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आजकल गुर्दे की खराबी जिसे #Kidney_Failure या Renal Failure भी कहा जाता है के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, संक्रमण, खान-पान में मिलावट, बिगड़ती जीवनशैली और प्रदुषण जैसे कारणों के चलते किडनी ख़राब होने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

किडनी हमारे शरीर में मौजूद अनावश्यक और विषैले तत्वों को मूत्र / Urine के रास्ते शरीर के बाहर निकालता है और शरीर को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद करता हैं। किडनी फ़ैल होने के कारण उसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है और रोगी के शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते है जिससे की रक्त में Creatinine का मात्रा बढ़ने लगती है। दवा से आराम न मिलने पर ऐसे Kidney failure के रोगियों को या तो Dialysis का सहारा लेना पड़ता है या तो फिर Kidney Transplant करना पड़ता हैं।

Kidney Failure होने पर शरीर में विषैले तत्व जमा न हो और Serum Creatinine की level रक्त में न बढे इसके लिए ऐसे रोगियों को विशेष आहार लेने की जरुरत होती हैं। किडनी की खराबी होने पर रोगी को ऐसा आहार लेना चाहिए जिससे की रोगी के किडनी पर अतिरिक्त भार न पड़े। आज इस लेख में हम आपको Kidney Failure होने पर रोगी ने कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी देने जा रहे हैं।

किडनी की खराबी होने पर रोगी को कैसा आहार इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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Kidney Failure के रोगी क्या खाये और क्या नहीं ?

Kidney Failure Diet chart in Hindi

किडनी ख़राब होने पर रोगी स्वास्थ्य को नियंत्रित करने के लिए उसके आहार पर ध्यान देना बेहद जरुरी होता हैं। अगर रोगी ठीक तरह से अपने स्वास्थ्य के हिसाब से आहार लेता है तो कम से कम औषधि में रोगी की हालत में सुधार लाया जा सकता है और Dialysis या Renal Transplant से बचा जा सकता हैं।

Kidney fail होने पर रोगी ने अपने आहार पर निचे दिए हुए बातों का ख्याल रखना चाहिए :

प्रोटीन - Protein in Kidney Failure 

  • प्रोटीन हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व हैं। शरीर की मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रोटीन आवश्यक हैं। 
  • अगर आप जरुरत से कम प्रोटीन लेते है तो शरीर में बेहद कमजोरी आ सकती हैं वही अगर आप ज्यादा प्रोटीन खाते है तो किडनी के ऊपर इसका बोझ बढ़ जाता हैं। 
  • अगर आपके यूरिन रिपोर्ट में ज्यादा Albumin positive आता है तो आपने प्रोटीन युक्त आहार कम लेना चाहिए। सामान्यतः हम 1 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो ले सकते हैं। 
  • किडनी की खराबी होने पर अपने मांसाहार नहीं करना चाहिए। आप चाहे तो कभी 1 अंडा या 30 ग्राम मछली खा सकते हैं। प्रोटीन के लिए आप 25 से 30 ग्राम पनीर, 1 से 2 कप दूध, 1 कप दही, दालें आदि ले सकते हैं। 
  • प्रोटीन युक्त आहार की पूरी जानकारी आप यहाँ click कर पढ़ सकते हैं - प्रोटीन का महत्त्व और आहार स्त्रोत। 
  • आपने रोजाना कितना प्रोटीन खाना चाहिए इसका फैसला आपकी शारीरिक जांच और किडनी की ब्लड रिपोर्ट देखकर आपके डॉक्टर या डायटीशियन बेहतर बता सकते हैं। 

सोडियम / Sodium in Kidney Failure 

  • हमारे आहार में सोडियम का सबसे बड़ा स्त्रोत नमक होता हैं। किडनी की खराबी होने पर अपने अधिक सोडियम / नमक नहीं खाना चाहिए। 
  • सोडियम हमारे शरीर में पानी का जमाव / Water retention का कार्य करता है जिससे शरीर में पानी जमा होने लगता है और किडनी पर बोझ पड़ता हैं। 
  • आपको आपके खाने में कम से कम नमक इस्तेमाल करना चाहिए। खाने में ऊपर से नमक बिलकुल न डालें। 
  • आपके लिए अलग से खाना बनाये जिसमे नमक का कम प्रयोग किया गया होना चाहिए। अधिक सोडियम युक्त चीजे जैसे अचार, पापड़, चिप्स, नमकीन, बाजार में मिलनेवाली तैयार सब्जियां का सेवन न करे। 
  • हर चीज में कितना सोडियम उपयोग किया गया है उसका ख्याल रखे। 
  • दिनभर में 1/4 चमच्च से ज्यादा नमक न ले। उच्च रक्तचाप या गंभीर किडनी के रोगी को रोजाना 3 ग्राम से अधिक सोडियम नहीं लेना चाहिए।  

