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माँ बनना हर महिला के लिए बड़ा सुखद एहसास होता हैं। गर्भावस्था में हर महिला और उसके परिजन छोटी से छोटी बातों का ख्याल रखते हैं पर देखने में आया है की अक्सर डिलीवरी के बाद एक माँ अपने स्वास्थ्य के प्रति इतना ख्याल नहीं रख पाती है और उसका सारा ध्यान बच्चे और अपने परिवार की तरफ चला जाता हैं। 

डिलीवरी के बाद खान-पान और व्यायाम की तरफ अनदेखी करने से ज्यादातर महिलाओं की समस्या होती है बिगड़ा हुआ फिगर और उसमें भी उनको सबसे ज्यादा परेशान करता है बाहर निकला हुआ टमी यानी पेट। अपने टमी को अंदर करने और अपने फिगर को दोबारा शेप में लाने के लिए आपको कड़ी मशक्कत करनी होती है और इसके लिए आपकी मदद कर सकता है सही आहार-विहार का चुनाव।

निरोगिकाया के Whatsapp Number 8511748301 पर हमें रोजाना कई महिलाओ से इस विषय पर प्रश्न भी पूछे जाते हैं। महिलाओ में डिलीवरी के बाद अपने पेट को कम करने के लिए अनुशासन और संयम रखने की जरुरत होती हैं। डिलीवरी के बाद महिलाओ ने फिर से पहले जैसा फिगर पाने के लिए निचे दिए हुए बातों का ख्याल रखना चाहिए :

How to lose Weight after Pregnancy / Delivery in Hindi Language

प्रेगनेंसी / डिलीवरी के बाद अपना वजन और पेट कैसे कम करे ?
How to lose Weight after Pregnancy / Delivery in Hindi Language

प्रेगनेंसी / डिलीवरी के बाद अपना वजन कम करने के उपाय इस प्रकार हैं :
  • अगर आप चाहती हैं कि आपका पेट पहले की तरह समतल दिखे तो हमेशा कैलोरी कंट्रोल डाइट लेने की कोशिश करें। आप चाहे तो आप के आहार में फल, साबुत अनाज, हरी सब्जियां आदि शामिल कर सकती है ऐसा करने से देर से भूख लगने के कारन एक साथ खाना खाने की आदत भी कम हो जाएगी। इसके अलावा तली-भुनी और ज्यादा चीनी और वसा वाले भोजन से परहेज करें क्योंकि यह शरीर में चर्बी को बढ़ाते हैं।
  • जितना हो सके कच्चा सलाद और कच्ची सब्जियां खाने की कोशिश करें। पकने के दौरान अधिकतर सब्जियों के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और दूसरी बात यह है कि कच्चा भोजन खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है क्योंकी शरीर धीरे-धीरे पोषक तत्व को सोखता है।
  • एक साथ बहुत अधिक खाना खाने से बेहतर है कि आप दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके खाएं ,  इससे आपकी ब्लड शुगर और व भूख दोनों नियंत्रित रहेंगे।
  • बच्चे को जितना हो सके उतना स्तनपान कराएं। स्तनपान कराने से अतिरिक्त वसा जलती है साथ ही  गर्भावस्था के दौरान फैला हुआ गर्भाशय भी पुराने आकार में आ जाता है।
  • अगर आपको कब्ज की शिकायत रहती है तो उच्च फाइबर युक्त भोजन करें। दिन भर में एक महिला को करीब 25 ग्राम फाइबर लेना चाहिए।  इसके लिए अपने आहार में अधिक मात्रा में साबुत अनाज, फल, सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स आदि को शामिल करें। इसके अलावा कम से कम 30 मिनट के लिए हफ्ते में 5 दिन चलना या कोई और व्यायाम जरूर करें।  दिन में तीन बार याने की सुबह उठने, पर दोपहर में और रात को सोने के पहले एक गिलास हल्का गर्म पानी  जरूर पीएं।
  • दिन भर में 10 से 12 ग्लास तक साधा पानी पिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलकर शरीर की सफाई होती है। कोशिश करे की फ्रीज का पानी न पिए।
  • नींबू पानी पीने से प्राकृतिक रूप से शरीर का मेटाबोलिजम सही रहता है। आप चाहें तो पानी में नींबू, खीरा, संतरा, पुदीना आदि के फ्लेवर डालकर पीए। पुदीने वाली चाय पीने से भी आप को फायदा हो सकता है।
  • हर रोज सुबह गुनगुने पानी में आधा नींबू और दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से भी शरीर का आकार पूर्ववत आने में मदद होती है। आप अपने रूटीन में ग्रीन टि या हर्बल टी को अपनाए, इनसे भी आपका वजन कम हो सकता है। इसके अलावा बिना चीनी या शहद मिला दूध पीना भी फायदा करता है पर ध्यान रहे की दूध मलाई रहित पिए।
  • अपने खाने में पेट को कम करने वाले पदार्थ जैसे काली मिर्च, पुदीना, निंबू, अननस, दही. पपीते आदि को शामिल करें।
  • खाने में पौष्टिक चीजों को ज्यादा शामिल करें और जंक फूड मिठाई चिप्स आदि न खाएं। हमेशा शुगर फ्री फूड खाने की कोशिश करें। सॉफ्ट ड्रिंक लेने से बचें क्योंकि यह पेट में गैस करते हैं जिससे पेट और बाहर निकलता है।
  • इसके अलावा दिन में 30 मिनट के लिए कार्डियक एक्सरसाइज, वर्कआउट, प्राणायाम आदि करें। एरोबिक्स, पावर योगा को सप्ताह में 2 दिन डॉक्टर की सलाह से कर सकती है।
  • याद रखिए कि कोई भी परिणाम आपको जल्दी मिलने वाला नहीं है, इसके लिए आपको थोड़ा धीरज रखना जरूरी होता है। साथ ही अपने आसपास ऐसी महिला हो तो एक दूसरे को प्रोत्साहित करती रहे। वजन कम करने के लिए आपका डाइट, आपकी मेहनत, एक्टिव लाइफस्टाइल और पॉज़िटिव थिंकिंग इनका संगम होना बहोत जरूरी है।
  • योग : गर्भावस्था के पश्च्यात डिलीवरी होने के बाद आप अपना बढे हुए पेट के आकार को दुबारा पहले जैसा समतल करने के लिए निचे दिए हुए योग कर सकते हैं। योग की सम्पूर्ण विधि जानने के लिए योग के नाम पर क्लिक करे।  
  1. कपालभाति 
  2. सूर्यनमस्कार 
  3. भुजंगासन
  4. त्रिकोणासन  
  5. गरुड़ासन 
  6. ताड़ासन
  7. शशांकासन  
  8. पश्चिमोत्तानासन 

प्रेगनेंसी / डिलीवरी के बाद अपना वजन और पेट कम करने के लिए किन चीजों से करे परहेज़ ?
Diet tips to lose weight after Pregnancy in Hindi

  • आवश्यकता अनुसार ही खाना खाए। भूख लगने पर जरुरत से ज्यादा खाने पर पेट और भी ज्यादा निकलता है।
  • मैदे से बनी चीजें बिल्कुल भी ना खाए जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता आदि। इसके अलावा आलू, सफेद चावल अपने डाइट में शामिल ना करें। आप चाहे तो ब्राउन राइस और गेहू से बनी ब्रेड शामिल कर सकते हैं लेकिन मर्यादित मात्रा में। फ़ास्ट फ़ूड से परहेज करें।
  • सोने के 2 घंटे पहले कुछ न खाएं। खाना और सोने के बीच में कम अंतराल होने से शरीर सुस्त हो जाता है और खाने का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है।
  • फल के जूस वैसे तो शरीर को फायदा करते हैं लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि उसमें चीनी ना हो।  कोशिश करें कि जूस की जगह सीधे फल खाएं।
  • शरीर फिट रखने के चक्कर में लगातार वर्कआउट ना करें। याद रखिए शरीर को भी थोड़ा आराम की जरूरत होती है, इसलिए बीच में थोड़ा ब्रेक लें चाहे तो फिर से वर्कआउट कर सकते हैं।
  • खाना खाने के तुरंत बाद न सोए ऐसा करने से शरीर में कैलोरी कम जलती है और वसा इकट्ठा होने लगती है जिसकी वजह से मोटापा बढ़ सकता है।
  • पेट कम करने के लिए जरूरत से ज्यादा डाइटिंग ना करें। इससे शरीर में पोषण की कमी हो सकती है और कमजोरी आ सकती है।
  • सबसे खास बात चिंता और तनाव बिल्कुल ना ले, क्योंकि इससे शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन का प्रोडक्शन ज्यादा होता है जिसके कारण पेट के हिस्से में चर्बी इकठ्ठी हो जाती है।
इस तरह ये आसान टिप्स आजमाकर आप प्रेगनेंसी / डिलीवरी के बाद अपना वजन और पेट को आसानी से कम कर सकते हैं। अगर आपकी ऑपेरशन द्वारा डिलीवरी हुई है तो कोई भी व्यायाम या योग करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य ले। डिलीवरी के बाद माँ को स्तनपान द्वारा अपने बच्चे को भी पोषण देना होता है इसलिए माँ ने संतुलित पोषक आहार अवश्य लेना चाहिए।

