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सफेद दाग यानी कुष्ठरोग या जिसे अंग्रेजी में Vitiligo (विटिलिगो) या Leucoderma (ल्युकोडाेर्मा) कहा जाता है, यह एक सामाजिक अभिशाप की तरह है, ना केवल भारत में बल्कि विदेशों मे भी इस बीमारी का असर मरीज़ पर तो होता ही है पर पूरे परिवार वाले इस बीमारी से प्रभावित होते है।  

यह रोग बच्चो से ले कर बड़ो तक किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ लोगो मे यह अनुवांशिक भी होता है।आधुनिक विज्ञान ने हर क्षेत्र में काफी प्रगति की हैं, उसमे से ही एक क्षेत्र है वैद्यकशास्त्र। पहले सफेद दाग के लिए आधुनिक चिकित्सा पद्धति की कुछ मर्यादाएं थी, लम्बे समय तक इलाज करना होता था तथा success rate भी काफी कम था। लेकिन मेडिकल साइंस में हुए प्रगति के कारण कई जटिल बीमारियों का इलाज अब आसान हो गया है। उसमें से ही एक बीमारी है Vitiligo। 

सफ़ेद दाग के कुछ प्रकार हम सर्जरी याने की शल्य चिकित्सा से ठीक कर सकते है, जैसे कि स्किन या सेलुलर ग्राफ्ट्स की मदत से। आसान तरीके से अगर कहा जाए तो इस उपचार पद्धति में सफेद दागों की त्वचा की ऊपरी सतह निकाली जाती है एवं उस जगह शरीर के अन्य स्थान से स्वस्थ पिगमेंट सेल्स (मेलनोसाइट्स) को लेकर transplant याने प्रत्यारोपण किया जाता है।  

Melanocyte Transplantation क्या है और यह कैसे किया जाता है इसकी सारी जानकारी निचे दी गयी हैं :
Melanocyte-Transplantation-cost-procedure-in-Hindi

सफ़ेद दाग का सफल ईलाज - Melanocyte Transplantation

Melanocyte Transplantation in Hindi

Melanocyte Transplantation क्या होता हैं ?

Melanocyte Transplantation को Non-cultured Melanocyte-Keratinocyte Transplantation Procedure (MKTP) भी कहा जाता है। मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट स्थाई सफेद दाग के लिए वरदान है। Leucoderma या Vitiligo के मरीजों के लिए यह अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति की देन है। विटिलिगो के अलावा मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट से झाइयाँ, loss of pigmentation, post burn marks (विवर्णता), लेज़र टैटू रिमूवल के बाद रहनेवाले scars, चोट के बाद के सफेद दाग आदि का भी इलाज होता है।
  • मेलनोसाईट ट्रांसप्लांटेशन के लिए मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होने की आवश्यकता नही होती। 
  • यह simple day care क्रिया है, जो करीब 1 से 3 घण्टों में हो जाती है। 
  • छोटे दाग से लेकर बड़े दाग तक भी इस चिकित्सा पद्धति से इलाज हो सकता है। 
  • इसकी सफलता का दर पूर्व चिकित्सा पद्धति जैसे स्किन ग्राफ्टिंग एवम पंच ग्राफ्टिंग से काफी बेहतर है। 
  • जिन जगहों पर यह ग्राफ्ट्स आसानी से नही जाते जैसे bony area, areola, genitals, knuckles आदि पर भी इस चिकित्सा पद्धति के अच्छे परिणाम है। 
Melanocyte किसे कहते हैं ? What is Melanocyte ?

मेलनोसाईट यह एक प्रकार का पेशियों का समूह होता है, जो मेलेनिन तैयार करता है, जो त्वचा को कलर देता है। सफेद दाग में मेलनोसाईट सेल्स नष्ट हो जाते है। मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट में शरीर के सामान्य भाग से मेलनोसाईट कोशिकाओं को निकालकर सफ़ेद दाग पर प्रत्यारोपण किया जाता है।

क्या सर्जरी का 1 सेशन त्वचा का एकसमान रंग लाने के लिए काफी होता है ? 