पानी / Water in Kidney Failure : 

  • किडनी के रोगी ने दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए यह भी रोगी के किडनी की स्तिथि पर निर्भर करता हैं। 
  • पानी हमारे शरीर के लिए एक बेहद जरुरी तत्व है पर अगर रोगी का क्रिएटिनिन बेहद ज्यादा हो और रोगी को पेशाब कम हो रहा हो तो दिन भर में एक लीटर से ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए। 
  • अगर रोगी को अच्छे से पेशाब हो रही है तो रोगी दो लीटर पानी भी पि सकता हैं। 
  • पानी कितना पीना चाहिए यह हवामान पर भी निर्भर करता है। गर्मी में पसीना ज्यादा आता है इसलिए पानी का प्रमाण बढ़ाना पड़ सकता है वही ठंडी में कम पानी पीना चाहिए। 
  • आपको इतना पानी अवश्य पीना चाहिए की आपकी जीभ सुखी / dry न रहे और शरीर में पानी की कमी न हो। 
  • आप आपके डॉक्टर  सलाहनुसार पानी की मात्रा तय कर अपने दिनभर में कितना पानी / जूस / चाय / दूध आदि तरल पदार्थ पिया है इसका रिकॉर्ड बनाकर रखे। 

पोटैशियम / Potassium in Kidney Failure 

  • किडनी की खराबी होने पर आपको अधिक पोटैशियम युक्त आहार से परहेज करना चाहिए। 
  • आपको अपने आहार में सोयाबीन, किशमिश, केला, अनार, पपीता, नारियल, निम्बू, खजूर, खरबूजा, आलू, भिंडी, संतरा, गाजर, पालक, टमाटर, चीकू, अनार, हरा धनिया, पालक, गवार की फली, मटर, अंडा, मीट, मछली, अखरोट, अंजीर, उड़द दाल, धनिया, जीरा, मेथी का सेवन कम करना चाहिए। 
  • अधिक पोटैशियम लेने से शरीर में पोटैशियम जमा हो सकता है जिसे हाइपरकेलेमिआ कहते है। इससे ह्रदय की गति घटते-घटते अचानक रुक जाना और फेफड़ों के स्नायु काम न करना जैसे जानलेवा परिणाम हो सकता हैं।   

फॉस्फोरस / Phosphorus in Kidney Failure 

  • किडनी की खराबी होने पर आपको अपने आहार में फॉस्फोरस की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। 
  • अंडा, मछली, मटन, दूध, दूध से बनी चीजे, सॉफ्ट ड्रिंक आदि नहीं लेना चाहिए। 

फैट / Fat in Kidney Failure 

  • खाना बनाने के लिए ओलिव ऑइल, मूंगफली का तेल या केनोला ऑइल का उपयोग करे। 
  • अधिक फैटयुक्त आहार, तलाहुआ फास्टफूड आदि न खाये। 

कार्बोहाइड्रेट्स / Carbohydrates in Kidney Failure 

  • किडनी की खराबी होने पर 40 कैलोरी प्रति किलोग्राम खाने की सलाह दी जाती हैं। 
  • रोगी को चोकर युक्त गेहू, बिना पोलिश किया हुआ चावल जैसे जटिल कार्बोहायड्रेट का उपयोग करे। 
  • मधुमेह या पोटापा होने पर मीठे से परहेज करे। 

कैल्शियम / Calcium in Kidney Failure 

  • किडनी के रोगियों को अधिक कैल्शियम नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे किडनी में पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती हैं। 
  • कैल्शियम युक्त आहार की पूरी जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं - कैल्शियम का आहार स्त्रोत क्या हैं 

