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गिलोय यह एक प्रसिद्द आयुर्वेदिक औषधि है जिसे अमृता या गुडुची नाम से भी जाना जाता हैं। गिलोय का औषधि / Latin नाम Tinospora Cordifolia हैं। इस विशेष आयुर्वेदिक औषधि पर कई वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया है और पाया है की यह औषधि शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति यानि Immunity बढ़ाती है।

आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग कई साधारण और मुश्किल रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता हैं। डॉक्टर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, डायबिटीज, टी.बी, पीलिया और कैंसर जैसे रोगों में गिलोय का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। आधुनिक वैज्ञानिक गिलोय को Immuno-Modulator drug मानते हैं।

आयुर्वेदिक औषधि में गिलोय का अकेले या अन्य दवा में मिश्रण कर उपयोग किया जाता हैं। गिलोय का उपयोग स्वरस, चूर्ण, सत्व, वटी और काढ़ा जैसे अनेक प्रकार में किया जाता हैं। गिलोय के कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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गिलोय के 10 स्वास्थ्य फायदे 

10 Super Health Benefits of Giloy / Guduchi in Hindi

गिलोय के विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  1. प्लेटलेट की कमी / Low Platelet Count (Thrombocytopenia): डेंगू, मलेरिया, कैंसर और कुछ वायरल रोगों में शरीर में खून का बहाव रोकनेवाली पेशी, प्लेटलेट की संख्या तेजी से कम होती हैं। ऐसे स्तिथि में गिलोय स्वरस या गिलोय सत्व का प्रयोग करने से शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती है और प्लेटलेट की संख्या भी बढ़ने में मदद होती हैं। पढ़े - प्लेटलेट को बढ़ाने के लिए कैसा आहार लेना चाहिए 
  2. डायबिटीज / Diabetes : आज भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही हैं। भारत में हर साल लाखों लोगों की मृत्यु डायबिटीज के कारण शरीर के प्रमुख अंग जैसे की ह्रदय, लिवर और किडनी पर होनेवाले दुष्परिणाम के कारण होती हैं। डायबिटीज में गिलोय का उपयोग करने से ऐसे दुष्परिणाम को रोका जा सकता हैं। पढ़े - डायबिटीज में कैसा आहार लेना चाहिए  
  3. कैंसर / Cancer : रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार के कारण कैंसर के रोगियों में सफ़ेद और लाल रक्त कण की कमी, पेट में जलन, वजन में कमी, अरुचि और कमजोरी जैसे दुष्परिणाम नजर आते हैं। इन दुष्परिणामों से बचाने के लिए अब कई कैंसर विशेषज्ञ रोगी को गिलोय का औषधि रूप में उपयोग कर रहे हैं। पढ़े - कैंसर का उपचार   
  4. अस्थमा / Asthma : शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति कमजोर होने से एलर्जी का प्रमाण बढ़ जाता है और रोगी को बार-बार अस्थमा का अटैक  सामना करना पड़ता हैं। रोजाना गुडुची सत्व को दूध के साथ सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति में इजाफा होता है और फेफड़े मजबूत बनते हैं। अस्थमा या खांसी के रोगियों ने डॉक्टर के परामर्श से इसका सेवन जरूर करना चाहिए। पढ़े - अस्थमा का उपचार 
  5. सोरायसिस / Psoriasis : सोरायसिस एक त्वचा का रोग है जिसके वजह से रोगी को बेहद पीड़ा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता हैं। इस रोग में गुडुची के उपयोग अकेले या मंजिष्ठा, कुटज, नीम आदि औषधि के साथ करने से लाभ मिलता हैं। रोगी को अपने आहार पर भी विशेष ध्यान होता हैं। पढ़े - सोरायसिस का उपचार 