कुछ मरीजों को एक बार के सेशन में फायदा नहीं होता है। करीब 30% मरीजों को दुबारा शल्यचिकित्सा करवाने की जरूरत पड़ सकती है।

मेलनोसाईट ट्रांसप्लांटेशन के लिए कौन से मरीज उपयुक्त होते है ? 

क्लीनिकली स्टेबल पेशेंट - जो मरीज चिकित्सीय दृष्टि से स्थिर होते हैं। मतलब जिनका श्वेत कुष्ठ कम से कम 1 से 2 वर्ष पुराना हो एवं 6 महीने में कोई नया सफेद दाग न आया हो, वह मरीज मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

इसके अलावा विटिलिगो के मरीजों में नीचे दिए हुए मापदंड ( criteria ) सही साबित होने चाहिए, जैसे कि
  1. सफेद दागों का आकार स्थिर होना चाहिए।
  2. जन्मजात सफेद दाग जो कि स्थाहि है।
  3. अगर त्वचा पर कोई जख्म होता है तो जख्म भरने के पश्चात नई आनेवाली स्किन भी त्वचा के समान रंगोवाली हो। 
  4. Hypomelamocytic naevus
इन सब मुद्दों के अलावा मरीज का चयन डॉक्टर द्वारा की गई जांच एवम मूल्यांकन पर निर्भर करता है। जो मरीज मेडिकल थेरेपी को रिस्पांस नही कर रहे हैं, उनमे इसके अच्छे परिणाम मिलते है।

मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट के फायदे Benefits of Melanocyte Transplantation
  • इस चिकित्सा पद्धति में scar याने निशान कम से कम रहता है। त्वचा काफी हद तक सामान्य त्वचा जैसी दिखती है।
  • रिजल्ट याने Repigmentation 3 हफ्ते से लेकर 4 से 6 महीने मे दिखता है। 
  • इस सर्जरी का success rate करीब 90% है। 
  • बड़े पैच के लिए सामान्य त्वचा का काफी कम भाग लगता है। जैसे, 100 cm2 पैच के लिए 10 cm2 तक का भाग काफी होता है।
  • जिनका विटिलिगो स्टेबल है, वह इस चिकित्सा पद्धति को जल्दी response देते है। 
  • इस चिकित्सा पद्धति के कोई विशेष साइड इफ़ेक्ट नही है। 
  • ऑपेरशन के बाद काफी कम देखभाल की जरुरत होती है।
मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट के दुष्परिणाम Side effects of Melanocyte Transplantation
  • सर्जिकल ट्रीटमेंट होने की वजह से एवम बहोत कम दवाई का उपयोग होने से जैसे ( एंटीबायोटिक, माइल्ड पैन किलर्स )आमतौर पर कोई दुष्परिणाम नही होते है।
  • स्कार / निशान की संभावना 2 से 5 प्रतिशत लोगों में होती है।
  • पैच के बॉर्डर पर कई बार Hypo pigmented ring दिखती है, जो वक्त के साथ चली जाती है।
मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट की मर्यादाएं Limitations of Melanocyte Transplantation

यह पद्धति उन लोगों में नही कर सकते जिनका दाग बढ़ रहा है या शरीर पर अन्य जगह नया दाग आ रहा है। 

तो यह थी मेलनोसाईट ट्रांसप्लांट की जानकारी सरल हिंदी भाषा मे। आशा करते है, इससे आपको काफी मद्त मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए इसमें निष्णात डॉक्टर जैसे कॉस्मेटोलॉजिस्ट या प्लास्टिक सर्जन से सम्पर्क करें। 

यह जानकारी हमें गुजरात के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन एवम कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ कविता अग्रवाल जी द्वारा प्राप्त हुई हैं। निरोगिकाया टीम और सभी पाठकों की ओर से उन्हें बहोत धन्यवाद और शुभकामनाये !

अगर यह सफ़ेद दाग के सफल ईलाज Melanocyte Transplantation की जानकारी आपको उपयोगी लगती है तो कृपया इसे शेयर कर जरुरत मंद लोगों तक पहुंचाने में हमारी सहायता करे !


