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विश्वभर में मोटापा (Obesity) एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चूका हैं। मोटापा के कारण युवा आयु में ही लोग डायबिटीज और ह्रदय रोग से पीड़ित हो रहे हैं। मोटापे से छुटकारा पाने के लिए और Weight loss करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपनाते है। Weight loss करने के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेने के बजाये कुछ लोग इन्टरनेट या समाचारपत्रों में किसी भी व्यक्ति द्वारा कहे गए भ्रान्ति का शिकार हो जाते हैं। 

Weight loss करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके आजमाते हैं, लेकिन याद रहे कि इस प्रयास में आप भ्रांतियों के शिकार ना हो जाए। भ्रांतियों के चलते लोग अपना वज़न कम नहीं कर पाते हैं और निराश होकर मोटापे से छुटकारा पाने की इस जंग से हार मान लेते हैं। 

ऐसी ही कुछ Weight loss से जुडी भ्रांतियों की जानकारी और Weight loss करने के सही तरीके से जुडी जानकारी आज इस लेख में दे रहे हैं :

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#Weight loss से जुडी कुछ महत्वपूर्ण भ्रांतियां Weight loss Myths in Hindi 

बहुत सारी चीजें छोड़ना होंगी 

जो लोग वजन घटाने को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क होते हैं वह अपने भोजन में बहुत ज्यादा कटौती करते हैं। अक्सर वे चॉकलेट जैसी चीजों से दूर हो जाते हैं और ज्यादा कैलरी या ज्यादा फैट वाला भोजन नहीं करते हैं। भोजन का संतुलन साधना जरूरी है लेकिन कुछ चीजों को भोजन से पूरी तरह हटा देना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। खानपान में शामिल कुछ चीजे हमारे पोषण और हमारे रोगप्रतिकार शक्ती के लिए बहुत जरुरी होता है और उन्हें पूरी तरह हटा देने के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आपको अपने आहार के मात्रा (quantity) की जगह गुणवत्ता (quality) पर भी जोर देना चाहिए। 

खाना पूरी तरह से छोड़ देना

आजकल हर किसी की जिंदगी में बहुत व्यस्तता है और ऐसे में हर थोड़े अंतराल पर कुछ खा पाना मुश्किल होता है और इसलिए लोग खाना चूक जाते हैं। अपने भोजन को लेकर प्लान बनाना जरूरी हैं। हमारे शरीर को हर 24 घंटे में पोषण की जरूरत होती है ताकि शरीर को मेटाबोलिज्म ठीक तरह से काम करता रहेगा। जब आप ज्यादा समय तक भूख रहते हैं तो शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता हैं इसलिए नियमित अंतराल पर कुछ ना कुछ खाते रहे। आपको खाने की मात्रा से ज्यादा खाने की पोषकता पर जोर देना चाहिए। कोई भी आहार पूरी तरह छोड़ने की जगह आपको डायटीशियन से मिलकर आपका डाइट प्लान बनाना चाहिए जिससे आपको दिनभर में शरीर के लिए आवश्यक कैलोरीज और पोषक तत्व भी मिलते रहे और आप अनावश्यक कैलोरीज लेने से भी बच सके। 

एक्सरसाइज से ही घटेगा वजन

अक्सर लोग यह मानते हैं कि अगर हम व्यायाम कर रहे हैं तो मैं कुछ भी खा सकते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। जब आप एक्सरसाइज करते हैं तो आपकी भूख बढ़ जाती है और आप की खुराक भी, लेकिन अगर आप वजन कम कर रहे हैं तो आपको डाइट को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकना होंगा। ज्यादा एक्सरसाइज और ज्यादा खुराक हल नहीं है, संतुलित भोजन और एक्सरसाइज सही तालमेल है। 

फिटनेस क्लास या जिम हर बात का हल

खाना खाने के बाद थोड़ा टहलना या फिर काम से घर लौटने के बाद टहलने के लिए जाने का नियम बना ले। किसी फिटनेस क्लास का फायदा उतना ही नहीं मिल सकता है जितना कि टहलने का। फिटनेस क्लास थोड़े समय के लिए आपको एक अभ्यास में डालती है जबकि अगर आप रोज पैदल घूमने की आदत बना ले तो अपनी बहुत सारी तकलीफों से खुद ही निजात पा सकते हैं। वेट लोस करने वालों के लिए रोज पैदल घूमना या जॉगिंग करना बहुत ही फायदेमंद है। ऐसे एरोबिक व्यायाम से न सिर्फ आपका Weight loss होंगा बल्कि आपका Heart  रहेगा। 

फैट कम शक्कर ज्यादा

अक्सर लोगों को लगता है कि वजन कम करने के लिए भोजन से तेल और घी को पूरी तरह हटा देना चाहिए। मौजूदा समय में विशेषज्ञ बताते हैं कि शक्कर और कार्बोहाइड्रेट के कारण ही लोग अपना वज़न कम नहीं कर पाते हैं। हमारे शरीर शक्कर और कार्बोहायड्रेट की बढ़ती मात्रा का आदि नहीं है और इसलिए लोग मोटापे के शिकार हो रहे हैं। इसलिए भोजन में फैट की कटौती के बजाए शक्कर और कार्बोहाइड्रेट कम करने के बारे में सोचे।

योग से Weight loss नहीं होता 

कई लोगो का मानना है की Weight loss करने के लिए जॉगिंग या जिम ज्वाइन करना ही पर्याय हैं। योग से उनका मतलब सिर्फ ध्यान करना ही होता हैं। असल में योग शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा उपाय हैं। कपालभाति, त्रिकोणासन, सूर्यनमस्कार, शीर्षासन, भुजंगासन, ताड़ासन, गोमुखासन इत्यादि योग करने से आप शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को हटा सकते है और Weight loss कर सकते हैं। सभी योग की विधि और लाभ की जानकरी पढ़े के लिए यहाँ क्लिक करे - योग की सम्पूर्ण जानकारी सरल हिंदी भाषा में !

किसी एक चीज को करने से ही आपका Weight loss नहीं हो सकता हैं। आहार, व्यायाम और योगा का सही संतुलन बनाकर आप Weight loss कर सकते हैं। Weight loss करने के सबसे सही उपाय जानने के लिए यहाँ क्लिक करे - कैसे करे Weight loss ?