  6. पेशाब में जलन / Urine Infection : महिलाए, डायबिटीज के रोगी और किडनी रोगी में बार-बार पेशाब में जंतु संक्रमण के कारण पेशाब में जलन होने की समस्या होती हैं। पेशाब में संक्रमण का स्थाई उपचार न करने पर रोगी की किडनी ख़राब होने का खतरा रहता हैं। ऐसी स्तिथि में डॉक्टर की सलाह से उचित मात्रा में गिलोय, पुनर्नवा, गोखरू आदि औषधि का उपयोग करने से यह समस्या रोकी जा सकती है और किडनी को सुरक्षित रखा जा सकता हैं। पढ़े - पेशाब में जलन का आयुर्वेदिक उपचार 
  7. वायरल बुखार / Viral Fever : आपने देखा होगा की कुछ व्यक्ति या बच्चे औरों की तुलना में बार-बार बीमार पड़ते है। ऐसे लोग रोग प्रतिकार शक्ति कमजोर होने के कारण सामान्य वायरल संक्रमण से भी नहीं लड़ पाते और बीमार हो जाते हैं। ऐसे कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में नियमित 3 महीने तक डॉक्टर की सलाह से गिलोय सत्व या स्वरस का कोर्स करने से रोग प्रतिकार शक्ति में जबरदस्त इजाफा होता है और सामान्य वायरल फीवर से लड़ने की शक्ति निर्माण होती है। पढ़े - कैसे बढ़ाये अपनी रोग प्रतिकार शक्ति 
  8. जोड़ों में दर्द / Joint Pain : आमवात और संधिवात में जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन जैसी समस्या निर्माण होती हैं। इसमें गिलोय का उपयोग करने से जोड़ों के दर्द और सूजन में कमी आती है और जोड़ों की क्रियाशीलता में इजाफा होता हैं। 
  9. विषैले तत्व / Toxins : रोजाना बढ़ रहे वायु प्रदुषण और खाने-पिने की चीजों में मिलावट के चलते हमारे शरीर में न चाहते हुए भी कई विषैले तत्व हवा, पानी और आहार के साथ प्रवेश करते हैं। ऐसे विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने के लिए, इनके दुष्प्रभावों से शरीर को बचाने के लिए और शरीर को detoxify करने के लिए आप गिलोय का उपयोग कर सकते हैं।  
  10. बॉडी टॉनिक / Immuno-Tonic : अगर आपको कोई रोग नहीं हैं या कोई शारीरिक या मानसिक समस्या नहीं है तब भी आप अपने डॉक्टर की सलाह से उचित मात्रा में गिलोय का Immuno टॉनिक के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे आपकी रोग प्रतिकार शक्ति ठीक रहती हैं, बुढ़ापा दूर रहंता हैं, शरीर के अंग स्वस्थ रहते हैं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थय टिके रहता हैं। 
इस तरह गिलोय एक चमत्कारिक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका डॉक्टर की सलाह से उचित मात्रा में उचित समय तक लगातार लेने से शरीर को सिर्फ फायदा होता है और किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता हैं। बाजार में गिलोय / गुडुची के नाम से कई नकली दवा मिलती है इसलिए असली दवा की पहचान करने के लिए अपने परिचित आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही दवा का उपयोग करे।

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अंग्रेजी में कहावत है, " An Apple a day, keeps the Doctor away !" हम बचपन से ये सुनते आ रहे है और ये काफी हद तक सच भी है। अपने बेहतरीन गुणों के कारण #सेब / #Apple को जादुई फल भी कहा जाता है। सेब दुनिया भर में व्यापक रूप में उगाए जाने वाला फल है। इसके पेड़ की ऊंचाई करीब करीब 15 मीटर होती है। कच्चे अवस्था में सेब हरे एवं स्वाद में खट्टे होते हैं पर पकने पर यह लाल गुलाबी हरित आभा लिए मीठे एवं रसदार हो जाते हैं।    

