती हैं। आपका Cord Blood Stem cell तो आपको उपयोग आएगा ही पर अगर किसी और को चाहिए तो आपके परिवार के अन्य सदस्य को थोड़ा मेल खाने पर भी इसे उपयोग में लाया जा सकता हैं।

Cord Blood के उपयोग पर आज कई संशोधन हो रहे और वह दिन दूर नहीं जब लकवा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, दिमाग के रोग, ह्रदय रोग, अनुवांशिक रोग, बहरापन, अंधापन जैसे गम्भीर रोग भी Cord Blood Stem cell से आसानी से ठीक किये जा सकेंगे।  

Cord Blood को कहा संग्रहीत करना चाहिए ?
Where to Store Cord Blood in Hindi ?

आजकल भारत में कई सारे बड़े शहरों में Cord Blood Bank की सुविधा उपलब्ध हैं। इसके लिए आपको प्रसूति के पहले अपना नाम दर्ज करना होता हैं और वहां पर आपकी जांच की जाती हैं। अगर आप फिट है तो आपका नामांकन हो जाता हैं। प्रसव के बाद सुचना देने पर Cord Blood बैंक की टीम आकर Cord Blood को सुरक्षित रूप से निकालकर संग्रहीत करती हैं। अपने बच्चे का Cord Blood संग्रहीत करने के लिए आपको हर बर्ष कुछ रकम अदा करनी होती हैं। अपने शहर की Cord Blood Bank और इसमें होनेवाले खर्च की जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से ही संपर्क करे।

Cord Blood को संग्रहीत करने का चलन धीरे-धीरे भारत में बढ़ रहा है और इसके महत्त्व को देखते हुए अगर आप Cord Blood को storage करने में सक्षम है तो इसे अवश्य सुरक्षित रखना चाहिए।
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विश्वभर में करीब 30% युवा पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से पीड़ित हैं। अगर सेक्स करते समय प्रथम 2 मिनिट में ही किसी पुरुष का वीर्य स्खलन / Semen Ejaculation हो जाता है तो इसे शीघ्रपतन  या Premature Ejaculation कहा जाता हैं। शीघ्रपतन का उपचार करने के पहले उसका कारण समझना भी बेहद जरुरी हैं। शीघ्रपतन के विविध कारणों की जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे - शीघ्रपतन के कारण।