अन्य महत्वपूर्ण सुचना / Others 

  1. किडनी में खराबी होने पर आप ने दिनभर में दो बड़े आहार लेने की जगह हर 3 से 4 घंटे पर खुराक लेना चाहिए। 
  2. अपने डॉक्टर की सलाह लिए बगैर मेडिकल से कोई भी दवा नहीं लेना चाहिए। विशेषकर टॉनिक, स्टेरॉयड और दर्दनाशक दवा लेने से किडनी में ज्यादा खराबी आती हैं इसलिए यह दवा डॉक्टर को पूछे बिना नहीं लेना चाहिए। 
  3. Whatsapp और इंटरनेट पर Kidney failure को जडीबुडी देकर ठीक करने के कई दावें किये जाते है या घरेलु नुस्खे बताये जाते हैं। अपने एलॉपथी या आयुर्वेदिक डॉक्टर को पूछकर ही कोई उपाय अपनाये। 
  4. शराब, धूम्रपान, तम्बाकू, गुटखा आदि का सेवन बिलकुल न करे। 
  5. कोई आपको कितना भी फाॅर्स क्यों न करे जो चीजे आपके सेहत के लिए ठीक नहीं है वह न खाए। याद रखे की खाने पर विशेष ध्यान देकर आप डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट से बच सकते हैं। 
  6. आयुर्वेद के अनुसार आप केवल मूंगदाल का पानी ही सेवन कर तो कुछ दिनों में ही आपका क्रिएटिनिन लेवल काबू में आ सकता हैं। 
  7. किडनी की खराबी होने पर आपको खाने में कई सारी पसंदीदा चीजों को खाना छोड़ना पद सकता है पर अगर आपको स्तिथि को काबू में रखना है तो ऐसा करना बेहद जरुरी हैं।      
  8. हर किडनी की खराबी के रोगी का आहार उसके स्थान, उम्र, लिंग, वजन, अन्य बीमारी और बीमारी की गंभीरता के हिसाब अलग-अलग हो सकता हैं। बेहतर होगा आप अपने डॉक्टर और आहार विशेषज्ञ की सलाह से आहार नियोजन करे और समय समय पर अपने इसका आकलन भी करते रहे। 
इस लेख में हमने Kidney Failure के patients के diet में क्या लेना चाहिए और diet में किन आहार पदार्थों का समावेश करना चाहिए इसकी संक्षिप्त जानकारी दी हैं।
आशा है आपको यह Kidney failure से जुडी जानकारी उपयोगी लगी होगी और इसे आप जरूरत मंद लोगों के साथ शेयर भी करेंगे !   

सर्दी का मौसम शुरू हो गया है और इसके साथ ही हॉस्पिटल में सर्दी-खांसी और जुखाम के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही हैं। अक्सर लोग बीमार होने के बाद अपने खानपान में बदलाव करते हैं जबकि बीमारी होने से पहले ही अगर हम ऋतू अनुसार योग्य आहार लेते है तो शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता हैं।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए और रोग प्रतिकार शक्ति को मजबूत रखने के लिए सही पोषण की जरुरत होती हैं। सर्दी / Winter के दिनों में हमें ऐसे आहार की जरुरत होती है जो शरीर को गर्म रखे और immunity power को बढ़ाये। अगर आपको अस्थमा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, टीबी या त्वचा रोग है तो सर्दी में खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता हैं। 

सर्दी के मौसम में कुछ खास फल और सब्जी का अपने आहार में समावेश कर आप बिमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। सर्दियों के ख़ास खान-पान की जानकारी निचे दी गयी हैं :

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सर्दी के मौसम में कैसे रखे अपने स्वास्थ्य का ख्याल ?