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जिस तरह हम जिम में कोई व्यायाम करने से पहले वार्मअप करते है ठीक उसी प्रकार योगासन करने से पहले भी हमें कुछ सुक्ष्मआसन करने होते है जिससे योग करते समय शरीर को कोई हानि नहीं पहुचती है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से होता हैं। 
  
पैर तथा हाथ हमारे शरीर के कर्मेंद्रिय है।  दैनंदिन जीवन की कई गतिविधियों को हम हाथों के द्वारा करते हैं। हाथों को मस्तिष्क से मिलने वाले निर्देशों के द्वारा यह कार्य होता है। आज हम गठिया निरोधक अभ्यासक्रम के तहत हाथों को मजबूती एवम लवचिकता प्रदान करने वाले छोटे आसन समूह का अभ्यास करेंगे। 

हाथों से किये जानेवाले सुक्ष्मआसन की जानकारी निचे दी गयी हैं :


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हाथों से किये जानेवाले सुक्ष्मआसन योग Hand Yoga Warm up exercises in Hindi 

मुष्ठीका बंधन ( मुट्ठियां कसकर बांधना ) Hand Yoga Exercise in Hindi 

हाथों की उंगलियां शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। विविध कार्यों को सुचारु रुप से चलाने में इनकी अहम भूमिका होती है। 

मुष्ठीका बंधन प्रारंभिक स्तिथि 

  1. पैरों को सामने तान कर बैठे।
  2. हाथों को भूमि से समांतर, कंधों की ऊंचाई में, कुहनियों में सीधा कर पैरों के ऊपर तथा समांतर रखें। 
  3. हाथों के तलवे भूमि की तरफ खुले हो।
  4. पीठ गर्दन तथा हाथ सीधे रहने चाहिए। 
  5. अब आंखें बंद करें और संपूर्ण शरीर को शिथिल पाए।

मुष्ठीका बंधन विधि 

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  • दोनों हाथों को सीधे रखते हुए पूरक करते हुए पांचों उंगलियों को तान देते हुए कड़ा कीजिये।
  • इस प्रकार तान दे कि वे एक दूसरे से पूर्ण रुप से अलग हो। ऐसी कृति में दो उंगलियों के बीच जो पडदे हैं वह पूर्ण रुप से ताने जाए।
  • अब सांस लेते हुए अंगूठे को अंदर ले कर मुष्टिका बांधे। 
  • इस कृति में अधिकतम कसाव हो, जो हमारे फेफड़ों को भी प्रभावित करेगा।
  • इस प्रक्रिया को करीब 10 बार दोहराइए। अभ्यासानुसार संख्या बढ़ा सकते हैं। 

मणिबन्ध नमन ( कलाई मोड़ना )Wrist Yoga Exercise in Hindi 

मनी बंध का अर्थ होता है कलाई। कलाई का जोड़ यह अनेक प्रकार से उपयोग में आता है। अंगुलियों की सूक्ष्म गतिविधियों के बाद उन्हें आधार देने का कार्य कलाई का होता है। 


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  • प्रारंभिक स्थिति में बैठकर हाथों को कंधों की ऊंचाई में मुष्टिका बंधन की तरह रखें। 
  • अब पांचों उंगलियों को मिलाकर हथेलियों को बंद कर ले। उंगलियों की दिशा भूमि की तरफ होगी। 
  • पूरक करते हुए हथेलियों को कलाई से ऊपर की ओर मोड़ीए और पूरे हाथ में इस प्रकार तनाव उत्पन्न  कीजिए,  जैसे आप किसी चीज को पूरी ताकत से दबा रहे हो।
  • श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जमीन की और शिथिल करते हुए छोड़िए।
  • इस प्रक्रिया को भी 10 बार दोहराइए। 

मणिबंध चक्र ( कलाई घुमाना ) Wrist Rotation Yoga Exercise in Hindi 

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  • प्रारंभिक स्थिति में बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर तान दे।
  • हाथों को कंधे की सीध में पैरों से समांतर रखे। 
  • मुठियां कसी हुई हो। 
  • पूरक करने के उपरांत अंतःकुंभक के साथ मुट्ठियों को बाहर की दिशा में वृत्ताकार घुमाइए। 
  • तत्पश्चात रेचक करें।
  • यही क्रिया विपरीत दिशा में भी करें। 
  • 10 से 20 आव्रुत्तिया करे।

कोहनी नमन ( कोहनियां मोड़ना )Elbow Yoga Exercise in Hindi 

कलाई के बाद कोहनी का नंबर आता है। कोहनी की रचना कुछ हद तक घुटनों के समान होती हैं। कुहनियों को भी स्वस्थ रखना उतना ही आवश्यक होता है। 


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  1. प्रारंभिक स्थिति में बैठे पैर सामने की ओर तान दें।
  2. हाथ पैरों से समांतर कंधे की ऊंचाई में रखते हुए हथेली आसमान की तरफ खुली रखें।
  3. धीरे-धीरे सांस लेते हुए हाथों को कुहनियों में मोड़े।
  4. पांचों उंगलियों के अग्र कंधों पर मिले। मेरुदंड सीधा रहे। 
  5. सांस छोड़ते हुए हाथों को पूर्व स्थिति में लाए।
  6. इस तरह 10 बार दोहराइए। 
  7. प्रकारांतर में पुनः सामने के बदले में भुजाओं को बाजू में फैला कर हथेलियों को ऊपर करके 10 बार और नीचे करके 10 बार उक्त अभ्यास को दोहरा सकते है। 

द्विस्कन्ध चक्र ( कंधों को घुमाना ) Shoulder Yoga Exercise in Hindi 

कंधे हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्दन से निकलने वाली तंत्रिकाएं हाथों तक कंधों के मार्ग से ही जाती है। यद्यपि हम कोई बाहरी काम नहीं करते फिर भी कंधों के दर्द का अनुभव प्रायः सभी लोगों को होता है।  इसका कारण यह है कि मस्तिष्क तथा गर्दन की नसों से कंधों का सीधा संबंध होता है।

इन कंधों के जोड़ों को मजबूत , क्रियाशील और लवचिक रखना आवश्यक होता है। 


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  1. प्रारंभिक स्तिथि में बैठ जाए। हाथों को कोहनियों में मोड़कर अंगुलियों से कन्धों को स्पर्श करें। 
  2. अब पूरक करके अंतः कुंभक के साथ दोनों कोहनियों को वृताकार घुमाइए। तत्पश्चात रेचक करें।
  3. अब विपरीत दिशा में भी यह क्रिया करें। 
  4. दोनों दिशा में कम से कम 10 आव्रुत्तियाँ करे। 
हमारी आज की कार्यपद्धती, आहार-विहार, तनाव आदि कई कारणों की वजह से हमारे शरीर के भीतर कठिनता, कड़ापन, लोच की कमी आदि परिवर्तन आ रहे हैं। अर्थराइटिस ,ऑस्टियोआर्थराइटिस , फ्रोजन शोल्डर , स्पांडिलाइसिस आदि कई तरह की बीमारियां होना अभी आम हो गया है।

पवनमुक्तासन गठिया निरोधक अभ्यासक्रम इन बीमारियों के व्यवस्थापन में अद्भुत भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं इसके दैनंदिन अभ्यास से हम दूसरे आसनों को भी आसानी से कर सकते हैं। यह व्यायाम दिखने में छोटे दिखते हैं पर इन्हें रोजाना करने से इसका परिणाम अत्यंत सूक्ष्म स्तर तक जाता है। इसलिए अपने रोजाना की दिनचर्या में और योगासन करने के पूर्व पवनमुक्तासन याने की गठिया  निरोधक अभ्यासक्रम को हमें जरुर अपनाना चाहिए।