आयुर्वेद के हिसाब से सेब वातपित्तनाशक, शीतल, गुरु, पुष्टिकारक, हृदय के लिए फायदेमंद, वीर्यवर्धक तथा गुर्दों को साफ करनेवाले होते है। यह पोषकतत्व, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट एवम खनिज से परिपूर्ण स्त्रोत है। इसमें फास्फोरस सर्वाधिक मात्रा में होता है इसके अतिरिक्त आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, शर्करा तथा बी समूह के विटामिन भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। फायबर का पर्याप्त स्त्रोत होने के कारन यह रेशेदार फल के रूप में जाना जाता है, जो कि पाचन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्बोहाइड्रेट का एक रुप पेक्टिन भी इसमें पाया जाता है। 

सेब खाने से होनेवाले विभिन्न स्वास्थ्य लाभ की जानकारी निचे दी गयी हैं :


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सेब खाने के फायदे Health benefits of Apple in Hindi

सेब खाने से निम्नलिखित फायदे होते हैं :
  • रखे हृदय को स्वस्थ : सेब में मौजूद फ़ायटोन्यूट्रिएंट्स हृदय के कार्यप्रणाली की रक्षा करने में सक्षम होते है। सेब के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रहता है। हृदय के लिए काफी फायदेमंद होने के कारण इसे हृदय का साथी भी कहा जाता है।
  • पथरी के मरीजों में भी करता है फायदा : पथरी के रोगियों के लिए सेब काफी फायदेमंद होता है। इन लोगों ने प्रतिदिन तीन से चार सेब पूर्णतः पके हुए खाने चाहिए। 
  • दूर होगी मस्तिष्क की कमजोरी : मस्तिष्क की कमजोरी दूर करने के लिए यह अचूक उपाय है। प्रतिदिन एक सेब का सेवन मस्तिष्क को ताकत देता है। साथ ही रोगी को दोपहर और रात के खाने में कच्चे सेब की सब्जी दे । शामको 1 सेब का रस दे तथा रात में 1 पका सेब खिलाएं। इससे एक महीने में ही रोगी की दशा में सुधार आने लग जाएगा।
  • आँखो की कमजोरी करे दूर : जिन लोगों को आंखों की कमजोरी है, उन्हें कुछ दिन तक आंखों पर ताजे सेब पर ताजे सेब की पुल्टिस बांधनी चाहिए तथा भोजन में प्रतिदिन ताजा मक्खन एवं एक मीठा सेब सेब लेना चाहिए। इससे आंखों की ज्योति बढ़ाने में मदद होती है साथ ही दस्त एवं पेशाब खुलकर आता है एवं चेहरे में रौनक भी आने लगती है। 
  • अस्थमा में देता है राहत : सेब में मौजूद फ्लैवोनॉइड्स श्वासमार्ग की सूजन कम करते है एवम फेफड़ों की ताकद व इम्युनिटी बढ़ाते हैं। जिससे फेफड़ों को स्वतंत्र रूप से साँस लेने में सहायता होती है। एक अध्ययन में पाया गया है कि सेब के नियमित सेवन से अस्थमा का खतरा करीब 30 से 35 प्रतिशत तक कम होता है। 
  • बुखार में उपयोगी : बुखार में रोगी को प्यास, जलन, थकान तथा बेचैनी हो तो सेब की चाय या ताजे सेब का रस पिलाना चाहिए। इससे रोगी को तुरंत आराम मिलेगा। 
  • छालों में मिलता है आराम : गले में घाव, छाले या निगलने में कष्ट हो रहा हो तो ताज़े सेब का रस चम्मच से गले में डाले एवं कुछ देर गले में रोक कर रखें, इससे आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा।
  • पेट मे गैस से दे राहत : पेट में गैस की शिकायत रहती हो तो एक मिठे सेब में 10 grm लौंग चुभाकर रख दे। 10 दिन बाद लौंग निकालकर 3 लौंग एवं एक मीठा सेब प्रतिदिन खाए। इस दौरान चावल या उस उस से बनी चीजें रोगी को खाने ना दें, इससे गैस की समस्या से राहत मिलेगी। 
  • पेट के कीड़ों से मिले छुटकारा : पेट के कीड़ों  से निजात के लिए रोगी को प्रतिदिन दो सेब दे या एक गिलास सेब का रस इससे पेट के कीड़े मल के रास्ते बाहर निकल जाएंगे।