Winter Diet tips in Hindi

सर्दी के दिनों में स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए आपने अपने आहार में किन चीजों का समावेश करना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • सब्जियां / Vegetables : सर्दी में हरी सब्जियां अवश्य खाना चाहिए। इनमे प्रचुर मात्रा में विटामिन्स होते है जो शरीर को गर्म रखने और रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने में सहायक हैं। सर्दी में पालक, चुकंदर, लहसुन, बथुआ, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गाजर का सेवन करना चाहिए। 
  • मूंगफली / Groundnut : सर्दी के दिनों में आपको मूंगफली का सेवन जरूर करना चाहिए। मूंगफली में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल, आयरन, विटामिन प्रचुर मात्रा में होते है। इसीलिए इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता हैं। सर्दी में शरीर को गर्म रखने के लिए, खून की मात्रा बढ़ाने के लिए और Immunity strong करने के लिए मूंगफली और देसी गुड़ साथ में खाना चाहिए। 
  • लहसुन / Garlic : भारत में सदियों से लहसुन के औषधि गुणों का उपयोग आयुर्वेदिक औषधि में और किचन में किया जा रहा हैं। आज आधुनिक विज्ञान भी इसके औषधि गुणों को मान रहा हैं। सर्दी में लहसुन का सेवन करने से आप मौसमी सर्दी, जुखाम और खांसी से छुटकारा पा सकते हैं। 
  • तिल / Sesame : सर्दियों में तिल खाने से ऊर्जा मिलती हैं। तिल के तेल से मालिश करने से त्वचा मुलायम बनी रहती है और ठण्ड से बचाव होता हैं। तिल और गुड़ का साथ में सेवन करने से शरीर को जरुरी पोषक तत्व मिलते हैं, ऊर्जा मिलती हैं, इम्युनिटी बढ़ती है और खांसी-कफ से राहत मिलती हैं। 
  • गाजर / Carrot : गाजर में विटामिन प्रचुर मात्रा में होने से रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती है और आँखे स्वस्थ रहती हैं। इसे खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती हैं। 
  • बाजरा / Pearl Millet : भारत के कई हिस्सों में सर्दियों में बाजरा अधिक खाया जाता हैं। बाजरा में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता हैं। खासकर छोटे बच्चों को बाजरा अवश्य खाना चाहिए। 
  • हल्दी / Turmeric : सर्दियों में हल्दीवाला गर्म दूध रोजाना रात में पिना स्वास्थ्यकर होता हैं। इसमें एंटीबायोटिक गुणों के साथ एंटी एलर्जिक और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण हैं। रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ने के लिए यह श्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि हैं। 
  • मेथी / Fenugreek : मेथी में विटामिन K, आयरन और फोलिक एसिड होता हैं। शरीर को गर्म रखने के साथ शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने में यह मदद करती हैं। 
  • बादाम / Almond : बादाम में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल होते है जो सर्दी में मौसमी बिमारियों से बचाव करते हैं। इसे रोजाना खाने से दिमाग तो तेज होता ही है साथ में कब्ज की समस्या भी नहीं होती हैं। डायबिटीज को नियंत्रित करने में भी यह मदद करता हैं। 
  • फल / Fruits : सर्दिओं में आपको मौसमी फल जैसे संतरा, सेब, अनार, आंवला आदि खाना चाहिए जो शरीर को पोषण, ऊर्जा और गर्माहट देते हैं। फलों का जूस बनाकर पिने से अच्छा है की आप सीधे स्वच्छ फल खाये। इससे पाचन भी ठीक रहता हैं। 
  • च्यवनप्राश : सर्दियों में च्यवनप्राश अवशय खाना चाहिए। सुबह शाम एक चमच्च च्यवनप्राश के साथ एक ग्लास गर्म दूध पिने से आपको शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ होता हैं। यह बुढ़ापे की गति को कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका हैं। च्यवनप्राश के फायदे जानने के लिए यह पढ़े - च्यवनप्राश क्या है ?
  • अन्य / Others : सर्दियों में हल्का और सुपाच्य भोजन करे। खाना हमेशा गर्म और तजा होना चाहिए। भोजन में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ाये। सर्दियों में अक्सर सर्दी जुखाम हो जाता है। ऐसे में खाने में बड़ी इलायची, लौंग, काली मिर्च, तेजपत्ता, अदरक जैसे गर्म मसालों इस्तेमाल पर्याप्त मात्रा में करे। 
आयुर्वेद में शरीरक बल बढ़ाने के लिए सर्दियों के मौसम को श्रेष्ट बताया गया हैं। इस मौसम में आप पोषक आहार के साथ व्यायाम और खेल कूद कर अपना शारीरिक बल, स्वास्थय और स्टैमिना बढ़ा सकते हैं। 

सर्दी के मौसम में क्या एहतियात बरते ?

  1. सर्दी-जुखाम का संक्रमण आसानी से फैलता हैं। आपको या किसी और को यह समस्या है तो खाने - पिने से पहले अपने हाथ साबुन से साफ करे। अपना टॉवल, रुमाल, पानी, गिलास आदि अलग रखे। 
  2. सर्दी-जुखाम होने पर सुबह शाम बाफ / steam लेना न भूले। 
  3. सुबह खुली ताज़ी हवा में जरूर टहले पर स्वेटर, कानटोपि आदि से अपनी सुरक्षा जरूर करे। 
  4. अगर आपको दमा या एलर्जी की शिकायत है तो अपना इनहेलर या पंप हमेशा पाने साथ रखे। हल्की सर्दी या खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे। अधिक ठन्डे पानी से न नहाए। 
  5. सर्दियों में अक्सर लोग घूमने जाते हैं। ऐसे में अपने साथ अपने मेडिकल रिकॉर्ड और चल रही प्रेशर या डायबिटीज दवा की अतिरिक्त खुराख हमेशा अपने साथ रखे। 
  6. सर्दियों में त्वचा रूखी और शुष्क हो जाती हैं। त्वचा को मुलायम रखें के लिए ग्लिसरीन गुलाब जल रोजाना लगाए। 
  7. सर्दियों में भूक ज्यादा लगती हैं पर आपको बाजार में मिलनेवाले फ़ास्ट फ़ूड की जगह पौष्टिक फल या घरेलु आहार ही खाना चाहिए। 
शरीर को शारीरिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए सर्दियों के दिन उत्तम होते हैं। आपको इन दिनों में योग्य दिनचर्या का पालन कर इस स्वास्थ्यकर समय का पूरा लाभ लेना चाहिए। 