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योगाभ्यास करते समय विविध आसनों की शुरुआत करने से पहले हमें शरीर वात और गठिया से रहित करना होता है, ताकि आसनों को करने में हमे आसानी हो और शरीर भी आसनों के योग्य बने। जिस तरह कोई भी कसरत करने से पूर्व हम warm up करते है , उसी तरह योगासन करने से पूर्व कुछ छोटे आसन समूहों का अभ्यास किया जाता है, उन्हें योग की भाषा में ' पवनमुक्तासन ' और ' शक्तिबन्ध समूह के आसन ' के नाम से जाना जाता है। 

पवन = वायु, मुक्त = छुटकारा, आसन = शरीर की विशेष स्तिथि। अर्थात वायु से उतपन्न बाधकों से छुटकारा पाने के लिए योगाभ्यास। वातनियंत्रक नाम होने के पश्यात यह आसन वात , पित्त और कफ आदि त्रिदोषों को नियंत्रित करता है। 

पवनमुक्तासन को तीन प्रमुख समूहों में विभक्त किया गया है। 
  1. गठिया निरोधक
  2. वात निरोधक
  3. दृष्टि वर्धक 
गठिया निरोधक अभ्यास को पुनः तीन भागों में विभाजित किया जाता है :
  1. पाद पवनमुक्तासन 
  2. हस्त पवनमुक्तासन  
  3. शिर पवनमुक्तासन
किसी भी योगासन करने के पहले यह सभी सूक्ष्म आसन करना जरुरी होता हैं। यह सूक्ष्म आसन कैसे करे यह जानकारी निचे दी गयी हैं : 


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किसी भी योग आसन करने से पहले कौन से सूक्ष्म व्यायाम करना चाहिए ? Exercise to do before each Yoga in Hindi

पादपवनमुक्तासन 

योगाभ्यास के शुरूआत में भी 2 मिनट का शवासन करना चाहिए  तनाव रहित शारीरिक व मानसिक स्थिति के लिए यह शिथिलीकरण आवश्यक है। 

1 ) पादांगुलिनमन / पैरों की अंगुलियों को मोड़ना

toes-yoga-exercises-in-hindiपैरों की उंगलियां रखने का जोड़ हमारे ह्रदय से अति दूर शरीर के अंग है। उनकी रचनाओं में हमारे शरीर के तंत्रिका प्रणालियों का अंत होता है। इसी वजह से शरीर का पूर्ण भार इन छोटे से अंगों पर होता है। हमारे शरीर के खड़े होने की स्थिति में उंगलियों का कार्य नियुक्ति होता है। जब हम खड़े रहते हैं तो पकड़ के लिए उंगलियां अपने आप में थोड़ी सिकुड़ जाती है। इस कृति को हम सामान्यतः समझते नहीं मात्र पैर की किसी उंगली को आवाज होने पर जब हमें उसे भूमि पर नहीं रख सकते तब जंघाओं में दर्द निर्माण होता है। इससे ही इसके महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है।

सूक्ष्म व्यायाम द्वारा हम शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में मजबूती ला सकते हैं।

प्रारंभिक स्तिथि 
  • सर्वप्रथम योगाभ्यास करने के लिए एक साफ-सुथरी दरी या योगा मैट बिछाकर अपने पैरों को शरीर के सामने सीधा फैलाकर कर बैठ जाए।
  • हाथों को कूल्हों के पीछे तथा बाजू में रखे। 
  • उँगलियों की दिशा पीछे की ओर। 
  • अपने हाथों के सहारे थोड़ा पीछे की ओर झुकीये। 
  • हाथ सीधे रहने चाहिए , कोहनियों में मोड़ना नहीं है। 
  • दोनों पैरों को एक दूसरे से मिला ले। 
  • रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। 
  • अपनी दृष्टि को पैरों की अंगुलियों पर रखते हुए उनके प्रति जागरूक होइए। 
  • अपने सम्पूर्ण शरीर को शिथिल रखे। 
  • श्वास लेते हुए केवल पैरो कीअंगुलियों को यथासंभव नीचे की ओर मोड़ना है और श्वास  छोड़ते हुए शरीर की और ताने। यह प्रक्रिया करीब 10 बार कीजिए।  
  • ध्यान रखें पैर को उठाना नहीं है। कड़ा रखते हुए अभ्यास करना है।
  • टखने को स्थिर रखे। केवल पैरों की उंगलियों में ही गद्यात्मकता हो। 
  • सर्वप्रथम दाएं पैर और फिर बाएं पैर के अंगुलियों पर पृथक अभ्यास करते हुए फिर दोनों पैर के अंगुलियों पर एक साथ अभ्यास करना चाहिए। 

2 ) गुल्फ नमन / पैरों के टखने मोड़ना 

गुल्फ़ का अर्थ होता है टखना। नमन अर्थात मोड़ना। 
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  • अभ्यास एक की प्रारंभिक स्थिति में बैठते हुए टखनों को जोड़ों से सामने व नीचे की ओर झुकाते हुए दोनों पंजों को जितना संभव हो उतना मोड़ीए। 
  • टखनों के जोड़ से पैरों का झुकना अधिकतम हो। 
  • सामने की ओर झुकते हुए श्वास लेना है और श्वास छोड़ते हुए सीधा कीजिए। यह क्रिया भी करीब 10 बार दोहराइए। 
  • पृथक पैर के लिए अभ्यास करने के पश्चात दोनों पैर के लिए एक साथ करना हैं।

3 ) गुल्फचक्र / टखने को व्रुत्ताकार घुमाना 

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  • अभ्यास की प्रारंभिक स्तिथि में बैठे हुए दोनों पैरों के बीच करीब 9 इंच का फासला रखिए।  
  • पैरों को टखनों के जोड़ों में  वृत्ताकार घुमाना है। 
  • एड़ी को जमीन पर रखते हुए दाहिने पंजे को दाई और घुमाते हुए सामने लाकर फिर बाई ओर से व्रुत्ताकार घुमा कर वापस सीधा रखें। 10 बार दोहराइए। पुनः विपरीत दिशा में घूमाइये। 
  • यही अभ्यास बाए पंजे से भी कीजिए। फिर दोनों पैरों को एक साथ घूमाइए। 
  • पूरक करने के उपरांत अंतः कुंभक के साथ वृत्ताकार घुमाने की कृति पूर्ण होने पर रेचक का अभ्यास करें।