  • कब्ज से मुक्ति : कब्ज हो तो प्रतिदिन सुबह खाली पेट दो सेब खाए, इससे धीरे-धीरे कब्ज से छुटकारा मिलेगा साथ ही अग्निमांद्य भी दूर होगा एवम् भूख भी लगेगी। ध्यान रखे कि कब्ज की समस्या में सेब को छिलकों सहित खाएं। 
  • मधुमेह में भी है फायदेमंद : सेब पाचन प्रक्रिया व कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को प्रभावित करता है। यह न सिर्फ रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को नियंत्रण में रखता है बल्कि मधुमेह होने से भी बचाता है। यह इन्सुलिन के उत्पादन को भी प्रोत्साहित करता है। 
  • हड्डियों को देता है मजबूती : कैल्शियम और फोस्पोरस का अच्छा स्त्रोत होने के कारण हड्डियों को मजबूती देता है। ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट के कारण हड्डियां बार बार टूटने से बचती है।  
  • लिवर से करता है विषाक्त पदार्थों को दूर : सेब में विषहरण गुण उत्तम मात्रा में पाए जाते है। अगर आप नियमित रूप से सेब खाते हो तो शरीर मे विषाक्त पदार्थ कम होते है। अगर 2 दिन केवल सेब पर रहा जाए तो विषाक्त पदार्थों का अंत होकर शरीर की पाचन प्रक्रिया एवम रक्त प्रवाह में सुधार आता है। लिवर याने जिगर के रोगियों के लिए तो सेव काफी फायदेमंद होते हैं। इन्हें प्रतिदिन भोजन से एक घंटा पहले एक से दो सेब का सेवन करना चाहिए या सेब की चाय पीनी चाहिए।
  • एनीमिया को करता है दूर : सेब में प्रचुर मात्रा में आर्यन होता है। इसलिए जिन व्यक्तियों में खून की कमी है, उन्हें प्रतिदिन 2 से 3 एप्पल खाने चाहिए जिससे धीरे धीरे उनकी खून की कमी पूरी होती है। 
  • वजन घटाने में भी है उपयोगी : सेब में फाइबर्स प्रचुर मात्रा में होते है, जब कि कैलोरीज कम होती है, इसीलिए ये वजन घटाने में सहायता करता है। एक अध्ययन के अनुसार जो व्यक्ति दिन में 2 से 3 सेब खाते है, वे दूसरे लोगो की तुलना में जल्दी वजन घटा सकते है। सेब खाने का सबसे अधिक फायदा ये है कि इसमें कम कैलोरीज व पोषकतत्व अधिक होने के कारण आप इससे अपनी भूख भी शांत कर पाएंगे साथ ही शरीर का पोषण होते हुए वजन भी कम होने में मद्त मिलती है। 
  • अनिद्रा से राहत : नींद ना आती हो या रात में 1- 2 बजे नींद खुल कर दोबारा नींद नहीं आती हो, तो रोगी को रात को सोने के पहले मीठे सेब का मुरब्बा खिलाएं एवं उसके ऊपर गुनगुना दूध पिलाएं। इसे नींद अच्छी आएगी। 
  • पुरानी खाँसी में कारगर : पके सेब के 1 ग्लास रस में मिश्री मिलाकर सुबह नियमित पीने से पुरानी से पुरानी खांसी भी ठीक हो जाती है। 
  • मनोरोग : जिन्हें सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, बेहोशी, उन्माद या भूलनेकी समस्या हो वो प्रतिदिन 2 ताज़े मीठे सेब भोजन से पहले सेवन करे। ऐसे रोगी को चाय - कॉफ़ी छोड़कर प्रतिदिन केवल एप्पल की चाय ही पीनी चाहिए। 
  • दांतों का पीलापन करे दूर : सेब दांतों को मजबूती देने के साथ ही दाँतोंका पीलापन दूर करने में मद्त करता है। यह टूथब्रश की तरह काम करता है, जिससे कई जिद्दी दागों से छुटकारा मिलता है। लेकिन इसमें शुगर व एसिड होने से इसे खाने के पश्चात अच्छी तरह से कुल्ला करना चाहिए। 
  • मस्तिष्क के लिए है लाभदायक : सेब में मौजूद quercetin मस्तिष्क को तेज़ी प्रदान करता है और उसकी कोशिकाओं को स्वस्थ बनाता है, जिससे अल्ज़ाइमर जैसी भूलने की बीमारि दूर रहती है। कोशिश करे कि सेब का सेवन छिलको के साथ करे। 
  • बचाये कैंसर से : सेब में फ़ायटोन्यूट्रिएंट्स व एंटीऑक्सीडेंट्स का समृद्ध स्त्रोत है , जो न केवल कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है बल्कि उनको नष्ट भी करता है। 