अधिकतर शीघ्रपतन के मामलों में कोई विशेष कारण नहीं होता है और रोगी से बात कर और विशेष व्यायाम / क्रिया समझाकर इसका उपचार किया जा सकता हैं। शीघ्रपतन की समस्या का उपाय और आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खों की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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  • परामर्श / Counselling : शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिए पीड़ित की तकलीफ को शांति से सुनने और उसके मन में बैठे भय या अज्ञान को दूर करना सबसे जरुरी होता हैं। कई लोगो को यह तकलीफ केवल अज्ञान या गलत जानकारी के कारण होती हैं। डॉक्टर के साथ अच्छी तरह से बात कर काफी हद तक यह तकलीफ दूर हो सकती हैं। 
  • असंवेदनकारी दवा / Local Anesthetic : कुछ डॉक्टर शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिए ऐसी दवा (क्रीम या स्प्रे) देते है जिसे लिंग / Penis पर लगाने पर संवेदना चली जाती है या कम हो जाती हैं। इससे सेक्स करने के 15 मिनिट पहले लगाना होता हैं। यह काफी असरदार उपचार है परन्तु इसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं। कुछ लोगों को इससे एलर्जी होने का खतरा रहता है।
  • मौखिक दवा / Oral Medicine : पीड़ित व्यक्ति की जांच करने के बाद डॉक्टर जरुरत पड़ने पर दवा भी देते हैं। 
  1. अगर किसी चिंता, भय या तनाव के कारण यह समस्या है तो टेंशन कम करनेवाली (Antidepressant) दवा दी जाती हैं। 
  2. कुछ दर्दनाशक (Analgesic) दवा उपयोग भी शीघ्रपतन को दूर  के लिए किया जाता हैं। 
  3. शीघ्रपतन के उपचार के लिए सिल्डेनफिल-वियाग्रा जैसी प्रसिद्ध दवा का भी उपयोग किया जाता है पर इनका सेवन डॉक्टर की सलाह से मर्यादित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि इस दवा के गंभीर दुष्परिणाम शरीर पर होते हैं। 
  4. अगर पेशाब या प्रोस्टेट ग्रंथि में कोई संक्रमण या infection है तो उसे एंटीबायोटिक दवा देकर ठीक किया जाता हैं। 
  5. अगर शरीर में थाइरोइड या टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में कोई गड़बड़ी है तो जांच कर उचित हार्मोनल दवा दी जाती हैं। 
  • व्यायाम / Exercise : शीघ्रपतन की समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टर आपको कुछ विशेष व्यायाम सिखाते है जिससे इस समस्या को बिना दवा भी ठीक करने में सहायता होती हैं। शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने के लिए निचे दिए हुए व्यायाम / क्रिया करने की सलाह दी जाती हैं :
  1. Stop Squeeze Technique - सेक्स करते समय जब पुरुष को लगे की वीर्य निकलने ही वाला है तब अपने साथी से गुप्तांग / Glans Penis के निचे दबाने को कहे। इतने जोर से दबाए की वीर्य न निकले और दर्द भी न हो। जब ऐसा लगे की अब वीर्य निकलने की इच्छा समाप्त हो गयी है तब छोड़ दे। अब आधा मिनिट रुक कर दोबारा सेक्स करे और जब वीर्य निकलने का एहसास हो तो दोबारा दबाकर रखे। इस तरह यह अभ्यास 8 से 10 बार करे। धीरे-धीरे अभ्यास के साथ वीर्य निकलने का अंतराल बढ़ जायेगा। 
  2. हस्त मैथुन / Mastribution - पीड़ित पुरुष को सेक्स करने के 1 या 2 घंटे पहले हस्तमैथुन करने को कहा जाता है। इससे बाद में सेक्स करते समय जल्द वीर्य स्खलन नहीं होता हैं। यह क्रिया अधिक उम्र के पुरुषों में काम नहीं आती क्योंकि उनमे हस्तमैथुन करने से दोबारा जल्द सेक्स इच्छा निर्माण होने की आशंका कम रहती हैं। 
  3. Stop-Start Technique - पीड़ित व्यक्ति में वीर्य स्खलन का अंतराल और क्लाइमेक्स के अंतराल को बढ़ाने के लिए यह अभ्यास करने के लिए कहा जाता हैं। इसमें पुरुष को हस्त मैथुन करने की सलाह दी जाती है और जब ऐसा लगे की वीर्य निकलने वाला है तब पहले ही रुकने की सलाह दी जाती हैं। ऐसा बार-बार करने से वीर्य को लम्बे समय तक रोकने का अभ्यास होता हैं और शीघ्रपतन में लाभ होता हैं। 
  4. Kegel Exercise - यह व्यायाम स्त्री और पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद हैं। मूत्र विसर्जन करते समय अचानक मूत्र के बहाव को रोक दे और कुछ सेकंड के अंतराल बार फिर मूत्रविसर्जन करे। मूत्र के बहाव को रोकने के लिए जिस मांसपेशियों का इस्तेमाल होता हैं उन पर ध्यान दे। इसमें जांघ, पृष्ठ और पेट के मांसपेशियों को ढीला रखना हैं। रोजाना इन पेशियों की कसरत करने से शीघ्रपतन में लाभ होता हैं। 