4) गुल्फ़ घूर्णन / टखने को उसकी धुरी पर घुमाना 

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  • यह एक तरह से गुल्फ़ चक्र का विस्तारित रुप है।
  • अभ्यास की मूल स्थिति में बैठिए। पैरों को सामने की ओर तान दें।
  • सर्वप्रथम दाहिने टखने को बाई जांघ पर रखिए। बाए हाथ की सहायता से दाहिने पंजे को पहले दाई ओर से फिर बाई और वृत्ताकार घुमाइए। विपरीत दिशा में भी घूमाइए। 
  • यह प्रक्रिया 10 बार करें।  
  • इसी प्रकार बाए पंजे से भी कीजिए। 
  • पूरक करने के उपरांत अंतः कुंभक के साथ इस कृति को पूर्ण किया जाता है।  
  • पश्चात रेचक करके शिथिलता का अनुभव करें।

6 ) जानुफलक आकर्षण 

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घुटनों का जोड़ अत्यंत महत्वपूर्ण जोड़ है। आज विश्व के कई लोग घुटनों के जोड़ों के दर्द से त्रस्त है। अत्यंत जटिल रचना का यह जोड़ हमारी कई गतिविधियों को  निर्देशित करता है, जैसे चलना, बैठना, उकडू बैठना, कुर्सी पर बैठना, छलांग लगाना, दौड़ना आदि समस्त क्रियाओं में इस जोड़ की भूमिका अहम है। योगाभ्यास के दौरान आसनों की कई कुर्तियों का घुटनों पर प्रभाव पड़ता है घुटनों में कमजोरी या दर्द के कारण कई आसन हम नहीं कर पाते हैं। इसलिए हमें घुटनों का भी विशेष ख्याल रखना होता है।  

जानू का अर्थ होता है घुटना और घुटने की कटोरियों को फलक कहते हैं तथा आकर्षण का अर्थ खींचना होता है। 
  • प्रारंभिक स्थिति को ग्रहण करें। पैरों को सामने की ओर तान दे। 
  • दोनों दोनों पैरों को एक दूसरे के नजदीक रखें। हाथों को कुल्लू के पास पीछे की ओर तथा बाजू में रखें।
  • अब घुटनों को शरीर की तरफ आकर्षित करें। यह कृति प्रथमतः कठिन लगती है क्योंकि इस कृती में जाँघ के स्नायु पर नियंत्रण करना होता है।  
  • मात्र कुछ अवधि के बाद यह सहज संभव होता है। कटोरियों को आकर्षित करना , कुछ क्षण स्थिति बनाए रखना तथा बाद में उसे शिथिल करना चाहिए। 
  • पूरक के साथ आकर्षण करें तथा रेचक के साथ शिथिलीकरण करें। प्रारंभिक अवस्था में 10 बार से शुरू करके 50 तक या अपने सुविधानुसार बढ़ाये। 

7 ) जानू नमन / घुटने को मोड़ना 

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आज की जीवन पद्धति में हम टेबल कुर्सियों का प्रयोग करते हैं।  इतना ही नहीं बल्कि भोजन के समय भी हम इसी पद्धति को अपनाते है। जो अशास्त्रीय है। यही कारण है कि घुटनों का कार्य दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहा है। घुटनों को मोड़कर किया जाने वाली यह प्रक्रिया सहज होनी चाहिए परंतु अधिकतर लोगों में इस क्रिया को करने में कठिनाई पाई जाती है।  इसलिए जानू नमन जैसे अभ्यास घुटनों को मोड़ने में आवश्यक माने जाते हैं।
  • अभ्यास की मूल स्थिति में बैठिए। 
  • दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए जमीन से थोड़ा ऊपर उठाइए। 
  • दोनों हाथों को दाहिनी जाँघ के नीचे बांध लीजिए।
  • अब सांस लेते हुए दाहिने पैर की एडी को बिना जमीन से स्पर्श किए बिना सीधा कीजिए।
  • फिर सांस लेते हुए दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए एडी को दाहिने नितंब के पास लाइए,  किन्तु एड़ी जमीन को ना छुए। फिर सीधा कीजिए।
  • इस प्रकार 10 बार दोहराइए।  इस अभ्यास को बाएं पैर से  भी कीजिए। 
  • धड़ की ओर लाते हुए श्वास छोड़े और सामने की ओर सीधा करते हुए श्वास ले। 
  • आवृत्तियां - 10

द्विजानु नमन 

  • यह आसन भी जानू नमन की तरह है लेकिन इसमें एक साथ दोनों पैरों को घुटनों में मोड़ना और सीधा करना होता है। 
  • पैरों की एड़ियां घुटनों में पैर के सीधे होने के पश्चात भूमि से ऊपर अधर में रहेगी। 
  • यह प्रक्रिया थोड़ी कठिन है तथा इसको करने के लिए पर्याप्त संतुलन की भी आवश्यकता है। 
  • यह केवल घुटनों के लिए ही नहीं अपितु जंघा तथा निम्न उदर,  नितंब आदि हिस्सों को प्रभावित करने वाला प्रखर अभ्यास है। 
  • श्वास की सजगता जानू नमन की तरह ही हो। 
  • आवृत्तिया - 10

8 ) जानुचक्र / घुटने को उसकी धुरी पर घुमाना 

  • मूल स्थिति में आइए। 
  • दोनों हाथों को बायीं जाँघ के नीचे बांधकर बाए पैर को मोड़ते हुए जमीन से थोड़ा ऊपर रखते हुए  छाती के पास स्थिर पकड़कर बैठिये। 
  • अब पैर के घुटने के निचले भाग को वृत्ताकार घुमाइए। सांस लेने के बाद कुम्भक करते हुए 10 बार घूमाइये।  और फिर सांस छोड़िए। 
  • यही क्रिया दाए पैर से भी कीजिए।

9 ) मेरुदण्ड को घुमाना 

  • सर्वप्रथम मूल स्थिति में आकर आराम से दोनों पैरों को एक दूसरे से जितना दूर फैला सके फैला लीजिए।
  • पैर और हाथों को सीधे रखते हुए दाहिने हाथ को बाए पैर के अंगूठे के पास लाइए और संपूर्ण बाए हाथ को पीछे की और फैलाइए , इस तरह की दोनों हाथ एक सीध में हो। 
  • अपनी गर्दन को भी पीछे मोड़ते हुए बाए हाथ के अंगूठे पर दृष्टि रखिए। 
  • कुछ क्षण रुक कर फिर विपरीत दिशा में बढ़ते हुए बाए हाथ को दाहिने पैर के अंगूठे के पास जाकर दाहिने हाथ को पीछे की ओर फैलाइए एवं गर्दन को पीछे छोड़ते हुए दाहिने हाथ के अंगूठे पर दृष्टि रखें। 
  • यह एक आवृत्ति हुई।  इस प्रकार 10 आवृत्तियां करे।  आरंभ में धीरे धीरे करें। क्रमशः गति को बढ़ाया जा सकता है। श्वास की गति सामान्य रहे। 