अगर आपको यह सर्दियों में हमने कैसा आहार लेना चाहिए और अपनी रोग प्रतिकार शक्ति कैसे बढ़ानी चाहिए की जानकारी उपयोगी लगी है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे।    

कई लोगों को गेहू से बने आहार खाने के बाद पाचन संबंधी समस्या निर्माण हो जाती हैं। यह समस्या आपको गेहू / Wheat में मौजूद प्रोटीन Gluten से एलर्जी वजह से हो सकती हैं। Gluten से एलर्जी होने की वजह से इसका पाचन ठीक से नहीं होता है और गेहू युक्त कोई भी आहार लेने से पीड़ित में एलर्जी के लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। 

Food Allergy खासकर गेहूं एलर्जी का नाम सुनते ही आमतौर पर सभी सकते में आ जाते हैं क्योंकि एलर्जी होने पर अक्सर उस वस्तु के सेवन का निषेध कर दिया जाता है फिर गेहू या रोटी तो हमारे आहार का अहम हिस्सा है और एक स्वस्थ व्यक्ति उस के सेवन के बिना 1 दिन भी नहीं रह पाता हैं। 

गेहू या Gluten से एलर्जी क्या हैं, इसके लक्षण क्या हैं, इसका निदान कैसे किया जाता है और इसके उपचार से जुडी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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गेहू या ग्लूटेन से एलर्जी के कारण, लक्षण और उपचार 

क्या है गेहूं की फूड एलर्जी ? What is Gluten Allergy in Hindi 

गेहूं एलर्जी वास्तव में पाचन संबंधी एक Auto Immune Disorder है जिसमें पीड़ित व्यक्ति गेहूं, राई, जौ, माल्ट और सूजी में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन का पाचन नहीं कर पाता है और वह हमारी छोटी आत में अवशोषित होने के बजाए उसे नुकसान पहुंचाता है। इसे Celiac बीमारी या फिर Gluten Sensitive Enteropathy भी कहा जाता है। आंकड़ों के हिसाब से हर 100 में से एक व्यक्ति गेहू एलर्जी से ग्रस्त होता है। जब एक व्यक्ति के शरीर की प्रति रक्षा प्रणाली (Immunity) के हिसाब से कोई खाद्यपदार्थ शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता हैं तो वह उस खाद्यपदार्थ से एलर्जी करता हैं। 

गेहूं की एलर्जी का लक्षण Symptoms of Gluten Allergy in Hindi 

गेहू / Gluten से एलर्जी होने पर निचे दिए हुए लक्षण नजर आते है। जैसे की :
  1. जी मचलाना 
  2. उलटी होना 
  3. जुलाब होना 
  4. खुजली होना 
  5. शरीर पर लाल निशान 
  6. पेट दर्द या पेट फूलना 
  7. चक्कर आना 
  8. सांस लेने में परेशानी 
  9. आँखों में सूजन 
  10. नाक जाम होना इत्यादि 
गेहू से एलर्जी के यह लक्षण गेहूयुक्त आहार का सेवन करते ही तुरंत या 2 घण्टे के बाद भी दिखाई दे सकते हैं।

गेहू या Gluten एलर्जी का निदान कैसे किया जाता हैं ?

गेहू या Gluten की एलर्जी का निदान खून जांच Allergy Blood Testing या त्वचा जांच Skin Prick testing कर किया जाता हैं।

गेहू की एलर्जी का क्या उपचार हैं ?