  • योग / Yoga - शीघ्रपतन की समस्या से निजात पाने के लिए आप निचे दिए योग अभ्यास कर सकते है जिससे वीर्य के शीघ्र बहाव को रोकने में मदद मिलती हैं। योग के विधि की सम्पूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए  पर click करे। 
  1. सर्वांगासन 
  2. पश्चिमोत्तानासन 
  3. हलासन 
  4. गोमुखासन 
  5. वज्रासन 
  6. मण्डूकासन 
  • आयुर्वेद और घरेलु उपाय / Ayurvedic and Home Remedies : कई वर्षों से शीघ्रपतन का सफल उपचार आयुर्वेदिक पद्धति से होता आ रहा हैं। कई एलोपैथी डॉक्टर भी उपचार करने के लिए आयुर्वेदिक फार्मूला का ही उपयोग करते हैं। 
  1. औषध - शीघ्रपतन का उपचार करने के लिए जतिफल, कुमकुम, खसखस बिज, अश्व्गन्धा, गोक्षुर, यष्टिमधु, भल्लातक फल मज्जा, जटामांसी, कपिकच्छु बिज, शहद, मूसली, शतावरी, शिलाजीत जैसे आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग किया जाता हैं। औषध का चयन, मात्रा और समय को रोगी के प्रकृति, कुपित दोष के हिसाब से किया जाता हैं। एक ही फार्मूला से सभी रोगियों को लाभ हो ऐसा नहीं होता हैं। 
  2. पंचकर्म - औषधि द्रव्यों के साथ जरुरत पढ़ने पड़ने पर स्नेहन, स्वेदन और बस्ती जैसे पंचकर्म चिकित्सा की जाती हैं। पचकर्म चिकित्सा से पीड़ित व्यक्ति को जल्द लाभ होता हैं। खासकर मधुतैलिक यापन बस्ती से अधिक लाभ होता हैं। 
  3. रोज सुबह दूध के साथ 1 चमच्च अश्वगंधा चूर्ण लेने से शीघ्रपतन में लाभ होता हैं। 
  4. सुबह शाम 1 चमच्च अतिरसादि चूर्ण लेने से भी लाभ होता हैं। 
  5. वसंत कुसुमाकर रस. गोदन्ति भस्म, यौनअमृत वटी, शिलाजीत सत्व जैसे आयुर्वेदिक दवा शीघ्रपतन में लाभकारी हैं। ऐसे तो यह सभी आयुर्वेदिक दवा सुरक्षित है पर अधिक मात्रा और अधिक समय तक लेना हानिकारक हो सकता हैं इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक दवा को अपने डॉक्टर से जांच कराकर लेने में ही समझदारी हैं।  
  6. आहार - शीघ्रपतन को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा के साथ अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आहार में तीखा-तला हुआ और अधिक मसालेदार आहार नहीं लेना चाहिए। आहार में ताजे फल, हरी-पत्तेदार सब्जी, फ्रूट जूस, नारियल पानी, दूध और शहद का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। आहार में शतावरी, अंडे, डार्क चॉकलेट, गाजर, ओट्स, अश्वगंधा, अवाकडो, अंगूर, केला, प्याज, लसुन, अदरक, बादाम, मशरूम और भरे चावल / ब्राउन राइस जैसे आहार पदार्थों का अधिक समावेश करने से वीर्य का प्रमाण भी बढ़ता है और शीघ्रपतन भी नहीं होता हैं।  
  • अन्य / Others - शीघ्रपतन की समस्या से निजात पाने के लिए निचे दिए हुए अन्य उपाय भी कारगर साबित होते हैं। 
  1. सेक्स करते समय दो कंडोम लगाकर सेक्स करे जिससे लिंग को जल्द संवेदना नहीं मिलती है और उत्तेजना देरी से मिलने से शीघ्रपतन नहीं होता। 
  2. तनाव मुक्त रहे। तनाव को दूर करने के लिए लाफ्टर थेरेपी या मैडिटेशन का सहारा लेना चाहिए। 
  3. शीघ्रपतन से बचने के लिए आप अपनी स्तिथि / Position भी बदल कर देख सकते हैं। अगर  समय हमेशा ऊपर रहते है तो खुद को निचे लिटाकर सेक्स कर सकते हैं। 
  4. सेक्स करते समय जब भी आपको एहसास हो की वीर्य जल्द निकलने वाला है तब लम्बी गहरी साँसे लेना शुरू कर दे। इससे वीर्य नहीं निकलेगा और आप शर्मिंदा होने से बच जाएंगे। 
  5.  शराब, धूम्रपान, तम्बाखू, कॉफ़ी जैसे व्यसन नहीं करने चाहिए।      
  6.  अगर आपका वजन जरुरत से अधिक है और आप मोटापे से पीड़ित है तो अपने अपना वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए। मोटापे के कारन टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में कमी आती हैं। 
  7. रोजाना या हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनिट तक अपने क्षमतानुसार व्यायाम अवश्य करना चाहिए। व्यायाम करने से शरीर फिट रहता है, वजन कम होता है और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की मात्रा सही रहती हैं। 
शीघ्रपतन / Premature Ejaculation के कारण पुरुष के अहम को बड़ी चोट लग जाती है और इसलिए जरुरी है की ऐसी समस्या निर्माण होने पर विज्ञापन देख कोई दवा इस्तेमाल करने की जगह आप विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज कराये।