अगर आज भी कोई मुझसे मेरे गर्भवती होने के तर्जुबे का बारे में पूछता है तो यही वो बात है जो सबसे पहले मेरे दिमाग में आती है। जब मैं अपनी बेटी आरिया के लिए गर्भवती हुई तो कुछ शुरूआती हफ्तों के दौरान मेरी खुशी का ठिकाना न था और इसकी वजह थी कि मैं खुद को बहुत ऊर्जावान और चुस्त-दुरूस्त महसूस कर रही थी क्योंकि उस समय मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि गर्भावस्था में अपने हाजमे को लेकर मुझे क्या-क्या परेशानियां झेलनी पड़ेंगी!!

यह सब तब शुरू हुआ जब मुझे दो माह का गर्भ था और मुझे खाने की नली में एक अजीब तरह की जलन का अहसास हुआ जिसे सीने की जलन कहा जाता है। शुरूआत में तो यह खाना खाने के बाद लगभग दो घंटों तक ही रहती थी पर धीरे-धीरे यह पेरशानी इतनी बढ़ गई कि मैं पूरी रात ठीक से सो तक नहीं पाती थी।

यह इतनी तकलीफदेह थी कि इसके डर से मैनें वास्तव में खाना खाना ही छोड़ दिया था। यह मेरे और पेट में पलने वाले शिशु दोनों के लिए अच्छा नहीं था पर एक महीने बाद मैनें फैसला लिया कि ‘बस, अब बहुत हो चुका’ और मुझे इस तकलीफ से निज़ात पाने का कोई तरीका ढूंढना ही पड़ेगा क्योंकि यह खुद से ठीक होने वाली बीमारी नहीं थी। यह तब मुमकिन हो पाया जब मैनें बड़ी संजीदगी से अपनी हालत के बारे में जाना और एक ऐसा तरीका खोजने की कोशिश की जिससे गर्भावस्था में सीने की जलन से राहत के लिए किसी एंटैसिड या बनावटी पदार्थ का सेवन की जरूरत ही न पड़े।

यहाँ मैं अपने निजी तर्जुबे से उन 7 बातों के बारे में बताने जा रही हूँ जिन्होने गर्भावस्था में बदहजमी की समस्या निपटने में मेरी बड़ी मदद की और मुझे उम्मीद है कि यह जानकारी दूसरी गर्भवती महिलाओं के काम भी आएंगी!!!


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गर्भावस्था में बदहजमी की समस्या से निपटने के ७ उपाय 

Pregnancy digestion Tips in Hindi

1. ध्यान दें - क्या और कैसे खाना है

गर्भावस्था में हमारा शरीर सुरक्षित और सेहतमंद रहे यह पक्का करने के लिए शरीर बहुत से हारमोनल बदलावों से गुजरता है और बदहजमी या इससे जुड़ी दूसरी तकलीफें इसी वजह से होती हैं। इस बदलाव का एक नतीजा यह भी होता है कि हम जो खाना खाते हैं वह बहुत धीरे-धीरे पचता है जिससे गर्भनाल के जरिए ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व पेट में पलने वाले शिशु तक पहुंच सकें। तो जो भी खाना आप खाती हैं, इसका सीधा संबंध आपकी परेशानियों से होता है इसलिए गर्भावस्था में सीने की जलन की तकलीफ से बचने के लिए इन बातों को जरूर अपने दिमाग में रखेंः

1. दिन में तीने बार भरपेट खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा और लगातार खायें
2. सोने के लिए जाने के कम से कम दो घंटे पहले खाना खा लें
3. तीखी, मसालेदार, तली हुई या जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें
4. खाते समय सीधे तन कर बैठें

2. जानें - क्या खाने से आपकी तकलीफ बढ़ती है

अपने खाने-पीने की आदतों की जांच-परख करें और यह पता लगायें कि किस चीज को खाने से आपको बदहजमी की समस्या होती है। मेरे मामले में नीबूं या इस जैसी दूसरी चीजों के रस का सेवन सीने की जलन की खास वजह थी तो एसे खाने-पीने वाली से परहेज करें। ऐसा करके आपको अपनी हालत में बदलाव के साथ-साथ काफी सुधार महसूस होगा।