गेहू या ग्लूटेन से एलर्जी का कोई ठोस उपचार अभी तक विकसित नहीं हुआ हैं। गेहू / Gluten मुक्त जीवनशैली अपनाना ही इसका एक सफल उपचार माना जाता हैं। 
  • दैनिक आहार में गेहूं और गेहूं के उत्पादन खाने से बचें। आप चावल, मकई, सोयाबीन, चना, कुट्टू, अरारोट, बाजरा, चौलाई, फ्लैक्स सीड्स, चिया सीड्स, ओट्स, बीन्स, मिल्लेट्स जैसी चीजें खाकर मल्टीग्रेन आटे की रोटी खा सकते हैं। यह रोटी स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होती हैं। 
  • आप रोटी की जगह बेसन का पुडा, मूंग दाल का चीला, उबले आलू मिलाकर मकई या कुट्टू के आटे की रोटी, चावल और उड़द दाल का डोसा, उत्तपम, साबूदाना जैसी चीजें ले सकते हैं। अगर आप ब्रेड, मैगी, नूडल्स, पास्ता, मैकरोनी, केक, कूकीज जैसी चीजें खाना चाहते हैं तो उसके पैकेट के लेबल पर चेक करे की गेहूं, जौ, सूजी का न बना हो। चने, राजमा, सोयाबीन, लोबिया जैसी दालों का सेवन करें। 
  • नियमित रूप से भोजन में हरी पत्तेदार और रेशेदार सब्जियों का सेवन करना फायदेमंद है। दिन में करीब 2 कटोरी सब्जी और सलाद को अपने भोजन में जरूर शामिल करें। इनमें करेला, मेथी, चौलाई, पालक, बैंगन, बींस, मटर आदि खाना बेहतर है। 
  • दिन में दो मौसमी फलों का सेवन जरूर करें। फाइबर से भरपूर फल आपके पाचन तंत्र को सुचारु रुप से चलाने में मदद करते हैं। 
  • नियमित तौर पर अलसी, अंजीर, अखरोट, बादाम, किशमिश जैसे ड्राई फ्रूट्स जरूर लें। 
  • दिन में कम से कम आधा लीटर दूध जरुर पिए। दही, पनीर का सेवन ज्यादा करें। आप चाहे तो सोया, बादाम या कोकोनट मिल्क, प्रोबायोटिक दही भी ले सकते हैं। 
  • अगर आप मांसाहारी हैं तो चिकन, मछली जैसे वाइट मीट खा सकते हैं। मटन के सेवन से जितना हो सके बचे। 
गेहू की एलर्जी होनेपर कई लोग घबरा जाते हैं। आप गेहू के बिना भी कई अन्य खाने की चीजों का लुफ्त उठा सकते है और शरीर के लिए पोषक तत्व ले सकते हैं। सौजन्य - डॉ छवि गोयल मांगलिक

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आयुर्वेद में दूध को सात्म्य आहार याने शरीर के लिये हितकारी आहार कहा गया है। दूध यह एक ऐसा पेय पदार्थ है जो हमसे जन्म से जुड़ा हुआ है। जिसे हर कोई जानता है। हमे बचपन से यह बताया जाता है कि दूध पीना हमारे सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। एक नवजात बच्चे के पोषण का आधार केवल दूध होता हैं। 

दूध का हमारे शारीरिक व मानसिक विकास में काफी योगदान होता है। दूध विटामिन A, B, K और कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, फोस्पोरस जैसे पोषक तत्व का एक बड़ा स्रोत है। दूध में सेरोटोनिन हार्मोन भी रहता है जो मस्तिष्क को शांत करने में मदद करता है। रोज एक गिलास दूध पीने से हमारा दिमाग चुस्त-दुरुस्त बना रहता है। आयुर्वेद के अनुसार दूध वातपित्तशामक, बल्य, हृद्य, क्षुधाशामक होता है। आयुर्वेद में गाय के दूध को सर्वोत्तम माना गया है। उसमें भी देसी गाय के दूध के प्रयोग पर अधिक बल दिया गया है।

कई बार हमारे मन में यह संशय रहता है कि दूध कितना पिया जाए और कब किया जाए तो जिससे लाभ या नुकसान हो सकता है। आज हम आपको बताएंगे कि दूध से क्या फायदे और नुकसान होते हैं। साथ ही दूध पीने का सही समय कौन सा है ताकि आप उसके गुणों से लाभान्वित हो सकें हो सकें। 


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दूध पिने के फायदे और नुकसान Health Benefits of Milk in Hindi 