Image courtesy of marin at FreeDigitalPhotos.net
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वर्तमान समय में पुरुषों में 'शीघ्रपतन'  या जिसे अंग्रेजी में 'Premature Ejaculation'  कहा जाता है यह समस्या अधिक देखने में आ रही हैं। ऐसे तो मैं सेक्स से जुड़े विषयों पर लिखने से बचता हु पर क्योंकि पिछले कई महीनों से रोजाना बहुत सारे पाठकों के ईमेल और व्हाट्सप्प पर इस समस्या से जुड़े प्रश्न आते हैं मैं इस विषय पर विस्तार में जानकारी लिख रहा हु।

अपेक्षा से पहले वीर्य / Semen  का स्खलन / Ejaculation होने को हीं शीघ्रपतन कहते हैं। पीड़ित व्यक्ति पर इस समस्या का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिणाम पड़ता हैं। इस समस्या के कारण जहां कुछ परिवार टूट जाते है तो वही कुछ लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। लोगो की इस मज़बूरी का फायदा उठाकर कई निम-हाकिम ऑनलाइन या समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर लोगो से हजारों रुपये लूट लेते हैं।

आज इस लेख में हम शीघ्रपतन के कारण और लक्षण की जानकारी दे रहे हैं :

premature ejaculation causes ayurvedic treatment remedies in hindi
शीघ्रपतन का कारण
Causes of Premature Ejaculation in Hindi

शीघ्रपतन का कोई ठोस कारण अभी तक पता नहीं चला हैं। यह समस्या शारीरिक और मानसिक दोनों कारणों से हो सकती हैं। इनकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :
  1. हस्थमैथन / Masturbation : कई विशेषज्ञों का कहना है की जो पुरुष अधिक हस्थमैथुन के आदि होते हैं उन्हें शीघ्रपतन की समस्या होने की संम्भावना अधिक होती हैं। ऐसे पुरुष को क्लाइमेक्स पर पहुंचने की जल्दी होती है जिससे यह समस्या निर्माण होती हैं। सप्ताह में 5 से अधिक बार हस्थमैथुन करने वाले पुरुषों को यह खतरा अधिक रहता हैं। 
  2. उत्तेजना / Excitation: जो पुरुष सेक्स से बार में अधिक सोचते है या ऐसे किताबें-वीडियो अधिक देखते हैं वे जल्दी उत्तेजित हो जाते है और परिणामतः शीघ्रपतन की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। 
  3. अज्ञान / Ignorance : सेक्स से जुड़ा अज्ञान शीघ्रपतन का एक और बड़ा कारण हैं। भारत में युवा वर्ग में इस विषय में कई सारे मिथक फैले हुए है और यहि कारण है की अज्ञान और घबराहट के कारण कई युवाओं में यह समस्या उत्पन्न होती हैं।  
  4. नसों पर प्रभाव / Neuropathy : शराब, तम्बाखू, गुटखा, धूम्रपान या डायबिटीज जैसे रोग के कारण शरीर की तंत्रिका प्रणाली पर विपरीत परिणाम होकर लिंग की नसे कमजोर होने से भी शीघ्रपतन की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। 
  5. हॉर्मोन / Hormone : सामान्यतः उम्र के साथ शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में कमी आ जाती है और शीघ्रपतन की समस्या निर्माण होती हैं। आजकल युवावर्ग में भी आलस्य मोटापे के कारण इस हॉर्मोन में कमी जल्द आने से यह समस्या जल्द निर्माण हो रही हैं। 
  6. तनाव / Stress : तनाव या चिंता जैसे मानसिक कारणों से शीघ्रपतन होना आम बात हैं। कुछ लोगों में कोई समस्या न होते हुए भी केवल शीघ्रपतन न हो जाये इस चिंता से भी शीघ्रपतन हो जाता हैं। 
  7. रोग / Disease : थाइरोइड, कमजोर लिंग (Erectile Dysfunction), डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, पेशाब में संक्रमण, हॉर्मोन्स में गड़बड़ी, विटामिन की कमी और मस्तिष्क में तंत्रिका प्रणाली / Nervous system में गड़बड़ी जैसे कारणों से शीघ्रपतन हो सकता हैं। 
  8. सेक्स का तरीका / Sex Technique : शीघ्रपतन कभी-कभी गलत सेक्स की पद्धति से भी हो सकता है जैसे की अत्याधिक मौखिक सम्भोग / Oral Sex, अत्याधिक पूर्वक्रिडा / Foreplay इत्यादि।     
शीघ्रपतन का सफल उपचार करने के लिए जरुरी है की पहले इस समस्या का सही कारण पता किया जाये। इस समस्या से पीड़ित कई व्यक्ति शर्म के कारण बिना डॉक्टर को बताये ऑनलाइन या समाचार पत्र में विज्ञापन देख महंगे उत्पाद खरीदते है और हजारों रूपए खर्च कर बैठते हैं।
शीघ्रपतन का उपचार और घरेलु नुस्खे की जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ click करे - शीघ्रपतन / Premature Ejaculation का उपचार और आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे !