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महिला हो या पुरुष, हर किसी को अपनी सुंदरता की तारीफ सुनना पसंद होता हैं। एक सुन्दर व्यक्तिमत्व के लिए सुन्दर और निरोगी आँखों की जरुरत होती हैं। कभी-कभी कम आयु में ही ऐसी सौन्दर्य समस्या निर्माण हो जाती है जिससे हमारे सौंदर्य में कमी आ जाती हैं। ऐसी ही एक बेहद परेशान कर देने वाली सौंदर्य समस्या हैं -आँखों के निचे के काले घेरे या जिसे अंग्रेजी में हम Dark circles under eyes कहते हैं।

आँखों के आसपास काले घेरे चेहरे की सुंदरता नष्ट कर देते हैं और उम्र ज्यादा दर्शाते हैं। हमारे आँखों के निचे की त्वचा बेहद मुलायम  नाजुक होती हैं। इस त्वचा में तेल ग्रंथि / Oil Glands न होने की वजह से चेहरे पर सबसे पहले झुर्रिया यहाँ पड़ने लगती हैं। इन पर जरा सी कोशिश से काबू पाया जा सकता हैं।

केमिकल युक्त औषधि से यह कालापन दूर हो सकता है पर त्वचा नाजुक होने के कारण केमिकल युक्त क्रीम लगाने की जगह घरेलु प्राकृतिक चीजे ज्यादा सुरक्षित होती हैं। आँखों के निचे के काले घेरे / #Dark Circles को आयुर्वेदिक और घरेलु उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :

Ayurvedic treatment and Home remedies to get rid of Dark circles under Eye in Hindi Language

आँखों के निचे काले घेरे होने के कारण
Causes of Dark circles under Eye in Hindi


आँखों के निचे काले घेरे होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे की
  1. नींद की कमी या देर रात तक जागते रहना 
  2. तनाव 
  3. अधिक समय तक टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन पर काम करना 
  4. गलत खान-पान के कारण आवश्य पोषक तत्वों की कमी 
  5. हीमोग्लोबिन की कमी 
  6. आयरन की कमी 
  7. एलर्जी 
  8. गर्भावस्था 
  9. आनुवंशिकता 
  10. अधिक धुप में काम करना 
  11. कोलोजन की कमी 
आँखों के निचे काले घेरे को दूर करने के लिए जरुरी है की आप इन ऊपर दिए हुए कारणों को ध्यान में रखे और इनसे बचकर रहे।

आँखों के निचे के काले घेरे दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय और घरेलु नुस्खे

Ayurvedic treatment and Home remedies to get rid of Dark circles under Eye in Hindi Language


आँखों के निचे के काले घेरे को दूर करने के उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • आहार / Diet : आँखों की सेहत बरक़रार रखने के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड्स, विटामिन ए / सी और ई युक्त आहार जैसे की पालक, फिश, अखरोट, संतरा, बादाम आदि अपनी डाइट में जरूर शामिल करे। खाना खाने के मामले में नियमित रहे। विटामिन ए के सेवा से आँखों की सेहत और रौशनी बढ़ती हैं, विटामिन सी से कालापन कम होता हैं और विटामिन ई से आँखों को पोषण मिलता हैं जो झुर्रिया दूर करता हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से आँखों के त्वचा का लचीलापन बना रहता हैं।
  • चश्मा / Sunglasses : इनके प्रयोग से न आप सिर्फ स्टाइलिश दीखते हैं बल्कि आप अपने आँखों व उनकी आसपास की त्वचा की भी सुरक्षा करते हैं। धुप से केवल आपकी त्वचा टेंड ही नहीं होती बल्कि आँखों के निचे झुर्रिया भी पड़ने लगती हैं। धुप में सनग्लासेस का उपयोग कर आप ऐसा होने से रोक सकते हैं।
  • क्रीम / AH Cream : एएच यानि अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड क्रीम जिस में फलों से निकाले गए क्रीम होते हैं। यह त्वचा के कोलेजन तैसजी से बनाकर उस पर झुर्रियां बढ़ने से बचाते हैं और आँखों के निचे का कालापन दूर करने में मदद करते हैं। रोज रात को चेहरा साफ़ करने के बाद अपनी रिंग फिंगर में क्रीम लेकर आँखों के चारों तरफ गोलाई से मसाज करे।
  • ब्रेड क्रम्बस / Bread Crumbs : ब्रेड क्रम्बस को गुनगुने दूध में फुलाए। इसमें बादाम तेल और एलोवेरा एक्सट्रेक्ट की कुछ बुँदे मिलाये। इस मिश्रण को गौज में लपेटे और बंद आँखों पर 15 मिनिट तक रखे। हफ्ते में 3 बार ऐसा करने से आँखों के निचे का कालापन दूर करने में सहायता होती हैं।
  • पुदीना / Mint : पुदीना ठंडी प्रकृति का होने से आँखों को ठंडक पहुचाता हैं। पुदीना को अच्छे से पीसकर इसमें थोड़ा से निम्बू का रस मिलाये। अब इस मिश्रण को आँखों के निचे काले घेरे पर 5 से 10 मिनिट तक रखे। अब पानी से चेहरा अच्छे से धो डाले। हफ्ते में 3 से 4 बार ऐसा करने आँखों के निचे काले घेरे धीरे-धीरे कम होने में सहायता होती हैं।
  • खीरा / Cucumber : खीरा ठंडक देने के साथ इसमें एस्ट्रिंजेंट गुणधर्म भी होता हैं। यह चेहरा की त्वचा का कालापन दूर करता हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और सूजन कम करता हैं। आप खीरा / ककड़ी को काटकर उसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रखे और फिर ठंडा होने के बाद उसे 5 से 10 मिनट तक आँखों पर रखे। इसके पश्च्यात चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ करे। ऐसा हफ्ते में 3 से 4 बार करने से अधिक लाभ होता हैं। 
  • गुलाब जल / Rose water : गुलाब जल आँखों को ठंडक पहुचाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व होने के कारण यह त्वचा को सुन्दर और जवान रखने में उपयोगी हैं। गुलाब जल में रुई भिगोकर इसे आँख के आसपास 15 मिनिट तक रखे और फिर चेहरा गुनगुने गर्म पानी से धो लीजिये। ऐसे दिन में सुबह शाम करने से आँखों की थकान दूर होंगी, रौशनी बढ़ेंगी और कालापन भी दूर होंगा।  
  • कोलोजन सीरम / Collagen Serum : उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में कोलोजन की निर्मिति कम हो जाती हैं। इस कारण आँखों के निचे कालापन, झुर्रिया आदि समस्या निर्माण हो जाती हैं। कोलोजन सीरम का रोजाना इस्तेमाल आपकी त्वचा को ऐसा होने से रोकता है और हाइड्रेट करता हैं। इसका उपयोग सुबह चेहरे को स्क्रब कर बाहर कम मात्रा में ही उपयोग करे।
  • नारंगी तेल / Orange Oil : विटामिन सी युक्त ऑरेंज आयल त्वचा की डैमेज पेशी को रिपेयर करता हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमी करता हैं। आधा चमच्च बादाम तेल और 5 बुँदे ऑरेंज आयल को मिलाकर आँखों के चारों और हलके से मालिश करने से लाभ होता हैं।
  • योग / Yoga : रोजाना योग करे। योग करने से हमे कई तरह के लाभ होते हैं। आँखों के निचे का कालापन दूर करने के लिए आप निचे दिए हुए योग कर सकते हैं। इन्हें करने से आपको अवश्य लाभ होंगा। योग की अधिक जानकारी पढ़ने के लिए योग के नाम पर क्लिक करे :
  1. विपरीतकरनी 
  2. सूर्यनमस्कार 
  3. सिंहासन 
  4. सर्वांगासन 
  5. कपालभाति 
  • व्यायाम / Exercise : दैनंदिन जीवन का आँखों पर पड़ने वाले तनाव को दूर करने के लिए आप आँखों की कसरत कर सकते हैं।  इससे आँखों के आसपास की पेशी मजबूत बनती है और लचीलापन बना रहता हैं। अपनी गर्दन को सीधा रखे। आँखों की पुतलियों को पहले 5-6 बार ऊपर-निचे और दाये-बाए घुमाए। इसके बार अपनी आँखों को गोलाकार घडी की दिशा में (clockwise) और बाद में घडी की विपरीत दिशा में (anti-clockwise) घुमाये। आँखों का यह व्यायाम करते समय बिच में थक जाने पर अपने हथेलियों के मध्य भाग से आँखों को बंद कर कुछ देर ढँक कर रखे।  
  • अन्य / Others : आँखों के निचे के काले घेरे कम करने के लिए इन बातों का ख्याल भी रखे।
  1. रोजाना 8 से 10 ग्लास पानी अवश्य पीना चाहिए। 
  2. रोजाना 7 से 8 घण्टे नींद अवश्य लेना चाहिए। 6 घण्टे से कम नींद लेना और 8 घण्टे से अधिक नींद लेने से भी आँखों के निचे काले घेरे आ सकते हैं। 
  3. चाय के लिए इस्तेमाल किये हुए ठन्डे Tea Bags भी उपयोगी हैं। इनमे टैनिन होता हैं जिससे आँखों के आसपास का कालापन और सूजन कम होती हैं। 
  4. किसी भी तरह का व्यसन जैसे की तम्बाखू, गुटखा, धूम्रपान या शराब का सेवन न करे। 
  5. लंबे समय तक लगातार कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल का उपयोग न करे।  
  6. सोते समय पीठ के बल ही सोना चाहिए और सिर के निचे तकिया रखे। ऐसा करने से आँखों के निचे सूजन नहीं होंगी और कालापन भी दूर होने लगेगा। 
  7. रात में सोने से पहले चेहरा अच्छे से साफ़ कर ही सोना चाहिए। सोते समय चेहरे पर कोई मेकअप न रखे।
  8. आहार में नमक का प्रमाण कम रखे। 
  9. अगर आपके शरीर में आयरन, हीमोग्लोबिन या कैल्शियम की कमी है तो डॉक्टर से मिलकर इस कमी को दूर करे। 
  10. रोजाना कम से कम आधा घंटे कोई व्यायाम अवश्य करे। 
  11. किसी भी तरह के तनाव से दूर रहे। तनाव को दूर करने के लिए आप अनुलोम विलोम प्राणायाम और ध्यान या मैडिटेशन का सहारा ले सकते हैं। 
इस तरह आप थोड़ीसी सावधानी बरतकर और घरेलु उपाय का अपनाकर अपने आखों के निचे के काले घेरे को आसानी से दूर कर सकते है और अपने आँखों को सुन्दर एवं स्वस्थ रख सकते हैं। अगर आपके पास भी कोई उपयोगी उपाय है तो कृपया कमेंट में इसकी जानकारी अवश्य दे।