10) अर्धतितली 

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जंघा,  श्रोणि प्रदेश , कटी प्रदेश , निम्न उदर यह मनुष्य के अत्यधिक महत्व के हिस्से है।  कई व्याधियां ऐसी होती है जिन का मूल कारण कटी प्रदेश में स्थित मेरुदण्ड की अव्यवस्था है। अगर जंघा के जोड़ों में लोच ना हो या कठिनता हो तो या आसनों के लिए बाधा बन जाती है। खास करके जब आसन में बैठकर साधना की जाती है तब आदर्श आसनों की आवश्यकता अधिक होती है जैसे स्वस्तिकासन , पद्मासन , सिद्धासन जो हमें सुद्रुढ पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं। ऐसे आसनों के लिए जंघा का लोचदार होना आवश्यक है।  अतः आगे आने वाले कुछ अभ्यास जंघा प्रदेश को लोचदार और मजबूती प्रदान करने के लिए किए जाते हैं। 
  • प्रारंभिक सिटी में बैठे। पैरों को सामने की ओर तान दे।  मेरुदंड सीधा रखें।
  • दाए पैर को मोड़ीए और उसके तलवे को बाई जाँघ पर रखिए। दाहिने घुटने की दिशा सामने हो। 
  • बाए हाथ से दाहिने पंजे को पकड़िए और दाहिने हाथ से घुटने को पकड़े।  मुड़े हुए दाएं पैर की मांसपेशियों को पूरा ढीला रखते हुए दाहिने घुटने को ऊपर नीचे कीजिए।
  • ऊपर उठाते वक्त पूरक करते हुए छाती तक ले जाएं। नीचे ले जाते वक्त रेचक करते हुए जमीन तक ले आए।
  • 10 बार दोहराइए।  इस क्रिया को बाएं पैर से भी करें। 

11) श्रोणिचक्र 

  • प्रारंभिक स्थिति में बैठ जाए। पैरों को सामने की ओर तान दें। 
  • दाहिने पैर को मोड़कर बाई जंघा पर रखे। बाए हाथ से दाहिने पैर को पकड़कर दाहिने हाथ से घुटने को पकड़ ले।
  • घुटनों को शरीर से बाहर की ओर जंघा की ओर वृत्ताकार घुमाइए। व्रुत्त को बड़े से बड़ा बनाने का प्रयास करें।
  • पर्याप्त आव्रुत्तियों के बाद घुटने को विपरीत दिशा में अंदर की ओर घुमाइए। 
  • यही क्रिया दूसरे पैर से भी करें।  
  • पूरक करने के उपरांत अंतः कुंभक में वृत्ताकार घुमाएं और फिर अंत में रेचक करें। 

12 ) श्रोणि विस्तार 

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  • प्रारंभिक स्थिति में बैठ जाए। पैरों को सामने की ओर तान  दें। 
  • दाहिने पैर को घुटनों में मोड़ कर बाई जाँघ पर रखें। 
  • बाए हाथ से दाहिने पैर के पंजे पकड़ ले तथा दाहिने हाथ से घुटने को।
  • अब धीरे-धीरे दाहिने हाथ से घुटने को शरीर के पीछे खींचने का प्रयास करें ताकि जंघा तथा श्रोणि प्रदेश का पूर्ण विस्तार हो।
  • वैसे ही अब बाएं हाथ से पंजे को बाइ ओर खींचे।  इस क्रिया में मुड़ा हुआ दाहिना घुटना बाए घुटने के ऊपर आए तथा बाई ओर से शरीर से बाहर रहे। 
  • जंघा विस्तार करते समय पूरक तथा आकर्षण करते हुए रेचक करें। 
  • नियमित अभ्यास अनुसार आवृत्तियां करें। 

13) पूर्ण तितली 

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तितली के पंख की गति से समानता रखने वाली यह कृति हर योगाभ्यासी के लिए आवश्यक अभ्यास है।  सामान्यतः दोनों घुटनों का भूमि स्पर्श होना ध्यान के आसनों में अनिवार्य रहता है किंतु हमारी जीवन जीने की पद्धति में  यह कृति कठिन होती जा रही है। इसे आसान बनाने हेतु यह अभ्यास विशेष लाभदायी है।
  • प्रारंभिक स्थिति में बैठे तथा पैरों को घुटनों में मोड़ कर जननांघ तक लाए। 
  • दोनों पैरों के तलवों का स्पर्श एक-दूसरे से होगा तथा एड़िया जननांघ को स्पर्श करेगी। 
  • दोनों हाथों की उंगलियों को एक दूसरे में पिरोकर दोनों पैरों की उंगलियों के जोड़ को पकड़ लो। हाथ दोनों घुटनों के अंदर रहे। 
  • अब एक साथ दोनों घुटनों को ऊपर ले आए तथा धीरे धीरे नीचे ले जाएं , जहां घुटनों का बाहर का हिस्सा भूमि से स्पर्श करें।  
  • शुरुआत में यह आसन करने में कठिनाई होगी पर धीरे-धीरे अभ्यास से सरलता आती जाएगी क्रमशः संपूर्ण प्रक्रिया धीमे , मध्य तथा तीव्र गति से होगी , जैसे तितली के पंखों की गति होती है। 
  • गति को कम करते हुए भी तीव्र से मध्य की और और मध्य से धीमी क्रिया करनी होगी।
  • घुटनों को ऊपर लाते हुए पूरक तथा नीचे लाते हुए रेचक करें।
टिप :- 
  1. पूरक -  सांस अंदर लेना 
  2. रेचक -  सांस छोड़ना
  3. अंतः कुम्भक - सांस लेने के पश्चात कुछ देर रोककर रखना। 
  4. बहिः कुम्भक - सांस छोड़ने के बाद कुछ देर रोक कर रखना।
Image Source - Ramdevyoga
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हर इंसान की एक प्यारी चीज होती है और वह है उसकी नींद (Sleep)। सेहत को सही रखने एवं शरीर के विभिन्न अवयवों का कार्य सुचारु रुप से चलने में एक अच्छी नींद की अहम भूमिका होती है। हम कितने घंटे सोते हैं इस बात पर हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य निर्भर करता है। एक अच्छी सेहत के लिए कम से कम 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना आवश्यक होता है। 

यह तो हुई नींद के अवधि की बात लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि हम किस स्थिति में सोते हैं यानी कि हमारी पोजीशन का असर भी हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर होता है। सोने की सही स्थिति कौन सी है इस बारे में कई वर्षों पहले आयुर्वेद में कहा गया है। इस बात को आज का विज्ञान भी मान रहा है। क्या यह स्थिति सही में मायने रखती है ? क्या सोने की स्तिथि का दुष्परिणाम भी हमारे शरीर पर हो सकता हैं ? 

आइए जानते हैं कौन सी स्थिति में सोना हमारे स्वास्थ्य के लिए क्या भूमिका निभाता है :


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बायीं करवट पर सोने के क्या फायदे हैं ?