सेब खाने का तरीका व सही समय

  1. कोशिश करे कि जब भी सेब खाएं उसे छिलके के साथ खाएं। छिलकों में फाइबर व विटामिन प्रचुर मात्रा में होते है। 
  2. सेब हो या कोई अन्य फल कभी भी खाने के साथ या तुरन्त बाद ना खाएं। क्योंकि फल व अनाज का पचने का समय अलग अलग होता है। सेब या तो खाने के आधा घण्टा पहले या 2 घण्टे बाद खाये। 
  3. अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती है तो हर रोज सुबह नाश्ते के समय 1 सेब खाने की आदत बना ले। इससे आपको मल त्याग करने में आसानी होगी। 
  4. कोशिश करे कि रात में सेब ना खाएं क्योंकि सेब में मौजूद पेक्टिन आंतो के लैक्टिक एसिड की रक्षा करता है व अच्छे बैक्टेरिया को बढ़ाता है, जिससे मल त्याग करने में आसानी हो। किन्तु पेक्टिन यह कार्य आंतो पर भार देकर करता है , जिससे पेट मे गैस भरे होने का अनुभव होता है। कई बार रात को शौच जाना पड़ता है एवम सुबह उठने पर भी तरोताज़ा महसूस नही होता है। 
  5. अगर आपका पाचन सही है तो सेब को आप दिन के किसी भी समय खा सकते है। 
  6. सेब या अन्य कोई भी फल को कभी भी दूध के साथ फ्रूट सलाद बना कर ना खाए आयुर्वेद के अनुसार यह विरुद्ध अन्न  होता है और यह रक्त को दूषित करता है जिससे त्वचारोग जैसे कई बीमारियां होती है।
  7. आप इसका जूस भी बनाकर पी सकते हो बशर्ते उसमे शुगर न हो। 
तो यह है, रसभरे, स्वादभरे सेब के गुण व फायदे। इस तरह सेब / Apple यह न केवल एक फल है बल्कि बीमारियों को दूर रखनेवाला एवम शरीर को पोषण देनेवाला एक खजाना है। आशा करते है, यह लेख पढ़कर आप सेब का पूरा लाभ उठाएंगे।

#पिस्ता जिसे अंग्रेजी में #Pistachios कहा जाता हैं, सूखे मेवों में अलग स्थान रखता है। यह विटामिन एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। स्वास्थ्य के लिहाज से यह बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके कतरन का उपयोग मिठाई की शोभा बढ़ाने में, खीर में, लस्सी, कुकीज और बिस्कुट में किया जाता है। 

पिस्ता प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर होता है। अन्य सूखे मेवों की तुलना में इसमें Fat कम मात्रा में होता हैं। सूखे मेवों में सबसे अधिक प्रोटीन पिस्ता में ही होता हैं। इसके साथ ही पिस्ता में विटामिन K, विटामिन B6, विटामिन E, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक जैसे पोषक तत्व होते हैं। 