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आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी के कारण युवा आयु में ही कई लोगों को बुढ़ापे की बीमारी होने लगी हैं। ऐसी ही एक बीमारी हैं - अपचन या Indigestion ! खान-पान की गलत आदतें, अशुद्ध और केमिकल युक्त आहार और शारीरिक परिश्रम के आभाव के कारण कई लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो चुकी हैं।हम सभी जानते हैं की ज्यादातर बिमारियों का घर पेट है और अगर पाचन कमजोर है तो व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहना लगभग नामुमकिन हैं। 

आयुर्वेद में कहा गया है, 
" समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियाः 
   प्रसन्नात्मेन्द्रियमनः स्वस्थ इत्यभिधीयते। " 
जिस मनुष्य के वात-पित्त-कफ यह तीन दोष, जठराग्नि, रस आदि सप्तधातु यह सभी सम अवस्था में रहते हैं, मल-मूत्र आदि की क्रिया ठीक होती है और जिसका मन, इंद्रिय और आत्मा प्रसन्न रहते हैं वह मनुष्य ही स्वस्थ है। आयुर्वेद के अनुसार हमारा पाचन तंत्र हमारे जाठराग्नि की सम अवस्था पर निर्भर करता है। जब हमारा जठराग्नि सम याने प्रबल होता है तो आहार का पाचन अच्छी तरह से होकर इससे रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र आदि सप्तधातु  की निर्मिति होकर अंत में ओज तैयार होता है। ओज को हम पाचन का सार कह सकते हैं। ओज पर हमारी रोग प्रतिकार क्षमता और शारीरिक शक्ति निर्भर करती है। 
   
इस तरह पाचनतंत्र में अग्नि का विशेष महत्व है। मन्दाग्नि या विषमाग्नि समस्त रोगों की जड़ होती है। पाचन तंत्र ठीक होने पर भोजन का अच्छे से पाचन होकर मिलने वाले पौष्टिक तत्वों से शरीर का विकास होता है। इसीलिए पाचन तंत्र का हमेशा सही रहना आवश्यक होता है। 


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अपचन के कारण Causes of Indigestion in Hindi 

पाचनतंत्र में खराबी की कई वजहें है, जैसे की :
  1. आहार में अनियमितता 
  2. भागदौड़ भरा जीवन
  3. तनाव 
  4. अशुद्ध आहार 
  5. व्यायाम का अभाव आदि। 
आयुर्वेद के अनुसार अनियमित आहार विहार, तनाव आदि से हमारी अग्नि कमजोर होती है। इससे हमारा पाचन बिगड़ता है। इस वजह से आम की उत्पत्ति होती है जिसे हम सामान्य भाषा में विष या toxin कह सकते हैं, जो कि सब बीमारियों की जड़ होता है। 

आधुनिक विज्ञान के अनुसार हमारे पेट में डाइजेस्टिव एंजाइम रहता है जिसे हम पेप्सिन कहते हैं। अगर असंतुलित आहार, उम्र या हमारी लाइफस्टाइल जैसी आदतों की वजह से हमारा ब्लड एसिडिक होता है तो पेट आवश्यक मात्रा से कम एसिड उत्पत्ति करता है, जिसे खाने का पाचन सही नहीं होता है। पेट में जलन पेट फूलना या गैस आदि लक्षण कम एसिड निर्माण होने से होते हैं ना कि ज्यादा निर्माण होने से। 

अगर आपको यह लक्षण दिखते हैं तो समझिए कि आपके पेट में HCL एसिड या डायजेस्टिव एंजाइम की मात्रा जरूरत से कम तैयार हो रही है। ऐसे में आपको अपने आहार में डेयरी प्रोडक्ट्स और प्रोटीन युक्त आहार को बढ़ा कर अपने पेट की मदद करनी चाहिए ताकि डाइजेस्टिव प्रोटीन अपना काम ठीक तरह से कर सकें। 

कई शारीरिक व्याधियां ऐसी है जिसमे अपचन यह लक्षण दिखता है जैसे, 
  1. अमाशय में सूजन, 
  2. पेट में अल्सर,  
  3. गॉल ब्लैडर में सूजन या स्टोन,  
  4. सिरोसिस, 
  5. अग्नाशयशोथ, 
  6. प्रेगनेंसी, ओवेरियन सिस्ट, 
  7. ह्रदय रोग, 
  8. पेट, अग्नाशय या ओवरी का कैंसर, 
  9. एच पाइलोरी इन्फेक्शन, 
  10. थाइरोइड व्याधि, 
  11. इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम आदि। 
अपचन की व्याख्या हम एक शब्द में नही कर सकते, इसे हम 
  • पेट फुला हुआ लगना,
  • पेट में असुविधाजनक अनुभति होना, 
  • सुबह उठने पर पेट ठीक से साफ़ नही होना,  
  • गैस, 
  • सिरदर्द, 
  • पेट में जलन,
  • मुँह में कड़वापन, खट्टा पानी आना,
  • जी मचलाना, उल्टी होना , 
  • खाना खाने के बाद भारी लगना ,
 आदि एक या अनेक लक्षणों का समूह कह सकते है। 

शरीर में खाना खाने के पश्चाद पाचन होने के बाद मल को एक निश्चित समय के उपरांत शरीर से बाहर निकलना चाहिए अर्थात मल विसर्जन की क्रिया कार्यान्वित होनी चाहिए। अगर किसी कारणवश इसमें बाधा आती है तो मल अधिक समय तक शरीर में पड़ा रहता है जिसके कारण अमोनिया जैसी गैस शरीर में बनती है। जिसके कारण व्यक्ति को उपरोक्त लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। आयुर्वेद में अपचन या मन्दाग्नि को सभी रोगों की जड़ माना जाता है।