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मित्रों, जब से हम अपने निरोगिकाया स्वास्थ्य ब्लॉग के पाठकों के साथ Whatsapp पर जुड़े हैं तब से अनेक पाठकों ने हमें शुक्राणु की संख्या / Sperm count कैसे बढ़ायी जाए  यह सवाल बार-बार पूछा हैं। आधुनिक युग की गलत जीवनशैली और आहार के कारण कई युवा और वयस्क व्यक्ति, वीर्य / Semen में शुक्राणु की कमी की समस्या से पीड़ित हैं। एक सामान्य व्यक्ति के वीर्य में 1 करोड़ 50 लाख शुक्राणु / ml वीर्य (15000000 sperm / ml) से अधिक होने पर ही उसे प्रजननक्षम माना जाता हैं।

वीर्य में शुक्राणु / Sperm की संख्या बढ़ाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए इसकी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :

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  • अंडकोष / Testicles का तापमान : प्रकृति ने हमारे अंडकोष को इसीलिए शरीर के बाहर इसलिए रखा है ताकि उसका तापमान शरीर के तापमान से कम होना चाहिए। अंडकोष का तापमान बढ़ जाने पर, अंडकोष में शुक्राणु तैयार होने का प्रमाण घट जाता हैं। इसलिए अधिक गर्म / टाइट और जींस जैसे कपडे नहीं पहनने चाहिए। रात में सोते समय शॉर्ट पहनकर सोना चाहिए। अधिक गर्म पानी से स्नान या सॉना बाथ नहीं लेना चाहिए। लम्बे समय तक अपने जांघ / Thigh पर लैपटॉप रख काम नहीं करना चाहिए। मोबाइल को अपने पैंट की जेब में अधिक समय न रखे। कोशिश करे की अंडकोष को कम तापमान में रखा जा सके।  
  • धूम्रपान / शराब : अगर आपको धूम्रपान, शराब, तम्बाखू या गुटखा आदि की लत हो तो यह सब करना बंद करना चाहिए। इन आदतों से नसे कमजोर होती हैं और शुक्राणु की संख्या में कमी आती हैं। 
  • वीर्यपात / Semen Ejaculation : शरीर में रोजाना लाखों शुक्राणुओं की निर्मिति होती रहती हैं पर अगर आप में इनकी कमी है तो रोजाना वीर्य स्खलन / Ejaculation नहीं करना चाहिए। रोजाना संबंध या हस्तमैथुन से वीर्यपात करने की जगह इनका संग्रह करना चाहिए और जरुरत पड़ने पर ही वीर्यपात करना चाहिए जिससे प्रजनन के मौके बढ़ेंगे और निर्मिति भी बढ़ेगी। हर वीर्यपात के बिच में कम से कम 2 दिन का अंतर देना शुक्राणु का स्वास्थ्य और संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं।  
  • विषैले रसायन /Chemicals : शरीर को विषैले रसायनों से बचाना बेहद आवश्यक है। अगर आप ऐसी जगह काम करते है जहां रसायनों का उपयोग होता है तो अपना शरीर पूरा देखे ऐसे सुरक्षित कपडे और उपकरण पहने। हर्बल तेल साबुन का प्रयोग करे। अधिक केमिकल का उपयोग किये हुए फल या सब्जी न खाये। 
  • दवा / Medicine : कई सारी दवाए ऐसी है जिनका उपयोग करने से शुक्राणुओं की संख्या में कमी आती हैं। अपने मन से कोई दवा नहीं लेना चाहिए और हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए। डॉक्टर को इसकी जानकारी दे की आपके शुक्राणु की संख्या कम हैं। 
  • व्यायाम / Exercise : रोजाना अपने क्षमता अनुसार कोई व्यायाम करे। नियमित व्यायाम करने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की मात्रा बढ़ती है जिससे शुक्राणु निमिर्ती में सहायता होती हैं। क्षमता से अधिक व्यायाम करना भी नुकसानदेह हैं। स्टेरॉयड का उपयोग न करे। 