दूध पिने के फायदे 

  • हड्डियां होती है मजबूत : दूध हमारे शरीर के लिए कैल्शियम की आपूर्ति का अच्छा स्त्रोत है, जिससे हड्डियां मजबूत बनने में मदद मिलती है। यह हमारे दांतों को भी मजबूत बनाता है। दूध में प्रोटीन रहता है जिससे हमारे शरीर की मांसपेशियों के पुनर्निर्माण में सहायता होती है। साथ ही मांसपेशियां भी मजबूत होती है। अगर शरीर को कही फ्रैक्चर हो तो दूध में हल्दी मिलाकर उसे उबालकर प्रयोग करना चाहिए। 
  • वजन रहता है नियंत्रित : दूध पीने की वजह से काफी देर तक भूख नहीं लगने का अहसास बना रहता है, ऐसे में व्यक्ति हल्का खाना खाता है और उसका वजन नियंत्रण में रहता है। दूध में प्रोटीन अधिक होता है, जो कार्बोहाइड्रेट के स्तर को घटाता है, जिसके चलते वजन कम होता है बशर्ते आप मलाई निकालकर दूध का प्रयोग करें। आप को कम से कम एक गिलास दूध सुबह नाश्ते के समय और रात को सोने से पहले पीना चाहिए।
  • सुंदरता में लगाएं चार चाँद : कहा जाता है कि पुराने जमाने में महलों की रानीया दूध से नहाया करती थी। सुंदरता को बढ़ाने में दूध काफी उपयोगी होता है। दूध में काफी विटामिन व न्यूट्रिएंट्स मौजूद होने के कारण नियमित तौर पर दूध पीने से आपकी त्वचा कोमल, मुलायम व चमकीली बनती है। त्वचा पर दूध मलने से झुर्रियां कम होती है। वैसे कच्चे दूध से मसाज क्लींजिंग क्रीम की तरह काम करता है। 
  • आएगी अच्छी नींद : अगर हमने रात का खाना किसी वजह से ना खाया हो और हमें नींद नहीं आ रही है तो एक चुटकी जायफल और केसर मिलाकर गर्म दूध पीजिये, इससे आपको अच्छी और शांत नींद आएगी।
  • सर्दी जुकाम से दे राहत : अगर आप सर्दी जुकाम से परेशान रहते है तो हर रोज दूध में हल्दी, अदरक या सौंठ, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, गुड़ डालकर उबालकर पियें। बार बार हो रहे ज़ुकाम मे गर्म दूध में कालीमिर्च डालकर पीए। 15 दिनों तक हर रोज 1 कालीमिर्च बढ़ाते जाए फिर 15 दिनों तक घटाते जाए। 
  • शरीर को हाइड्रेट रखने में करता है मदत : उपवास में दिन में 2 से 3 ग्लास दूध पीने से शरीर को एनर्जी मिलती है। वर्कआउट के बाद 1 ग्लास दूध पीने से थकान दूर होकर ताजगी मिलती है , शरीर को पोषण मिलता है, मांसपेशियों का विकास होने में मदत मिलती है तथा वर्कऑउट की पीड़ा भी कम होती है। आप चाहे तो एक्सरसाइज के बाद प्रोटीन मिल्क शेक भी बनाकर पी सकते है। 
  • कब्ज से देता है राहत : सोने से पहले 1 ग्लास गुनगुने दूध में 8 -10 मनुका डालकर पिये। इससे कब्ज में राहत मिलेगी। 1 ग्लास गुनगुने दूध में 8 से 10 मनुका व 1 अंजीर मिलाकर पीने से पाइल्स के तकलीफ में राहत मिलती है।
  • बढ़ाएगा मेमोरी पावर : रोज रात को 1 ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच बादाम तेल मिलाकर पीने से मस्तिष्क को ताकत मिलती है, साथ ही मेमोरी बढ़ने में मदत मिलती है। दूध में बादाम के साथ इलायची मिलाकर पीने से दिमाग, दिल, आंखे व मस्तिष्क के लिए फायदेमंद होता है। 
  • चॉकलेट वाला दूध बनाएगा आपको जवां : चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते है। चॉकलेट पाउडर मिलाकर दूध पीने से या चॉकलेट डॉयफ्रूइट मिल्क शेक पीने से स्वाद के साथ मस्तिष्क को मजबूती मिलेगी। साथ ही त्वचा जवां होकर झुर्रियां कम होने में मदत मिलेगी। 
  • आयरन की कमी होगी दूर : दूध में शक्कर के बजाय गुड़ मिलाकर पीने से आयरन की कमी दूर होती है। यह शरीर को काफी फायदा करता है व शक्कर से होनेवाले नुकसान से बचाता है।
  • चिंता को करता है दूर : आफिस या जॉब में पूरा तनाव भरा दिन बिताने के बाद घर आने पर अगर हम 1 ग्लास दूध पीते है, तो यह हमें प्रसन्नता व ताजगी के साथ पोषण देता है। अगर आप थका थका महसूस कर रहे हो तो 1 ग्लास ठंडा दूध आपको कुछ एनर्जी जरूर देगा। 
  • बढ़ाता है इम्युनिटी पावर : रोजाना दूध पीना आपको बीमारियों से लड़ने में मदत करता है। दूध के सेवन से लिवर के हानिकारक तत्व, कॉलेस्टेरॉल कम होने में मदत मिलती है। साथ ही हृदय को भी स्वस्थ रखता है। 


क्या है दूध पिने का सही तरीका ? 