अपचन की चिकित्सा   How to treat indigestion in Hindi

  • आमतौर पर अपचन में  चिकित्सा की जरूरत नहीं होती है। कोशिश करें  कि आप अपने लाइफस्टाइल में सुधार करे। 
  • अगर आपकी तकलीफ ज्यादा है या आपको कोई बिमारी की वजह से ये तकलीफ है तो उस बिमारी का इलाज डॉक्टर की सहायता से करे। 
  • डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर और अगर जरुरत हो तो ब्लड टेस्ट, एक्सरे, इंडोस्कोपी आदि जांच कराकर आपकी उचित चिकित्सा कर सकते हैं। 
  • पेन किलर, स्टीरॉयड, एंटीबायोटिक्स आदि का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें। 
  • अगर आप प्रेग्नेंट हो तो अपने आहार-विहार का खास ख्याल करें। प्रेगनेंसी में आहार के लिए यहाँ क्लिक करे - प्रेगनेंसी में कैसा आहार लेना चाहिए ?  
व्यक्ति की फिटनेस का मुख्य आधार उसका पाचन तंत्र होता है। आप कितना भी पौष्टिक आहार लें अगर आपका पाचन तंत्र सही नहीं है तो वह आहार शरीर को नहीं लगेगा। आइए जानते हैं पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए किन तरीकों को अपनाना चाहिए :
  • फाइबर से भरपूर आहार : पाचनशक्ति बढाने वाला आहार ले। जैसे साबुत अनाज, सब्जियां खासकर बथुआ, पालक, मेथी आदि। हरि पत्तेदार सब्जियां, फल, रेशेदार खाद्य पदार्थ जो पचने में आसान और कब्ज रोकने में मदद करते हैं इनका समावेश अपने आहार में अधिक से अधिक करें। 
  • फल : हर रोज एक मौसमी फल अवश्य लें। इसमें भी खास करके एप्पल, अनार, पपीता, तरबूज, अमरुद, केला,नाशपति इनका समावेश अपने आहार में अधिक करें। फल खाने का सही समय खाने के आधा घंटा पूर्व या खाने के 2 घंटे बाद होता है। फल खाने के विशेष नियम की जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - फल खाने के आवश्यक नियम !
  1. पपीता : अगर आप पाचन शक्ति को जल्दी सुधारना चाहते हैं तो कच्चा पपीता काफी अच्छा माना जाता है। इसमें पपाइन नामक प्रोटीन होता है जो आहार का सही तरीके से विभाजन करके खाना पचाने योग्य बनाता है। 
  2. नाशपाती : हफ्ते में एक बार नाशपति का सेवन पेट के लिए अच्छा होता है। इसमें फाइबर और पोटैशियम अधिक मात्रा में रहते हुए यह सोडियम, क्लोराइड और फैट फ्री होता है। 
  3. सेब / एप्पल : कहां जाता है कि, एन एप्पल ए डे कीप्स डॉक्टर अवे ! फाइबर से भरपूर यह फल पाचन तंत्र के लिए काफी अच्छा होता है। 
  4. अनार : अनार ऐंटि-ऑक्सिडेंट होने के साथ फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के तथा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। 
  5. केला : पोटैशियम से भरपूर यह फल आँतों के लिए अच्छा होता है। 
  6. अमरुद : स्वास्थ्य और पौष्टिकता की दृष्टि से यह उपयोगी फल है। संस्कृत में इसे अमृतफल कहा गया है। विटामिन सी, के और फॉस्फोरस से भरपूर या फल पाचन शक्ति बढ़ाता है। ह्रदय और मस्तिष्क को बल देता है। दांत, मसूढ़े और जोड़ों का दर्द कम करता है। 
  • अच्छी तरह चबाकर खाएं : पुराने जमाने में कहते थे कि खाने को 32 बार चबाना चाहिए। पाचन की प्रक्रिया मुंह में लार के साथ ही शुरू हो जाती है। हम खाना जितना अच्छे से चबाएंगे वह लार के साथ उतना ही अच्छे से मिक्स होगा और लार में मौजूद एंजाइम की मद्त से आहार का विभाजन होकर पाचन प्रक्रिया आसान होगी। 
  • नाश्ता / Breakfast :  रातभर आहार नहीं लेने के बाद सुबह एक अच्छा हेल्थी और संतुलित नाश्ता करना आपको दिन की अच्छी शुरुआत दे सकता है और शरीर को पूरे दिन के लिए तैयार करता है , आपको अधिक ऊर्जा मिलेगी और आप पूरे दिन एक्टिव रहोगे। सुबह के नाश्ते में आप मूंग मोठ चना राजमा आदि प्रोटीन से भरपुर कटहोल, ओट्स, फ्रूट्स, स्मूदीज, पोहा, उपमा , इडली आदि ले सकते हैं। 
  • प्रीबायोटक्स और प्रोबायोटिक्स : हमारे intestine में कुछ फ्रेंडली माइक्रोफ्लोरा रहते हैं जैसे कि बेक्टेरिया और यीस्ट जो कि खाने को पचाने में और हमारी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिनमें यह मौजूद होते हैं जैसे ताजा दही एक बाउल,फर्मण्टेड फूड जैसे इडली,डोसा आदि और एप्पल साइडर विनेगर इन्हें अपने आहार में शामिल करें। 

कैसे बढ़ाएं पाचनशक्ति How to increase digestion in Hindi 

खाते वक्त इन चीजों का ध्यान रखे 
  • खाने के शुरुआत में सलाद खाए, जिससे आप ओवरईटिंग से बच सकते है। स्वाद के चक्कर में जरूरत से अधिक खाना खाने से आपको बाद में पछताना पड़ सकता है। जरूरत से अधिक खाना खाने से खाने का पचन सही नहीं होगा और साथ में एसिडिटी, कब्ज की भी तकलीफ होगी। 
  • पुरे दिन में आपको थोड़ा थोड़ा आहार हर 2 से 3 घण्टे के अंतराल में लेना है, जिससे आपको पेट में भारीपन नही लगेगा।  
  • आप अपना ज्यादा और भारी खाना हो तो दोपहर के खाने में ले क्योंकि दोपहर में आहार पाचक रस का प्रमाण अधिक होता है जिससे आहार पाचन होने में आसानी होती है। 
  • रात का खाना जल्दी खाने की कोशिश करें हो सके तो सूर्यास्त के पहले या 8:00 बजे के पहले रात का खाना ले। 
  • आयुर्वेद के अनुसार आपको खाना खाते वक्त अपने पेटमें 1/3 या 1/4 जगह रखनी चाहिए ताकि खाने का आसानी से पाचन हो सके। 
  • मन्दाग्नि या अजीर्ण होने पर दिन में खाना खाने के बाद आप अदरक निम्बू की चाय पी सकते हैं । इसे universal remedy कहा जाता है। अदरक से लार, पित्त और एंजाइम्स को उत्तेजना मिलती है, आंतो की पेशियां भी अच्छे से काम करती है, गैस कम होता है।
  • अपचन होने पर आप टमाटर पर सेंधा नमक लगाकर खा सकते है। 
  • सौंफ और अजवाइन को चबाकर खाने से भी पाचन सही रहता है।  
  • खाने के दौरान पानी कैसे पिए इसका भी नियम होता है। आयुर्वेद में कहा गया है की,
"अजीर्णे भेषजं वारि, जीर्णेवारी बलप्रदम।    
भोजनेचमृतम वारी, भोजनांते विषप्रदम।।"

  • इसका तात्पर्य यह है कि अजीर्ण होने पर केवल  पानी ही औषधि है । आहार जीर्ण होने के पश्चात पानी पीना बलप्रद होता है। खाना खाते वक़्त बीच-बीच में घुट - घुट पानी पीना अमृत समान होता है और खाने के तुरंत बाद पानी पीना विष समान होता है। 
  • आप चाहे तो खाने के शुरुआत में या खाना होने के पश्चात एक कप गर्म पानी पी सकते हैं। हो सके तो सुबह उठने पर और रात में सोने से पहले 1 ग्लास गर्म पानी पियें। इसके लिए आपको पहले पानी को पूरा उबालकर फिर आपके जरुरत के हिसाब से गुनगुना करना चाहिए। 
  • हर रोज 20 से 30 min मैडिटेशन या ध्यान या साधना करे। 
  • नियमित व्यायाम करे। 
  1. अगर आप का वजन संतुलित होगा तो आपका पाचन तंत्र दुरुस्त होगा। 
  2. व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं। 
  3. दिन में कम से कम 30 से 40 मिनट तक आप को व्यायाम करना चाहिए। 
  4. इसमें आप तेज चलना , दौड़ना , साइकिलिंग , करना , योगासन करना आदि अपने अनुरूप क्रियाओं का चयन कर सकते हैं। 
  • ड्रिंकिंग , स्मोकिंग , तनाव से दूर रहे। कोल्ड्रिंक्स के सेवन से बचिए।  इसके बजाय देसी ड्रिंक्स जैसे नींबू पानी, गन्ने का रस, फलों के जूस, नारियल पानी आदि को अपने आहार का हिस्सा बनाएं। 
  • चाय, कॉफ़ी, सोडा इनके अतिसेवन से बचे। इनसे एसिड की मात्रा अधिक बनती है साथ में यह बॉडी को डीहाइड्रेट भी करते हैं जिससे एनर्जी में कमी आती है। इसके बदले आप ग्रीन टी, दूध का सेवन कर सकते हैं। ठंडे पानी के बजाए गुनगुना या सादा पानी पिए। ठंडे पानी से अग्नि मंद होती है जिससे आहार का पाचन भी मंद होता है। 
  • अपने लिवर का खास ख्याल रखें जिससे उसकी कार्यक्षमता बनी रहे।  इसके लिए अल्कोहोल का पूरी तरह त्याग कीजिए क्योंकि यह लिवर के लिए विष होता है।  इसके बदले लीवर की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले आहार जैसे कि गाजर, बीट रूट, हरी पत्तेदार सब्जियां, फ्रेश जूस, फ्रूट्स आदि को अपने आहार में शामिल करें। 
  • एलोवेरा और आमला जूस का नियमित सेवन कर अपने शरीर के हानिकारक तत्व को शरीर के बाहर निकाल कर शरीर की सफाई करते रहे। 
  • नकारात्मक भावनाओं का त्याग करे, इनसे अग्नि मन्द होती है। तनाव कम से कम ले। सकारात्मक सोच रखें और हमेशा खुश रहने की कोशिश करें। 
इस तरह अपने आहार विहार में योग्य बदलाव लाकर , व्यायाम की शक्ति को समझकर , सकारात्मक सोच रखकर आप अपनी पाचन शक्ति को बढ़ा सकते हैं और अच्छी सेहत पा सकते हैं।
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारिश के मौसम में डेंगू / Dengue fever, मलेरिया / Malaria, चिकनगुनया / Chickungunya और अन्य विषाणु / Viral रोगों ने लाखों लोगों को अपने बीमारी की चपेट में ले लिया हैं। हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष इनकी संख्या और प्रभाव भी बढ़ चूका हैं। डेंगू और मलेरिया जैसे रोग में प्लेटलेट / Platelet पेशी की कमी होना सबसे बड़ी समस्या होती हैं।

सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 1.5 लाख से 4.5 लाख / cumm प्लेटलेट्स होते हैं।  सामान्य प्लेटलेट पेशी की उम्र 5 से 9 दिन तक होती हैं। शरीर में हर रोज हजारों प्लेटलेट पेशी के टूटने और निर्माण होने की प्रक्रिया सामान्यतः चलती रहती हैं। प्लेटलेट की संख्या 1.5 लाख से कम होने पर उसे प्लेटलेट की कमी या Thrombocytopenia कहा जाता हैं। प्लेटलेट की संख्या 20 हजार से कम होने पर रोगी के जान को खतरा हो सकता हैं और ऐसे में रोगी को प्लेटलेट चढ़ाना (Platelet Transfusion) बेहद जरुरी हो जाता हैं।

जब कभी हमें कोई चोट लगती है और कही से रक्तस्त्राव या Bleeding होना शुरू हो जाता है तब इस रक्तस्त्राव को रोकने का महत्वपूर्ण कार्य प्लेटलेट द्वारा किया जाता हैं। प्लेटलेट्स की संख्या बेहद कम हो जाने पर रोगी को बाह्य या अंधरुनि रक्तस्त्राव शुरू हो सकता है जैसे की नाक या दांत से खून निकलना, पेशाब में खून आना, चमड़ी के निचे लाल थक्के जमना इत्यादि। ऐसे लक्षण नजर आने पर रोगी को तुरंत उपचार करना जरुरी होता हैं।

डेंगू या मलेरिया में प्लेटलेट की संख्या कम हो जाने पर उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए इसकी जानकारी निचे दि गयी हैं :

tips-how-to-increase-platelet-count-in-dengue-foods-information-in-hindi-language

प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने के लिए क्या करे ?
How to increase Platelet count in Dengue and Malaria in Hindi

शरीर में कम हुए Platelets की संख्या को बढ़ाने के लिए रोगी को निचे दिए हुए आहार देना चाहिए :
  • पपीता / Papaya : प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने के लिए पपीते का फल और पत्तों का प्रयोग सफलतापूर्वक किया जा सकता हैं। 2009 में मलेशिया में हुए एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है की डेंगू बुखार में ताजे और स्वच्छ पपीते के पत्तों का ताजा रस देने पर प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में सहायता होती हैं। पपीते के पत्ते का रस आप अपनी क्षमतानुसार 10 से 20 ml दिन में 2 से 3 बार ले सकते हैं। अगर इसे पिने से उलटी होती है तो यह नहीं लेना चाहिए। पपीते का फल खाते समय वह पका हुआ होना चाहिए। 
  • गेहुज्वारा / Wheatgrass : प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के लिए आप गेहू के घास का उपयोग भी कर सकते हैं। 150 ml स्वच्छ और ताजे गेहू के घास का जूस पिने से केवल प्लेटलेट ही नहीं बल्कि हीमोग्लोबिन, सफ़ेद रक्त पेशी और रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने में भी सहायता होती हैं। 
  • चुकंदर / Beetroot : चुकंदर में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते है और साथ में इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट की मात्रा बढ़ाने में सहायता होती हैं। आप रोगी को इसकी स्वादिष्ट और पाचक सब्जी बनाकर खिला सकते है या फिर इसका 10 ml ताजा जूस रोगी को दिन में 3 बार पिला सकते हैं। 
  • कद्दू / Pumpkin : कद्दू में प्रचुर मात्रा में विटामिन K होता हैं। प्लेटलेट की तरह विटामिन K भी शरीर में रक्तस्त्राव होने पर खून को ज़माने (Clotting) का काम करता हैं। आप रोगी को इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनाकर दे सकते है फिर रोगी को रोजाना 150 ml कद्दू का ताजा जूस 1 चमच्च शहद मिलाकर पिला सकते हैं। 
  • कीवी / Kiwi : कीवी फल में प्रचुर मात्रा में विटामिन C, E और पोलीफेनोल होता हैं। रोजाना एक कीवी फल सुबह और शाम खाने से प्लेटलेट पेशी की संख्या तेजी से बढ़ना शुरू होती हैं। कीवी फल खाने से कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होता हैं। 
  • गिलोय / Tinosporia Cordifolia : गिलोय या जिसे गुडूची नाम से भी जाना जाता है, एक चमत्कारिक आयुर्वेदिक औषधि हैं। शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए यह एक उत्तम औषधि हैं। बाजार में शुद्ध गुडूची सत्व मिलता है जिसे सुबह शाम 1 चमच्च दूध के साथ लेने से शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ती है और प्लटेल्ट काउंट भी सामान्य होने लगता हैं। रामदेव बाबा के अनुसार गिलोय, पपीते के पत्ते, एलोवेरा और अनार इनका जूस बनाकर रोजाना 50 ml सुबह-शाम पिने से प्लेटलेट काउंट तेजी से बढ़ने लगता हैं। 
  • अनार / Pomegranate : अनार एक बेहद पौष्टिक फल हैं। इसमें लोह तत्व / Iron प्रचुर मात्रा में होने से यह हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट की मात्रा बढ़ाने में मदद करता हैं। आप रोगी को अनार के दाने निकालकर खिला सकते हैं। इसे खाने से गैस भी नहीं बनता और रोगी का पाचन भी सुधरता हैं। अगर अनार का जूस देना है तो इसे घर पर ही तैयार कर देना चाहिए। 
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड : ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति को बढ़ाने और प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने के लिए शरीर के लिए एक आवश्यक तत्व हैं। इसके लिए आपको आहार में पालक, अखरोट, अलसी जैसे आहार पदार्थों का समावेश करना चाहिए। 
  • विटामिन C : विटामिन K की तरह प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन C मिलना भी बेहद जरुरी होता हैं। शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन C मिलने के लिए आहार में निम्बू, टमाटर, कीवी, संतरा, पालक और ब्रोकोली जैसे आहार पदार्थों का समावेश कर सकते हैं। आप चाहे तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन C की गोली भी चूस सकते हैं। 
  • पानी / Water : हमारे शरीर में पानी का बड़ा महत्त्व है। शरीर में रक्त पेशी निर्माण होने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी होना जरुरी हैं। रोगी व्यक्ति को रोजाना 8 से 10 ग्लास पानी अवश्य पीना चाहिए। डेंगू में शरीर में पानी की कमी होना बहुत बड़ी समस्या होती हैं।     
  • अन्य उपयोगी सलाह / Other Important Advice 
  1. प्लेटलेट की संख्या कम होने पर पेट की अंदर की त्वचा लाल हो जाती है जिससे एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ जाती हैं। ऐसे हालात में रोगी को कच्चा, भारी, तीखा और मसालेदार आहार नहीं देना चाहिए। 
  2. रोगी को चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। 
  3. रोगी को एक साथ अधिक आहार देने की जगह थोड़ा-थोड़ा आहार हर 2-3 घंटे से देते रहना चाहिए। 
  4. प्लेटलेट कम होने पर बिना डॉक्टर की सलाह से कोई भारी दवा या चूर्ण लेने से हानि हो सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह लिए रोगी को कोई दवा नहीं देना चाहिए। 
  5. प्लेटलेट की संख्या बेहद कम होने पर ब्रश करते समय दांतों को जोर से नहीं घिसना चाहिए। 
  6. रोगी को बिना डॉक्टर की सलाह से कोई भी भोजन, नुस्खा या दवा नहीं देना चाहिए।  
  7. रोगी को नाक या दांत से खून आना, पेशाब में खून आना, आँखे लाल होना, शरीर पर लाल चकते आना, उलटी में खून आना या सांस लेने में तकलीफ होना जैसे कोई लक्षण नजर आने पर इसकी जानकारी तुरंत डॉक्टर को देना चाहिए। 
शरीर को समतोल और पौष्टिक आहार मिलने पर हमारा शरीर ही इस काबिल होता है की वह बड़े से बड़े संक्रमण से लड़ सकता हैं। रोगी को उचित पोषण के साथ रोगी की परिवार और दोस्तों से घबराने की जगह रोगी को हिम्मत देना भी बेहद जरुरी हैं। सकारात्मकता या Positive energy भी रोगी को जल्द ठीक करने के लिए जरुरी हैं।