3. आईसक्रीम पहली पसंद

बदहजमी और सीने की जलन से राहत देने में आईसक्रीम ने मेरी बहुत मदद की। मेरा फ्रिज हमेशा मेरे पसंदीदा फ्लेवर की आईसक्रीम से भरा रहता था और यकीनन आईसक्रीम ने इन परेशानियों से राहत देने में कमाल का काम किया क्योंकि जलन के अहसास को मिटाने के लिए कुछ भी ठंडा खाना हमेशा कारगर होता है तो आईसक्रीम खाती रहें पर ध्यान रहे कि यह बहुत ज्यादा न हो। इसी तरह एक कटोरा दही खाना भी बदहजमी और सीने की जलन से राहत देने में बहुत कारगर होता है।

4. शरीर में पानी की कमी न होने दें

अच्छी तादाद में पानीदार चीजों का सेवन हाजमे से जुड़ी परेशानियों में बहुत कारगर होता है, खासकर एसीडिटी और मितली आने जैसी समस्याओं में। लगातार मितली होने की वजह से आपके शरीर का बहुत सा पानी बाहर निकल जाता है और यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए यह यह जरूरी हो जाता है कि आप ज्यादा से ज्यादा तरल पीते रहें जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए। दूध पीना भी गर्भवती माताओं को पानी की कमी से बचाने में बहुत असरदार और फायदेमंद होता है

5. सेब खाएं, बदहजमी से बचें

सेब को आप फल या भोजन कुछ भी कहें पर यह कमाल की चीज है। यह मेरी गर्भावस्था के समय बदहजमी से बचने के सबसे उपयोगी तरीकों मे से था और गर्भावस्था में सेब खाने से मुझे बदहजमी की तकलीफ से निपटने में बहुत मदद मिली। सेब में आयरन काफी तादाद में होता है जो पेट की परतों को आराम देने और बदहजमी से जुड़ी समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार होता है। अगर आप सेब खाना नापसंद हो तो आप आयरन से भरपूर कोई और फल जैसे आंवला या अनार भी खा सकती हैं।

6. कैफीनयुक्त चीजों से परहेज करें

मैं जानती हूँ कि आपको चाय या काॅफी पीना पसंद है लेकिन फिर भी मेरी सलाह है कि यदि आप सीने की जलन से परेषान हैं तो चाय या काॅफी पीना कम कर दें क्यांेकि वह जलन के अहसास को बढ़ाती है।

7. डाॅक्टर द्वारा बताये गये हल्के एंटेसिड का सेवन

इन बुनियादी नुस्खों को अपनाने के बावजूद भी अगर आपको बदहजमी या दूसरी परेशानियां महसूस हों तो अपने डाॅक्टर की सलाह के मुताकिब कुछ हल्के एंटेसिड लें और किसी खान-पान विशेषज्ञ की भी सलाह लें जिससे इन तकलीफों के साथ तालमेल कर पाने में मदद मिले। इन समस्याओं पर शुरूआत में ही ध्यान दें जिससे आपकी गर्भावस्था का समय खुशनुमा और सेहतमंद बना रहे।

यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 
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भारतीय परिवारों में घी / #Ghee खाने को बहुत महत्व दिया जाता है। हर उम्र में घी खाने की सलाह दी जाती है। घी शरीर को ताकत और शक्ति देता है। जितना एक बड़े व्यक्ति के लिए घी खाना ज़रूरी होता है उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी छोटे बच्चों के लिए होता है। 

जन्म के पश्चात छह महीने तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान करवाया जाता है। परंतु 6 महीने के बाद बच्चों को संपूरक आहार देना प्रारंभ किया जाता है उस स्थिति में आहार में घी को शामिल किया जाना ज़रूरी हो जाता है। 

बच्चों के खाने में उचित मात्रा में घी शामिल करना क्यों जरुरी है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :


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बच्चों को घी खिलाने के फायदे Health benefits of Ghee in Hindi