पिस्ता मीठा और नमकीन मिलता है। आजकल unsalted (बिना नमक वाला) पिस्ता भी मिलता है जो ज्यादा फायदा करता है। पिस्ता खाने के फायदे और नुकसान से जुडी अधिक जानकारी निचे दी गयी हैं :


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पिस्ता खाने के फायदे और नुकसान Health Benefits of Pistachios in Hindi

पिस्ते के फायदे Pista khane ke fayde

  • कैंसर : पिस्ता विटामिन बी 6 का प्रमुख स्रोत है जिससे यह कैंसर से बचने में मदद करता है। 
  • दिल : यह मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाकर दिल को मजबूत करता है। 
  • वजन नियंत्रण : पिस्ता में कम कैलोरी और अधिक प्रोटीन होने से यह वजन कम करने में सहायक है। 
  • त्वचा : पिस्ता में विटामिन E होता है जो त्वचा को जवान और सुन्दर बनाये रखने में मदद करता हैं। 
  • यौन शक्ति : कई परिक्षण में यह साबित हो चूका है की पिस्ता खाने से यौन शक्ति में वृद्धि होती है और जो लोग शीघ्र पतन से पीड़ित है उन्होंने इसका नियमित सेवन करना चाहिए। 
  • खून की कमी : पिस्ता में कॉपर और विटामिन बी 6 होता है जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करता हैं। 
  • आँखे : यह आंखों की रोशनी को बढ़ाता है। 
  • कोलेस्ट्रॉल : पिस्ता में एंटीऑक्सिडेंट्स अधिक मात्रा में होने से यह शरीर में ख़राब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करता हैं। 
  • डायबिटीज : इसमें कम कैलोरी और अधिक प्रोटीन होने से डायबिटीज के रोगियों को पिस्ता खाना चाहिए। 
  • पिस्ता का तेल : पिस्ते का तेल सौंदर्य की दृष्टि से बहुत अच्छा है। यह झुर्रियों को साफ करता है। इसके तेल की मालिश से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है। पिस्ता खाने से त्वचा में कसावट आती है।  
अवश्य पढ़े - रात में देरी से खाना खाने के नुकसान

पिस्ता के नुकसान / सावधानिया 

  1. हर रोज 8 से 10 पिस्ते से अधिक का सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक पिस्ता खाने से पेट में दर्द, सूजन आदि समस्या हो सकती है। 
  2. पिस्ता की तासीर गर्म होने की वजह से पित्त प्रकृति वाले और जिन्हे एसिडिटी की समस्या अधिक रहती है उन्होंने इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए। 
  3. इसका हमेशा air tight बॉक्स में बंद करके फ्रिज में रखे। 
  4. अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की समस्या है तो आपने नमकीन पिस्ता नहीं खाना चाहिए। 
अवश्य पढ़े : केला खाने के फायदे और नुकसान
पिस्ता का उपयोग हम अपने आहार में कई तरह से कर सकते हैं। कई व्यंजन या मिठाई में इसका इस्तेमाल होता है साथ भी आप इन्हे रोस्ट कर भी खा सकते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत हैं। 
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भारत में खासकर महिलाए और कुछ प्रमाण में पुरुष भी नवरात्रि के त्यौहार में व्रत / उपवास करते हैं। लोग भगवान के प्रति अपनी आस्था के रूप में भले ही व्रत करते हैं पर डॉक्टर्स का कहना है की स्वास्थ्य के दृष्टीकोण से अगर सही तरीके से नवरात्रि का व्रत किया जाये तो इससे आपके सेहत को बेहद लाभ मिलता है और साथ ही वजन नियंत्रण करने में भी मदद होती हैं। 

अगर आप भी इस नवरात्र अपनी आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए उपवास करने का मन बना रही है तो अपने खानपान में कुछ खास बातों का ध्यान रखकर आप इन हे बिना परेशानी के पूरा कर पाएंगी। 