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#उच्च रक्तचाप या जिसे अंग्रेजी में हाई ब्लड प्रेशर (#Hypertension) कहा जाता हैं यह भारत में तेजी से बढ़ने वाली एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या हैं। विश्व स्वास्थ्य संघटन (WHO) के मुताबिक 25 वर्ष से अधिक आयु के 40% लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित हैं। भारत में हर 3 में से एक युवा व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती हैं।

हाई ब्लड प्रेशर के 50% से अधिक मरीज ऐसे होते है जो यह मानने को तैयार नहीं होते की उन्हें यह समस्या है और अक्सर ऐसे रोगी अपनी दवा बिच में ही बंद कर देते है। हाई ब्लड प्रेशर यह इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद भी समाज में इसे लेकर कोई जागरूकता या सम्पूर्ण जानकारी नहीं हैं।

हाई ब्लड प्रेशर / #Hypertension से जुड़े उच्च अहम सवालों के जवाब देने की कोशिश हमने इस लेख में की हैं। अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़े :

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1. ब्लड प्रेशर किसे कहते हैं ?

हमारे शरीर में रक्त नलिकाओं में बहते समय रक्त, रक्त नलिकाओं की दीवार पर जिस प्रेशर से दबाव डालता है उसे ब्लड प्रेशर कहा जाता है। 

2. सामान्य ब्लड प्रेशर का स्तर कितना होता हैं ?


सामान्य सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी ऊपर का ब्लड प्रेशर 110 से 130 mmhg तक होता हैं। 
डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानि की नीचे का ब्लड प्रेशर 70 से 84 mmhg तक होता हैं।  

3 किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर ज्यादा है ऐसा कब कहा जा सकता हैं ?


किसी भी व्यक्ति ऊपर का ब्लड प्रेशर यानि की सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 या 140 mmhg से ज्यादा रहने पर या निचे का ब्लड प्रेशर 90 या 90 mmhg से ज्यादा रहने पर उस व्यक्ति का ब्लड प्रेशर ज्यादा है ऐसा कहा जा सकता हैं। 

4. मुझे कोई तकलीफ नहीं है लेकिन डॉक्टर का कहना है कि मुझे हाई ब्लड प्रेशर है ! ऐसा कैसे हो सकता है ?

हाई ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर है। हाई ब्लड प्रेशर के अधिकतर मरीजों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं और किसी अन्य समस्या के लिए डॉक्टर के पास जाने पर हाई ब्लड प्रेशर का पता चलता है। हाई ब्लड प्रेशर का प्रभाव शरीर पर धीरे-धीरे होता है और जब यह परिणाम नजर आते हैं तब उन लक्षणों का स्वरूप बहुत बड़ा होता है। जैसे कि पैरालाइसिस, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर इत्यादि। इसीलिए हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण नजर आने की राह न देखे। ब्लड प्रेशर बढ़ जाने पर तुरंत उपचार शुरू करें। 

5. एक बार हाई ब्लड प्रेशर की दवा शुरू करने पर मुझे उन दवाई की आदत हो जाएगी और मुझे हमेशा के लिए वह दवाई लेनी होगी !

यह आपकी सोच गलत है। किसी भी हाई ब्लड प्रेशर के रोगी के लिए दवा लेना एक जरूरत है ना की आदत। एक बार ब्लड प्रेशर बढ़ जाने के बाद संभावना यही रहती है कि वह हमेशा बड़ा हुआ रहेगा। अगर आपने उसका उपचार नहीं किया तो ऊपर दिए गए हो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आपके शरीर में ब्लड प्रेशर के ऊपर का नियंत्रण खो दिया है इसीलिए आपको दवा लेने की जरूरत है। दवा लेकर अपने बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के अलावा आपके पास कोई अन्य उपाय नहीं है।

जिन लोगों का ब्लड प्रेशर उन कारणों से बड़ा है जीने हम सुधार सकते हैं ऐसे लोग अपने उस कारण को ठीक कर अपने दवा की मात्रा / Dose को कम कर सकते हैं और जिनका ब्लड प्रेशर केवल थोड़ा ही बड़ा है वह लोग अपनी दवा बंद भी कर सकते हैं। ऐसे लोग जिनका रक्तचाप बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ होता है वह अपनी दवा बंद नहीं कर सकते हैं।

6. एक बार ब्लड प्रेशर नियंत्रण में आने पर क्या मैं अपनी हाई ब्लड प्रेशर की दवा बंद कर सकता हूं ?


जी नहीं ! हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है पर उसे जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता है। एक बार हाई ब्लड प्रेशर की तकलीफ हो जाने पर आपको जिंदगी भर दवा लेने की जरूरत होती है। अगर आप 1 दिन भी हाई ब्लड प्रेशर की दवा नहीं लेते हैं तो आप का प्रेशर बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर की दवा रोजाना लेना बेहद जरूरी है। ब्लड प्रेशर की दवा अचानक बंद करना बेहद नुकसानदेह हो सकता हैं। 

7. हाई ब्लड प्रेशर की दवा कितने समय लेनी चाहिए ?

ब्लड प्रेशर की ज्यादातर दवा 24 घंटे तक काम करती है इसलिए दिन में एक बार ही दवा लेने की जरूरत होती है। रोजाना तय समय पर ही अपनी दवा ले। आधा से एक घंटा आगे-पीछे हुआ तो कोई बात नहीं पर ज्यादा अंतराल न करें। आपको कोई अन्य तकलीफ ना हो इसलिए तय समय पर दवा लेने की आदत डालें। डॉक्टर आपके ब्लड प्रेशर बढ़ने के समय के अनुसार सुबह या शाम में दवा लेने को कह सकते हैं। 

8. अगर मैं कभी अपनी ब्लड प्रेशर गोली लेना भूल जाऊं तो मुझे क्या करना चाहिए ?

ऐसे मामले में तुरंत दवा लेना चाहिए। हमेशा अपने जेब में या अपने कार्यस्थल पर दवा की अतिरिक्त खुराक पास में रखें। घबराए नहीं और तुरंत अपनी दवा ले। 

9. मैं और मेरे मित्र दोनों हाई ब्लड प्रेशर के रोगी है परंतु मेरा मित्र 5 मिलीग्राम की दवा लेता है और मैं 40 मिलीग्राम की दवा। मुझे इतने बड़ी मात्रा में दवा लेने की क्या आवश्यकता है ?

बाजार में कई प्रकार की हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं हैं। हर दवा का निम्न मात्रा (Minimum Dose) अलग-अलग है। जैसे अगर आप Amlodipine दवा लेते हैं तो उसकी निम्न मात्रा 2.5 से 5 मिलीग्राम है और अगर आप Telmisartan दवा लेते हैं तो उसकी निम्न मात्रा 40 मिलीग्राम है। हर रोगी को आवश्यकता अनुसार अलग-अलग गोली अलग-अलग मात्रा में दी जाती है। इसलिए घबराएं नहीं। डॉक्टर आपके शरीर के लिए सुरक्षित दवा ही लिखकर देते हैं। 

10. मेरे एक मित्र है जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर था। उन्होंने कई दिनों से अपनी दवा बंद कर ली है और उनका ब्लड प्रेशर अभी भी सामान्य है। ऐसा कैसे हो सकता है ?