  • पाचन / Digestion : तीन से साथ वर्ष की उम्र के बच्चे के भोजन में घर तथा बाहर का खाना शामिल हो जाता है। वे हर तरह का भोजन खाने लगते हैं। कई भोजन ऐसे होते है जिसको पचाने में मुश्किल होती है और बच्चों को गैस की समस्या होने लगती है। ऐसे में भोजन में घी शामिल किए जाने से गैस की समस्या से बचा जा सकता है। शुरुआत में बच्चों को पतली दाल या दाल के पानी में घी डालकर खिलाया जा सकता है। इससे दाल का स्वाद भी बढ़ जाता है।
  • कब्ज / Constipation : अलग-अलग तरह का खाना जहाँ न पचने के कारण गैस जैसे मुश्किल पैदा करता है वहीं बच्चों को इससे क़ब्ज की समस्या भी हो सकती है। इससे उनका पेट कड़ा हो जाता है औए पेट में दर्द भी होने लगता है। ऐसी स्थिति में घी ऐसा आहार है, जो बच्चों को आसानी  से पच जाता है बच्चों को घी खिलाने से उन्हें कब्ज़ की शिकायत नहीं होती क्योंकि उनके शरीर में चिकनाहट बनी रहती है। 
  • ऊर्जा / Energy : Fat (वसा)  का एक स्वस्थ स्त्रोत है तथा यह बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा देता है जो की तीन से सात वर्ष की आयु के बच्चों के लिए लाभदायक होता है। घी उनके विकास और वृद्धि में मदद करता है। इसके साथ की घी खाने से बच्चे के दिमाग का विकास करता है।
  • वजन / Weight : एक साल का होने तक बच्चे का वज़न उसके जन्म के समय के वज़न से तीन गुना अधिक बढ़ जाता है। अत: बच्चे के उचित विकास के लिए उसके आहार में उर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे घी आदि शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। बच्चे के वजन के मुताबिक ही उसे घी की मात्रा दें जैसे यदि बच्चे का वजन पहले से ही ज्यादा हो तो कम मात्रा में घी दें और यदि बच्चा कमजोर हो तो उसे कुछ अधिक मात्रा में घी दें।
  • कफनाशक / Cough : घी का इस्तेमाल उपचार के लिए भी किया जा सकता है। घी गरम होता है। इसलिए घी से बच्चों की छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है। कई बार अधिक हिचकी आने के स्थिति में आहा चम्मच घी खिलाने से हिचकी आना रुक जाता है। 
इस तरह घी पोषक होने के साथ-साथ बच्चो के स्वास्थ्य और शारिरिक विकास के लिए बेहद जरुरी होता है। बच्चों के आयु और वजन के हिसाब से उचित मात्रा में घी अवश्य खाने में मिलाकर खिलाना चाहिए। आयुर्वेद में भी घी को स्वास्थ्यकर बताया गया हैं। बच्चों को घर का बना देसी घी खिलाना ज्यादा उचित रहता हैं।

यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 

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रागी: आपके नन्हें-मुन्नों के लिए एक अनोखा अनाज

रागी, जिसे ‘Finger Millet’ भी कहा जाता है, इसके कई लाभों और पौष्टिक गुणों के कारण एक अनोखा अनाज है। 
यह ज़्यादातर दक्षिण भारत में पाया जाता है, कई लोग गलती से इसे राई (काली सरसों) समझ लेते हैं क्योंकि यह काफी मिलता-जुलता है।

रागी में महत्वपूर्ण Amino acids जैसे आइसोल्यूसिन, ल्यूसिन, मेथिओनीन एवं फ़िनाइल एलिनीन होते हैं जो स्टार्च वाले अन्य खाद्य पदार्थों में नहीं होते हैं। इसमें कैल्सियम (344 मि॰ग्रा॰%) और पोटैशियम (408मि॰ग्रा॰%) की उच्चतम मात्रा होती है। रागी आयरन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है जो इसे निम्न हीमोग्लोबिन स्तर वाले व्यक्तियों के लिए लाभकारी बनाता है।

आज इस लेख में हम आपको रागी के बच्चों में विशेष लाभ और रागी के बच्चो के लिए स्वादिष्ठ पकवान की जानकारी देने जा रहे हैं :   
रागी - बच्चों का सुपरफूड 

बच्चों को रागी खिलाने के फायदे Health benefits of Ragi in Hindi 

बच्चों, नन्हें-मुन्नों के लिए रागी के लाभ

  • उच्च पोषक तत्व:  
  • रागी पाउडर पोषक तत्वों से भरपूर है।
  • आसानी से पच जाता है।
  • भूख पर लगाम लगाता है।
  • बच्चों को संपूर्णता का अहसास कराता है।
  • आयरन एवं कैल्सियम की कमियों को दूर करता है।
  • प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
रागी में आपके तंत्र (शरीर) को गरम रखने की क्षमता है इसलिए इसे आपके बच्चे को गर्मियों में भी दिया जा सकता है, लेकिन इसे सही तरीके से और सही मात्रा में दिया जाना चाहिए।