  • मोटापा / Obesity : अगर आप मोटापा से पीड़ित है तो समय आ गया है की आप अपना वजन नियंत्रित करे। सामान्य व्यक्ति की तुलना में मोटापे से पीड़ित व्यक्ति में शुक्राणु की संख्या कम होने का खतरा 45% अधिक रहता हैं। वजन कम कैसे करे यह जानने के लिए यहाँ click करे - वजन काम करने के आसान टिप्स हिंदी में !
  • तनाव / Stress : हमेशा तनाव में रहना यह भी शुक्राणु की संख्या  का एक अहम कारण हैं। तनाव में रहने से स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाता है जिसका विपरीत परिणाम शरीर पर पड़ता हैं। तनाव से दूर रहने के लिए योग और लाफ्टर थेरेपी करे। 
  • संक्रमण / Infection : अगर आप शरीर या अंडकोष में किसी संक्रमण से परेशान है तो इसका तुरंत इलाज कराये। हाइड्रोसील, वरिकोसील, गोनोरिया जैसे संक्रमण के कारण शुक्राणु की संख्या कम हो सकती हैं। अगर किसी कारण से शुक्राणु नलिका में अवरोध / obstruction है तो उसे भी ऑपरेशन कर दूर किया जा सकता हैं। 
  • पौष्टिक तत्व : शुक्राणु की निर्मिति बढ़ने के लिए फॉलिक एसिड, जिंक सलफेट, विटामिन C  सेलेनियम जैसे पौष्टिक तत्वों की बेहद आवश्यकता होती हैं। आप आहार में या डॉक्टर से टॉनिक दवा लिखकर इनकी कमी दूर कर सकते हैं। आहार में केला, अनार, लहसुन, हरी पत्तेदार सब्जी, डार्क चॉकलेट,जामुन, अखरोट जैसे पदार्थों का समावेश अधिक करे। अधिक तला, तीखा, मसालेदार फास्टफूड का सेवन न करे। 
  • आयुर्वेद / Ayurveda : शुक्राणु की कमी का सफल इलाज आयुर्वेदिक दवा से हो सकता हैं। इसके लिए रोगी की शारीरिक जांच आवश्यक हैं। वैद्य रोगी की जांच कर उसके प्रकृति और कुपित दोष के आधार पर दवा और पंचकर्म इलाज करते हैं। आमतौर पर शुक्राणु की संख्या और वीर्य को गाढ़ा बनाने के लिए गोक्षुर, शिलाजीत, अश्वगंधा, जिनसेंग, खसखस, कौंच बिज जैसे आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग किया जाता हैं। एक ही दवा सभी के लिए उपयोगी साबित होंगी यह जरुरी नहीं हैं। रोगी की प्रकृति और दोष के अनुसार अलग-अलग दवा के संयोग से उपचार किया जाता हैं।  
  • योग / Yoga : वीर्य में Sperm की संख्या बढ़ाने के लिए आप योग का सहारा भी ले सकते हैं। रोजाना निचे दिए योग का अभ्यास करने से प्रजनन प्रणाली व्यवस्तिथ रहती है और शुक्राणु की संख्या की संख्या बढ़ने में मदद होती हैं। निचे दिए योग की विधि जानने के लिए योग के नाम पर click करे :
  1. भस्त्रिका प्राणायाम 
  2. हलासन
  3. सूर्यनमस्कार 
  4. सेतुबंधासन 
  5. धनुरासन 
आज कल वीर्य में शुक्राणु / Sperm की कमी के मामले कई गुना बढ़ गए है और यही कारण है की ऑनलाइन या समाचार पत्र में इसका ईलाज करने के झूटे दावे कर कई लोग महँगी दवा बेचकर पीड़ित लोगो से हजारों लूट रहे हैं। मेरा आपसे यही निवेदन है की कोई डॉक्टर इतना सिद्धि प्राप्त नहीं है (मैं भी नहीं !) जो बिना देखे आपका इलाज करे इसलिए कृपया पहले डॉक्टर को दिखाए, अपनी समस्या का सही कारण पता करे और फिर सही उपचार कराये।
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