Health benefits of Sleeping on left side in Hindi

ज्यादातर लोग उस स्थिति में सोना पसंद करते हैं जिस स्थिति में वह अपने आप को आरामदायीं महसूस कर सके। कोई बायीं करवट पर सोते हैं तो कोई दायीं करवट पर। कोई अपने पीठ के बल सोना पसंद करते हैं तो किसी को अपने पेट पर सोना रास आता है। इन सभी स्थितियों का हमारे शरीर स्वास्थ्य पर फर्क पड़ता है।   जानते हैं कैसे ?
  • पेट के बल सोने से कई बार सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए जिन व्यक्तियों को अस्थमा या नींद ना आने की शिकायत रहती हो उनके लिए इस स्थिति में सोना ठीक नहीं होता है। पेट के बल सोने से आपको स्पाइन की तकलीफ भी हो सकती हैं।  
  • बायीं करवट पर सोना आपका पाचन तंत्र दुरुस्त रखता है जबकि दायीं करवट पर सोने से आपके पाचन तंत्र में बिगाड़ होने की संभावना रहती है। इसीलिए आयुर्वेद में खाना खाने के बाद कुछ देर बाद वाम कुक्षी लेने का विधान है ताकि आपका हाजमा दुरूस्त रहे। 
  • बायीं करवट पर सोने से हमारी कई परेशानियां कम हो जाती है जैसे कि पेट फूलना , पेट में गैस होना , एसिडिटी होना आदि। 
हर एक स्थिति में सोने का हमारे शरीर पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान के आधार से सोने की सही स्थिति होती है बायीं करवट पर सोना। आइए जानते हैं इससे हमें क्या फायदे होते हैं ?
  1. लसिका तंत्र : हमारे शरीर के बाएं हिस्से में Lymphatic System ( लसिका तंत्र ) की प्रमुखता रहती है। जब हम बायीं करवट पर सोते हैं तब हमारा शरीर विषैले एवं बेकार तत्वों को lymph node और Thoracic duct के द्वारा आसानी से कई गुना ज्यादा रफ्तार से शरीर के बाहर निकालने में सक्षम होता है। दायीं करवट पर सोने से यह क्षमता कम हो जाती है। 
  2. पीठदर्द में राहत मिलती हैं : जिन लोगों को पुरानी पीठ दर्द की शिकायत है उन्हें बाई करवट पर सोने से आराम मिलता है। इससे स्पाइन पर दबाव कम आता है और धीरे धीरे पीठ दर्द में राहत मिलने लगती है। 
  3. हृदय के लिए हितकारी : बायीं करवट पर सोने से रक्त संचलन ( Blood circulation ) में आसानी होती है एवं हृदय पर दबाव भी कम पड़ता है। 
  4. स्रीयों में गर्भावस्था में लाभदायी : गर्भावस्था में बायीं करवट पर सोना एक आदर्श स्थिति होती मानी जाती है। इससे पीठ पर दबाव कम आता है साथ ही गर्भाशय, गर्भ एवं किडनी की तरफ रक्त का बहाव भी बढ़ता है। जिससे गर्भ का विकास सही ढंग से बिना अवरोध के होता है। 
  5. छाती में जलन से राहत : गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट भी मानते हैं कि बाई करवट पर सोने से एसिड रिफ्लक्स ( पेट का अम्लीय द्रव फिर से अन्ननलिका में आना, जिससे छाती में जलन, एसिडिटी आदि जैसे लक्षणों में कमी आती है। 
  6. कब्ज से राहत : अगर आप बायीं करवट पर सोते हो तो आहार का पाचन अच्छे से होता है और आपको धीरे धीरे कब से भी राहत मिलने लगती है।
अगर आपको बाई करवट पर सोने की आदत नहीं है तो इसके लिए आपको थोड़ा अभ्यास और कुछ बदलाव करने होंगे। जैसे कि :
  • बाई करवट पर सोना और पीठ के पास एक तकिया लगा देना जिससे कि करवट बदलने में आप असमर्थ हो। 
  • आप चाहे तो अपने दाहिनी और कोई नाइट लैंप रख सकते हैं जिससे कि आप उसकी तरफ पीठ करके सोने में मजबूर हो जाए। 
  • इस तरह थोड़े दिनों में आपको बाई करवट पर सोने की आदत हो जाएगी और आप बाई करवट पर सोना आरामदाई महसूस करने लगेंगे और इस से होने वाले फायदों का लाभ उठा पाएंगे। 
हम मानते हैं कि पूरी रात एक ही करवट पर सोना कई बार मुश्किल होता है और हमे करवट भी बदलते रहना चाहिए।  हमें कोशिश करनी चाहिए कि जब भी हम सोए तो बाई करवट पर सोए और जब भी हमारी नींद खुले तो हमें तुरंत बाई करवट ले लेनी चाहिए। किसी भी सूरत में हमें औंधे मुंह जाने पेट के बल नहीं सोना चाहिए इससे रीढ़ की हड्डी पर भी दबाव होता है साथ ही कभी-कभी घबराहट पर नर्वसनेस के लक्षण भी दिखते हैं। 

इस तरह आप अपने सोने की आदत में थोड़ा बदलाव करके अच्छी सेहत पा सकते हैं।  आशा करते हैं यह लेख  आपको पसंद आया होगा और आपको उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई होगी। 

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भारत में शिशु (New Born) मृत्यु दर 47/1000 शिशु है। यानी देश में जन्म लेने वाले हर हजार शिशुओं में से 47 शिशु की मृत्यु उनके जीवन के प्रथम वर्ष में ही हो जाती है। इन बच्चों में से 60% की मृत्यु जन्म के 1 महीने के भीतर ही हो जाती है। आज भी देहात में ज्यादातर लोगों का अनपढ़ होना और अस्वच्छता यह भारत में इतना अधिक शिशु मृत्यु दर होने की कुछ प्रमुख बड़ी वजह हैं।

नवजात शिशुओं में लगभग 90% की मृत्यु ऐसे कारणों से होती है जिनसे बच्चे को बचाया जा सकता है। जैसे की जन्म के समय वजन कम होना, समय से पूर्व जन्म होना, जन्म के समय बच्चे को सांस लेने में तकलीफ, संक्रमण या पीलिया इत्यादि। 

बच्चों के जन्म से पहले से ही बच्चे जब माता के कोख में होते तब से लेकर तो जन्म के बाद पहले एक वर्ष तक माता और शिशु की विशेष देखभाल बेहद आवश्यक होती हैं। माता और नवजात शिशु की देखभाल कैसी करनी चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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नवजात की देखभाल कैसे करे ? Newborn Baby Care tips in Hindi