वास्तव में, मैं अपनी बेटी को उसके पहले आहार (दूध छूटने के बाद) से ही रागी दे रहा हूँ। मेरा विश्वास करें कि मुझे किसी भी मौसम में इसे उसको देने में कोई समस्या नहीं हुई और इसकी उच्च पौष्टिकता के कारण मुझे अपनी बेटी के पोषण के संबंध में कोई चिंता नहीं है।

रागी के स्वादिष्ठ व्यंजन Ragi Recipe in Hindi 

1. रागी हलवा:

  1. रागी का आटा और घी लें।
  2. घी और आटे को मिलाएँ और तब तक पकाएं जब तक कि यह हल्का भूरा न हो जाए।
  3. गुड़ और उबला हुआ पानी मिलाएँ।
  4. और तब तक हिलाएं जब तक कि पानी गायब न हो जाए।
  5. बच्चों के लिए आप ड्राई फ्रूट पाउडर डाल सकते हैं।

2. रागी बनाना पैनकेक:

सामग्री 
  1. रागी का आटा- ½ कप
  2. आर्गेनिक गुड़ पाउडर- 1 से 2 टेबल स्पून (वैकल्पिक)
  3. कोकोनट की छीलन- 2 टेबल स्पून
  4. केला- 1 माध्यम आकार का (मसला हुआ)
  5. इलायची- 1
  6. काजू- 1 टेबल स्पून (वैकल्पिक)
  7. पानी- आवश्यकतानुसार
  8. मक- एक चुटकी
  9. तेल/घी- पैनकेक बनाने के लिए
विधि 
  • रागी आटा, कोकोनट और गुड़ को नाप लें। इसे तैयार रखें। फोर्क की सहायता से केले को मसलें और एक ओर रख दें।
  • एक सॉस पैन में गुड़ लें और पानी डालें जब तक कि यह डूब न जाए। गुड़ को गरम करें जब तक कि यह पूरी तरह से पिघल न जाए। अशुद्धियों को हटाने के लिए छन्नी का प्रयोग करते हुए गुड़ के पानी को छान लें। इसे एक तरफ रख दें।
  • एक बर्तन में, रागी का आटा, गुड़ का पानी एवं छिला हुआ कोकोनट, कुचली हुई इलायची और मसला हुआ केला डालें। धीरे-धीरे पानी डालें और अच्छी तरह से मिलाएँ जिससे कोई पिंड न बने। फेंटाई सामान्य डोसे फेंटाई के समान होनी चाहिए जो न तो ज्यादा गाढ़ा हो और न ही ज्यादा ढीला। अंत में काजू को फेंटन में डालें और अच्छी तरह से मिलाएँ। इसे एक ओर रख दें।
  • डोसा तवा को गरम करें, एक चमचा फेंटन को इसमें डालें और एक गोला बनाने के लिए इसे फैलाएँ। बहुत अधिक न फैलाएँ। घी अथवा तेल छिड़कें। पाँच मिनट तक पकाएं जब तक कि एक ओर भूरा न हो जाए और डोसा को पलट दें। एक मिनट तक पकाएं और तवे से हटा दें। शेष फेंटन के लिए इसी प्रक्रिया को दुहराएँ।

3. रागी डोसा

सामग्री
  1. रागी आटा/ फिंगर मिलेट आटा- ½ कप
  2. गेहूँ का आटा- ¼ कप
  3. प्याज- 1
  4. हरी मिर्च- 1
  5. करी पत्ता- 1 टहनी
  6. जीरा- 1 टेबल स्पून
  7. नमक- आवश्यकतानुसार
  8. छाछ (वैकल्पिक) अथवा पानी- आवश्यकतानुसार
विधि
  • एक कटोरे में रागी, गेहूं का आटा, बारीक कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च, टूटे हुए करी पत्ते, जीरा व नमक लें और फेंटन पतली बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में छाछ अथवा पानी डालें।
  • डोसा पैन को गरम करें, तेल छिड़कें जैसा हम रवा डोसा के लिए करते हैं, कुछ और तेल छिड़कें और मध्यम आँच में दोनों ओर पकाएं।