हाई ब्लड प्रेशर के 90% मामलों में इसका मुख्य कारण का पता नहीं होता है। ऐसे कई घटक है जिनका आपके ब्लड प्रेशर पर असर पड़ता है। कुछ ऐसे कारण हैं जिन्हें हम रोक / कम कर सकते हैं और कुछ ऐसे कारण हैं जिन्हें हम सुधार / कम नहीं कर सकते हैं। 
  • ऐसे कुछ घटक जिसमें सुधारना नहीं की जा सकती है, वह है : a) अनुवांशिकता और b) उम्र 
  • ऐसे घटक जिन्हे हम सुधार सकते हैं, वह है : a) मोटापा b) तनाव c) नमक का अधिक उपयोग और d) धुम्रपान
11 हाई ब्लड प्रेशर का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

हाई ब्लड प्रेशर का हमारे शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 

a) ह्रदय / Heart : हाई ब्लड प्रेशर का सबसे गंभीर दुष्परिणाम हमारे ह्रदय पर पड़ता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर होने से हमारे ह्रदय को इस उच्च ब्लड प्रेशर के दबाव का सामना करना पड़ता है जिससे हमारे ह्रदय की दीवारें मोटी / thick हो जाती है और उसकी लवचिकता / elasticity कम हो जाती है। इसी कारण ह्रदय की रक्त को पंप करने की शक्ति भी कम हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है। आपके ह्रदय में हाई ब्लड प्रेशर से सूजन आ कर हार्ट फेल होने का खतरा भी रहता है। 

b) रक्त नलिकाएं / Arteries : लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से रक्त नलिकाओं मोटी हो जाती है और उनकी लवचिकता भी कम हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर से रक्त नलिकाओं में कोलेस्ट्रोल जमा होने की गति तेज हो जाती है जिससे हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है।

c) मस्तिष्क / Brain : हाई ब्लड प्रेशर होने से ब्रेन तक पहुंचने वाली सूक्ष्म रक्त नलिकाओं मैं अत्याधिक प्रेशर के कारण रक्त नलिकाए फूटने की संभावना होती है। इसमें कोलेस्ट्रोल जमा होने से पैरालिसिस होने का खतरा रहता है।


d) किडनी / Kidney : रक्त में जमा हुआ कचरा अलग कर रक्त को साफ करने का काम किडनी करती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण रक्त की सफाई ठीक तरह से न होने से प्रोटीन लॉस अधिक होता है जिससे किडनी फेल होने की संभावना रहती है।


e) आँखे / Eyes : हाई ब्लड प्रेशर के कारण रेटीना पर प्रतिकूल परिणाम पड़ता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण आंखों की रोशनी कम हो सकती है और आँखों की रौशनी भी जा सकती है। 

f) पैरों की नसें / Perpheral Arteries : उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के अधिकता से पैरों की नसें ब्लॉक होकर पैरों में दर्द और गैंग्रीन जैसी गंभीर स्थिति निर्माण हो सकती है।



12. हाइ बलड प्रेशर से और कौन से अन्य रोग निर्माण हो सकते हैं?

हाई ब्लड प्रेशर के कारण भविष्य में डायबिटीज हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्टअटैक, किडनी फेल होना, हाथ-पैर की नसों के रोग हो सकता है। 

13 हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों ने अपने आहार में क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?

हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों ने अपने आहार में निचे दि हुई सावधानी बरतनी चाहिए :

a) नमक : हाई ब्लड प्रेशर के रोगी ने अपने आहार में कम से कम नमक का सेवन करना चाहिए। नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। 

b) तेल / Oil : हाई ब्लड प्रेशर के रोगी ने अपने आहार में तेल और तली हुई चीजों का कम से कम सेवन करना चाहिए।

c) कोलेस्ट्रोल / Cholesterol : हाई ब्लड प्रेशर से कोलेस्ट्रोल बढ़ने की संभावना रहती है। अपने आहार में कोलेस्ट्रोल युक्त चीजों का सेवन कम से कम करें जैसे रेड मीट, प्रॉन, अंडे का पीला भाग इत्यादि। 

14 हाई ब्लड प्रेशर के रोगी ने अपने दैनंदिन जीवन शैली में क्या बदलाव करना चाहिए ?

अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए हाई ब्लड प्रेशर के रोगी ने निचे दी हुई बातों का ख्याल रखना चाहिए : 

a) नींद / Sleep : हाई ब्लड प्रेशर के रोगी में पर्याप्त मात्रा में नींद लेना बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में नींद लेने से तनाव कम होता है। 

b) तनाव / Stress : अधिक तनावयुक्त जीवन शैली से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा दुगना हो जाता है। तनाव मुक्त जीवन जीने की कोशिश करें। तनाव की मात्रा को कम करने के लिए मेडिटेशन करें, अपना रोजाना शेड्यूल तय करें, शांत मनस्थिति रखें ,अपने व्यस्त काम से थोड़ा समय निकालकर खुशहाल जिंदगी जीने की कोशिश करें।

c) व्यायाम / Exercise : शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम करना बेहद जरूरी है। व्यायाम करने से हम रिलैक्स महसूस करते हैं और हमारा शरीर को शांति मिलती है। व्यायाम करने से हमारा वजन नियंत्रित होता है जो की ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए जरूरी है। अगर आपका ब्लड प्रेशर बेहद ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही व्यायाम शुरु करें। हल्के व्यायाम से शुरुआत करें और अभ्यास के साथ धीरे-धीरे व्यायाम की समय अवधि बढ़ाए। वजनदार व्यायाम के जगह एरोबिक एक्सरसाइज आपकी सेहत के लिए ज्यादा उपयोगी है।

d) आहार / Diet : आहार में नमक का प्रमाण कम रखें। समतोल पौष्टिक आहार ले। हरी पत्तेदार सब्जियों का समावेश करें। फल खाएं और तली हुई चीजों का सेवन कम करें। 

e) व्यवहार / Behaviour : गुस्सा आपके शरीर के लिए हानिकारक है। हमेशा शांत रहने की कोशिश करें। संयम रखें और किसी भी परिस्थिति को शांतिपूर्ण वातावरण में सुलझाने की कोशिश करें। हमेशा सकारात्मक नजरिया रखें और ऐसी किताबें पढ़ें जिससे आपको प्रेरणा मिलती है।


15 मैंने अपने हाई ब्लड प्रेशर की दवा को किस तरह लेनी चाहिए ?

हाई ब्लड प्रेशर के रोगी ने अपने आहार में नीचे दिए हुए सावधानी बरतनी चाहिए :

आपके आवश्यकता अनुसार डॉक्टर आपको हाई ब्लड प्रेशर की दवा लिख कर देते हैं। डॉक्टर आपको दवा चालू करते समय निम्न स्तर / low dose से दवा शुरु करते हैं और आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे दवा का डोज बढ़ाते हैं। एक बार आपको दवा निर्धारित होने पर वही दवा लेना होता है और समय-समय पर अपना रक्तचाप जांच करना होता है। 
  • डॉक्टर की सलाह अनुसार सुबह या शाम के समय दवा लें रोजाना तय समय पर ही अपनी दवा ले। 
  • दवा के समय में अधिक फेरफार ना करें। 
  • ब्लड प्रेशर की अधिकतर दवा का असर 24 घंटे तक रहता है इसलिए वह गोली दिन में एक बार ही लेना होता है। 
  • ब्लड प्रेशर की दवा के साथ चाय-नाश्ता आहार लेने की जरूरत नहीं होती है। आप इस दवा को खाली पेट में ले सकते हैं। 
  • अपने ब्लड प्रेशर की दवा को बिना तोड़े पूरी दवा ले। दवा को तोड़ने से दवा का असर कम हो सकता है। 
  • अगर आप कभी दवा लेना भूल जाते हैं और आपको बाद में याद आता है तो तुरंत अपनी दवा ले। 
  • अपने दवा की अतिरिक्त खुराक हमेशा अपने जेब में या ऑफिस में रखें अपने दवा का डोज़ कभी ना बदले। 
  • अपने शरीर पर कोई एक्सपेरिमेंट ना करें। 
  • अगर आपकी कोई शिकायत या सवाल है तो अपने डॉक्टर से मिलें और उस शंका का निराकरण करें।
  • अपने मन से या किसी और की सहायता से अपनी दवा में फेरफार न करें। डॉक्टर को दिखाने के दिन अपनी दवा लेना ना भूले। 
  • अगर आपको कोई अन्य बीमारी है तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को अवश्य दें। 
हाई ब्लड प्रेशर की एक छोटी सी गोली रोजाना लेकर आप अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को होनेवाले भयानक दुष्परिणाम से बचा सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर को आप नियंत्रित कर सकते है पर पूरी तरह से ठीक कर पाना बेहद मुश्किल हैं। कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह लिए अपनी दवा बंद न करे। हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए आप योग, ध्यान, व्यायाम, समतोल आहार और जीवनशैली परिवर्तन कर सकते है और इससे आपको लाभ भी होता है परंतु दवा बंद करने की जरुरत है या नहीं इसका निर्णय आपके डॉक्टर को ही लेने देना चाहिए। 

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#हेपेटाइटिस / Hepatitis, यह बैक्टीरिया से फैलने वाला ऐसा इंफेक्शन है जो सीधे तौर पर लिवर को प्रभावित करता है। सामान्य भाषा में इसे हम पीलिया या जॉन्डिस नाम से जानते हैं। हेपेटाइटिस से एक बार लीवर को नुकसान होने के बाद रिकवर होना मुश्किल हो जाता है। हेपेटाइटिस पांच प्रकार के होते हैं - हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, और ई ! फिलहाल दुनिया में सबसे ज्यादा लोग हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के शिकार है।