जन्म से पहले देखभाल कैसे करे ? Pregnancy care tips in Hindi 

नवजात शिशु की देखभाल का सबसे महत्वपूर्ण समय मां के गर्भ के दौरान होता है। गर्भ के दौरान यदि मां स्वस्थ है, उसका खानपान उचित हो और गर्भ से संबंधित कोई विकार ना हो तो बच्चा जन्म के समय स्वस्थ रहता है। चीनी लोगों का मानना है कि जन्म के समय बच्चे की उम्र नव महीने की होती है जबकि हम जन्मदिन बच्चे के पैदा होने के वक्त मनाते हैं। इसका मतलब यह है कि संबंध बनाने (कंसेप्शन) के पहले दिन से ही बच्चे का जीवन शुरू हो जाता है और तभी से उसका पूरा-पूरा ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस दौरान की गई देखभाल से ही शिशु जन्म के समय स्वस्थ होगा। इसी तरह इस दौरान बरती गई लापरवाही का नतीजा भी जन्म के समय पर आने वाली जटिलताओं के रूप में सामने आता है। 
  • नवजात शिशु की देखभाल के लिए मां को समुचित जानकारी मेडिकल व पेरामेडिकल स्टाफ द्वारा दी जानी चाहिए। 
  • प्रेगनेंसी प्लान करने के पहले ही माता का सम्पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण करना चाहिए जिससे खून / कैल्शियम की कमी, थीरोइड, हेपेटाइटिस, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि बीमारी होने पर उसका पता पहले से चल जाये और उचित उपचार शुरू हो सके।  
  • जहां तक संभव हो सके प्रसव हमेशा अच्छे अस्पताल में ही होना चाहिए ताकि चिकित्सक और नर्स की सेवाएं मिल सके इससे जटिलताओं की आशंका कम हो जाती है। 
  • किसी भी प्रकार की जटिलता पेश आने पर अस्पताल में तुरंत उससे निपटने की व्यवस्था की जा सकती है। 

जन्म के बाद शिशु की देखभाल कैसे करे ?
Newborn Baby Care tips in Hindi

शिशु का जन्म होते ही उसकी ठीक से देखभाल होना आवश्यक हैं। शिशु की क्या देखभाल करनी छाईए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • जन्म के आधे घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध पिलाना चाहिए। माता का पहला पिला दूध शिशु को अवश्य पिलाये इसमें कई बिमारियों से लड़ने की शक्ति होती हैं। स्तनपान से जुडी अधिक जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - स्तनपान कैसे करे और स्तनपान का महत्त्व 
  • जीवन के पहले 6 महीने तक बच्चे के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। इस दौरान मां के दूध के अलावा कोई भी चीज ना पिलाये।  
  • कई लोग बच्चे को पानी, घुटी, शहद, नारियल पानी, सोना को घिसकर या गंगा जल पिलाने की गलती करते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। 
  • शुरूआती 6 महीनों तक माता का दूध पीने वाले बच्चे अच्छी तरह से विकसित होते हैं। संक्रमण से उनका बचाव होता है। साथ ही उन में अपने माता-पिता के प्रति भावनात्मक लगाव लंबे समय तक बना रहता है।  
  • छह महीने की उम्र के बाद बच्चे को माता के दूध के अलावा ऊपरी आहार भी देना चाहिए। 
  • जन्म के तुरंत बाद शिशु को पोलियो की दवा, बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीका देना चाहिए। 
  • शिशु को ठंड से बचाने के लिए उसे पूरे कपड़े पहनाने चाहिए। 
  • कपड़ों के साथ ही उसे टोपी, बग्लॉव्स और मोज़े पहना कर रखना चाहिए। 
  • बच्चे को मां के समीप रखना चाहिए क्योंकि मां के शरीर से बच्चे को गर्मी मिलती है। 
  • घर की किसी बड़े सदस्य को कोई संक्रामक बीमारी होने पर उन्हें बच्चो से दूर रखे। 
  • बच्चे को उठाते या खिलाने-पिलाने से पहले अपने हाथ अच्छे से साफ़ करे और स्वच्छ बर्तन का ही इस्तेमाल करे।  
  • बच्चो को उठाते समय उनके सिर को सहारा अवश्य देना चाहिए। छोटे बच्चो में neck control नहीं होता जिससे सिर उठाने पर पीछे लटक जाता हैं। 
  • बच्चों को चोट लग सके या बच्चा निगल सके ऐसी कोई चीज बच्चों के पास न रखे। 
  • अगर डायपर का इस्तेमाल करते है तो हमेशा अच्छे डायपर का इस्तेमाल करे और 10 घंटे से अधिक कोई डायपर न रखे। 
  • 6 महीने से बड़ों बच्चो को पानी पिलाते है तो हमेशा स्वच्छ पानी ही पिलाये। 
  • स्वच्छता - मां को स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना चाहिए ताकि बच्चा गंदगी से संक्रमण की चपेट में ना आएं। गद्दे और चादर साफ होने चाहिए। बच्चे और मां के कपड़े भी अच्छे से धुले हुए होने चाहिए। बच्चे और मां को रोज नहाना चाहिए। मां के नाखूनों में मैल जमा नहीं होना चाहिए। मां को अपने संपूर्ण शरीर की स्वच्छता की खास देखरेख रखनी चाहिए। 
  • मालिश - बच्चे की मालिश करना फायदेमंद होता है। यह वैज्ञानिक रूप से सही माना जाता है। मालिश हल्के हाथ से करनी चाहिए। मालिश दोपहर के समय करना चाहिए ताकि बच्चे को ठंड ना लगे। 
  • काजल - बच्चों की आंखों में काजल लगाया जाता है। यह माना जाता कि इससे बच्चे की आंख बड़ी होती है। बच्चों को आंख में काजल नहीं लगाना चाहिए यह नुकसानदायक हो सकता है। 
  • बच्चो में उलटी या दस्त लगने पर तुरंत डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। घरेलु नुस्खे आजमाने की जगह उन्हें तुरंत डॉक्टर को बताये। उलटी, बुखार और दस्त के कारण बच्चे की तबियत जल्द सीरियस हो सकती हैं। बच्चो में बीमारी के किसी भी लक्षण को हलके में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।  

बच्चो को क्या कपडे पहनाये ?

गर्मी का मौसम हो तो नवजात को कॉटन के ढीले कपड़े पहनाने चाहिए। उसका पूरा शरीर कपड़े से ढका होना चाहिए ताकि मच्छरों से बचाव हो सके। गर्मी में बच्चों को उन्ही कपड़े से गर्मी होती है। मौसम में ठंडक होने पर ही उन्हीं कपड़े पहनाए। ठंड के मौसम में उन्ही कपड़े पहनाए लेकिन अंदर पतला नरम कॉटन कपड़ा जरूर पहनाना है। बच्चे को शरीर पूरी तरह ढका होना चाहिए ताकि उसे ठंडा लगे या मच्छर ना काट पाए। 

अवश्य पढ़े - कैसा होना चाहिए जन्म से लेकर 3 वर्ष तक के बच्चों का आहार

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MI यानी Myocardial Infarction उस स्वास्थ्य स्तिथि को कहते हैं जब हृदय के किसी भाग को रक्त नहीं पहुंचता है। साधारण भाषा में इसे हम हार्ट अटैक या हृदयाघात कहते हैं। इसका मुख्य कारण धमनियों में रक्त का थक्का जम जाना है। अगर इस समस्या का सही प्रकार से सामना नहीं किया जाए तो इससे ह्रदय का हिस्सा काम करना बंद कर सकता है। 

हार्ट अटैक आने के बाद बेहतर स्वास्थ्य स्तिथि पाने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करने की जरूरत रहती हैं। आपका ह्रदय पहले से कमजोर और इसे क्षति पहुचने का खतरा अधिक रहने के कारण आपको अपने जीवनशैली या लाइफस्टाइल में बदलाव करना पड़ता हैं। 

हार्ट अटैक आने के बाद अपने जीवनशैली में क्या महत्वपूर्ण बदलाव लाने चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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हार्ट अटैक आने के बाद अपने जीवनशैली में क्या बदलाव लाये ?