दूध पिने के सही तरीके की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • दूध में मिठास के लिए शक्कर ना डालें। मीठा दूध कफकारक होता है। इसके अलावा शक्कर मिलाकर पीने से कैल्शियम नष्ट होता है। इसमें प्राकृतिक मिठास होती है अगर मीठे की जरूरत हो तो शहद, गुड़,  मनुका या मिश्री डालें। 
  • दूध को अधिक देर तक उबालने से इसमें मौजूद विटामिन बी नष्ट होता है। 1 उबाल आने पर इसे प्रयोग में ले। 
  • दूध में थोड़ा पानी मिला सकते है, ताकि वह पचने में भारी न हो। आप चाहे तो दूध में 1 चुटकी इलायची, सुंठ, केसर, जायफल,लौंग, दालचीनी का पावडर भी मिला सकते है, जिससे वह पेट मे जाकर गर्मी उतपन्न करता है, जिससे दूध आसानी से हजम हो सके। यह दूध कफकारक भी नही होता है।
  • याद रखे, खट्टे व नमकीन चीजों के साथ दूध का सेवन कभी न करे। आजकल फ्रूट्स और दूध मिलाकर फ्रूट सैलेड बनाया जाता है, जो कि आयुर्वेद के अनुसार विरुद्धान्न होता है। इससे कई तरह की त्वचा की समस्याएं होती है एवम शरीर के लिए नुकसानकारी होता है। 

क्या हैं दूध पीने का सही समय ?

दूध पिने के सही समय की जानकारी निचे दी गयी हैं : 
  • आयुवेद रात में दूध पीने को प्राथमिकता देता है। वैसे तो दूध सुबह भी लाभदायक होता है क्योंकि सूर्य की गर्मी के साथ इसका पाचन भी अच्छे से होता है एवम दिनभर एनर्जी भी बनी रहती है।  
  • रात को सोने से पहले दूध पिया जाए तो नींद अच्छी आती है व दिमाग शांत रहता है, क्योंकि दूध में अमीनो एसिड ट्रीप्टोपिन होता है, जो नींद के लिए आवश्यक हार्मोन सेरोटोनिन को बढ़ाता है। अगर आपको रात को सोने से पहले दूध पीना है तो शाम को भोजन के 3 घंटे होने के बाद दूध पिए, ताकी तब पेट खाली हो और दूध का पाचन आसानी से हो सके। 
  • बहुत ठंडे या बहुत गर्म दूध के के दूध के के बजाय गुनगुना या कमरे के तापमान के बराबर दूध पीना बेहतर होता है।
  • कोशिश करे कि, रात को दूध पीते वक्त उसमे 1 चम्मच गाय का घी मिलाकर पिएं। 
  • दूध को कभी भी भोजन के साथ नही पीना चाहिए, ऐसा करने से उसका पाचन सही नही होता है।

दूध पीने के नुकसान क्या हैं ?

  1. कई लोगों को दूध हज़म नही होता है। उन्हें पेट बार बार खराब होने या पेट फूलने की शिकायत रहती है। आजकल दूध की क़्वालिटी में पहले के तुलना में काफी गिरावट आने के कारण यह परेशानी होती है। 
  2. कई लोगों को दूध की एलर्जी होती है, जिसमे उन्हें दस्त लगती है या पेट मे मरोड़ आती है। यह उसमें मौजूद लैक्टोज़ इनटॉलेरेंस के वजह से होता है। 
  3. आजकल पैकेट वाला दूध काफी इस्तेमाल होता है , जो न कि ताज़ा होता है न ही जैविक। जो शरीर को नुकसान कर सकता है। कोशिश करे, की ताजा, बिना पैकेट वाला दूध ही प्रयोग करे। 
  4. जो लोग कफ प्रकृति के हो, जिनका पाचन कमजोर रहता हो, पेट मे कीड़े होते हो या पेट बार बार खराब होता हो, उन्हें दूध पीने से बचना चाहिए या दूध में सौंठ और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए।
तो यह है दूध के फायदे, नुकसान, दूध पीने का सही समय व तरीका आदि के बारे में जानकारी। दूध के गुणों के कारण इसे सर्वश्रेष्ठ आहार भी कहा जाता है। हमे इसे सही तरीके से अपनाकर इसके लाभ जरूर उठाने चाहिए।

अगर आपको यह दूध के फायदे और नुक्सान की जानकारी उपयोगी लगी है तो कृपया इसे शेयर अवश्य करे !

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