4. रागी फेंटन

सामग्री 
  1. 2 कप रागी/फिंगर मिलेट
  2. 2 कप ब्राउन राइस
  3. 1 कप उरद दाल
  4. ½ टेबल स्पून मेथी
विधि
  • अच्छी तरह से धोएँ और 5-6 घंटे तक पर्याप्त पानी में फिंगर मिलेट को भिगोएँ।
  • 3-4 घंटे तक अलग से चावल और उरद दाल को मेथी के साथ भिगोएँ।
  • उरद दाल से पानी को निकाल दें और अच्छे पेस्ट के रूप में इसे पीस लें।
  • उरद दाल के पेस्ट को एक बर्तन में रख दें और अब भीगे हुए फिंगर मिलेट और ब्राउन राइस को पीस लें।
  • थोड़े खुरदरे पेस्ट के रूप में उन्हे पीस लें।
  • अब उरद दाल के पेस्ट और चावल-फिंगर मिलेट पेस्ट दोनों को मिला दें, नमक डालें और रात भर के लिए एक ओर रख दें।
  • किण्वन के बाद, हिलाएँ और डोसा एवं इडली की तरह पकाएं।
  • तीन दिन बाद, पेस्ट को उत्थपम की तरह तैयार किया जा सकता है।

5. रागी उत्थपम

सामग्री 
  1. रागी पेस्ट (आवश्यकतानुसार)
  2. ½ कप कद्दूकस की हुई गाजर
  3. ½ कप शिमला मिर्च (लाल एवं हरी अच्छी तरह से कटी हुई)
  4. नमक
  5. छिड़कने के लिए तेल
विधि
  • एक कटोरे में कद्दूकस की हुई गाजर, कटी हुई शिमला मिर्च लें, नमक डालें, अच्छी तरह से मिलाएँ, ज्यादा नमक न डालें क्योंकि पेस्ट में पहले से ही नमक होगा।
  • अपने डोसा तवा को गरम करें, तेल की कुछ बूंदों के साथ इसे धीरे-धीरे रगड़ें।
  • एक बार जब तवा गरम हो जाए, करछुल से रागी का पेस्ट डालें और मोटे डोसे की तरह फैलाएँ, इसे पतला न फैलाएँ।
  • किनारों पर तेल छिड़कें।
  • डोसा के ऊपर गाजर, शिमला मिर्च मिश्रण को समान रूप से छिड़कें, स्पैचुला से दबाएँ।
  • एक बार जब डोसा अच्छी तरह से पक जाए, डोसे को पलट दें और पकाने के लिए इसे दूसरी ओर पलटें।
  • कुछ तेल छिड़कें और और इसे अच्छी तरह से पकने दें।
  • जब दूसरी साइड अच्छी तरह से पक जाए, उत्थपम को तवा से हटा दें।
  • तत्काल चटनी, सांभर अथवा कुझंबू के साथ परोसें।
रागी आटा फ्लैट ब्रेड, चपाती, डोसा व इडली बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसके उच्च पोषक तत्वों के कारण, दक्षिण भारत में विशेष रूप से रागी आटे की वीनिंग फूड के रूप में सलाह दी जाती है।
मैं उसी तरह से अपने घर में रागी का आटा रखता हूँ जैसे हम गेहूँ का आटा रखते हैं और कभी-कभी अपनी बेटी के लिए कोई भी चीज जैसे पूड़ी अथवा चपाती तैयार करने के दौरान एक चम्मच मिला लेता हूँ।

क्या आप यहाँ रागी की रेसिपी को साझा करना चाहेंगे? कृपया अपने विचार एवं फीडबैक यहाँ साझा करें क्योंकि हमें आपके विचारों को जानकार बहुत अच्छा लगेगा।
यह लेख हमारे साथ Parentune team ने साझा किया हैं। Parentune भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पेरेंटिंग कम्युनिटी है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त सलाह और सहयोग देती हैं। और जाने Parentune के बारे में - http://www.parentune.com/ 

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