#हेपेटाइटिस सी वायरस एड्स के वायरस से 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है। 25% हेपेटाइटिस पीड़ित मरीज ऐसे होते हैं जो अपने बीमारी के बारे में परिवार के दोस्तों को कुछ नहीं बता पाते हैं। 80% लोग हेपेटाइटिस के कारण लिवर कैंसर से मारे जाते हैं। 6 लाख लोग सालभर में इसके शिकार बनते हैं।

4000 से ज्यादा लोग हर दिन हेपेटाइटिस के कारण बीमार पड़ते हैं। 2 अरब के लगभग दुनिया में लोगों का वर्तमान या पहले कभी भी हेपेटाइटिस बी संक्रमण होने का सेरोलॉजिकल प्रमाण है। भारत में ही हर साल हेपेटाइटिस से 1 लाख लोगों की मृत्यु होती है।

सभी प्रकार के हेपेटाइटिस के लक्षण और उनसे बचने के उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :

symptoms-treatment-prevention-tips-in-hindi-language

हेपेटाइटिस के लक्षण क्या हैं ?
Symptoms of Hepatitis in Hindi 

हेपेटाइटिस बीमारी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसका पता जल्दी नहीं लगता है और साल भर तक ऊपर से कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं जैसे की कैंसर में होता है। डॉक्टर हेपेटाइटिस के कुछ लक्षण इस प्रकार मानते हैं :
  1. बॉडी और आंखों में पीलापन 
  2. पेशाब का रंग पीला होना 
  3. थकावट 
  4. उल्टी 
  5. पेट दर्द 
  6. भूक की कमी 
जानकारी के अभाव में हेपेटाइटिस सी के 80% और हेपेटाइटिस बी के 70% मरीजों में बीमारी का पता ऐसे चरण में लगता है जब उनका इलाज संभव नहीं होता है। विश्व भर में सभी प्रकार की हेपेटाइटिस में हेपेटाइटिस बी में सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चूका हैं।

सभी प्रकार के हेपेटाइटिस से बचने के उपाय क्या हैं ?
Hepatitis prevention tips in Hindi

हेपेटाइटिस से बचने के उपाय

सभी प्रकार के हेपेटाइटिस से बचने के उपाय की जानकारी निचे दी गयी हैं :

हेपेटाइटिस ए से बचाव

  • अगर आप ऐसी जगह जा रहे हैं या हेपेटाइटिस ए का खतरा है तो हेपेटाइटिस ए का वैक्सीन लगवा लेना ठीक रहेगा। हेपेटाइटिस ए वैक्सीन के 6 महीने के अंतराल से दो इंजेक्शन लेना होता हैं। इसकी अधिक जानकारी आप अपने डॉक्टर से ले सकते हैं।  
  • शौच के बाद अपने हाथ साबुन से धो लें। 
  • तुरंत पका हुआ ही भोजन खाएं। 
  • उबला हुआ पानी या बोतल बंद पानी पिए। ब्रश करने के लिए भी इस पानी का ही उपयोग करे।  
  • छिल कर खाने वाले फल ही खाएं। 
  • कच्ची सब्जियों का सेवन अधिक न करें। 
  • सुरक्षित यौन संबंध रखे। 

हेपेटाइटिस बी से बचाव

Hepatitis B से बचने के लिए निचे दिए हुए एहतियात बरतने चाहिए :
  • सलून में शेविंग या बाल कटाते समय हमेशा नयी ब्लेड  इस्तेमाल करने का आग्रह करे। 
  • निर्जंतुक सुई - अस्पताल में हमेशा निर्जंतुक सुई या ब्लेड का इस्तेमाल करे। 
  • सुरक्षित यौन संबंध - अपरिचित व्यक्तिओ के साथ यौन संबंध न रखे। व्यक्ति के स्वास्थ्य की जानकारी न होने पर यौन संबंध करते समय कंडोम का इस्तेमाल करे। 
  • Tattoo कराते समय या कान छिदवाते समय निर्जंतुक सुई का इस्तेमाल हो रहा है इसका ध्यान रखे। 
  • अपने शेविंग ब्लेड या टूथ ब्रश किसी भी व्यक्ति के साथ शेयर न करे। 
  • Hepatitis B vaccine - बच्चों को जन्म के समय पहला डोस, 1 महीने पर दूसरा डोस और 6 महीने में तीसरा डोस देकर Hepatitis B से सुरक्षा दे सकते हैं। Combination वैक्सीन इस्तेमाल करने पर या जरुरत पड़ने पर 4 booster डोस दे सकते हैं। 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों ने यह वैक्सीन जरूर लगाना चाहिए। यह वैक्सीन लगाने पर अगले 20 वर्षो तक Hepatitis B होने का खतरा 95% तक कम हो जाता हैं। जिन व्यक्तिओ को Hepatitis B होने का खतरा है उन्होंने भी इस वैक्सीन के 3 डोस डॉक्टर की सलाहनुसार लगाने चाहिए। 

हेपेटाइटिस सी से बचाव

  • अपने घाव को खुला न छोड़े। 
  • शराब से दूरी बनाए रखें। 
  • दवाई की उपकरण को शेयर ना करें। 
  • टैटू करवाए तो यह देख ले कि उपकरण अच्छे से साफ हो या टेटू बनवाने से बचे। 
  • खून चढाने से पहले उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए। 
  • निर्जंतुक सुई - अस्पताल में हमेशा निर्जंतुक सुई या ब्लेड का इस्तेमाल करे। 
  • सुरक्षित यौन संबंध बनाये। 

हेपेटाइटिस डी से बचाव

  • जो व्यक्ति हेपेटाइटिस बी से संक्रमित वही हेपेटाइटिस डी से भी संक्रमित हो सकता है इसलिए हेपेटाइटिस बी के लिए हेपेटाइटिस बी के ही सभी दिशा निर्देशों का पालन करें। 

हेपेटाइटिस ई बचाव

  • हेपेटाइटिस ई से संक्रमित लोगों के लिए हेपेटाइटिस ए के ही नई दिशा निर्देशों का पालन करें। 

हेपेटाइटिस को रोकने के लिए क्या करें
Tips to prevent Hepatitis in Hindi

  • अगर आप जानते हैं कि हेपेटाइटिस किन कारणों से संक्रमित होता है तो आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं। 
  • अपने टूथब्रश और शेविंग रेजर को दूसरों के साथ ना बाटे। 
  • सुरक्षित ढंग से इंजेक्शन ना लगाएं। 
  • सुरक्षित ढंग से यौन संबंध बनाए। 
  • मां से बच्चे में खून के द्वारा संक्रमण होने से रोके। 
  • दवा लेने देने के उपकरणों को दूसरे के साथ ना साझा करें। 
  • असुरक्षित ढंग से खून देना या लेना से फैलता है वह ना करें। 
  • वैक्सीन लगवा में देरी ना करें। हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगवाने से नियंत्रित हो सकता है जो हेपेटाइटिस बी विषाणु के संवाहक के रसिया शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आता है उसे हेपेटाइटिस बी एम लोग लोग मिल के एक या अधिक टिके हेपेटाइटिस बी 7 लगवाने चाहिए हिमोग्लोबिन अस्थाई जबकि टीका बीमारी से दीर्घकालिक रक्षा करता है
  • टेस्ट करवाएं। 
  • सजग रहे। नई तकनीकों के साथ हेपेटाइटिस के टेस्ट उपलब्ध है जो जल्द और अच्छे नतीजे देते हैं।  
  • कोई भी लक्षण दिखने पर बिना देरी किए जांच करवाएं और नतीजे के अनुसार इलाज प्रारंभ करें। इस बीमारी में थोड़ी सी भी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। ऐसे मामलों में नीम हकीमों के पास जाना बेहद घातक हो सकता है। 
  • छुपाए नहीं उपचार कराएं। हेपेटाइटिस सी का उपचार उपलब्ध है और इसमें 90 से 95% ठीक हो जाते हैं। संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के तरल पदार्थों जिसमें वीर्य / Semen भी शामिल है कि संपर्क से बचा जाए। 
  • रक्त चढ़ाते समय सिरिंज का इस्तेमाल साझा तौर पर ना करें। 
हेपेटाइटिस का समय पर उपचार और एहतियात का पालन न करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हेपेटाइटिस से बचने के लिए हमें हर संभव प्रयास करने चाहिए। हेपेटाइटिस होने पर हमें घरेलु उपाय या नुस्खों में समय बर्बाद करने की जगह तुरंत डॉक्टर से उपचार कराना चाहिए और उनकी सलाह का पालन करना चाहिए। 
Image courtesy of Sira Anamwong at FreeDigitalPhotos.net

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