Lifestyle changes after Heart attack in Hindi

हार्ट अटैक आने के बाद रोगी को अपने जीवन में कुछ विशेष बदलाव लाना बेहद जरुरी होते हैं। यह बदलाव क्या है और इन्हें कैसे लाना है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

व्यायाम करे / Exercise

  • सही जीवन शैली अपनाने में कभी देर नहीं होती और खास तौर पर जब आप हार्ट अटैक की स्थिति से गुजरे हो तो आपके लिए अपनी जीवनशैली में उचित सुधार करना और भी आवश्यक हो जाता है। 
  • व्यायाम करना आपकी सेहत को दुरुस्त रखने में मदद करता है तो अगर आप अभी तक व्यायाम में जी चुराते रहे हैं तो आपके लिए अच्छा रहेगा कि आप अभी कसरत करना शुरू कर दे 
  • बेहतर रहेगा की आप हल्का व्यायाम शुरू करें और जैसे जैसे आपकी और आपके दिल की सेहत में सुधार आता रहेगा आप व्यायाम का अभ्यास बढ़ा सकते हैं।  
  • आप चलना, तैराकी, जोगिंग और साइकिलिंग जैसे एरोबिक व्यायाम कर सकते हैं। इनकी मदद से आपका ब्लड प्रेशर भी कम रहेगा साथी कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहेगा। 
  • TALK test : व्यायाम करते समय यह ध्यान रखे की इतना व्यायाम करे की आप छोटे वाक्य ठीक से बोल सके। अगर आपको एक छोटा वाक्य जैसे की, ' मैं ठीक हूँ ! ' इतना बोलने में भी सांस फूलती है तो इसका मतलब अब आपको रुक जाना चाहिए और आराम करना चाहिए। क्षमता से अधिक व्यायाम करने का प्रयास न करे। 

सोडियम पर नजर / Sodium Intake

  • सोडियम शरीर में पानी को रोके रखता है।जिससे कि ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका रहती है। 
  • अधिक मात्रा में सोडियम का सेवन आपके सेहत के लिए अच्छा नहीं है 
  • नमक सोडियम का सबसे बड़ा स्रोत है। 
  • यानी आपको ऐसा भोजन खाने से बचना चाहिए जिसमें अधिक मात्रा में नमक हो जैसे कि अचार, पापड़, नमकीन बिस्किट, टोमेटो सॉस इत्यादि। 
  • आप चाहे तो साधारण नामक की जगह मेडिकल से Low Sodium Salt ले सकते हैं। 

वजन नियंत्रण / Weight loss

  • अगर आपका वजन अधिक है तो आप अपनी समस्याओं में बढ़ोतरी कर रहे हैं। 
  • यही नहीं आपके भविष्य में हार्ट अटैक की समस्या को दोबारा सामना करने की आशंका भी बढ़ जाती है तो इसलिए अगर आपका वजन अधिक है तो फिर आप मोटापे के शिकार है तो आपको इससे छुटकारा पाना ही होगा। 
  • सही आहार और व्यायाम आपको इसमें काफी मदद कर सकता है। आप चाहे तो डाइटिशियन की मदद भी ले सकते हैं। 
  • वजन कम करने के आसान उपाय जानने के लिए यहां क्लिक करें  - अपने वजन को कैसे कम करें ?

नशा / Habits 

  • धुम्रपान आपके हार्ट के लिए बेहद नुकसानदेह होता है। इससे हार्ट अटैक होने का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है। 
  • अगर आपको सिगरेट पीने की लत है तो जनाब जल्द से जल्द इससे निजात पाए। 
  • तंबाकू आपकी दिल की सेहत के लिए किस हद तक घातक है इसका अंदाजा लगा पाना भी आपके लिए मुश्किल है। 
  • यह आपके शरीर में आक्सीजन की मूवमेंट पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है साथ ही यह आपकी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढ़ाता है। 

तनाव / Stress

  • केवल अत्यधिक तनाव के कारण भी आपको आकस्मिक हार्ट अटैक दोबारा आ सकता है। 
  • जहां तक हो सके तनाव से दूर रहे। 
  • हार्ट अटैक का निदान और इलाज आप पर मानसिक और शारीरिक दबाव डालती है इस परिस्थिति में आपको शांत और संयमित रहने की जरूरत होती है। 
  • अपनी जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव लाकर आप एक सामान्य जीवन जी सकते हैं। 
  • लाफ्टर थेरेपी की मदद ले। 
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। 
  • मेडिटेशन का अभ्यास करें। 
  • बेकार के विचार दिमाग न आये इसलिए अपने आपको व्यस्त रखे। 

योग और प्राणायाम / Yoga

  • योग और प्राणायाम करके आप अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। 
  • कई शोधों में यह सिद्ध हुआ है कि योग और प्राणायाम के द्वारा आप अपने धमनियों में जमा कोलेस्ट्रोल के प्रमाण को कम कर सकते हैं। 
  • आप अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से नीचे दिए गए हुए योग कर सकते हैं। योग की विधि और लाभ पढ़ने के लिए निचे दिए हुए योग के नाम पर click करे :
  1. भस्त्रिका प्राणायाम 
  2. कपालभाति 
  3. अनुलोम विलोम 
  4. शिवलिंग हस्त मुद्रा 
  5. पवनमुक्तासन 
  6. शवासन 
  7. वज्रासन 
  8. भुजंगासन 
  9. धनुरासन 
  10. ताड़ासन 
  11. सेतुबंधासन 

स्वास्थ्य परिक्षण / Medical Check up

हार्ट अटैक का उपचार कराने के बाद आपको पहले से बेहतर महसूस होता है पर इसका मतलब यह नहीं है की आपको अब डॉक्टर को दुबारा नहीं दिखाना हैं। आपको डॉक्टर की सलाहनुसार समय-समय पर डॉक्टर से मिलकर अपना परीक्षण कराना है और समय पर सभी दवा लेते रहना चाहिए। किसी भी बहकावे में आकर अपनी दवा बंद कर अपने जान को दांव पर न लगाए।

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