नवरात्र की तैयारियां शुरू हो चुकी है इन 9 दिनों में पूरे देश में खासतौर से पूर्वी पश्चिमी और उत्तरी भाग में दुर्गा मां के 9 अवतारों की पूजा अर्चना की जाती है इन 9 दिनों में हर उम्र के भक्तों उपवास भी करते हैं। अपनी मनोकामना की पूर्ति इन व्रतों के पीछे मुख्य वजह होती है। इन 9 दिनों में उपवास के दौरान आपको फलाहार पर निर्भर रहना होगा और इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि आपकी उर्जा सामान्य स्तर पर बनी रहे। 

नवरात्रि के व्रत कैसे करे और अपने स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखे इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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नवरात्र के व्रत में ऐसे रखें अपने स्वास्थ्य का ख्याल ?

  • कम ना होने दें एनर्जी को : लगातार 9 दिन तक उपवास करने से आपका ग्लूकोज का स्तर कम हो सकता है और आप थकान महसूस कर सकती है। आपकी भक्ति के साथ-साथ आपकी शारीरिक शक्ति भी बनी रहे इसके लिए सबसे अच्छा उपाय होगा कि थोड़े थोड़े अंतराल पर छोटी-छोटी मिल्स / आहार लेती रहे। इन आहार में आपको भरपूर मात्रा में फल और ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें। यह आपको जरूरी पोषक तत्व प्रदान करने के साथ-साथ शरीर की उर्जा को भी बनाए रखेंगे। 
  • शरीर में पानी का प्रमाण : व्रत के दौरान आपको अपने पोषण का ही नहीं बल्कि अपने शरीर को हाइड्रेट रखने पर भी ध्यान देना होगा। शरीर में पानी की कमी ना हो इसके लिए भरपूर पानी पीने के अलावा दूसरे तरह तरल पदार्थों का सेवन भी करती रहे। इसके लिए नारियल पानी, नींबू पानी, फ्रूट जूस, ग्रीन टी और छाछ जैसे विकल्पों को अपनाया जा सकता है। यह सभी पौष्टिक विकल्प है जो शरीर को हाइड्रेट और पेट को हल्का करने में काफी मददगार साबित होते हैं। 
  • कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन : इसमें कोई दो राय नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट्स एनर्जी का बेहतरीन स्रोत है और यही वजह है कि व्रत में कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन को महत्व दिया जाना चाहिए। इसी के लिए आलू, टमाटर, लौकी, सीताफल और साबूदाना से बने व्यंजन को अपने भोजन में शामिल करें। कुट्टू का आटा भी इस लिहाज से बहुत फायदेमंद होता है। इसमें 70 फ़ीसदी से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और 25 फ़ीसदी तक प्रोटीन रहता। 
  • तले हुए स्नेक से दूर रहे : अगर आप रात से जुड़े फायदे का पूरा लाभ लेना चाहती है तो आपके अपने खानपान के प्रति सजग रहना होगा। स्नैक्स में नमकीन और अन्य तले हुए खाद्य पदार्थों से दूर रहे क्योंकि यह पाचन में भारी होने के साथ-साथ वजन को भी कम नहीं होने देंगे। इसके बजाय आप फ्रूट चाट या खीरे का रायता को जगह दे सकती है। फ्रूट शेक से भी एनर्जी प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की कमी को पूरा किया जा सकता है। 
अगर आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी आदि को समस्या है तो डॉक्टर की राय लेकर ही आपको व्रत करना चाहिए। व्रत करते समय अगर आपको चक्कर आना, जी मचलाना, पेट दर्द जैसे कोई लक्षण नजर आते है तो आपको तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए।

Click करे और अवश्य पढ़े - उपवास करने के फायदे

यह जानकारी हमें डॉ श्वेता सींग ने अहमदाबाद से भेजी हैं। निरोगकाया टीम और पाठकों की और से उन्हें बहोत बहोत धन्यवाद !
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